हम सभी किसी तरह के प्रचार के शिकार है। अगर हिन्दू घर में पैदा हुए हैं, तो एक तरह के प्रपोगेंडिस्ट हवा में हमको बनया गया है। जैन घर में पैदा हुए, दूसरी तरह की; ईसाई घर में तीसरी तरह की ….रूस में पैदा हो जाए तो एक चोथे तरह की हवा में आपका निर्माण होगा। और आप यही समझेंगे कि, यह जो प्रचार ने आपको सिखा दिया, यह आपका है। जब तक आप यह समझते रहेगें कि प्रचार जो सिखाता है वह आपका है, तब तक आप शास्त्रों से मुक्त नही हो सकते। और जो आदमी प्रपोगेण्डा और प्रचार से मुक्त नही होता, वह कभी सत्य को उपलब्ध नही हो सकता है।
और प्रचार के सूत्र एक जैसे हैं- चाहे लक्स टायलेट साबुन बेचनी हो, चाहे कुरान दोनेा में कोई फर्क नहीं है। advertisement का रास्ता एक ही है, प्रपोंगेडा का रास्ता और सूत्र एक ही है। धर्मगुरु बहुत चालाक लोग थे, उन्हे ये सूत्र पहले पता चल गए, व्यापारियों को बहुत बाद में पता चले। रेडियों पर रोज दोहराया जाता हैं कि सुन्दर चेहरा बनाना हो तो फला-फला अभिनेत्री लक्स टायलेट का उपयोग करती है। अभिनेत्री के चेहरे में और लक्स टायलेट में एक संबंध जोडने की कोशिश की जाती है।
अगर सत्य को पाना हो, तो फंला-फंला .ऋषि रामायण को पढकर सत्य पा गए। ऋषि में और रामायण मे सत्य जोडने की कोशिश की जाती है। यह वही कोशिश हैं, जो अभिनेत्री और लक्स टॉयलेट में की जाती है, अगर सुन्दर होना हो तो लक्स टॉयलेट खरीद लीजिये, और अगर सत्य पाना हो तो फलां-फलां ऋषि ने फलां-फलां किताब से पाया, आप भी उस किताब को खरीद लीजिये! उसके भक्त हो जाइये ! फिर रोज-रोज दोहराने से आदमी का चित्त इतना कमजोर है की रिपीरटिशन को वह भूल जाता है की यह क्या हो रहा है रोज रोज दोहराया जाता है |
आपको पता भी नहीं है, रास्ते पर निकलते है लक्स टॉयलेट सबसे अच्छा साबुन है, दरवाजे पर लिखा हुआ है, अख़बार खोलते हैं, लक्स टॉयलेट सबसे अच्छा साबुन है, रेडियो चलाते है, लक्स टॉयलेट सबसे अच्छा साबुन हैं, रोज.रोज सुनते है |
जब एक दिन आप बाजार में जाते है दुकान पर साबुन खरीदने को आप कहते हैं मुझे लक्स टॉयलेट साबुन चाहिए, और आपको पता नहीं की यह आप नहीं कह रहे हैं, आप से कहलवाया जा रहा है, आपको लक्स टॉयलेट का पता भी नहीं था |
एक प्रपोगैंडा आपके चारों तरफ हो रहा है और आपके मूह से, आपके कान में आवाज़ डाली जा रही है बार-बार जो की एक दिन आपके मूह से निकलनी शुरू हो जाएगी, और आप इस भ्रम में होंगे की मैंने लक्स टॉयलेट साबुन ख़रीदा, आपसे खरीदवा लिया गया और जो लक्स टॉयलेट के सबंध में सही है, वही कुरान, बाइबिल, वेद, उपनिषद् के सम्बन्ध में भी सही है, हम अदभुत रूप से प्रचार के शिकार हैं |
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 11 जुलाई 2017
प्रचार प्रसार के शिकार हैं हम
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें