मेकाले शिक्षा पद्धति से जो असहमत हों उनके बच्चों के लिये गुरुकुल आश्रम खोलना चाहिए । इसके लिए मंदिरों के धन का सदुपयोग करना चाहिए । ऐसे गुरुकुल आश्रम में मेकाले की शिक्षा पद्धति के पाठ्यक्रम का अध्यापन बिल्कुल नहीं होना चाहिए । वहां संस्कृत, स्थानीय भाषा, वेद पुराण महाभारत रामायण, आयुर्वेद की पढ़ाई होनी चाहिए ।
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