रविवार, 30 जुलाई 2017

मधुशाला

मधुशाला_ धर्मवीर भारती
धर्मग्रंथ सब जला चुकी है जिसके अंतर की ज्वाला‚
मंदिर‚ मस्जिद‚ गिरजे सबको तोड़ चला जो मतवाला|
पंडित‚ मोमिन‚ पाादरियों केफंदे को जो काट चुका|
कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।

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