#थप्पड़_इमाम_को_नहीं_देश_के_प्रधानमंत्री_के_मुंह_पर_मारा_गया_है’
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इस देश में मस्जिद के बाहर उस मस्जिद के आसपास रहने वाले जाने पहचाने चेहरे जमा होते हैं। नारा लगता है। भारत माता की जय। वंदे मातरम। मस्जिद के अंदर अफरातफरी मचती है। इमाम गेट पर आते हैं। नारा लगाने वाला समूह उन्हें गेट की चौखट से नीचे खींच लेता है। इमाम झुंड के घेरे में हैं। झुंड उनसे कह रही है,’बोल भारत माता की जय’ बोल जल्दी ‘वंदे मातरम’ ‘गद्दार’ ‘मार साले को।’ इमाम के चेहरे पर भय पसर जाता है। वह दोनों हाथों से झुंड को समझाने का प्रयास करते हैं, कुछ कहने को होते हैं तभी एक थप्पड़ उनके चेहरे पर पड़ता है। सब कुछ दस- बारह सेकंड में हो गया।
इमाम पीट दिए जाते हैं। इमाम का अर्थ होता है नेतृत्वकर्ता। नमाज़ पढ़ाने वाला। इमाम के मुंह से वंदेमातरम निकलवाना होता तो भीड़ थोड़ा इंतज़ार करती। दस सेकंड से भी कम टाइम में थप्पड़ मार देना बताता है कि वे लोग उन्हें पीटने आए थे। मीडिया थी वहां। कैमरे चमक रहे थे। वीडियो बन गया। मन तृप्त हुआ। आत्मा की तृष्णा शांत हुई। नफरत के वटवृक्ष की शाखें पहले से कहीं अधिक बलवान हो गईं। हरियाणा के हिसार से वीडियो चला और देश भर में फैल गया। लोग कहने लगे बहुत अच्छा। गद्दारों का यही हश्र होना चाहिए।
मुझे भी दिखा। साथ मे मेरे दोस्त थे Uday Raj, Arun Tiwari,Rajeev Naithani,anjodh Ranjodh Singh Pandher, Rohit Singh , Gopal Kant मैंने उनसे से कहा कि तुम लोगो ने देखा ? उन्होनो बताया कि रात में ही देख लिया था। वो हिल गये थे भीतर तक। जबकी बो हिंदू है। मैंने सोचा आखिर ये लोग क्यों डर गया। इमाम को मारने वाले तो हिंदू थे न। ये लोग भी हिंदू है। इस हिसाब से तो इनको को खुश होना चाहिए कि उसके ही मज़हब वाले एक मुसलमान को पीट रहे हैं। फिर इनको हिंदुओं के हाथों इमाम के पीटे जाने से दुख क्यों हुआ।
फिर हिसाब लगाने लगा कि अमरनाथ जत्थे पर हमले के बाद देश का ऐसा कौन सा मुसलमान है जिसे खुशी हो रही। मेरे जानने में ऐसा कोई नहीं दिखा। मैंने Kafeel Ahmad WaQar, Mannan Rayeen Chishti, tovseef Touseef Pasha, Mohd Arif Shaikh,Mohammed Fazal, Golden N को फोन किया और पूछा कि तुम्हारे मज़हब के मानने वालों ने अमरनाथ जा रहे हिंदुओं पर गोलियां बरसाईं और क़त्ल कर दिया, मन को शांति मिल गई ? उन सबने कहा कि सरफराज आप पागल हो गए हैं क्या? ये कैसा बेहुदा सवाल है।
अब मैं और परेशान हो गया कि मेरे हिन्दु दोस्तो को इमाम की पिटाई से गहरा धक्का लगा है तो दूसरी तरफ मेरे मुसलमान दोस्तों को अमरनाथ जत्थे पर हुए हमले का अफसोस है। फिर हरियाणा के बजरंग दल के नेता और उसके पीछे वाली भीड़ ने मस्जिद से इमाम को निकाल कर सिर्फ इसलिए क्यों पीटा कि हमला करने वाले पाकिस्तानी मुसलमान हैं और इमाम भी मुसलमान हैं। क्या हरियाणा के मुसलमान कश्मीर गए थे हमला करने? मनोहर लाल खट्टर जी, क्या आपके राज्य में रहने वाले हिसार के मस्जिद के इमाम हमले में शामिल थे? नहीं। फिर क्यों थप्पड़ मार दिया।
प्रधानमंत्री जी आपने कहा था कि देश का मुसलमान मुझसे आधी रात में भी संपर्क कर सकता है। मैं आधी रात को भी मुसलमानों की सेवा में हाजिर रहूंगा। सेवन आरसीआर के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। हिसार में इमाम के मुंह पर थप्पड़ नहीं मारा गया बल्कि देश के प्रधानमंत्री की अंतरात्मा पर बजरंगियों ने थूका है। बजरंगियों ने बता दिया कि नरेंद्र मोदी से हम नहीं डरते। देश के कानून, नीति निर्माताओं की बातों का हमपे कुछ फर्क़ नहीं पड़ता।
बजरंगियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुसलमानों की सेवा-सुरक्षा पर दिए गए बयान का न सिर्फ मज़ाक बनाया है बल्कि उन्होंने यह भी बता दिया है कि देश में बजरंग दल के झुंड से बढ़ कर कुछ नहीं। इमाम का तो सिर्फ चेहरा था, जिस पर चोट पहुंची है इधर तो पूरा का पूरा जमीर है जो पल भर में नेस्तानाबूत कर दिया गया। अब कभी किसी प्रधानमंत्री की औकात नहीं होगी कि वह इस तरह के झुंड के विरूद्ध जा सके।
अब देश में क्या होगा वह ऐसी ही भीड़ तय करेगी क्योंकि जो इस भीड़ से अलग हैं और बड़ी तादाद में हैं उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। क्योंकि जिनके हाथ में कानूनी बेंत है वे इसे होने दे रहे हैं। क्योंकि जिनके हाथ में धर्म की बागडोर हैं वे अपनी गद्दियों पर आराम फरमा रहे हैं।
प्रधानमंत्री जी कहीं किसी कोने में बैठे बैठे यह गा रहे होंगे, ऐसा मुझे लगता है।
कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों,
अब इस भीड़ के हवाले वतन साथियों।
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