सफदरजंग हॉस्पिटल में एक मेरे मित्र है , सिनियर डाक्टर है . कभी कभी उनसे मिलने उनके कक्ष में चला जाता हु . अक्सर उनसे मरीज पूछते है , की इस दवाई का कोई साइड इफ़ेक्ट तो नही ... उनका एक ही जवाब होता है , साइड इफ़ेक्ट तो हर दवाई के होते है , लेकिन आप ओवरआल इसके इफ़ेक्ट देखिए , और दवाई ना लेने की वजह से अपने शरीर को होने वाले नुक्सान को देखिये . इसलिए तो आपको दवाई दे रहा हु .
अब यदि मै इफेक्ट्स और साइड इफ़ेक्ट की बात का धर्म के सन्दर्भ में विश्लेषण करू . तो अपने जन्म से पहले 1947के धर्म के आधार पर दंगो के बारे में तो सुन चूका ही चूका हु और अपनी आखो से १९८४ में देश भर में सिख विरोधी दंगे और 2002 के गुजरात में हुए दंगे , देखे ही है . और झुटपुट दंगे तो होते ही रहते है , जिनमे कइयो की जान जाती है . यदि इन सब बातो को रहने भी दे तो अपने देश के दो हिस्से ही धर्म के आधार पर हुए . आज हमे, अपने देश की GDP का एक अच्छा ख़ासा बजट , अपनी सुरक्षा परखर्च करते है . यानि धर्म के साइड इफ़ेक्ट तो साफ़ नजर आ रहे है . और यह साइड एफेक्ट , पुरे विश्व के इतिहास में आपको देखने को मिलेगे .
अब रही धर्म की बात . अच्छे बुरे इंसान हर धर्म में होते है . ऐसा तो कतई नही है की सिर्फ एक धर्म में अच्छे लोग है और दुसरे धर्म में बुरे लोग . यानि की अच्छा या बुरा , मनुष्य की पर्वृति पर निर्भर करता है , ना की धर्म पर . और यदि तोलना ही है तो आप के आस पास क्तिने राम मिले गे जो अपने पिता के कहने पर चौदह साल वनवास चले जायेगे . चौदह साल की बात छोडिये , यदि अपने पिता के लिए चोदह घंटे भी निकाल सको , तो गनीमत है . मै दूसरो की बात नही कर रहा हु , इसे अपने उपर ही लागू करके बता रहा हु . मुश्किल से हफ्ते में , उनके लिए दो चार घंटे ही निकाल पाता हु , जबकि मै बिलकुल फ्री हु . वैसे रामायण तो हम सबने पड़ी है , है कोई हममे से जो राम की तरह अपना राजपाट छोटे भाई को दे दे . यदि वसीयत में मिली प्रोपर्टी में से एक कमरा भी अधिक देना पड़ जाए तो जान निकल जायेगी . यही सच्चाई है , हमारे समाज की .और हम इस सच्चाई से मुंह नही मोड़ सकते .
मानिए या नही मानिए , धर्म ने इस दुनिया में समस्याए जायदा खड़ी की है , बजाय कुछ अच्छा करने के . यानि साइड इफ़ेक्ट ज्यादा है , बजाय एफेक्ट के ... लेकिन मन है की ... माने ना
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