Ram Adhar Yadav ji ne whatsapp group me bheja h_
नास्तिकता बौद्धिक साहस के जिगर वाली मर्दानगी और कोरी गप्प को नकारने वाले साहस का नाम है।गोबर में गणेश देखने वाले कायरों और डरपोंकों को नास्तिकता का पाठ पढ़ाना बेवकूफी है।
नास्तिकता का मतलब अधार्मिकता नहीं होती।
नास्तिक व्यक्ति आचरण में धार्मिक लोगों से भी बेहतर हो सकता है।
इंसानियत से मुहब्बत और समसहजीविता का आचरण करना धार्मिक होना ही है।
एक नास्तिक दुनियां के सभी मजहबों की अच्छाइयों से मुहब्बत करता है, उन्हें पढ़ता समझता है।
वह किसी भी मजहब के इंसान से नफरत नहीं करता, उनकी खामियों को इशारों में बताता है ।
धर्म और मजहब आम इंसान को अच्छा बनाने के अपने अपने तरीके बताता है, नास्तिक उन सभी तरीकों का पालन करने की बजाय सीधे इंसानी अच्छाइयों पर चलने की कोशिशें करता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें