मैं समझता हूँ भारतीय इन्हीं के कारण पीछे रह गए की जब सारा दिमाग इसी में खर्च हो जाएगा की गुरुवार को नाख़ून नहीं काटने, अमावस्या को चावल नहीं बनाने, रविवार को तुलसी में पानी नहीं डालना, शनिवार को मूर्ति पर तेल चढ़ाना है, सोमवार को बेलपत्र तोड़ने हैं, मंगल को व्रत रखना है, बुध को घास गणेशजी को चढ़ानी है, बिल्ली रास्ता काटे तो अशुभ मानना है, छींक आए तो 5 मिनट रुकना है, 12 बजे घर से बाहर नहीं निकलना है।
तो घण्टा कोई ज्ञान हासिल करने या नया अविष्कार करने में अपना दिमाग लगा पाएगा। यह सब मनुष्य की उन्नति में बाधक है
Saurabh Varshney
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