रविवार, 30 जुलाई 2017

ईश्वर की सच्चाई

P. M. Panda _ ईश्वर को मानने वाले लोगों की कमी नहीं है। ईश्वर के पक्ष में बात करने के लिए उनके पास अनेक प्रकार के तर्क हैं। पर आज तक वे नास्तिकों के प्रश्नों का संतोष जनक उत्तर नहीं दे पाए हैं। नास्तिकों के प्रश्नों को सुनकर कई बार वे आपे से बाहर हो जाते हैं। मूल प्रश्न फिर वही है कि क्या वास्तव में ईश्वर जैसी कोई शक्ति है? यदि ईश्वर है तो उसे हम किस तरह से जान सकते हैं? ईश्वर के क्रियाकलापों का क्या कोई प्रमाण मिल सकता है? ईश्वर यदि समस्त ब्रह्मांड का मालिक है तो क्या उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? संसार में जो कुछ भी घटित हो रहा है क्या ईश्वर का उनसे कोई लेना देना नहीं है? दुनिया में जो कुछ भी घटित होता है क्या ईश्वर की ही इच्छा से ही होता है? बुद्ध और ओशो जैसे महान विचारक तो ईश्वर की अवस्थिति से ही इंकार करते हैं।महान साहित्यकार श्री प्रेमचंद व व्यंग्य विधा को प्रसिद्धि देने वाले श्री हरिशंकर परसाई भी ईश्वर के अस्तित्व से साफ इंकार करते हैं। तर्क और बुद्धि की कसौटी पर भी ईश्वर के पक्ष में निराशा जनक उत्तर ही प्राप्त होते हैं। वैज्ञानिकों ने भी अब तक ईश्वर के अस्तित्व को मान्यता नहीं दी है। दरअसल ईश्वर के नाम पर रोजी रोटी का साधन जुटाने वाले कभी नहीं चाहते कि ईश्वर का भय समाप्त हो हाँ ईश्वर के नाम पर दान दक्षिणा भेंट की राशि सदैव यूँ ही मिलती रहे! "ईश्वर के रूप में एक हौआ खड़ा कर दिया गया है। उस ईश्वर को कोई भी नहीं जानता!ईश्वर को मानने वाले लोग भ्रम और भय से पीड़ित हैं। काश; वे सच्चाई को स्वीकार कर सुखी जीवन व्यतीत करते तो संसार का भी भला हो सकता।" [पद्ममुख पंडा महापल्ली]

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