बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

परिधान

          परिधान -
संशोधन परिवर्तन ही गति है । गति ही जीवन है ।
संस्कृति रक्षा के नाम पर पहनावा पर ही क्यों चर्चा और भी कई विंदु हो सकते हैं ।
जिन्हे पुराने पहनावा पसंद है उनके परिवार के सदस्यों को धोती अंगोछा, साड़ी चोली पहनना चाहिये ।

धर्म और विज्ञान

धर्म कहता है - मान लो।
विज्ञान कहता है - जान लो।

सोमवार, 25 अक्टूबर 2021

गीता का कर्म फल

कर्मेण्येव अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।।
कर्म पर अधिकार होता है याने कि कर्म करें या नहीं, कौन सा क्या कर्म करें? यह हमारी मर्जी है । लेकिन कर्म के परिणाम पर कर्ता का अधिकार अधिकार नहीं होता। यह पूर्णतः सत्य है ।
         इस श्लोक का आशय स्पष्ट है कि परिणाम पर आसक्त न हों। आसक्ति होने से साध्य को प्राप्त करने के लिए गलत साधन का उपयोग हो सकता है । यही आसक्ति भ्रष्टाचार का कारक है ।
विनोबा भावे जी ने भगवद्गीता  पर अपनी पुस्तक में इसी गलत साधन के लिए सचेत किया है।

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

सवाल

अवैज्ञानिक अतार्किक प्रथाओं और परम्पराओं पर intelligent युवा सवाल उठाने लगे हैं।

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

भक्ति

जो लोग आजादी के लिए कुछ किये नहीं, उनके भक्त ऐसा दिखाते हैं जैसे भगत, सुभाष, बल्लभ पटेल जी उन्हीं के साथ थे ।

रविवार, 10 अक्टूबर 2021

प्रमाण


जो नहीं है उसका प्रमाण नहीं होता । 
जो होता है उसका प्रमाण हो सकता है ।

सः अस्ति     वह है।         आस्तिक 
सः न अस्ति   वह नहीं है।  नास्तिक 

प्रतिमा चित्र का महत्व


प्रतिमा, चित्र का महत्व -
हम अपने पूर्वजों के चित्र अपने घर में रखते हैं । उन्हें याद करने के लिए, उनसे प्रेरणा लेने के लिए, हमें एक अच्छे नागरिक बनाने के लिए मन में आभार व्यक्त करने के लिए ।
    उसी तरह महापुरुष जिन्होंने देश समाज के लिए कुछ किया हो उनकी प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य होता है, उनके द्वारा किये गये अच्छे कार्यों को याद कर,उनसे प्रेरित होकर हम भी अच्छा अच्छा करें ।
           मन्दिरों में भगवान, उन के अवतार, देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित कर मंत्र से मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करते हैं । उन्हें जीवित मान कर उनकी पूजा करते हैं, मत्था टेक कर उन से कुछ मांगते हैं, अपने किये पाप अपराध से मुक्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं ।

रविवार, 5 सितंबर 2021

शिक्षक और गुरू में अंतर

शिक्षक और गुरू में अंतर होता है । अर्थ शास्त्र के अनुसार एक शिक्षक श्रमिक होता है जो अपने श्रम (अध्यापन) का पारिश्रमिक लेता है । यदि शिक्षक पाठ्यक्रम के विषय वस्तु के अध्यापन के अलावा भी विद्यार्थियों के लिए, समाज के लिए कुछ करता है तो यह उसकी गुरूता है । जिसमें गुरुता हो वह गुरू है ।
सभी शिक्षक गुरू नहीं होते ।

रविवार, 29 अगस्त 2021

शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

धर्म और संविधान

-धर्म -
यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले अपने - अपने   देश समाज के संचालन के लिये अलग अलग नीति  नियम बनाए गये जिसे सभी लोग धारण / पालन करते थे। उनका संकलन था मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल ....  । अलग अलग धर्म, अलग -अलग  नियम  ।
अब सभी देश अपना - अपना संविधान बनाये । जिसके नीति नियमों का पालन हमें करना चाहिए ।
            याने कि  अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए । 
            पुराने धर्म के नीति नियम वर्तमान संविधान से अलग हो तो संविधान के नियम कानून का पालन करना चाहिए ।

धर्म

-धर्म -

यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल के बताये नियम का पालन करते थे । अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए ।

गुरुवार, 19 अगस्त 2021

भगवान का प्रत्यक्ष दर्शन


जंगल में पेड़ बंदर खूब देख कर आये तो घर में जागते हुये भी बंदर दीखते हैं। यह imaging है । कभी कभी कोई रिश्तेदार, मित्र जागते हुये भी दीख जाते हैं । किसी भगवान देवी देवता की मूर्ति पर ध्यान करने से भी ऐसा हो सकता है ।
       बचपन में मैं सपना में भगवान श्री राम, श्री कृष्ण देवी सरस्वती से बात करता था । यह कोई भगवान या देवी का प्रसन्न होना या उनका प्रत्यक्ष दर्शन नहीं है । 

मंगलवार, 10 अगस्त 2021

CO2 का निर्माण

लोबान, धूप अगरबत्ती, घी,  तेल, मोमबत्ती , लकड़ी कुछ भी जलाने कार्बन डाई आक्साइड बनता है । इससे हवा में आक्सीजन  की खपत होती है। याने आक्सीजन कम हो जाता है कार्बन डाई आक्साइड बढ़ जाता है ।

शनिवार, 7 अगस्त 2021

जड़ और चेतन

जड़ और चेतन 

कुछ लोग अपने दिमाग में copy paste कर भरते जाते हैं ।
जो बिना सोच विचार किये पढ़े या सुने हुए को मान लेता है वह जड़ । 
जो बहुत सोच विचार कर मानता है या नकार देता है वह चेतन ।

सह सम्बंध

अधिकतर विद्यार्थी  युवक  समाजवादी, साम्यवादी  होते हैं ।
उम्र के साथ साथ  समझदारी बढ़ती है । कुछ लोग मानवतावादी हो जाते हैं ।
बाकी लोग 
पूंजी वादी, भोगवादी हो जाते हैं ।
******
उम्र 
और 
समझदारी, चालाकी, स्वार्थ
के बीच 
धनात्मक सहसम्बन्ध होता है । याने उम्र के साथ साथ इनमें बढोत्तरी होती है लेकिन कुछ अपवाद होते हैं जिनके दिल में मानवता होती है ।

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

सहयोग

चिड़ियों को कुछ अनाज खिला देने से कुछ नहीं होगा। जरूरतमंद को सहयोग करें तो सचमुच कुछ मिल जाएगा।
अपंग बूढ़े के अतिरिक्त अन्य भिखारियों को भीख देकर निठललापन को बढ़ावा देना है। इससे अच्छा है जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग करें।

सहयोग

चिड़ियों को कुछ अनाज खिला देने से कुछ नहीं होगा। जरूरतमंद को सहयोग करें तो सचमुच कुछ मिल जाएगा।

धर्म

यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो,  जिसे धारण करें वह हमारा धर्म।  
बहुत पहले अलग अलग भू भागों में देश काल परिस्थिति अनुसार अलग अलग धर्म थे । 

हमारा संविधान मानवतावादी है ।
अब हमारा संविधान ही हमारा  धर्म होना चाहिए ।

सोमवार, 2 अगस्त 2021

गौतम बुद्ध

गौतम  बुद्ध एक आम इंसान ही थे । 
most intelligent. 
लेकिन कुछ चालाक लोगों ने उन्हें भगवान बना दिया ।

विपरीत

बुद्ध के "अप्प दीपो भव" के विपरीत है यह "बुद्धम् शरणम्  गच्छामि "

मंगलवार, 20 जुलाई 2021

दिमाग

अपने दिमाग में खूब भरना चाहिए कभी full नहीं होगा । लेकिन सिर्फ़ भरना नहीं, उस पर सोच विचार भी करना चाहिये ।

शनिवार, 10 जुलाई 2021

संस्कृति परम्परा में परिवर्तन

हमारी संस्कृति / परम्पराओं में परिवर्तन--
 ***"*
पहले--- मनु स्मृति 
बहुपत्नी विवाह, सती प्रथा, बाल विवाह,. .., ...
धोती कुरता, साड़ी, बैल गाड़ी, मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाना, तीर धनुष, तालाब का पानी, ..
आज-- संविधान 
परम्परा / संस्कृति विरुद्ध _
**********
हिंदू विवाह अधिनियम, .., .  , .... 
आम जन के लिए स्कूल कॉलेज.. ,.. , ...
आधुनिक पहनावा, बिजली, स्टील प्लास्टिक बर्तन, गैस चुल्हा, रेफ्रिजेटर, कम्प्युटर, टी वी, मोबाइल, शौचालय, रेल गाड़ी, ए सी, बिजली बल्ब, बिजली पंखा, पेट्रोल कार ट्रेक्टर मोटर  साइकिल, ...

रविवार, 4 जुलाई 2021

ऐसा क्यों

हमारे देश में सब से ज्यादा धार्मिक ग्रंथ, भगवान, देवी  देवता, मंदिर, भक्त, भक्ति है फिर भी हमारे देश में सब से ज्यादा भ्रष्टाचार ,पाप, बलात्कार, गुंडागर्दी, घूसखोरी, कामचोरी, बेइमानी है । सोचना चाहिए ऐसा क्यों?

बुधवार, 30 जून 2021

स्वर्ग नहीं चाहिए

स्वर्ग में तो हम जाना ही नहीं चाहते । क्यों कि वहां गंगा नहा कर, कुम्भ स्नान कर, देवी देवताओं के मंदिर में चढ़ावा देकर अपने किये अपराध पाप को धो लेने वाले भी बहुत होंगे। 

शनिवार, 26 जून 2021

स्वयम्बर

महाभारत, रामायण काल का कथित स्वयम्बर सही माने में स्वयम्बर नहीं था ।  विवाह के लिये वर वधु चुनने की आजादी नहीं थी ।
उस स्वयम्बर में कन्या  के पिता द्वारा आमंत्रित उम्मीदवारों में से जो
शर्त को  पूरा करे उसे कन्या वरमाला पहनाती  थी । उसके गुण जैसे  भी हो, वीर बहादुर होना चाहिये  ।

बुधवार, 23 जून 2021

प्रेम स्वार्थी होता है

प्रेम स्वार्थी होता है ।
मेरी पत्नी / प्रेमिका मेरी ही होनी चाहिए। मेरा पति /प्रेमी मेरा ही होना चाहिए । इसी स्वार्थ के कारण मनमुटाव ,मार पीट, तलाक, हत्या होती है ।

सहसंबंध

भक्ति और अंधविश्वास के बीच धनात्मक सहसम्बंध होता है ।

सोमवार, 21 जून 2021

secular

सेकुलर गद्दार नहीं होते। वे अपने मस्तिष्क का उपयोग करते हैं। कट्टर धार्मिक लोग लकीर के फ़कीर होते हैं जो अपने दिमाग का पूरा उपयोग नहीं करते । ऐसी कट्टरता ही आतंकवाद को जन्म देती है  

शुक्रवार, 11 जून 2021

मेकाले शिक्षा पद्धति से उलट

मेकाले शिक्षा पद्धति से जो असहमत हों उनके बच्चों के लिये गुरुकुल आश्रम खोलना चाहिए । इसके लिए मंदिरों के धन का सदुपयोग करना चाहिए । ऐसे गुरुकुल आश्रम में मेकाले की शिक्षा पद्धति के पाठ्यक्रम का अध्यापन बिल्कुल नहीं होना चाहिए । वहां संस्कृत, स्थानीय भाषा, वेद पुराण महाभारत रामायण, आयुर्वेद की पढ़ाई होनी चाहिए ।

सोमवार, 7 जून 2021

मैं शिक्षक हूं

मैं शिक्षक हूं. 
आज देश में वैज्ञानिक जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता और तर्कशीलता की जरूरत है । मैं इसके लिए स्कूल, कालेज, सोशल मीडिया में कोशिश करता हूं । 

रविवार, 30 मई 2021

अंतर्जातीय विवाह

महाभारत काल में अंतरजातीय विवाह को सामाजिक मान्यता थी । लेकिन कालांतर में जातीय भेद भाव, जातीय श्रेष्ठता का अहंकार बढ़ता गया । आज सामाजिक मान्यता नहीं मिलने के कारण हत्या,  आत्म हत्या कr लेते हैं प्रेमी या उन्हें और उनके परिवार वालों को प्रताड़ित किया जाता है, अर्थ दंड दिया जाता है जातीय समाज के द्वारा ।
             हमारे देश के संविधान को मानते हुए अंतरजातीय विवाह को समाज द्वारा भी मान्यता मिलनी चाहिए लेकिन लकीर के फ़कीर रोड़ा बनते हैं ।

रविवार, 9 मई 2021

वे इस दुनिया के हितैषी नहीं

ये अकाल बाढ़ महामारी कत्लेआम युद्ध आतंकवाद नक्सलवाद आगजनी... सब अल्लाह भगवान देता है तो इस दुनियां का हितैषी नहीं होगा ।

शनिवार, 1 मई 2021

एक प्रश्न

जानना चाहिए ST और  OBC किस वर्ण / वर्ग में आते हैं ।
***
ज्ञातव्य है कि 
सवर्ण ((ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य )  के अलावा तीन वर्ग SC, ST, OBC को आरक्षण, छात्रवृति का लाभ मिलता है ।
ब्राह्मण सवर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य)  के अलावा OBC और ST  के घर में पूजा पाठ,संस्कार करते हैं ,शुद्र के घर में नहीं करते ।
शुद्र को अछूत मानते थे । सवर्ण ST, OBC  को नहीं ।

बुधवार, 28 अप्रैल 2021

mixing

दोनों जर्मनी मिलकर एक हो गये । हिंदी अरबी मिलकर उर्दू बन गई । हिंदी में अंग्रेजी अरबी के शब्द mix हो गये । भारत में मुस्लिम ईसाई पारसी... आकर भारतीय हो गये । अमेरिका जर्मनी ... में भारतीय .... नस्ल mix हो गये । 
       पता नहीं हमारे देश की  विभिन्न जातियों में mixing हुआ है या नहीं?

मंगलवार, 27 अप्रैल 2021

चोला बदल लेते हैं लोग

 अंग्रेज़ी संस्कृति की जो जो अच्छा लगा सभी लोग अपना चुके, अपना रहे हैं । हाँ कुछ ऐसे भी हैं जो साठ पैंसठ उम्र के बाद चोला बदल लेते हैं । पेंट शर्ट सूट clean shaved से कुरता धोती पाजामा, लम्बी सफेद दाढ़ी... नौकरी में खूब खाये पिये, अब भागवत गीता रामायण पाठ..... 

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

अपने बच्चों की पढ़ाई

जो समझते हैं कि शहरी संस्कृति से, आधुनिक स्कूल कालेज की पढ़ाई से संस्कृति का विनाश हो रहा है, उन्हें अपने बच्चों को किसी गुरुकुल/वैदिक/ संस्कृत school में पढाना चाहिये । यदि ऐसे स्कूल कम पड़े तो मिलजुल कर नये स्कूल खोलना चाहिए जहाँ केवल  हिंदी , संस्कृत, वेद पुराण, गीता, भागवत, मनु स्मृति, ....  की पढ़ाई हो ।

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

जयकारा याने युद्ध

जयकारा याने युद्ध ।
जय श्रीकृष्ण, जय श्री राम, जय ईशु, जय गुरदेव, जय भीम, .....    
किसी का जयकारा लगाने का क्या मतलब है? हार जीत का प्रश्न जहाँ हो अपने का जयकारा लगाते हैं याने कि अपने एक की जीत, दूसरों की हार । युद्ध में हार जीत होती है । युद्ध का आधार  नफ़रत होता है, प्रेम मानवता नहीं ।
पहले युद्ध के लिये प्रस्थान करते राजा सेना को प्रोत्साहित करने के लिए जयकारा लगाते थे ।

क्षमाशील ईश्वर

ईश्वर को क्षमाशील मानते हैं इस लिये उनसे डरते नहीं। डरते तो बुरे कर्म नहीं करते ।
 अपने पाप धोने के लिये भगवान को मनाने के लिए कई सरल रास्ते हैं ।

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

आस्तिक नास्तिक कैसे बनते हैं

धार्मिक धर्म ग्रंथों को बिना पढ़े, सुन सुन कर बहुत सारे लोग आस्तिक होते हैं ।
 उन ग्रन्थों को पढ़ कर, समझ कर ही कुछ लोग  नास्तिक हो जाते हैं ।
जैसे - ऋषि जाबालि,  चार्वाक ऋषि,  गौतम बुद्ध,  स्वामी पेरियार डॉ कोबूर (श्रीलंका) ,  भगत सिंह, विश्वनाथ (सरिता के सम्पादक) .. .... .... रायगढ़ जिला के मुमताज भारती, जय प्रकाश मानस रथ, लोइंग के स्व श्री सुभाष चंद्र गुप्ता,  पंडरीपानी पूर्व के श्री जगदीश गुप्ता,  महापल्ली के श्री पद्ममुख पंडा

बुधवार, 7 अप्रैल 2021

CO2 निर्माण

लोबान, धूप अगरबत्ती, घी,  तेल, मोमबत्ती , लकड़ी कुछ भी जलाने कार्बन डाई आक्साइड बनता है । इससे हवा में आक्सीजन  की खपत होती है। याने आक्सीजन कम हो जाता है कार्बन डाई आक्साइड बढ़ जाता है ।

सोमवार, 29 मार्च 2021

होली

कई साल से लोग होली मना रहे हैं, होली की बधाई देते हैं.. क्या इससे सुख समृद्धि में वृद्धि हो रही है? बुराई में कमी आ रही है ?

रविवार, 28 मार्च 2021

अम्बेडकर का नहीं हमारा संविधान

हमारे संविधान सभा के अध्यक्ष 
अम्बेडकर जी नहीं थे. वे drafting कमेटी के अध्यक्ष थे। 
drafting कमेटी का काम संविधान सभा में पारित नियम कानून को धारा उप धाराओं में सजाकर लिखना था । उन्होने उन पारित नियम कानून नीतियों को कर संविधान का रूप दिया ।
यह काम विधि विशेषज्ञ अच्छे से कर सकते थे । इस लिये इसकी जिम्मेदारी अम्बेडकर जी को दी गई थी ।
    अतः हमारे संविधान को अम्बेडकर का संविधान कहना गलत है ।

शनिवार, 20 मार्च 2021

कुल देवता कुल देवी

कुल देवी / कुल देवता 
                      ******
            हिंदू धर्म मानने वाले सभी जाति की एक एक कुल देवता / देवी होती है । पता नहीं, मुस्लिम इसाई लोगों के कुल देवता या कुल देवी होती है या नहीं ।
              कोलता जाति की कुल देवी 
श्री रामचंडी को मानते हैं । वे दुर्गा की रूप हैं ऐसा माना जाता है । आज कल हमारे इधर रायगढ़ पूर्वांचल के कई गांवों  में श्री रामचंडी के मंदिर बना रहे हैं । 
         देवी के नाम में श्री राम और श्री चंडी जुड़े हैं । इससे लगता है कि पाताल लोक की देवी महामाया ही ( जिन्हें देवी दुर्गा का रूप माना जाता है ) श्री रामचंडी देवी हैं जिनके सामने रावण का भाई पाताल का राजा अहिरावण श्री राम और श्री लक्ष्मण जी का बलि देने वाला था । वीर हनुमान जी ने अहिरावण को पराजित कर  राम और लक्ष्मण को भूलोक में  ले आये । हो सकता है हनुमान जी देवी महामाया / चंडी को भी अपने साथ ले आये हों । जिन्हें हम श्री रामचंडी कहते हैं जिन्हें हम कोलता जाति की कुल देवी मानते हैं ।

शनिवार, 13 मार्च 2021

वर्ण, जाति, उपनाम, पिछड़ी जाति, कोलता, गुप्ता

जाति और उनके उपनाम 
पिछड़ी जाति OBC कौन ? -
-------
छत्तीसगढ़ में कोलता जाति के लोग भी उपनाम "गुप्ता" लिखते हैं, ओड़िशा में कोई नहीं लिखता ।
******************
                 आर्यों के मनु स्मृति के अनुसार चार वर्णों में से तीन वर्ण क्रमशः उच्च माने जाते हैं ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य। चौथा वर्ण है शुद्र ।
*****************
           शुद्र को अछूत माना गया । ब्राह्मण उनके घर में जाकर जन्म  मृत्यु संस्कार, शादी विवाह, यज्ञ हवन आदि नहीं करते ।
               हमारे भारत के मूल निवासी जंगलों में रहने वाले  (S. T.) तथा मैदानी इलाके में रहने वाले (अन्य पिछड़ी जाति O. B. C. मुख्य काम खेती ) को आर्यों ने  राक्षस कहा । आर्यों के पुराणों में इन्हें राक्षस कहा गया है । उनके कथा कहानियों में उन्हें कुरूप, झगड़ालु , बदमाश, मांसाहारी..  बताया गया । आर्यों और राक्षसों के बीच युद्ध होते रहे । कथित राक्षस बलिष्ठ और  सरल स्वभाव के होते थे । आर्यों के कथित उच्च वर्ग (सवर्ण)  बड़े  दिमाग वाले तथा चालाक होते थे ।
             O. B.C  कोलता अघरिया कुर्मी.....  खुद को सवर्ण वैश्य,  क्षत्रिय कहलाना चाहते हैं खुद को उच्च जाति का बताकर सम्मान पाना चाहते हैं लेकिन शासन द्वारा मिलने वाली सहायता छात्रवृत्ति आरक्षण का लाभ लेते हैं ।
                 हम कोलता भी राक्षस कुल के हैं । छत्तीसगढ़ में हम कोलता लोगों के घर में  विवाह/एकादश कर्म के पूजा हवन में पुरोहित मंत्रोच्चार करते हैं कहते हैं -
जम्बू द्वीपे भारतवर्षे उत्कल देशे राक्षस कुलस्य गुप्त वंशस्य  . .......... (गुप्त के स्थान पर साहा, साहू, भोई भोय.... आदि )
ओड़िशा में क्या कहते हैं? कृपया बताएं।
इससे स्पष्ट है छत्तीसगढ़ के हम  (कोलता ) के पूर्वज उत्कल देश (ओड़िशा) से आए हैं । ज्ञातव्य है कि ओड़िशा में कोलता कुल्ता कुलिता कोई अपना उपनाम "गुप्ता " नहीं लिखते ।
                    ओडिशा से कुलिता कुलता छत्तीसगढ़ (पहले मध्यप्रदेश) में आकर कोलता लिखने लगे ।  पधान से प्रधान, भोई से भोय, साहू से साहा साव सा, ....।
            मध्यप्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) रायगढ़ पूर्वांचल दो दो विद्वान जो बहुत पढ़ाकू थे महापल्ली के श्री हेम सुंदर प्रधान तथा लोइंग के श्री पूर्ण चंद्र प्रधान ।
अपने कुल / जाति को गर्वित करने के लिए उपर्युक्त दोनो ने अलग अलग विचार कर अपना उपनाम परिवर्तन किया ।
श्री हेम सुंदर जी अपनी पुस्तक "कुलिता " में लिखा है कि कोलता जाति काश्मीर से आकर उत्कल में बस गये । सम्राट अशोक के वंशज हैं । याने क्षत्रिय हैं । उन्होंने आगे लिखा है कि उनके काम के अनुसार अनुसार गुप्त (प्रधान मंत्री), खम्हारी (कोषाध्यक्ष), गढ़तिया (गढ़पति /कीलेदार).... कहा जाता था । कालांतर में यही सब कुल मिला कर 120 वर्ग हो गये। उन्होने कोलता को कलिंग से जोड़ा। उनके अनुसार गुप्त और प्रधान पर्यायवाची हैं । (कोलता जाति को  (विंशसए) विशासहे कुल कहा जाता है ।) इसी लिये श्री हेम सुंदर प्रधान जी ने अपना उपनाम "गुप्त" लिखना आरम्भ किया ।
   श्री पूर्ण चंद्र प्रधान जी ने कोलता को उच्च /श्रेष्ठ स्थान दिलाने के उद्देश्य से 
मनु के चार वर्ण में से वैश्य वर्ण का बताने के लिए मनु के निर्देशानुसार सरनेम " गुप्त" लिखना उचित समझा । लेकिन वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी के भी प्रेमी थे । उन्होने अपना सरनेम गुप्त का अंग्रेजी स्टाईल गुप्ता पसंद किया । वे पूर्ण चंद्र गुप्ता लिखने लगे । उनके बड़े भाई इन्द्रो जी भी, फिर लोइंग, भोजपल्ली  के गौन्तिया /गौटिया परिवार के अधिकतर लोग उपनाम  "प्रधान" लिखना छोड़ कर "गुप्ता" लिखने लगे । (लोइंग के  गौटिया परिवार में भी सरनेम लिखने में एकरूपता नहीं थी। मेरे ताऊ श्री धरनीधर प्रधान, मेरे पिता श्री गजपति प्रधान,  मेरे चाचा श्री जयराम गुप्ता,  श्री उद्धव प्रधान,  चचेरे भाई श्री शशिभूषण प्रधान ) । उसी वंश के दूसरे गांव महापल्ली, केंसरा, तुरंगा, पोटेबिर्नी, ..के लोग भी प्रधान सरनेम छोड़ कर गुप्ता लिखने लगे । यह गुप्ता सरनेम बड़े लोगों का, ऊँचा माना जाने लगा। फिर  छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरनेम प्रधान, भोई, खम्हारी,  साहू, बारीक, बिश्वाल, स्वाईं   ....  ..अपना उपनाम  गुप्ता लिखने लगे । कालांतर में छत्तीसगढ़ कोलता समाज की बैठक में बहुत विचार विमर्श के पश्चात गुप्ता सरनेम को मान्यता दी गई ।
*****************        
             ज्ञातव्य है कि मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण,  उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये  है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण   - उपनाम - जनेऊ 
ब्राह्मण - शर्मा  -  रेशम 
क्षत्रीय  - सिंह  -  कपास 
वैश्य     - गुप्त  - जूट
शुद्र      - दास 
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
 मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु  यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार  उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता  में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह
******************
             कालांतर में जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी वर्णों के उनके काम के अनुसार कई कई वर्ग बन गए । तदनुसार अलग अलग सरनेम याने एक उपनाम के कई उपनाम ।
ब्राह्मणों शर्मा के - पंडा , द्विवेदी,  त्रिवेदी. चतुर्वेदी, तिवारी ...
कोलता के - कोई राजा या जमीदार का मेनेजर का काम किया उनके वंशज दिवान/खम्हारी, कोई गांव का मुखिया बना तो उसके वंशज पधान /प्रधान, कोई साहुकारी करने लगा तो उनके वंशज साहू.... 
पधान प्रधान, साहू सा साव साहा शाह,  भोई भोय, बारीक, खम्हारी , दिवान, बिश्वाल,  ... .... 

वर्तमान में 
सरनेम देख कर जाति नहीं जान सकते ।
सरनेम लिखने के संबंध में कोई कानून नही है। याने उपनाम लिखने के लिए सभी स्वतंत्र हैं कोई कुछ भी लिखे । कई जाति के लोग पहले कोई उपनाम ही नहीं लिखते थे ।
बाद में दूसरों के देखा देखी कुछ लोग अपनी जाति को ही उपनाम लिखने लगे । कुछ शारीरिक जाति के नये नये उपनाम गढ़कर लिखने लगे । जैसे निर्मलकर, विमलकर, कुम्भकार, बसोड़, चर्मकार, किसान, सूर्यवंशी,  ... 
कुछ जाति के लोग दूसरी जाति के उपनाम को लिखने लगे । जैसे भोय, साहू, ठाकुर, चौहान, ...
ज्ञातव्य है कि पहले परीक्षा या अन्य फार्म में उपनाम का कालम नहीं होता  था ।
           आधुनिक काल में साहित्यकारों के द्वारा अपने स्वभाव कर्म योग्यता को व्यक्त करने के लिए अतिरिक्त उपनाम लिखने की परम्परा बनी । जैसे श्री  रामधारी सिंह "दिनकर,  श्री गोपाल दास "नीरज",  श्री जय प्रकाश  "मानस", .................
********
                  मेरे विचार से मनु के निर्देशानुसार अपने वर्ण के मुख्य उपनाम के साथ उस के वर्ग का उपनाम लिखना चाहिए । इनके अलावा जो चाहें अपनी पसंद का अतिरिक्त उपनाम भी लिखना चाहिए ।
              मेरे समझ में मनु स्मृति को छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ के निम्नांकित  दो शिक्षक ठीक ठीक पढ़े और समझे थे । क्यों कि वे अपना नाम मनु के निर्देशानुसार लिखते थे ।
( उनसे कभी मनु स्मृति या जाति उपनाम के सम्बन्ध में मेरी चर्चा नहीं हुई ।
1 श्री नीलाम्बर प्रसाद शर्मा त्रिपाठी "शास्त्री" सेवा निवृत्त प्रधान पाठक लोइंग (जिला रायगढ़) 
2 श्री कृतार्थ रथ शर्मा सेवा निवृत्त प्रधान पाठक  नवाँपारा (पुसौर  जिला रायगढ़ ) ।
                यदि हमारी जाति "कोलता" को वैश्य मान लें तो लिखना चाहिए -
श्री हेम सुंदर गुप्त प्रधान (महापल्ली )
श्री पूर्ण चंद्र गुप्त प्रधान (लोइंग )
तदनुसार मैं लिखूं  तो -
नत्थू राम गुप्त प्रधान "सत्यार्थी"
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             कृपया मुझे जातिवादी या मनुवादी न समझें । यह बता दूं मैं मनु स्मृति पढ़ा हूं । 
मेरे इस लेख का मकसद किसी  को ठेस पहुंचाना नहीं है , सच को सामने लाना है ।
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अवलोकनार्थ संलग्न है स्व श्री हेम सुंदर गुप्त जी की पुस्तक "कुलिता" के कुछ अंश

शुक्रवार, 5 मार्च 2021

रामायण महाभारत के बाद मनु स्मृति रची गई

रामायण  महाभारत के बाद मनु स्मृति की रचना हुई 
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 मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण,  उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये  है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण   - उपनाम - जनेऊ 
ब्राह्मण - शर्मा  -  रेशम 
क्षत्रीय  - सिंह  -  कपास 
वैश्य     - गुप्त  - जूट
शुद्र      - दास 
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
 मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु  यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार  उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता  में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह

बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

विद्यालय और मंदिर

विद्यालय का मतलब शिक्षा ज्ञान का केन्द्र होता है. वह भक्ति केन्द्र नहीं होता. भक्ति के लिये मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा होते हैं जहां विज्ञान, तर्क, प्रयोग का कोई महत्व नहीं होता जिसे पवित्र कहा जाता है । वहां  जो सुनाया जाता है उसे ही सच माना जाता है ।

सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

वैज्ञानिक जागरूकता समिति की स्थापना

       आज देश में वैज्ञानिक जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता की बहुत जरूरत है । इसके लिए हर जिला में एक वैज्ञानिक जागरूकता फोरम /समिति की स्थापना होनी चाहिए  जो  विद्यार्थीयों में वैज्ञानिक तथा स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कोशिश करे ।

हमारी संस्कृति प्यार वाली


  असल में  राधा कृष्ण के प्यारवाली है हमारी सँस्कृति ....खजुराहो  जैसे शिल्प दुनियाँ में  कहीं नहीं ।   हकीकत में  1000साल पुराना हमारा समाज ज्यादा mature  और खुल्ला था ।

शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

शादी की उम्र क्या हो

शादी की उम्र क्या हो ?-
हमारे देश में कानून अनुसार शादी की न्यूनतम उम्र लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 है । कानून में शादी के लिये पुरुष से महिला की उम्र अधिक हो, दोनो की बराबर हो.... तो कोई प्रतिबंध नहीं है ।
 मनु स्मृति के अनुसार लड़का लड़की के शादी के उम्र में 8 साल का अंतर होना चाहिए । यह अंतर का सुझाव बहुत महत्वपूर्ण है । इसलिये कि पुरुष की यौनेच्छा 70-80 साल तक भी रह सकती है लेकिन स्त्री की इच्छा उसके मासिक चलते तक ही रहती है । प्रकृति द्वारा दिये इस विसंगति के कारण पत्नी के रजोनिवृत्ति के बाद पति नया पार्टनर खोजने लगता है । पहले पुरुष दो - तीन शादी करते थे । आज कल स्त्री की रजोनिवृत्ति के बाद पांच - सात साल तक हार्मोन चिकित्सा से Period की अवधि बढ़ाई जा सकती है ।

सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

संविधान में इंसानियत

 गीता कुरान बाइबल तो अपनी अपनी बात कहते हैं , एक संविधान ही है जो इससे उपर उठकर सिर्फ इंसानियत की बात कहता है |

रविवार, 27 दिसंबर 2020

जंगल में तपस्या

जंगल में तपस्या करने से भगवान के दर्शन और आशीर्वाद मिलता है । मोक्ष ओर स्वर्ग मिलता है ।
स्वर्ग में अप्सराएं सोम रस उपलब्ध होते हैं । वहां कोई काम करना नहीं पड़ता । सुख, आनंद ही आनंद ।
लेकिन आज कल बहुत कम लोग तपस्या करते हैं ।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

गांधी जी और वर्ण व्यवस्था

अम्बेडकर भक्त कहते हैं कि गांधी जी मनु के वर्ण व्यवस्था के पक्षधर थे ।
तो क्या हुआ? मुंडे मुंडे मतिर्भिनाः। 
गांधी जी किसी शुद्र दलित को पढ़ने पढ़ाने, शिक्षक मंत्री बनने, वोट देने, से नहीं रोका । अछूतों से अछूत व्यवहार नहीं किया ।

धर्म में सवाल नहीं

सभी धर्म दिमाग आंख सब बंद कर चुपचाप मानने के लिए कहते हैं । कोई तर्क नहीं, सही कोई सवाल नहीं ।

वीर या आधा वीर


सावरकर जी आजादी की लडाई में शामिल हुए.  इसीलिए उन्हें कालापानी की सजा हुई.  बाद में माफ़ीनामा लिख कर सजा से मुक्त हुए.  उनके आजादी की लड़ाई, कालापानी  के कष्ट की सोचें। 
यह भी सोचें हमने देश के लिए क्या किया?  हम होते तो क्या करते? 
सावरकर जी को पूरा वीर भले ही न कहें आधा वीर तो कह सकते हैं ।




गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

गांधी जी का हरिजन और मोदी जी का दिब्यांग

गांधी जी ने कथित शुद्र दलित को प्यार से हरिजन कहा था. सम्मान देने की नियत से । (उन्होंने कभी किसी दलित शुद्र का तिरस्कार अपमान नहीं किया। ) जैसे मोदी जी ने विकलांग अपंग को भी दिब्यांग नाम दिया उन्हें सम्मान देने के लिए ।
        कथित दलित शुद्रों को तिरस्कार के भाव से हरिजन कहें या SC उन्हें बुरा तो लगेगा ही । उसी तरह विकलांग अपंग दिब्यांग ।

रविवार, 20 दिसंबर 2020

गांधी ओर हरिजन

गांधी और हरिजन 
यह तर्क है तर्क करने के लिए. 
कथित दलित शुद्र हरिजन हैं तो बाकी राक्षस हैं क्या? 
उन्हें गांधी जी ने हरिजन कहा था उसमें कोई तिरस्कार अपमान का भाव नहीं था । 
ये भीम के भक्त अम्बेडकर को सबसे महान, सबसे बड़ा बनाने के लिए गांधी जी की तुलना कर उनके बारे में झूठ अफवाह फैलाते हैं । वे कहते हैं कि गांधी जी कथित शुद्रों के शुभ चिंतक नहीं थे । उन्हें हरिजन कहकर उनका अपमान किया । वे इसके साथ एक झूठ फैला रहे हैं कि जिसके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन कहा जाता है याने वौश्या के संतान को । यह सरासर झूठ है । दरअसल जिनके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन नहीं राम जनी कहा जाता है । (इसका मतलब यह भी नहीं कि वे श्री राम जी के संतान हैं । )
यह भी ज्ञातव्य है कि 
गांधी जी अपने जीवन में कथित शुद्र दलितों के साथ कभी अछूत ब्यवहार नहीं किया ।
हमारे संविधान में सब को समान अधिकार दिया गया है, कथित शुद्रों हरिजन दलित को भी , उन्हें भी आरक्षण दिया गया है । यह सब गांधी जी जीवित थे तब हुआ है । यह अधिकार केवल एक अम्बेडकर जी की इच्छा से नहीं, पूरे संविधान सभा की सहमति से हुआ है ।

आरक्षण का लाभ देने के लिए हर वर्ग को एक नाम तो देना ही पड़ा । ओ बी सी OBC,  एस टी ST,  एस सी SC ।
कथित शुद्र एस सी SC कहते हैं. कई लोगों के कहने के लहजे में तिरस्कार का भाव होता है ।
यह गलत है । लेकिन धीरे धीरे शिक्षा प्रसार और सझदारी के कारण उन्हें अपमानित करने का भाव , छुआछूत कम हो रहा है ।

बुधवार, 16 दिसंबर 2020

अम्बेडकर

भीम राव अम्बेडकर जी निश्चित ही बहुत intelligent थे, खूब पढाई किये, बहुत सारे डिग्री हासिल किये लेकिन उन्हें देश दुनियां के लिए नहीं, केवल अपनी अछूत जाति के हित से मतलब था ।
        उन्होने  देश के संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में सभा द्वारा पारित नियम कानून का  बहुत अच्छा ड्राफ्टिंग किया ।

रविवार, 13 दिसंबर 2020

मेरी आस्था

मैं पहले पूरा आस्तिक था । लेकिन अब मुझे किसी भी भगवान देवी देवता भूत प्रेत के अस्तित्व पर विश्वास नहीं है । 
मैं यह सार्वजनिक कर रहा हूं । अपना विचार व्यक्त करना चाहिये । मुझे सिर्फ़ मानवता पर भरोसा है । क्यों कि मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है ।
हमारे घर में उन भगवान देवी देवताओं की मुर्ति फोटो हैं क्यों कि घर में मैं अकेला नहीं रहता ।
     अगर वे दुनियां में कहीं हैं तो सब कुछ देख कर मुक दर्शक क्यों बने रहते हैं? स्पष्ट है वे नहीं हैं, कल्पित हैं । अगर हैं तो अपनी duty नहीं कर रहे । ऐसी स्थिति में उनका अस्तित्व क्यों स्वीकार करूं?

भगवान को जानने, पाने की कोशिश


उस कथित  भगवान को जानने की बहुत कोशिश किया। अब कोशिश बंद है । 
कुछ भी नहीं समझा, कुछ भी नहीं जाना । 
उसे खोजने, जानने,पाने की कोशिश करना निरर्थक लगा । 
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इतनी बड़ी दुनियां 
इतने सारे लोग 
आओ 
सबसे प्यार करें ।




गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

आर्य और अनार्य


भारत के मूल निवासी (ST, OBC)  बलिष्ठ, सीधे,सरल, सच्चे,निष्कपट , होते थे । आर्य उनकी अपेक्षा बड़े दिमाग वाले याने intellgent होते थे । मूल निवासी जंगल में रहते थे । जंगल के पेड़ पौधों के फल पत्ते और मांस ही उनका मुख्य भोजन था ।

बाद में कुछ (OBC) मैदानी भाग में रहने लगे जो खेती तथा पशु पालन करने लगे । 

आर्यो का सर्वोच्च वर्ण ब्राह्मण बहुत अधिक intelligent थे । उनकी कल्पना शक्ति अद्भुत होती  श। भगवान देवी देवता को पैदा कर लेते श । ग्रहों की चाल स्थिति बदल देते । याने पूरी दुनियां को नचाते ।
      उनका दूसरा वर्ण क्षत्रिय बलशाली थे । वे बाहु बल से किसी भी भाग के राजा बन जाते ।
         तीसरा वर्ण वैश्य भी बड़े दिमाग वाले  होते थे । वे खेत खेत्र में बिना मेहनत किये बुद्धि के बल पर वस्तुओं का उत्पादन करते याने विनिमय कर मालामाल होते ।
      आर्य अपनी सेवा के लिये जिन्हें नगर गाँव के किनारे जगह देकर बसाते थे उन्हें वे शुद्र कहते थे । वे अछूत होते थे ।
  
      आर्य खुद को देव कहते थे और भारत के मूल निवासियों को अनार्य दानव राक्षस कहते थे ।
आर्य अपने कथा कहानियों में मूल निवासियों के राजाओं को खल नायक बताकर उन्हें बदमाश, कुरूप बताते थे तथा उनका उपहास करते थे ।

आर्य अपने दिमाग का उपयोग कर भारत में प्रभाव जमाने लगे । ब्राह्मण के अलावा क्षत्रिय तथा वैश्य के घर में पूजा पाठ करते थे इससे उनकी पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी । इसलिए वे भारत के मूल निवासी ST, OBC के घर में भी पूजा पाठ करने लगे । वे आज भी शुद्र के घर में पूजा पाठ शादी विवाह आदि कोई संस्कार , यज्ञ हवन नहीं करते ।
  
ST, OBC, ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य और शुद्रों के त्वचा का रंग, रहन सहन, संस्कार उनके क्रिया कलाप, सब  अलग अलग होते थे । कालांतर में सब मिश्रण होते जा रहा है ।

राम नाम सत्य

🤔🤔
अगर राम नाम सत्य है, तो बाकी के क्या है...? जैसे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश, दुर्गा , काली, सरस्वती इत्यादि क्या ये सब नाम झूठ है...?🤔

सोमवार, 7 दिसंबर 2020

महिला शिक्षा

महिलाओं को युग युग से शिक्षा से वंचित रखा गया था । कुछ साल से शिक्षा मिल रही  है । धीरे धीरे  सोच विचार , वैज्ञानिक जागरूकता में वृद्धि होने लगी है।

आस्था

आस्था -
 हमारे हिंदू धर्म के अनुसार जो भी होता है पूर्व निर्धारित होता है| याने भगवान द्वारा तय होता है| बाढ़ भूकम्प, युद्ध, दंगे फसाद, हत्या चोरी डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार... सब कुछ.. 
 कोई पत्ता हिलता हो तो वह भी उपर वाले की मर्जी से होता है ।
 सब कुछ वही करता है| गजब है यह मान्यता| 
कोई इसे बकवास कहे तो उनकी धार्मिक आस्था को चोट लगेगी| और ऐसी मान्यता के प्रचार प्रसार से हमारी वैज्ञानिक आस्था को चोट लगेगी उसका क्या?

रविवार, 6 दिसंबर 2020

मस्तिष्क का फार्मेट

पाठ्य पुस्तकों के अलावा हर तरह की पुस्तकें (हजार हजार) पढ़ कर बचपन से अपने दिमाग में भरे कचरे की सफाई (मस्तिष्क का फार्मेट) कर सार सार को भरते रहना चाहिए ।

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

वेद कुरान में विज्ञान?

जो लोग वेद पुराण कुरआन में ज्ञान विज्ञान की बात करते हैं उनको अपने बच्चों को स्कूल कॉलेजों में भेजने के बजाय धार्मिक स्थलों पर ही भेजना चाहिए। 

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

सम्बोधन

हम भारतीय दूसरे अपरिचितों को बड़े प्यार सम्मान से सम्बोधन करते हैं.. भाई भैया, बहन दीदी, चाचा अंकल, चाची आंटी , ..
इसे हम हमारी महान संस्कृति,संस्कार , हमारी महान सभ्यता मानते हैं । फिर भी हम दूसरों के साथ गाली गलौच, अपमान, ईर्ष्या, नुकसान,  चोरी , मार काट , रिश्वतखोरी , ......करते हैं। याने हम नाटक करने में expert हैं । बातचीत में ब्यवहार में सब बहुत  अच्छे। सब को प्रेम सम्मान देते हैं  लेकिन अंदर नफ़रत, जहर, स्वार्थ, जलन, ....
हम किसी समूह को बहुत आत्मीयता दर्शाते हुए  सम्बोधन करते हैं - भाइयों, बहनों,  मित्रों, सज्जनों ...
इससे तो अच्छा है पश्चिम देशों का सम्बोधन - ladies and gents साफ स्पष्ट यथार्थ , कोई नाटक नहीं।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

गोमाताओं की व्यथा गाथा

शहरों में कुछ गो पालक ऐसे भी होते हैं जिनके पास गाय को रखने की पर्याप्त जगह नहीं होती फिर भी सैकड़ों लिटर दूध का धंधा करते हैं । उनके गाय सड़कों में लावारिस घूमते रहते हैं, जो मिला खाते हैं, कचरा कागज.. आदि भी खा जाते हैं । रात को कहीं भी, बीच सड़क पर भी सो जाते हैं । ट्राफिक के लिए समस्या बनते हैं, जो दुर्घटना के कारक भी होते हैं । सुबह चारा पानी खाने मालिक के पास पंहुच जाते हैं । थोडा दाना पानी देकर आखिरी बूंद तक दूध निकाल कर अपने गायों को सड़क पर छोड़ देते हैं । 
ये है हमारे देश की गो माताओं की दिनचर्या। उनकी व्यथा गाथा ।

मंगलवार, 24 नवंबर 2020

पाप धोने का मतलब

पाप धोने का मतलब अपने किये अपराधों के प्रमाण मिटाकर दंड से बचना । इस तरह के पाप धोने के सरल तरीके जहाँ अधिक होंगे वहां अपराध भ्रष्टाचार भी अधिक होंगे ।

शनिवार, 21 नवंबर 2020

हेप्पी बर्थ डे

घर में कोई अंग्रेजी में बात नहीं करता लेकिन 
हेप्पी बर्थ डे टुयू गाते हैं।

नामकरण

बहुत सारे संस्थाओं के नाम नेहरू इंदिरा के नाम पर हैं ।
प्रधान मंत्री मुख्य मंत्री के नाम से उनके कार्यकाल में किये काम का नाम होना चाहिए । किसी संस्था के लिये जो कुछ खास काम किये हों उनके नाम से भी संस्था हो सकते हैं । लेकिन जिन्होंने उस संस्था के लिए कोई काम न किया हो उनका नाम कदापि नहीं होना चाहिए ।
        ऐसा अब भी होना चाहिए । मोदी जी ने भी जो जो किये उनका नाम भी होना चाहिए ।

बुधवार, 18 नवंबर 2020

प्रतिमाओं को प्रणाम

देवी देवता अपने जमाने में कुछ अच्छा काम किये होंगे देश समाज के लिए, ऐसा मान कर कभी कभी उनकी प्रतिमा को प्रणाम कर देता हूँ ,उनकी पूजा नहीं करता, चढ़ावा नहीं देता, मत्था टेक कर उन से  नहीं मांगता।जीवन में सिर्फ एक मंदिर में चढ़ावा दिया हूं , बटमूल आश्रम साल्हेओना महाविद्यालय महापल्ली में

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

कामेच्छा

काम पिपासा पुरुष में अपेक्षाकृत अधिक होती है ।
पुरुष की इच्छा शायद 70-80 या उससे अधिक उम्र तक रहती है।
      जबकि 50 (औसत) वर्ष बाद स्त्री का period बंद हो जाता है उसकी कामेच्छा समाप्त हो जाती है । 
यह स्त्री पुरुष के सम्बंध के लिए बहुत बड़ी समस्या हो जाती है ।
       स्त्री की कामेछा समाप्ति के बाद उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता । लेकिन पुरुष की क्षुधा तृप्ति घर में नहीं हो पाती । जिनके हार्मोन ज्यादा बनते हैं वे घर के बाहर भूख मिटाने की कोशिश करते हैं ।
      इससे पति पत्नी के बीच कलह होता है । कोई स्त्री यह सहन नहीं कर पाती कि उसका पति घर के बाहर खाना नास्ता करे । पत्नी यह दे नहीं सकती। उसकी इच्छा नहीं होती ।
       विवाह के समय पति पत्नी के उम्र में यदि अधिक अंतर हो तो यह समस्या कम होती है । यदि दोनों के उम्र में कम अंतर हो या समान हो तो समस्या अधिक होती है । शायद इसी लिये मनु जी ने दोनो की उम्र में आठ साल का अंतर रखने का सुझाव दिया था ।
        यदि स्त्री इस उम्र में पति का ध्यान रखे तो कलह से बचा जा सकता है । 
       एक सुझाव है यदि स्त्री physicaly पूर्णतः स्वस्थ है तो वह रजोनिवृत्ति के बाद किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से hormon treatment ले सकती है । इससे period पांच - सात साल बढ़ जाती है ।

रविवार, 15 नवंबर 2020

चमत्कार और विज्ञान

संसार में कोई भी चीज चमत्‍कार नही है। हर चमत्‍कार के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण है। हमारी अज्ञानता ही चमत्‍कार है, जब इन  चमत्‍कारों का कारण एक साधारण व्‍यक्ति जान जाता है तो वह विज्ञान कहलाता है और जब ये कारण किसी ठग की जानकारी में आता है तो वह अंधविश्‍वास बन जाता है।

शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

DNA Test

सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते। वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । इच्छानुसार बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं 
     

जाति की रक्त शुद्धता

सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण  अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जाती समाज में  विवाद, भेद, विभाजन  होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले  पुत्र / पुत्री  कभी न आएं का शर्त और समाज द्वारा तय  जुर्माना  भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं । 
ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। 

             Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं 
     ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म  हत्या... नहीं होंगे ।

क्यों???

भारत में सबसे ज्यादा भगवान,सबसे ज्यादा पाठ पूजा,सबसे ज्यादा कर्म कांड फिर भी इतना भ्रस्टाचार,अन्याय,अव्यवस्था, गंदगी क्यो ??

हजारों में से कोई एक

सब की सोच समान नहीं होती ।
कीमती आभूषण हजारों लोग देखते हैं । उनमें से कोई एक का मन लालच करता है ।
उन हजारों लालची में से कोई एक लूटता है ।
उसी तरह जिस्म देख कर भी..... 

सोच और बलात्कार का सम्बन्ध

सच तो यह है कि कपड़े और बलात्कार का कोई सम्बन्ध नहीं है ।सोच और बलात्कार का सम्बन्ध जरूर है ।
अरे! कोई कीमती आभूषण पहना हो तो देख कर लूट लोगे क्या? 

आस्था और तर्क

श्रद्धा आस्था विपरीत होते हैं तर्क विज्ञान से ।
लेकिन हम 
दोनों से चिपके रहना चाहते हैं 

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

समलैगिंक आकर्षण




  समलैगिंक आकर्षण अधिकतर विवाह के पहले होता है । काम क्षुधा की पूर्ति के लिए विपरित लिंग नहीं मिलने से gay या lesbo sex कर के पूर्ति कर लेते हैं । इसे कोई बीमारी समझना उचित नहीं है । यह किसी भी उम्र में हो सकता  है ।

हर जाति का दो भाग बना देना चाहिए


सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन 
अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे रक्त मिश्रण होने देना नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण  अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जातीय  समाज में  विवाद, भेद, विभाजन  होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले  पुत्र / पुत्री  कभी नहीं आने के शर्त के साथ  समाज द्वारा तय  जुर्माना  भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं । 
ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। 
भविष्य में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों ।
     ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म  हत्या... नहीं होंगे ।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

प्रदर्शन और लालच

 घर के बाहर अपने जिस्म का प्रदर्शन  उचित नहीं है । अच्छे से शरीर को ढक कर बाहर निकलना चाहिये । देख कर कुछ लोगों को लालच आ जाता है ।

उसी तरह 

अपने  धन के प्रदर्शन के लिए कीमती आभूषण  पहन कर घर से बाहर घूमना भी उचित नहीं है। कुछ लोगों का मन बिगड़ जाता है ।

दोनों ही परिस्थितियों  देश समाज की शांति व्यवस्था खराब होती है । पोलिस, अदालत सब परेशान होते हैं ।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

अंध भक्ति से हानि

उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।
एक ही तरह की बात सुनने पढ़ने से अंध भक्ति होती है । यह भक्ति देश समाज संसार के लिए बहुत हानिप्रद होती है ।
इसी से आतंकवाद, नक्सलवाद, तानाशाही फलता फूलता है ।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

बच्चे के खाली दिमाग में धर्म आस्था भर दी जाती है

बच्चा जन्म लेता है तब उसके दिमाग में कोई आस्था धर्म भगवान अल्लाह god... कुछ नहीं होता । उसके माता पिता, परिवार के लोग उसके दिमाग में यह सब भरते हैं जिसे वह मान लेता है ।
   कालांतर में कोई कोई सोच विचार कर अपने दिमाग में भरे हुए आस्था विश्वास आस्तिकता को हटाकर विज्ञान को भरते जाते हैं । ॠषि चार्वाक, ऋषि जाबालि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह, डाक्टर कोबूर, पेरियार स्वामी, विश्वनाथ (सरिता के सम्पादक) .....
हमारे छत्तीसगढ़ रायगढ़  जिला  के - 
ग्राम लोइंग के स्व श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता (मेरे मित्र, चाचा) पूर्व प्रधान पाठक शास उच्चतर माध्यमिक शाला महापल्ली, 
श्री पद्ममुख पंडा सेवा निवृत्त बैंक मेनेजर निवासी महापल्ली.
पंडरीपानी पूर्व के श्री जगदीश गुप्ता 
रायगढ़ के मुमताज भारती, जयप्रकाश मानस रथ

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

असामान्य लोगों को राजनीति से दूर करना चाहिए

ये बाबा साधु सन्यासी के  विचार, रहन सहन, उपदेश.. आम आदमी से हट कर होता है ।
            असामान्य लोगों को देश की राजनीति में भागीदारी से वंचित करना चाहिए। उनके लिए किसी राजनौतिक मुद्दे पर बात करना , वोट देना प्रतिबंधित होना चाहिए ।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

कर्म फल और भाग्यफल

कर्म फल वैज्ञानिक सिद्धांत है ।
कर्म का उचित फल मिलता है ।
कारण और परिणाम का सम्बंध वैज्ञानिक है ।
भाग्य फल सिद्धांत कल्पित है झूठ है । इस का प्रचार प्रसार शोषक वर्ग के हित में किया गया ताकि शोषित का शोषण अबाध होता रहे ।

शोषण

जो भी होता है उपर वाले की मर्जी से होता है ।
उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता 
जो होता है सब भाग्य फल होता है। जैसा किस्मत में लिखा होगा वैसा ही होगा ।

इन धार्मिक भावना से शोषित का शोषण करने में शोषको को सुविधा होती है ।
क्यों कि शोषित संतुष्ट रहता है ।

मन की शांति

जो होता है वही करता है.. 
मान लेने से दिमाग के सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं । मन शांत हो जाता है । कुछ सोच विचार करने की जरूरत नहीं रह जाती ।
जो भी घटना दुर्घटना हो उसके कारण, निवारण के उपाय जानने करने की जरूरत नहीं । क्यों कि जो हो रहा है सब उसकी इच्छा से हो रहा है ।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

आशीर्वाद

#  "कैसे हो? "
#  "सब आपके आशीर्वाद से अच्छा हूं गुरू जी "
#  बहुत अच्छा लेकिन मेरे आशीर्वाद से नहीं, तुम्हारी अपनी कोशिश से "
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शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

परम्परा

पुरानी परम्पराओं के औचित्य पर सोच विचार कर उसका त्याग या पालन करना चाहिए ।
परम्परा -
परम्परा हमारे व्यवहार के तरीकों की द्योतक है।
 परम्परा का अर्थ उन सभी विचारों आदतों और प्रथाओं का योग है, जो व्यक्तियों के एक समुदाय का होता है, और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होता ।

रविवार, 4 अक्टूबर 2020

अम्बेडकर का संविधान या हमारा संविधान

प्रेमचंद का गोदान, तुलसी का राम चरित मानस, धर्मवीर भारती का गुनाहों का देवता..... 
ये सब तो ठीक है. 
लेकिन कुछ लोग बार बार अलापते रहते हैं 
बाबा का संविधान ,
अम्बेडकर का संविधान ..
ये क्या कहना चाहते हैं ।
अम्बेडकर का संविधान होने से तो सर्वाधिकार उनके परिवार का होता, पुस्तक विक्री की रायल्टी भी उन्हें मिलती । उनकी अनुमति के बिना उसमें कोई संशोधन सम्भव नहीं होता ।

शनिवार, 26 सितंबर 2020

अजपाजप

किसी के नाम को जपने से ज्ञान प्राप्त नहीं होता । ध्यान (सोच विचार) करने से ज्ञान प्राप्त होता है ।

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

हमारा भारत

पहले यहाँ सिर्फ मूल निवासी रहते थे । वे जंगलों में कंद मूल फल मांस खाते थे । उनके अलग अलग कबीले होते थे।  हर कबीला का एक सरदार याने राजा होता था। 
बाद में कुछ होशियार लोग मैदानी इलाकों में रहकर खेती और पशु पालन करने लगे जो आज OBC कहलाते हैं । अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग राज्य के राजा होते थे ।
  बहुत बाद में आर्य आये । ब्राह्मण,  क्षत्रिय , वैश्य अपने साथ अपनी सेवा कराने के लिये कुछ दास लेकर आये वे जिन्हें शुद्र कहते थे । जो आजकल SC में आते हैं। 
आर्य अपने तीन उच्च वर्ण के लोगों को "आर्य" कहकर सम्बोधन करते थे । वे भारत के मूल निवासियों को राक्षस, दैत्य , असुर कहते थे ।
धीरे धीरे आर्य भारत के मूल निवासियों के कबीले,  राज्यों को साम दाम दंड भेद से जीत कर एक कर लिये जिसे व आर्यावर्त कहा गया । कालांतर में आर्यों के छोटे छोटे टुकड़े टुकड़े राज्य हो गये ।
जिन्हें मुगलों ने जीत कर एक बादशाह के अधीन  कर दिया जो हिन्दुस्तान कहलाया । जिसमें अधिकतर राजा हिन्दू थे ।
अंग्रेज आकर सबको जीत कर एक india बना दिए ।
1947 आजादी के बाद हमारे देश का नाम भारत,  india हुआ ।
पाकिस्तान अलग हो गया ।
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अब तो सभी हर तरह का काम धंधा करते हैं। 

धर्म परिवर्तन

मुस्लिम,  इसाई धर्म में कोई भी शामिल हो सकता है लेकिन हिन्दू धर्म में मुस्लिम इसाई शामिल नहीं हो सकते । 
लेकिन हम कहते हैं 
"वसुधैवेकम् कुटुंबकम् "
पूरी पृथ्वी एक परिवार है ।

प्रेम

 कई संकीर्ण लोग प्रेम कथा पढ़ते सुनते देखते हैं लेकिन अपने परिवार जाति समाज में हो तब उन प्रेमियों के प्रेम को सहन नहीं कर पाते याने प्रेम करने वालों से जलते हैं ।