"सत्य से परहेज क्यों?"
* * * * *
बच्चा जब मुश्किल से बोलना व चलना सीख रहा होता है उस समय लोग बच्चे को पूजा पाठ में शामिल कर लेते हैं जैसे वह उनका परम कर्तव्य हो!
क्या आप बता सकते हैं कि किस बिना पर आपने उसे उस पूजा में शामिल किया?वह तो मासूम व इस तथ्य से सर्वथा अपरिचित है कि कोई भगवान या ईश्वर भी है जिसकी पूजा की जानी चाहिये?
इस तरह आपने उसके वैचारिक स्वतंत्रता के खिलाफ काम किया है।
वह मासूम है तो है ही अपने हित अहित से भी अंजान है। यदि उसके कुछ बड़े होने तक यदि उसे मौका दिया जाता तो क्या उचित नहीं होता? क्या जल्दी थी बेचारे को एक महत्वपूर्ण निर्णय में जबरदस्ती उतारने की?
वह पहले अध्ययन करता सही गलत बात पर गौर करता उसकी मीमांसा करता और फिर भगवान या ईश्वर को लेकर कोई निर्णय लेता?
आज प्रजातंत्र का युग है। अपने प्रतिनिधि के 5 वर्ष तक के चुनाव के लिए उसे कम से कम 18 वर्ष की उम्र का होना जरूरी है तो जीवन भर के लिए कोई महत्वपूर्ण निर्णय हेतु जल्दबाजी क्यों?
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बच्चा जब मुश्किल से बोलना व चलना सीख रहा होता है उस समय लोग बच्चे को पूजा पाठ में शामिल कर लेते हैं जैसे वह उनका परम कर्तव्य हो!
क्या आप बता सकते हैं कि किस बिना पर आपने उसे उस पूजा में शामिल किया?वह तो मासूम व इस तथ्य से सर्वथा अपरिचित है कि कोई भगवान या ईश्वर भी है जिसकी पूजा की जानी चाहिये?
इस तरह आपने उसके वैचारिक स्वतंत्रता के खिलाफ काम किया है।
वह मासूम है तो है ही अपने हित अहित से भी अंजान है। यदि उसके कुछ बड़े होने तक यदि उसे मौका दिया जाता तो क्या उचित नहीं होता? क्या जल्दी थी बेचारे को एक महत्वपूर्ण निर्णय में जबरदस्ती उतारने की?
वह पहले अध्ययन करता सही गलत बात पर गौर करता उसकी मीमांसा करता और फिर भगवान या ईश्वर को लेकर कोई निर्णय लेता?
आज प्रजातंत्र का युग है। अपने प्रतिनिधि के 5 वर्ष तक के चुनाव के लिए उसे कम से कम 18 वर्ष की उम्र का होना जरूरी है तो जीवन भर के लिए कोई महत्वपूर्ण निर्णय हेतु जल्दबाजी क्यों?
पद्ममुख पंडा
महापल्ली
महापल्ली
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