Sonu Meena Mandawar
17 hrs ·
कई साल पहले मेरे छोटे भाई ने पूछा कि God है या नहीं ?
मैंने कहा, नहीं है.
मेरे भाई को बहुत सदमा लगा, उसको लगा कि मैंने उससे सबकुछ छीन लिया.. मैंने उससे आख़िरी उम्मीद भी छीन ली थी.
मैं उस दिन समझ गया कि समस्या कितनी गहरी है.
असल में God का नाम लोगों की उम्मीदों से जुड़ा है.. बुरे से बुरे हालात में भी वो सोचते हैं कि God सब ठीक करेगा.. इस उम्मीद को कोई खोना नहीं चाहता..
इस लिये मैं आस्तिक या अन्धविश्वासी लोगों का मज़ाक़ नहीं उड़ाता, बल्कि मुझे उनपे तरस आता है.
वे सोच भी नहीं सकते कि वे कितने बड़े झूठ पे विश्वास कर रहे हैं.
असल दोषी वे संत, बाबे या धार्मिक स्थानों में बैठे लोग हैं, जो सदियों पुराने झूठ का आज भी प्रचार करते हैं,
वे सत्ता और स्वार्थ के लिये लोगों को मूर्ख बनाते हैं.. वे नकली सुख-शान्ति, लालच और डर बेचते हैं..
सदियों से चली आ रही आस्था और विश्वास ने, लोगों के दिमाग़ को विकसित नहीं होने दिया,
वे झूठ और सच में फ़र्क़ नहीं कर पाते,
God के झूठे सहारे ने लोगों के आत्मिक बल को बहुत कमज़ोर कर दिया है.. वे God के बग़ैर जीने की कल्पना भी नहीं कर पाते.
क्या ऐसे लोगों को तरस करके अनदेखा कर देना चाहिये ?
बिल्कुल भी नहीं.. अगर हम बेहतर समाज में जीना चाहते हैं तो उनको जागृत करने की बहुत ज़रूरत है..
अगर लोग धार्मिक हैं, ये उनका निजी मामला नहीं है, ये पब्लिक मैटर बन गया है.. क्योंकि वे समझते हैं कि सिर्फ़ उनका धर्म, उनका God ही सच्चा है, बाकी सब झूठे हैं,
उनको लगता है कि सिर्फ़ उनके धर्म वाले ही इन्सान हैं, बाकी सबसे वे नफ़रत करने लगते हैं.. सिर्फ़ नफ़रत ही नहीं, बल्कि कुछ तो उनको ख़त्म करने की इच्छा भी रखते हैं.
आस्तिक या धार्मिक होने के सैंकड़ों साइड इफेक्ट्स हैं, जिन्हें पूरा समाज और देश भुगत रहा है.. धर्म ख़तरनाक हो रहे हैं, ख़तरे बढ़ रहे है..
सुबह-शाम लाउड स्पीकरों का शोर छोटा मामला है..मसले बहुत बड़े हैं..
कोई धर्म चाहे कितनी भी अच्छी सोच से शुरू हुआ हो, बाद में वो इन्सान की सोच को कुंद या बंद कर देता है..
धर्म की अच्छी बातें सिर्फ़ सुनने-सुनने के लिये रह जाती है, इस तरह एक ढोंगी समाज की रचना होती है..
वर्तमान में मानवता को सबसे बड़ा ख़तरा धर्म से है, लेकिन किसी धर्म पे उंगली उठाओ तो सिर कटने का ख़तरा भी है..
तो क्या किया जाये ?
धर्मों का ढांचा जिस काल्पनिक शक्ति की बुनियाद पे खड़ा है, उस शक्ति का कोई वजूद नहीं है,
हमें बस ये साबित करते रहना है कि उस शक्ति का कोई वजूद नहीं है...
ये बुनियाद हिल जाये तो धीरे-धीरे बेबुनियाद ढांचे भी गिर जायेंगे...
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 25 जुलाई 2017
God/ धर्म
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