धर्म के नाम पर अपने बच्चों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने परिवार का कत्ल
धर्म के नाम पर सधर्मियों का कत्ल
धर्म के नाम दूसरे धर्म के लोगों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने गाँव-शहर वालों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने देशवासियों का कत्ल
धर्म के नाम पर दूसरे देश वालों का कत्ल
धार्मिक लोगों ने हर स्तर पर कत्ल करने के बहाने खोज रखे हैं। सुना है धर्म कभी ख़राब नहीं होता, धार्मिक लोग ख़राब होते हैं। धार्मिक ख़राब होते हैं तो सुधार कौन करेगा? या फिर जनसंख्या बैलेंस करने का ठेका ले रखा है सल्फेटों ने? खुद दस-दस बीस-बीस पैदा करते-करवाते रहते हैं और बैलेंस करने के लिये कटवाते-मरवाते रहते हैं।
धर्म से वर्चस्व को अलग कर के देखिये। बड़ा मज़ा आता है खुद को लाशों के ढेर के बीच में बैठा महसूस कर के। वही लाशें जो कभी दुश्मन थीं। अच्छा लगेगा मुर्दों की महक के बीच साँस लेते हुये.. क्योंकि मुर्दों से पसीने की बदबू नहीं आती। बेचारे मुर्दे सिर्फ मुस्कुराते

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