शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

धर्म और संविधान

-धर्म -
यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले अपने - अपने   देश समाज के संचालन के लिये अलग अलग नीति  नियम बनाए गये जिसे सभी लोग धारण / पालन करते थे। उनका संकलन था मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल ....  । अलग अलग धर्म, अलग -अलग  नियम  ।
अब सभी देश अपना - अपना संविधान बनाये । जिसके नीति नियमों का पालन हमें करना चाहिए ।
            याने कि  अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए । 
            पुराने धर्म के नीति नियम वर्तमान संविधान से अलग हो तो संविधान के नियम कानून का पालन करना चाहिए ।

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