मंगलवार, 5 सितंबर 2017

शिक्षक दिवस का औचित्य

शासन का आदेश है.   हर वर्ष 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाने के लिए छुट्टी रहेगी। तदनुसार स्कूलों में शिक्षक ही शिक्षक दिवस मनाते हैं। वे विद्यार्थियों को सिखाते हैं शिक्षकों का चरण स्पर्श कर फूल माला पहनाएं । फिर वही शिक्षक शिक्षकों का महत्व बताते हैं...  शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। गुरू गोविंद दोऊ खड़े हैं...  याने शिक्षक भगवान के बराबर हैं उनका सम्मान करना चाहिए ।
डाॅ राधा कृष्णन जी को राष्ट्रपति पद का आफर मिलने से वे प्राध्यपक पद से स्तीफा दे दिए। कहते हैं कि उन्होंने शिक्षक पद की गरीमा बढ़ाई । मेरे विचार से यदि वे राष्ट्रपति पद स्वीकार न कर काॅलेज में ही अध्यापन करते तो निश्चित ही शिक्षक पद की गरीमा बढ़ी होती ।
उन्होंने कहा कि उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए । शिक्षकों की गरीमा बढ़ाने के बहाने खुद का जन्मदिन मनाने की इच्छा जाहिर करना भी आश्चर्य है ।
सभी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ऐसा कहें तो....
शिक्षक श्रमिक होता है जो पारिश्रमिक लेकर अध्यापन करता है। निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने की कोशिश करता है। हर साल शिक्षक दिवस मनाकर शिक्षकों के सम्मान करने का क्या औचित्य है? अन्नदाता कृषक जो खेतों में पसीना बहाकर हमारा जीवन रक्षा करता है,  बय ट्रेन जहाज का चालक जो हमें सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुँचाता है,  पोलिस सेना जो जान पर खेलकर हमारी रक्षा करता हैं, स्कूल कार्यालय में जो सबकी सेवा कर कर्मियों अधिकारियों की कार्य क्षमता बढा़ते हैं भृत्य चपरासियों का हम कितना सम्मान करते हैं?  नहीं करते तो क्यों?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें