Sonu Meena Mandawar
कितनी अजीब बात है , जब भागवत में बैठकर पंडा कहता है-
" प्रभु प्रेम के भूखे थे , हैं , पर्भु ने प्रेम किया. Etc...."
तब तो भक्त वाह वाह करते हैं...!!
और हम इसकी चर्चा भी करते हैं , तो लोग हमारी मानसिकता पर भी सवाल उठाते हैं..
इस शब्द को निंदा के साथ देखा जा रहा है..!
जबकि ये तो सोशल मिडिया के बुद्दिजीवियों का नमूना है,,
जब आप सोशल मिडिया पर इस विषय पर चर्चा नही कर सकते हैं , तो अपने बच्चों और युवाओ को इस विषय में कैसे गाइड करोगे ,, वो इसे बेहद गन्दा विषय समझेंगे...!!
- फिर वे इस विषय पर आपसे हमसे खुलकर बात क्यों करेंगे..??
जैसे ही वे मुँह खोलेंगे तुम उन पर टूट पड़ोगे....!!
फिर वे आपसे सलाह मशवरा क्यों करेंगे..??
- सीधा अवैध सम्बन्ध जोड़ेंगे और लास्ट में ट्रेन के निचे...!!
- युवाओ को बदलने से पहले बुद्दिजीवियों को अपनी स्वयँ की इस विषय में सोच बदलने की जरूरत हैं....!!
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