-धर्म -
यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले अपने - अपने देश समाज के संचालन के लिये अलग अलग नीति नियम बनाए गये जिसे सभी लोग धारण / पालन करते थे। उनका संकलन था मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल .... । अलग अलग धर्म, अलग -अलग नियम ।
अब सभी देश अपना - अपना संविधान बनाये । जिसके नीति नियमों का पालन हमें करना चाहिए ।
याने कि अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए ।
पुराने धर्म के नीति नियम वर्तमान संविधान से अलग हो तो संविधान के नियम कानून का पालन करना चाहिए ।
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