यादें-
सरलता और ईमानदारी_
छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल जशपुर जिला में महादेवडांड़ के साप्ताहिक बाजार में मैं गुड़ खरीद रहा था--
## क्या भाव है गुड़ का?
# पाँच रूपये किलो|
## कुछ कम नी करस का? ( कुछ कम नहीं करोगे क्या?)
# बाबू! ओ देख. ओहां चार रूपया मं देवथे| मोर ले उकर हर निकता हे| ( उधर चार रूपये में दे रहा है| मेरे से उसका गुड़ अच्छा है|)
## तो तुम महंगा क्यों बेंच रहे हो?
# का करिहं बाबू, मैं महंगा मं बिसाय हँ| (क्या करूँ बाबू, मैं महंगे दाम देकर खरीदा हूँ|)
**** मैं उसी से गुड़ लिया पाँच रूपये में|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 30 मई 2017
सरलता
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