शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

मन्नतें और अंधविश्वास

Meraj Anwar

#झाड़_फ़ूक_बाबा_माजर_मन्नत

आपने कहते सुना होगा कि, उस बाबा के कृपा से मैं पास हो गया, मेरी नौकरी लग गयी, मेरा बच्चा हो गया, मेरी ये मन्नत पूरी हो गयी, मैं चादर चढाने जा रहा हूँ, और वाकई में ऐसा देखने को भी मिलता है।

पर क्या ये सच में होता है?
क्या बाबा के पास शक्ति होती है?
क्या चादर से मन्नतें पूरी होती है?

जवाब है - नही

होता ये है कि अगर 500 लोग किसी बाबा के पास या किसी मजार पर गये तो 5 लोगों की मन्नत या उनकी ख्वाहिश संयोग से पूरी हो जाती है, जो उनके न जाने पर भी पूरी हो जाती।

और यहीं से इस अन्धविश्वास की शुरुवात होती है, जिन 495 लोगों की मन्नत पूरी नहीं होती, वो ये सोचकर खामोश हो जाते हैं कि मेरे में गलती रही होगी, या बाबा इस बार मेरी नहीं सुने हैं, इसतरह वो किसी से नही कहते है, खामोश रहते हैं।

पर जिन 5 लोगों का संयोग से मन्नतें पूरी हो जाती है, वो 500 लोगों को बता देते हैं और फिर वो 500 लोग 50,000 को ऐसे संख्या बढ़ती जाती है, और लोग बाबा के पास या माजर पर जाते रहते हैं।

**इस अन्धविश्वास से बचे, खुद पे विश्वास रखे , आपको मेरा यकीन न हो तो मुझे किसी बाबा या ऐसे मजार पर बुलाएँ मैं आपके सामने मन्नत मांगता हूँ, कि कहीं बलात्कार/चोरी/जुर्म न हो, और पूरी सिद्दत से, पुरे मन से देखतें है पूरा होता है की नही।।।

नोट- मंदिर/मस्जिद/गुरुद्वारा/चर्च आदि की मन्नत को भी इसी रूप में लो

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