गुरुवार, 21 सितंबर 2017

ऊपर वाले की_मर्जी

सभी धर्म चीख चीख कर रहे हैं कि जो भी होता है वह ईश्वर, अल्लाह या गॉड की मर्जी से होता है। सब कुछ खुदा, भगवान या गॉड द्वारा पूर्व निर्धारित होता है। इसे भविष्य का सब कुछ ज्ञात है। उसकी मर्जी बिना पत्ते के भी हिलने की औकात नहीं।
लेकिन फिर भी विभिन्न धार्मिक स्थलों, धार्मिक आयोजनों एवं धार्मिक लोगों की रक्षा करने में वह अपने आपको असहाय महसूस करता। इन सब पर वह अपनी शैतानित क्यों करता है? कोई भी धर्म इसका सही सही जवाब नहीं दे पाता। इसकी इस तरह की हरकतों से तो यही लगता है कि शैतान ही खुदा है। देखिये उसकी शैतानियतः-
जो ईसा मसीह उसके संदेश को जन जन तक पहुँचा रहा था उसीको लोगों ने (उसकी मर्जी से) सूली में चढ़ा दिया और वह (काल्पनिक खुदा, भगवान या गॉड) खामोशी से तमाशा देखता रहा। जो होता है उसकी मर्जी से होता है
प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर एवं प्रसिद्ध म्यूजिक कम्पनी के मालिक ‘गुलशन कुमार’ जिनका सारा जीवन दुर्गा मां को समर्पित था। मन्दिर से पूजा करने के पश्चात बाहर आते समय दुष्टों की गोली का निशाना बन गये और मौत हो गयी। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
3 अगस्त 08 हाल ही में हिमाचल प्रदेश के विलासपुर जिले में नैना देवी मन्दिर की सीढ़ियों पर मौत का खेल देखा गया जिसमें 1150 व्यक्ति काल कलवित हो गये और अन्य सैकड़ों व्यक्ति घायल हो गये। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
सन् 1854 प्रयाग में कुंभ मेले के दौरान मची भगदड़ में लगभग 800 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
सन् 1983 नयना देवी-हिमाचल प्रदेश मन्दिर में भगदड़ से करीब 55 भक्तों की जीवन लीला समाप्त हो गयी। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
सन् 1884 हरिद्वार के एक मंदिर में दर्शन के दौरान भगदड़ में 200 श्रद्धालुओं के जीवन का अन्त हो गया। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
1941 में बारिस और तूफान ने मक्का मस्जिद में मौजूद काबा को पानी में डुबो दिया। काबा पूरी तरह कीचड़ के गंदे पानी से भर गया। मुस्लिम मातम मना रहे थे। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
20 नवंबर 1979 इस्लामिक जेहाजिदों ने मक्का मस्जिद पर हमला कर दिया। जेहादी और वहाँ की सेना के बीच गोलीबारी में सैकड़ों हज यात्री मारे गये। काबा तवाह हो गया। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
सन् 1989 हरिद्वार के कुंभ मेले के दौरान भगदड़ ने 350 तीर्थयात्रियों की जान ले ली। सन् 2005 महाराष्ट्र के सतारा जिले में मंदरा देवी मंदिर पर धार्मिक मेले के समय शार्ट सर्किट के चलते भगदड़ में 300 से ज्यादा भक्त मौत का शिकार हुए और 200 से ज्यादा घायल हो गये। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
15,16 जून 2013 को उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित केदारनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों में हुई जल प्रलय की विपदा सभी के जहन में याद ताजा है,जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु काल के गाल में समां गए और लाखों लोग इस विपदा से प्रभावित हुए. मन्दिर के अन्दर ही लाशों के ढेर लग गए थे,और मंदिर परिसर में मलबे का अम्बार लग गया था। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
स्पेशल इंतजाम के बावजूद बकरीद पर आयोजित मक्का में हज के दौरान अनेकों बार भगदड़ में सैकड़ों हज यात्रियों की मौत हो जाती है। यह भगदड़ अक्सर शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते वक्त होती है। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
इसी प्रकार ईसाई धर्म के आयोजनों में भी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पादरियों की हत्याएँ होना भी कम दर्दनाक उदाहरण नहीं है। जो होता है उसकी मर्जी से होता है।
जिन धार्मिक स्थलों पर वह काल्पनिक खुदा, भगवान या गॉड रक्षा नहीं कर सकता वह बाकी संसार में आम साधारण इंसानों की क्या रक्षा करेगा? जबकि इन सारी मुसीबतों की जड़ तो वही है।

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