गुरुवार, 25 मई 2017

मेरी मर्जी


Dinesh AastikMithilesh K Sinha और 11 अन्य लोगों के साथ.

मैं आस्तिक हूँ
क्योंकि मुझे त्यौहार मनना पसंद हैं, मुझे रँगोली पसंद है, मुझे पुराने मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे पसंद हैं। मुझे गीता, बाइबिल कुरान के अच्छे उपदेश भी पसंद हैं। मुझे धर्म का सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक पहलू भी पसंद है। मैं धर्म की अच्छाईयों की चोरी की है। धर्म के अनुसार चोरी करना पाप है। हाँ मैंने पाप किया है। ऐसा पाप करके मैं गौरान्वित अनुभव करता हूँ।

मैं नास्तिक हूँ
क्योंकि मैं किसी ईश्वर को नहीं मानता, किसी देवता या अलोकिक शक्ति को नहीं मानता, किसी फरिश्ते को नहीं मानता।

मैं धर्म के चमत्कारों को नहीं मानता, मैं धार्मिक पाखण्डों और आडम्बरों को नहीं मानता।

छद्म धार्मिकों से निवेदन
लेकिन तथाकथित छद्म धार्मिकों से मेरा कहना है कि हम अनीश्वरवादियों से बेहूदे सवाल न पूछे कि आपने अपना नाम फलां क्यों रखा? अपने धर्मिकों की तरह शादी क्यों की? आपने धार्मिको की तरह बच्चे पैदा क्यों किये? आप ईश्वर की बनाई हुई हवा क्यों लेते हैं? 
मुझे जो अच्छा लगेगा मैं वह करूँगा। आप कौन होते हो मुझे रोकने वाले? यदि आपका अपने ईश्वर पर पूरी तरह यकीन हो तो उससे पूछो कि इन नास्तिकों को क्यों पैदा किया। इन्हें नास्तिक क्यों बनाया?

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