इतिहास
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महाभारत युद्ध की समाप्ति पर
श्रीकृष्ण ने मौसी कुंती से कहा__
" यदि मैैं चाहता तो इस महायुद्ध को
निश्चित ही रोक सकता था
किन्तु युद्ध अनिवार्य था
इसे टाल देना स्वीकार्य नहीं था!
अचंभित कुंती हतप्रभ रह गई
अस्फुट स्वर में क्या कुछ कह गई
"जब युद्ध तुमसे रोका जा सकता था
फिर क्यों नहीं रोक लिया?
हजारों को अनाथ;विधवा
और पुत्र हीन हो जाने दिया?
यह कैसा तुम्हारा धर्म बासुदेव!
होकर समर्थ भी तुमने
यह निंदनीय कार्य किया?
इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा
तुम्हें भी चक्रधर!
अपनों से बिछडने का
दुःख क्या होता है
तुम्हें भी पता चल जाएगा
यह कुंती का अभिशाप ही था
यादव वंश निर्मूल हो गया
सब कुछ प्रतिकूल हो गया।
इतिहास गवाह है
महापुरुषों की ऐसी ही भूलों की सजा
हम भुगत रहे हैं
अपनों से ही नफरत करते
लड़ने को उद्यत रहे हैं!
महापुरुषों का अंधानुकरण
हम नहीं करेंगे
अपने ही लोगों के हाथ
अब नहीं मरेंगे
हमें उन तथ्यों से यही सीखना है
इतिहास खुद को दोहरा न सके
ऐसा नया इतिहास लिखना है!
पद्ममुख पंडा
महापल्ली
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