बड़ी छोटी सी बात है अगर समझ में आ जाय तो ठीक ही है-
एक दर्जी से ये शिकायत करना की तुम सिर्फ कपडे ही क्यों सिलते हो, चप्पल क्यों नही? या एक कुम्हार से शिकायत करना की तुम सिर्फ बर्तन ही क्यों बनाते हो इलेक्ट्रॉनिक उपकरण क्यों नही? फेसबुक पर शिकायत करने वालों का हाल भी कुछ ऐसा ही है हमें समझना होगा की ह्यूमन टेस्ट (taste) अलग अलग होते हैं, हर कोई अलग खाना, अलग पहनना पसंद करता है, हमारी हॉबीज और इंटरेस्ट अलग अलग होते हैं, हर कोई हर किसी मुद्दे से प्रभावित नही होता। अब आप दिलीप सी मंडल से शिकायत करने लगें की आप सिर्फ दलितों के मुद्दे पर ही क्यों लिखते हैं तो ये आपकी मूर्खता को दर्शायेगा। न्यूज़ रिपोर्ट्स भी अलग अलग बीट पर रिपोर्टिंग करते हैं कुछ स्पोर्ट्स, कुछ पॉलिटिक्स, कुछ क्राइम, तो क्या हमें उनसे शिकायत करनी चाहिए की तुम सिर्फ क्राइम के बारे में क्यों लिखते हैं मनोरंजन के बारे में क्यों नही? रही बात मेरी तो मैं उन्ही मुद्दों पर लिखूंगी जो मुझपर असर छोड़ते हों या जिनमे मैं सुधार या बदलाव की ज़रूरत महसूस करती हूँ, आप जो पढ़ना चाहते हैं मैं वो नही लिख सकती, इसलिए यहाँ शिकायत का नगाड़ा बजाने की ज़रूरत नही
🙏
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 25 मई 2017
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