यादें_
ट्रेन में मेरे सामने सीट पर दो लोग बात कर रहे थे|
एक ने कहा- कमजोर दिमाग वाले लकीर के फकीर होते हैं, मूढ़ होते हैं| वे ही भक्त होते हैं|
दूसरा हां हूं कर रहा था|
पहला समझा रहा था जो ठीक से मुझे सुनाई नहीं दे रहा था,हल्ला गुल्ला के कारण|
मुझे ये भक्त वाली बात समझ में नहीं आई| पूछने का मन कर रहा था| बहुत सारे लोग मंदिर मस्जिद में भक्ति करते हैं वे सब के सब मूढ़ नहीं हो सकते| मोदी जी भी भक्त हैं हमारे देश को चला रहे हैं|
कुछ कहना ठीक नहीं लगा दो की बातचीत में जबर्दस्ती घुसना |
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 18 मई 2017
कमजोर दिमाग
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