महाभारत काल में अंतरजातीय विवाह को सामाजिक मान्यता थी । लेकिन कालांतर में जातीय भेद भाव, जातीय श्रेष्ठता का अहंकार बढ़ता गया । आज सामाजिक मान्यता नहीं मिलने के कारण हत्या, आत्म हत्या कr लेते हैं प्रेमी या उन्हें और उनके परिवार वालों को प्रताड़ित किया जाता है, अर्थ दंड दिया जाता है जातीय समाज के द्वारा ।
हमारे देश के संविधान को मानते हुए अंतरजातीय विवाह को समाज द्वारा भी मान्यता मिलनी चाहिए लेकिन लकीर के फ़कीर रोड़ा बनते हैं ।
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