धार्मिक धर्म ग्रंथों को बिना पढ़े, सुन सुन कर बहुत सारे लोग आस्तिक होते हैं ।
उन ग्रन्थों को पढ़ कर, समझ कर ही कुछ लोग नास्तिक हो जाते हैं ।
जैसे - ऋषि जाबालि, चार्वाक ऋषि, गौतम बुद्ध, स्वामी पेरियार डॉ कोबूर (श्रीलंका) , भगत सिंह, विश्वनाथ (सरिता के सम्पादक) .. .... .... रायगढ़ जिला के मुमताज भारती, जय प्रकाश मानस रथ, लोइंग के स्व श्री सुभाष चंद्र गुप्ता, पंडरीपानी पूर्व के श्री जगदीश गुप्ता, महापल्ली के श्री पद्ममुख पंडा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें