गुरुवार, 11 मई 2017

हमारा धर्म हमारा संविधान

समाज के लिए जो नियम बनाए जाते थे वह धर्म है| यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| कुरान, मनु स्मृति . . सभी तब के धर्म थे जिसका पालन करना अनिवार्य होता था| नए जमाने में समाज उन पुराने धर्मों को उचित नहीं मानता| हर देश में संविधान है | अब यही हमारा धर्म होना चाहिए| लेकिन कुछ लकीर के फकीर कट्टर पंथी अब भी मनु स्मृति/कुरान को अपना धर्म मानते हैं| संविधान के साथ साथ मनु स्मृति/कुरान को एक साथ मानना संभव ही नहीं है|

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