शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

चमत्कार की आशा

Ajaib Jalalana
किसी चमत्कार की आस में इंसान अपनी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर लेता है।वह भ्र्म पाल लेता है,शायद किसी चमत्कार से उसे स्वर्ग मिल जायेगा!! पूरी जिंदगी ही बदल जाएगी!! गुरबत(गरीबी)से छुटकारा तो पक्का मिल ही जाएगा!!परन्तु ये ख्वाब,ख्वाब ही बनकर रह जाते हैं।उधर अपनी कीमती जिंदगी किसी दांव पर लग गई होती है।
वैसे तो शताब्दियों से प्रत्येक धर्म के अगुवाओं को एक चमत्कारित रूप में पेश किया जाता रहा है।ताकि उनके भावी अनुयाइयों में आस्था के नाम पर अन्धविश्वासों को पक्का कायम किया जाये। और धार्मिक नेता को चमत्कारी घोषित करके अन्धविश्वासी लोगों की एक अच्छी खासी संख्या अपनी तरफ खींच ली जाये।
डेरा सिरसा से सबंधित पूर्व बाबा के अनेकों चमत्कारों को पुस्तकों में छपा हुआ देख सकते हैं;
एक बार की बात है,बाबा जी मौजगढ़ के पास भाखड़ा नहर के किनारे टहक रहे थे,वहां उन्होंने क्या देखा!नहर में एक बड़ी मछली छोटी मछलियों को शिकार बना करके उन्हें खा रही थी।ये देखकर बाबा जी का दिल पसीज गया!उन्होंने कहा ये तो अन्याय है! कलयुग है!घोर पाप!फिर क्या था,बाबा जी ने अपनी जेब में से कुछ बचा हुआ प्रसाद निकाला,और उस प्रसाद को पानी में डाल दिया।बड़ी मछली ने उस प्रसाद को चख लिया!उसके बाद एक ऐसा चमत्कार हुआ!!उस मासाहारी बड़ी मछली ने आगे से जीवों को खाना ही छोड़ दिया!!!
लो कर लो बात...भला कोई उनसे पूछे..पानी में रहने वाला जीव,प्रसाद के चमत्कार से अपने खाने का मीनू कैसे बदल सकता है??

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