"जरा सोचिये!"
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आत्मा तो हम सभी की एक जैसी ही होती होगी। भले ही शरीर किसी का भारी भरकम तो कोई दुबला पतला हो सकता है।
जब कोई चिंटी मर जाती है तो उसकी आत्मा और जब कभी कोई हाथी मर गया तो उसकी आत्मा दोनों आपस में मिलते होंगे तो क्या बात चीत होती होगी?
मनुष्य बेचारा कितना अधिक सोचता रहता है कि मैं बूढ़ा हो गया हूँ मेरे पास अब अधिक समय नहीं है। मैं मर गया तो मेरे परिवार का क्या होगा?
मनुष्य को अपनी आत्मा के बारे में कुछ ज्यादा ही फिक्र रहती है। जीवन भर तो कमाने खाने के चक्कर में पिसता रहता है मरते समय भी चिंता उसका पीछा नहीं छोड़ती है।
दोस्तों! आज तक आत्मा के बारे में कोई ठोस जानकारी हासिल नहीं हुई है और भविष्य में भी दूर दूर तक इसकी जानकारी मिलने की कोई संभावना नहीं है।
जो सामने है;उस पर विश्वास करना ठीक है कि जो कल्पना पर आधारित है उस पर विश्वास करना चाहिए?
अब तक अनगिनत शरीरों ने प्राण त्याग दिए हैं और आने वाले समय में भी यही सब कुछ होने वाला है!
मन को मजबूत बनाकर जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर सुखी जीवन व्यतीत करें। परिवार तथा खुद को स्वस्थ रखने का प्रयास कर देश की दशा और दिशा बदलने में भागीदार बनें।
मरने के बाद क्या होगा? कैसे होगा?यह सब परेशान करने वाली बातों से खुद को दूर रखें।
आप यदि किसी का बुरा नहीं करते तो कोई भी ताकत आपका अनिष्ट नहीं कर सकती है।
अस्तु आमीन..!
विचारक. पद्ममुख पंडा
महापल्ली
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