सोमवार, 24 अगस्त 2020

अहंकार मंत्र


अपने पक्का मकान और कार से सुख मिलता है लेकिन उसके side effect से बचने के लिए 
इस मंत्र का ध्यान करें ।
झर रे झर मेरे अहंकार 
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 यह  श्री  भवानी प्रसाद षड़ंगी पूर्व प्राचार्य नगर पालिका उच्चतर माध्यमिक शाला रायगढ़ की एक  कविता की प्रथम पंक्ति है ।

रविवार, 23 अगस्त 2020

शनिवार, 22 अगस्त 2020

प्रेम और वासना

प्रेम और काम वासना अलग अलग हैं ।
प्रेम सागर है,  आकाश है । वहां कोई स्वार्थ नहीं होता । 

प्रेम और वासना  साथ साथ भी हो सकते हैं,  नहीं भी ।जहाँ सिर्फ सेक्स सम्बन्ध है वहां जरूरी नहीं प्रेम भी हो ।
जहाँ प्रेम हो वहां जरूरी नहीं काम वासना हो ।

दरवाजा खुला है



मेरे दिल का दरवाजा खुला है सब के लिये ।
इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग 
आओ सबसे प्यार करें ।

गुरुवार, 20 अगस्त 2020

अम्बेडकर और संविधान

ये जय भीम वाले कहते हैं 
बाबा का संविधान 
बाबा का कानून ।
 
अम्बेडकर जी संविधान सभा नहीं थे ।
सभा द्वारा बनाए गये प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष थे ।

मंगलवार, 18 अगस्त 2020

स्त्री को वस्तु मानते थे

पहले पुरुष स्त्री को वस्तु मानते थे ।
कुछ मुर्ख अब भी कहते हैं.. 
तु चीज बड़ी मस्त मस्त ।

धार्मिक यात्रा के लिए सरकारी खर्च क्यों

हज यात्रा या किसी भी धार्मिक समारोह में जाने के लिए सरकारी खर्च नहीं होना चाहिए । 
जो पुण्य कमाने के लिये तीर्थ यात्रा करना चाहता है वह खुद वहन करे ।

कोरोना मंत्र का रोज जाप करें

अब इस कोरोना मंत्र का रोज जाप करें तो देश समाज का कुछ हित हो सकता है ।
कृपया इसे share करें  ।
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असतो मा सद्गमय ।
यः असत्यम् वदति, भ्रष्टाचारम् करोति , पापम् करोति ।
तस्य शरीरे कोरोना प्रविशतु ।
(जो झूठ कहे, भ्रष्टाचार करे,  पाप करे उसके शरीर में कोरोना प्रवेश करे)

सोमवार, 17 अगस्त 2020

खूबसूरती का आनंद लें, तोड़ें नहीं



स्त्री के अंग प्रदर्शन,  उसके छोटे कपड़े,  उसकी खूबसूरती,  उसकी सेक्सी फिगर, उस का अकेले घूमना,  रात को अकेली यात्रा करना.... ये कोई कारण नहीं कि पुरुष स्त्री को लूट ले ।
 स्त्री के कीमती गहने देख कर लूट लोगे ? 

बैंक में रूपयों की गड्डी देख कर लूट लोगे?
फूलों की खूबसूरती देख कर तोड़ लोगे? 
बिल्कुल गलत ।
          

रविवार, 16 अगस्त 2020

शादी और प्यार

शादी एक अलिखित समझौता है. दोनों   सुख दुःख के भागीदार होते हैं . आनंद पूर्वक एक परिवार का सृजन करते हैं । साथ साथ रहकर स्वावाभाविक रूप से एक दूसरे से प्यार करते हैं । कुछ बुरे लोग होंते हैं  जो समझौता तोड़ देते हैं ।

शनिवार, 15 अगस्त 2020

भोले शंकर जी

आर्य खुद को देवता कहते थे। यहाँ के मूल निवासियों राक्षस/दानव । 
आर्यों के क्षत्रिय राक्षसों को साम दाम दंड से परास्त कर राजा बन गये । 
        शंकर जी भारत के मूल निवासी अनार्य थे ।  उनके ज्ञान और शक्ति को परास्त करने का साहस आर्य नहीं कर सके। आर्यों ने शंकर जी को महादेव की उपाधि देकर खुश कर लिये । अपने साथ मिला लिये ।
         शंकर जी भोलेनाथ थे मन के सच्चे सरल । उन्हें जो भी कुछ भी माँगता वे तथास्तु कह कर दे देते थे ।

पुराने जमाने के संविधान

मनु स्मृति,  कुरान,  बाइबिल.... पुराने जमाने में अपने अपने समाज के लिये संविधान थे ।
अब तो अपने अपने देश का संविधान है । यही हमारा धर्म होना चाहिए ।
       एक दिन आएगा  सरहदें नहीं होगी,  संयुक्त राष्ट्र संघ का संविधान ही पूरी दुनियां का धर्म होगा ।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

कोरोना मंत्र

इस कोरोना मंत्र का रोज जाप करें तो देश समाज का कुछ हित हो सकता है ।
कृपया इसे share करें  ।
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असतो मा सद्गमय ।
यः असत्यम् वदति, भ्रष्टाचारम् करोति , पापम् करोति ।
तस्य शरीरे कोरोना प्रविशतु ।
(जो झूठ कहे, भ्रष्टाचार करे,  पाप करे उसके शरीर में कोरोना प्रवेश करे) 
 हिं क्लिं फट् स्वाहा। 
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स्वर्ग नर्क

स्वर्ग नर्क की कल्पना समाज से अत्याचार भ्रष्टाचार अपराध दूर करने के लिए की गई थी । लेकिन अब नर्क से बचने,  स्वर्ग में आरक्षण के कई short cut तरीके खोज लिये गये हैं ।




प्रेमिका और पत्नी

प्रेमिका कई हो सकती है । उनकी संख्या घाटती जाती है। 
पत्नी एक ही होती है जो जीवन भर साथ देती है ।

प्यार और इश्क

प्यार = प्रेम ।
इश्क = प्यार + कामेच्छा 
प्रेम हर प्राणी, हर वस्तु से कर सकते हैं । पूरी दुनियां से कर सकते हैं ।
इश्क मनुष्य करते हैं मनुष्य से ।
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इतनी बड़ी दुनियां 
इतने सारे लोग 
आओ 
सबसे प्यार करें ।

मंगलवार, 11 अगस्त 2020

पति पत्नी का प्यार

कुछ लोग कहते हैं कि पति पत्नी एक दूसरे को जीवन भर झेलते हैं याने उनके बीच प्यार नहीं होता ।
मेरे विचार से यह गलत है ।  साथ साथ रहने से तो मकान की दिवारों से भी प्यार हो जाता है फिर पति पत्नी के बीच क्यों नहीं होगा । अगर दोनों बदमाश नहीं तो निश्चित ही दोनों के बीच जीवन भर प्रेम रहेगा ।

राधा और मीरा को जीओगे तो

आज कृष्ण जी के पहले राधा का नाम लेते हैं । 
राधा कृष्ण राधा कृष्ण
भजते हैं ।
कई जगह राधा कृष्ण के मंदिर भी हैं । 
 उनके जीवन काल में पता नहीं राधा के पति और परिवार की मनोदशा क्या थी ।
आज मीरा राधा को 
गाओगे तो मिलेगी ताली 
जीओगे तो मिलेगी गाली ।

सोमवार, 10 अगस्त 2020

जलाने CO2बनता है

लोबान, धूप अगरबत्ती, घी,  तेल, मोमबत्ती , लकड़ी कुछ भी जलाने कार्बन डाई आक्साइड बनता है । इससे हवा में आक्सीजन  की खपत होती है। याने आक्सीजन कम हो जाता है कार्बन डाई आक्साइड बढ़ जाता है ।

रविवार, 9 अगस्त 2020

लोग क्या कहेंगे

स्त्री को लोग क्या कहेंगे वाला डर ज्यादा होता है पुरुष को यह डर कम होता है ।
इसी लिये पुरुष के कई gf होते हैं लेकिन महिला के आम तौर से एक ।
 इसी लिये पुरुष दुस्साहस कर  कई से सम्बन्ध बना लेते हैं । यही समस्या है परिवार समाज का ।
यदि पपुरुष भी स्त्रियों की तरह डरते तो बदमाशी कम होती ।
खास बात.. ये लोग क्या कहेंगे... में कथित लोग स्त्रियां ही होती हैं  लगभग 90%

शनिवार, 8 अगस्त 2020

प्यार और स्वास्थ्य

प्यार और स्वास्थ्य के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध है ।
प्यार को प्रदर्शित करने का भी महत्व है । घर में पति पत्नी प्यार का  इजहार करने में झिझक न करें। अपने घर में खुल्लम खुल्ला प्यार करें । यह सोच कर कि हम तो 50 + हैं गम्भीरता का लबादा न ओढ़ें । कभी कभी शरारत भी करें । पत्नी कहे. . अरे क्या करते हो, दरवाजा खुला है..... 

चेतन कौन

जो बिना सोच विचार किये पढ़े या सुने हुए को मान लेता है वह जड़ । जो बहुत सोच विचार कर मानता है या नकार देता है वह चेतन ।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

सवाल ???

सवाल नहीं करने वाले भक्त बनते हैं जो कुछ पढ़ते सुनते हैं उसे मान लेते हैं ।
सवाल करने वाले वैज्ञानिक सोच वाले होते हैं,  वे सोच समझकर मानते हैं ।

बुधवार, 5 अगस्त 2020

आलोचना

धार्मिक परम्पराओं,  नियमों, मान्यताओं की सार्थक तर्क आधार युक्त वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आलोचना करना उचित है । यह किसी धर्म व्यक्ति की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है ।

धर्म

यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो,  जिसे धारण करें वह हमारा धर्म।  
बहुत पहले अलग अलग भू भागों में देश काल परिस्थिति अनुसार अलग अलग धर्म थे । 

हमारा संविधान मानवतावादी है ।
अब हमारा संविधान ही हमारा  धर्म होना चाहिए ।

आर्य अनार्य कौन

आर्य जब भारत में आये अपने साथ अपनी सेवा के लिए शुद्रों को लेकर आये थे या फिर भारत के गरीब जो OBC की सेवा करते थे उन्हें आर्यों ने शुद्र कहा होगा ।
भारत के मूल निवासी OBC और ST को उन्होने राक्षस /अनार्य कहा है ।
आर्य यहाँ के राक्षसों से युद्ध कर साम दाम दंड से अपने अधीन कर लिये । 
पहले ब्राह्मण केवल अपनी जाति,  क्षत्रीय,  वैश्य के घर में पूजा पाठ,  यज्ञ हवन,  .. करते थे । उनकी संख्या कम होने से पर्याप्त आय नहीं होती थी । बाद में कथित अनार्य  राक्षसों के घर भी जाने लगे । उनके घर में भी पूजा पाठ....  करने लगे ।
 इससे OBC और ST अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने लगे । वे भी दलितों को हेय दृष्टि से देखने लगे तथा उन्हें अस्पृश्य मानने लगे ।
ज्ञातव्य है कि ब्राह्मण आज भी कथित शुद्र /दकित के घर पूजा पाठ यज्ञ हवन नहीं करते ।
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एक कथित मूल निवासी जय भीम वाले ने facebook पर लिखा कि OBC और ST भी दलित हैं ।
इस से मैं सहमत नहीं हूं । इसलिए उपर्युक्त पोस्ट डाला ।
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स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं मानवता वादी हूं । बचपन से ही छूआ छूत नहीं मानता ।

मंगलवार, 4 अगस्त 2020

राक्षस कौन?

आर्य जब भारत में आये अपने साथ अपनी सेवा के लिए शुद्रों को लेकर आये थे ।
भारत के मूल निवासी OBC और ST को उन्होने राक्षस कहा है ।

बाबा का संविधान नहीं हमारा संविधान

हमारे देश के संविधान सभा में 200 सदस्य थे ।  कई कमेटी बनाई गई थी ।  सब की राय से संविधान की धाराएं तय किये गये । इसलिए हमारे संविधान को अम्बेडकर का या बाबा कासंविधान कहना गलत है । 
            अम्बेडकर जी को ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बनाया गया था उनकी योग्यता के लिए । संविधान की ड्राफ्टिंग की  का दायित्व किसी अच्छे ऐडवोकेट को ही दे सकते थे  ताकि संविधान  कानूनी दृष्टि से सटीक हो, स्पष्ट हो।
    
            सभी कार्यालय में लिपिक होते हैं जो ड्राफ्टिंग करते हैं । अधिकारी जो कहते बोलते हैं उसे वे उचित शब्दों में सजाकर लिखते हैं । कोर्ट में जबाब देने के लिए उस लिपिक को ड्राफ्टिंग करने के लिए कहा जाता है जिसे विधि भाषा की कुछ जानकारी हो।

सोमवार, 3 अगस्त 2020

सम्भोग

sex को हिंदी में सम्भोग कहा गया है याने दोनों समान रूप से भोग करें,  समान रूप से आनंद लें। किसी को कोई मानसिक शारीरिक पीड़ा नहीं होनी चाहिए ।

अम्बेडकर का संविधान?

संविधान कोई उपन्यास नहीं है जिसे अम्बेडकर ने लिखा ।
हमारे देश के संविधान को अम्बेडकर का संविधान कहना गलत है।
  यह संविधान अगर अम्बेडकर जी का है तो उस पर सर्वाधिकार उनके परिवार का होना चाहिए । कोई संशोधन संसद में नहीं अम्बेडकर के परिवार में होता ।

गुरुवार, 30 जुलाई 2020

विवाह पश्चात सुखी जीवन

विवाह एक अलिखित समझौता है ।
विवाह पश्चात स्त्री पुरुष आपस में सुख दुःख के भागीदार होते हैं । एक दूसरे को  सुख देकर सुख प्राप्त किया जाता है । जितना देते हैं उससे ज्यादा मिलता है । यह आधिक्य स्त्री पुरुष दोनों पक्ष को मिलता है । यही सुखी जीवन होता है ।

मंगलवार, 28 जुलाई 2020

स्त्री

इज्जत चली जाती है सिर्फ़ स्त्री की ।
संदेह होता है सिर्फ़ स्त्री पर । 
परित्याग किया जाता है सिर्फ़ स्त्री का ।

Pornography


भारतीय संस्कृति रक्षा के लिए भारत में porn प्रतिबंधित किया। लेकिन सब कुछ लेकिन लेकिन हो रहा है । लगातार भाजपाइयों के porn video सोशल मीडिया में आ रहे हैं ।
  यह सब Pornography बंद होने के कारण हो रहे हैं,  बलात्कार भी इसी कारण बढ़े हैं ।
मनोवैज्ञानिक फ्रायड के अनुसार काम वासना का दमन करने से विकृत रूप धारण कर लेती है। काम की पूर्ति होना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है । कामुक स्वप्न से भी सेक्स की पूर्ति होती है । 
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वयस्कों के लिये पोर्न फोटो वीडियो मूवी देखने की छूट होने से उनकी कामवासना की कुछ पूर्ति हो सकती है। इससे अवैध संबंधों और बलात्कार में कमी हो सकती है । 

सोमवार, 27 जुलाई 2020

भगवान पर भरोसा

आश्चर्य 
अधिकतर धार्मिक लोग भगवान पर आधा अधूरा विश्वास करते हैं । घर से बाहर निकलते समय और सोने के पहले main gate में ताला लगाकर दो बार जांच करते हैं ।

बहुत आश्चर्य 
मंदिर का पुजारी मंदिर में ताला लगाकर दो बार जांच करता है ।

रविवार, 26 जुलाई 2020

गुरु

वेतन लेकर पढाने वाला, स्कूल में केवल निर्देशित काम करने वाला शिक्षक होता है , जरूरी नहीं वह गुरू भी हो ।
जो बिना कोई पारिश्रमिक लिये दिशा दे/मार्ग दर्शन करे,  बौद्धिक विकास के लिए सहायता करे वह गुरू होता है। 
     कोई शिक्षक यदि सरकार द्वारा निर्देशित कार्य के अलावा विद्यार्थी को मार्गदर्शन करे, सहायता करे तो वह उसकी गुरूता होगी,  वे भी गुरू।

कान फूँका गुरु

कान फूँका गुरू -
      पुराने जमाने से परम्परा चली आ रही है किसी एक गुरु से कर्ण मंत्र लेकर गुरु बनाने का । वह गुरू स्कूल कालेज का शिक्षक नहीं होता, कोई अनपढ़ या प्रायमरी पास भी हो सकता है । ये गुरू नये चेले के कान में धीमी आवाज में एक दो पंक्ति का मंत्र सुनाते हैं ताकि कोई दूसरा सुन न ले । शंख घंट की तेज ध्वनि में जरूरी नहीं वह मंत्र चेला को सुनाई दे। कर्ण मंत्र लेकर शिष्य अपने गुरू को चरण स्पर्श कर प्रणाम करता है,  उपहार और दक्षिणा देता है । लोग  हर साल कम से कम एक बार अपने कान फूँका  गुरू को चढ़ावा देते हैं ।
      ये गुरू लोग (आजकल के स्कूल शिक्षक भी अपने चेलों भक्तों/ विद्यार्थियों को यह खूब सुनाते हैं) -
गुरू गोबिंद दोऊ खड़े हैं, काके लागूं पाँय|
याने अपनी महत्ता का बखान खुद करते हैं|
  *†**** 
             मैं किसी गुरू से कभी कोई कर्ण मंत्र नहीं लिया | कभी लूंगा भी नहीं|
******"*
           मेरे स्कूल के सभी शिक्षकों में से एक शिक्षकमुझे बहुत याद आते हैं। श्री सोनसाय चौहान | उन्होंने मुझे कक्षा पाँचवीं से  उपन्यास कहानी पढने के लिए प्रेरित किया| वे मुझे पढने के लिए  उपन्यास, कहानी देते थे| उनकी प्रेरणा से मैं जीवन में हर तरह के हजारों उपन्यास कहानी पत्रिकाएं कविता संग्रह पढ़ा| वे मेरे जैसे बहुत सारे विद्यार्थियों को रास्ता दिखाए होंगे|
        गाँव के लोग उन्हें "गंड़ा मास्टर" कहते थे| मैं उनके घर पुस्तक लेने जाता था | कभी कभी पानी मांगकर  पी लेता था| हमारे बड़े गुरुजी की पत्नी मुझे डाँटती थी - केंता रे, तुईं परे गंड़ा मास्टर घरें पानी पीइसू? ने जीबू तार घर के | (क्यों रे, तुम गांड़ा मास्टर के यहां पानी पीते हो मत जाना उसके घर |)
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         अर्थ शास्त्र के अनुसार पारिश्रमिक (वेतन) लेकर अध्यापन करने वाले शिक्षक श्रमिक हैं|
          कुछ शिक्षक अपनी निर्धारित ड्यूटी के अलावा भी अपने विद्यार्थियों के लिए कुछ करते हैं, मार्गदर्शन करते हैं । यह उनकी गुरुता है | वे ही गुरू होते हैं|
ऐसे ही मेरे गुरू श्री सोनसाय चौहान को नमन|
          | हमारे महान गांड़ा मास्टर को नमन|

अंतर्जातीय विवाह

अंतर्जातीय विवाह _
         बहुत तकलीफ होती है जब अंतर्जातीय विवाह करने वालों को और उनके घर वालों को जाति समाज द्वारा बहिष्कार का दंड दिया जाता है । इसी डर से माता पिता अपने पुत्र /पुत्रियों को अंतर्जातीय विवाह के लिए सहमति नहीं देते । फल स्वरूप युवक युवती घर से भाग कर शादी करते हैं या आत्म हत्या कर लेते हैं ।
                  संस्कृति की दुहाई देकर अंतर्जातीय विवाह का विरोध किया जाता है । मेरी जानकारी में कोलता,  अघरिया,. . ,  .  . , ... सभी जाति में मांसाहार शाकाहार दोनो प्रचलित है,  अब  सभी जाति में कुछ लोग मुर्गा,  शराब भी चलाने लगे हैं । पहनावा भी समान है । मातृ भाषा, बोली समान होने से भी उनके संस्कार में बहुत अंतर भी देखा गया है । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रायपुर के ओड़िया भाषी और ओडिशा के झारसुगड़ा सम्बलपुर सुंदरगढ़ के ओड़िया भाषी के संस्कार में अंतर देखा गया है । धमतरी  और रायगढ़ रायपुर वालों के संस्कार में बहुत फ़र्क होता है ।
        OBC और ब्राह्मण मारवाड़ी क्षत्रिय के जीवन यापन के पुश्तैनी धंधे अलग अलग हैं लेकिन अब लोग वह छोड़ कर नौकरी करने लगे हैं । आजकल खानपान में भी परिवर्तन हो रहा है । ब्राह्मण मारवाड़ी भी शराब मांस मछली खाने लगे हैं ।
         रक्त मिश्रण की चिंता जता कर अंतर्जातीय विवाह का विरोध करते  हैं लेकिन किसी की जाति बिना देखे आवश्यकता होने से खून ले लेते हैं अपने शरीर में । रक्त मिश्रण तो हो गया ।
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यह पोस्ट विचार विमर्ष के लिए है । अंतर्जातीय विवाह का समर्थन  करें न करें, उन्हें उनके घर आने से जाति बहिष्कार का दंड नहीं होना चाहिए । इसी डर से परिवार वाले अपने पुत्र / पुत्री को अन्तर्जातीय शादी की सहमति नहीं देते । फल युवक युवती स्वरूप आत्म हत्या कर लेते हैं ।

रविवार, 19 जुलाई 2020

अंतर्जातीय विवाह और सामाजिक बहिष्कार

अंतर्जातीय विवाह करने वालों को जाति समाज द्वारा दिया गया सामाजिक बहिष्कार का कठोर दंड 
देश निकाला, आजीवन कारावास या मृत्यु दंड जैसा होता है । कोई रिश्वत खाए,  सरकारी या संस्था का रूपया खाए, बेइमानी करे,  अपने परिवार या दूसरे का जमीन हड़प ले,....  उन्हें कोई समाज कोई दंड नहीं देता । वैसे संविधान विरुद्ध है यह सामाजिक बहिष्कार ।

शनिवार, 18 जुलाई 2020

यमक अलंकार - दो नशा

यमक अलंकार -
एक नशा से मनुष्य कुछ देर प्रभावित होता है ।मस्तिष्क पर नियंत्रण कम हो जाने से मन उड़ने लगता है,  मन का राजा हो जाता है । हिम्मत आ जाती है, जो चाहे कह सकता है गाली गलौच करने लगता है,  कुछ भी कर सकता है, अपराध कर सकता है। इस नशा को पाने के लिए कुछ दाम चुकाना पड़ता है, अपना और परिवार का आर्थिक नुकसान होता भी है ।
  दूसरे नशा से मनुष्य जीवन भर प्रभावित रहता है । सरल सीधे लोग इस से कोई गलत काम नहीं करते, दयालु , ईमानदार होते हैं । जो खर्च करते हैं उससे अपने परिवार और देश समाज की भलाई होती है । कुटिल चालक लोग इस नशे के प्रभाव से स्वार्थ के लिए खूब अपराध भ्रष्टाचार करते हैं 
, कभी कभी अपने किये पाप विभिन्न तरीके से धो लेते हैं । पाप धोने में जितना खर्च करते हैं उससे लाख लाख गुना अर्जित करते हैं । इनके कर्म से देश समाज का बहुत अहित होता है ।

मंगलवार, 14 जुलाई 2020

भ्रष्टाचार में कमी नहीं हो रही

पता नहीं. 
नमाज, बाइबिल, गीता, रामायण पढ़ने से क्या होगा?  कहानी और उनके कही बात को जान लेंगे बस । लेकिन इससे क्या होगा?  बहुत सारे लोग पढ़ते हैं लेकिन दुनियां में मार काट खून खराबा लड़ाई झगड़े,   भ्रष्टाचार,  कम नहीं हो रहे हैं ।

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

संस्थान उपक्रमों के नाम

सोशल मीडिया में चर्चा है कि नेहरू जी के कार्यकाल में जितने संस्थान, उपक्रम  बने सब में  नेहरू जी का नाम जोड़ दिया गया । 
खैर जो हुआ हुआ। 
अब 2014 के बाद सब में  मोदी जी का नाम जोड़ना चाहिए । नये नोट, नये मिसाइल,  सर्जिकल स्ट्राइक,  चीन युद्ध रणनीति , अमेरिका दोस्ती,..... 
भविष्य में भी यह परम्परा जारी रहनी चाहिए ।

बुधवार, 1 जुलाई 2020

आर्य

कहते हैं आर्य कोई जाति नहीं,  गुण  है । आर्य का अर्थ श्रेष्ठ । सवर्ण सवर्ण को आर्य कहकर सम्बोधन करते थे । याने खुद श्रेष्ठ बाकी सब छोटे,  शुद्र,  एकलव्य,  शम्बुक... 

आस्तिक नास्तिक

माना गया है जो वेद को मानता है वह आस्तिक,  जो नहीं मानता वह नास्तिक ।
लेकिन शब्दार्थ अनुसार 
सः (ईश्वर) अस्ति अर्थात ईश्वर है ऐसा मानने वाला आस्तिक ।
सः (ईश्वर) न अस्ति अर्थात वह नहीं है ऐसा मानने वाला नास्ति ।

शनिवार, 27 जून 2020

इम्युनिटी बूस्टर को दवा नहीं कहते ।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले,  रोग प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि करने वाले किसी विटामिन, खनिज युक्त टैबलेट,  सीरप,  अवलेह , पावडर, काढ़ा, चूर्ण दवा के अन्तर्गत नहीं आते । 
       कहा जाता है वृद्ध च्यवन ऋषि ने एक इम्युनिटी बूस्टर बनाए थे ।  उसका सेवन कर वे जवान हो गये । उसे उन महान आयुर्वेद के जानकार ऋषि च्यवन के नाम से च्यवन प्राश कहा जाता है ।

आयुर्वेद बनाम एलोपैथी

कहते हैं अंग्रेजों ने , कांग्रेस  ने एलोपैथी थोप दी ?
 कांग्रेस काल में बहुत आयुर्वेद अस्पताल खोले ।  सब आयुर्वेद इलाज कराएं।  किसने मना किया? 
अंग्रेजों ने विज्ञान थोप दिया तो मत पढ़ाएं अपने बच्चों को उन्हें वेद पुराण कुरान गीता रामायण पढ़ाएं।  भजन कीर्तन नमाज करते रहें । बिना वैज्ञानिक उपकरणों के जीएं।

राहुल गांधी की जाति से लोगों को तकलीफ हो रही

लगता है राहुल गांधी के जनेऊ धारण, ब्राह्म्ण कहलाने पर ब्राह्मणों को आपत्ति हो रही होगी । उन्हें चाहिए राहुल गांधी परिवार का जाति बहिष्कार कर दें। यह तो वही कर सकते हैं  । यह देश का  कानून तो करेगा नहीं ।

वैदिक विज्ञान

कहते हैं हमारे वेदों में सारा विज्ञान है । ऐसा है तो स्कूल कालेजों में विज्ञान के दो ग्रुप हों । वर्तमान विज्ञान और वैदिक विज्ञान। दोनों में से कोई एक लें विद्यार्थी । वर्तमान सरकार तो यह कर सकती है चाहे तो ।

शनिवार, 20 जून 2020

सहसंबंध

आमतौर से 
मनुष्य की उम्र और सरलता में ऋणात्मक, उम्र और  चालाकी में धनात्मक सहसम्बन्ध होता है ।

सारे प्रश्न समाप्त

मन में बहुत सारे प्रश्न आते हैं जिनका तर्क सम्मत आधार युक्त जबाब नहीं मिलता, मन अशांत हो जाता है । मान लें ईश्वर ही सब कुछ करता है तो  सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं , मन शांत हो जाता है । 
     प्रश्नों से मुक्ति मिल जाती है ईश्वर की सत्ता को मान लेने से । यह कल्पना करने वालों की चालाकी है । ताकि लोगों की आदत बन जाय मान लेने की,  श्रद्धा विश्वास करने की , तर्क प्रश्न समाप्त हो जाए। इससे उन्हें लाभ होता है ।

मंगलवार, 16 जून 2020

आलोचना

जिस के बारे में जानते हैं उसी के बारे में चर्चा होती है. 
अपनी जाति समाज , अपने धर्म,  अपने देश के संविधान पर चर्चा होती है, आलोचना भी करते है ताकि कमी, बुराई को समझ कर उसे दूर कर सकें, परिवर्तन, संशोधन हो ।आज कल हमारे देश के लोग आरक्षण कानून पर बहुत चर्चा कर रहे हैं । विदेशों के कानून पर नहीं  । अपनी जाति समाज, अपने धर्म, संविधान पर चर्चा करनी चाहिए, आलोचना करनी चाहिए, दूसरे जाति समाज,  धर्म , संविधान की नहीं ।

सोमवार, 15 जून 2020

करेण्येव अधिकारस्ते

उपदेशक, शिक्षक ज्ञानी जन कहते हैं_
भगवद् गीता के अनुसार कर्म करना चाहिए किंतु फल की आशा नहीं करनी चाहिए| 
गीता में ऐसा नहीं कहा है|
"""""
गीता के "कर्मेण्येव अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" में  परिणाम की आशा नहीं करने के लिए नहीं कहा गया है| कर्म में हमारा अधिकार है चाहे हम करें न करें जैसा करें| कर्म करने के बाद हमारे कर्म के परिणाम में हमारा कोई अधिकार नहीं होता| हर विद्यार्थी परीक्षा में सफलता के लिए मेहनत करता है किंतु उसके परिणाम में उसका अधिकार नहीं होता| किसान फसल लगाता है.... व्यापार, खेल, युद्ध, ...
   वांछित परिणाम की आशा से ही कर्म करते हैं|फल की आशा करें किंतु फल के प्रति आसक्त न हों| आसक्ति होने से इच्छानुसार परिणाम प्राप्त करने के लिए गलत तरीके अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं  | परिणाम के प्रति आसक्ति न हो तो इच्छानुसार परिणाम नहीं मिलने से कर्ता दुःखी नहीं होता हताश नहीं होता, कोई गलत कदम नहीं उठाता आत्म हत्या नहीं करता| पुनः पुनः श्रम करता है |

गुरुवार, 11 जून 2020

गांधी उपनाम

फ़िरोज गांधी इंदिरा गांधी से उनके परिवार में गांधी लिखना चल रहा है । इसमें मजाक उड़ाने की क्या बात है ? जवाहर लाल नेहरू और उनके पूर्वज नेहरू लिखते थे । 
      जिन्हें उनके गांधी लिखने से आपत्ति है उन्हे कोर्ट जाना चाहिए । वैसे चाहें तो वे या कोई भी अपना उपनाम गांधी लिख सकता है । मर्जी अपनी अपनी ।

यमक अलंकार

यमक  अलंकार - एक ही शब्द का अलग अलग अर्थ ।

1- तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है। 
2- मनु जी का social distance युगों से और मोदी जी का social distance दो महिना से चल रहा है ।
3- पहले हमारे भारत के ऋषि मुनि तपस्या के बल पर दिब्यांग होते थे । अब  हमारे देश में दिब्यांगों को विभिन्न सरकारी  सहायता मिलती है,  आरक्षण का लाभ मिलता है ।

बुधवार, 10 जून 2020

शब्द जाल

कथा उपदेश सुनाने वाले, टीका करने वाले शब्द जाल का निर्माण करते हैं।  बेचारा श्रोता उस जाल में उलझ जाता है । आखिरी सांस तक कुछ ठीक ठीक समझ नहीं पाता ।

सोमवार, 8 जून 2020

गंगा जल

यादें -
धार्मिक पत्रिकाओं में पढ़ा   -
गंगा जल से हर तरह के कीटाणु जीवाणु मर जाते हैं ।
गंगा जल बोतल में रखें तो कभी खराब  नहीं होता ।
गंगा जल का एक बूंद कुंआ तालाब नदी के पानी में मिला दें तो उसका अपवर्तनांक बहुत बढ़ जाता है ।
  *****
           मैं 1982 में संगम से गंगा जल लाया । एक बोतल में गंगा जल,  दूसरे में कुंए का पानी रखा । एक साल बाद,  दो साल बाद देखा । कोई जल खराब नहीं हुआ था । जस के तस ।
           स्कूल के प्रयोगशाला में गंगा जल का अपवर्तनांक निकाला,  कुएं के पानी के बराबर ही था ।कई बार प्रयोग किया । परिणाम वही ।

शनिवार, 6 जून 2020

सवाल

जो पढ़ कर, देख कर सोच विचार करते हैं वे ही सवाल करते हैं । वे ही intelligent होते हैं। 
बाकी लोग बिना सवाल किये अपने अणु मस्तिष्क में भरते जाते हैं ।

रविवार, 31 मई 2020

हमारे देश के मूल निवासी शुद्र नहीं राक्षस


 हमारे देश के मूल निवासी शुद्र नहीं हैं । मूल निवासी जो जंगलों  में रहते थे  वे  ST अनुसूचित जन जाति, और जो मैदानी भागों में रहकर कृषि करते थे वे O. B.C. अन्य पिछड़ी जाति । उन्हें आर्यों ने राक्षस कहा ।
 आर्य के सवर्ण अपनी सेवा के लिए अपने साथ शुद्रों (दास) को लेकर आये थे ।

अंतरजातीय विवाह को मान्यता

महाभारत काल में अंतरजातीय विवाह को सामाजिक मान्यता थी । लेकिन कालांतर में जातीय भेद भाव, जातीय श्रेष्ठता का अहंकार बढ़ता गया । आज सामाजिक मान्यता नहीं मिलने के कारण हत्या,  आत्म हत्या कr लेते हैं प्रेमी या उन्हें और उनके परिवार वालों को प्रताड़ित किया जाता है, अर्थ दंड दिया जाता है जातीय समाज के द्वारा ।
             अंतरजातीय विवाह को समाज द्वारा भी मान्यता मिलनी चाहिए लेकिन लकीर के फ़कीर रोड़ा बनते हैं ।

धर्मों ने सिर्फ हिंसा और नफ़रत दिया

धर्म अंधेरा कर रहे हैं मैं तो यही देखा । पूरी दुनियां में धर्मों ने हिंसा मार काट नफ़रत दिया । तर्क प्रयोग से भक्तोंको दूर रखने की कोशिश की । 
हमारे हिन्दू धर्म की सैकड़ों पुस्तकें पत्रिका तथा ये कथित आध्यात्म की बहुत किताबें पत्रिकाएं मैं पढ़ा, अजपा जप किया, गायत्री मंत्र का जाप किया, बुद्ध का विपश्यना ध्यान,  महेश योगी का  भावातीत ध्यान किया । ऐसे बहुत सारे अध्ययन किया लेकिन ये कथित आध्यात्म से कोई खास कुछ नहीं मिला । यही जाना कि ध्यान से हर काम करना चाहिए । ध्यान  लगाकर  पढ़ाई करनी चाहिए । ध्यान एकाग्रता से किसी विषय पर तर्क युक्त सोच विचार करना चाहिए ।

शनिवार, 30 मई 2020

यदा यदा हि..

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|
       ********
गीता के श्लोक को लिखने में  हम भूल कर सकते हैं/कर रहे हैं? मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता पुस्तकों  में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा जी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|
     कई लोगों को मेरे संदेह को व्यक्त किया| समाधान नहीं हुआ| 
   तब मैं मई 2015 में फेसबुक में लिखा| 2016, 2017, 2018 में फिर से शेअर किया|  17-06-2018 को  फेसबुक और वाट्सएप कई ग्रुप में शेअर किया| 
     मेरे वाट्सएप ग्रुप "विचार मंच" में रचनाकार महेश शर्मा ने आज दिनांक 17-06-2018 के अर्थ बताया -
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
       यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |
   उसी दिन यथार्थवादी चिंतक, रचानाकार पद्ममुख पंडा महापल्ली मुझसे सहमत हुए| कुछ और भी| सहमत हुए|
      गीता का यह चित्र  श्लोक सहित बड़ा बोर्ड जिनके घर के दिवाल पर लगे देखा उन्हें यह कहा लेकिन किसी ने नहीं मानी मेरी बात|
     सोचने की बात है कि गीता में 
"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए" नहीं ,
"धर्म के उत्थान के लिए" 
ही कहा गया होगा|
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्थामधर्मस्य)  नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य कहा गया होगा|.
         **"*"**"

शुक्रवार, 29 मई 2020

स्व श्री लखी राम अग्रवाल

स्व श्री लखी राम अग्रवाल 
के बारे में कोई बता रहा था कि  स्व. श्री लखी राम अग्रवाल अपने जीवन में दीन दुखियों की बहूत सेवा करते थे, उनकी चिकित्सा तथा दवा भी अपने खर्च से कराते थे । दूसरे आदमी बोले वे डाक्टर थे  सबका निशुल्क चिकित्सा करते थे। इसीलिए उनके नाम से रायगढ़ के मेडिकल कालेज का नाम "स्व लखी राम अग्रवाल चिकित्सालय रायगढ़ " रखा गया है ।
कोई तीसरा जोर से बोला. ये सब क्या बकवास करते हो. आप लोगों को पता नहीं है तो चुप रहो. लखी राम कोई समाज सेवक नहीं थे, एक व्यवसायी थे उनके खानदान का व्यवसाय  गुड़ाखू बनाने का कारखाना था । वही गुड़ाखू जिससे कैंसर होने का खतरा बताते हैं! 
किसी ने कहा लखी राम बनिया थे खरसियां के, वे छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे । इस लिए भाजपा के शासन काल में रायगढ़ मेडिकल कालेज का नाम उनके नाम से रख दिए।

गुरुवार, 28 मई 2020

वीर न कहें तो आधा वीर ही कहें

दामोदर सावरकर जी को देश की आजादी के लिए काला पानी की सजा हुई । अंडमान के उस कारागृह में कुछ समय रहने के बाद उन्होंने अंग्रेज सरकार से माफी मांग कर वचन दिया कि वे भविष्य में कभी अंग्रेज सरकार का विरोध नहीं करेंगे । 
             उन्हें RSS और भाजपा द्वारा वीर कहने से लोग को आपत्ति जताते हैं । क्यों कि वे माफी मांगने के बाद अपने वचन का पालन करते हुए अंग्रेज सरकार का कभी विरोध नहीं किया तथा देश की आजादी से कोई सारोकार नहीं रखा ।
            मेरे विचार से उन्हें  "वीर" न कहें तो कम से कम आधा वीर तो कहना चाहिये । हम तो उनके सौवां भाग के बराबर भी शायद ही देश के लिये  कुछ कर सकें ।

सोमवार, 25 मई 2020

वायरस जनित रोग की दवा नहीं होती

किसी भी वायरस को नष्ट करने की कोई दवा नहीं होती । कोरोना 19 की भी नहीं ।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही वायरस को नष्ट करती है । यह क्षमता बढ़ाना ही उपाय है । आदर्श आहार,  उचित जीवन यापन ।
रोग प्रतिरोध क्षमता अच्छी है तो वायरस को खत्म होना ही है नहीं तो जीवन खत्म ।
      **********
      वायरस मारने के लिए कोई भी दवा, कोई भी जड़ी बूटी,   मंत्र,  तंत्र, यंत्र , पूजा पाठ  प्रार्थना, नमाज.... नाटक होगा । लगेगा कि यही काम किया ।

गुरुवार, 14 मई 2020

OBC कौन? छत्तीसगढ़ में कोलता जाति के लोग भी लिखते हैं उपनाम "गुप्त"

पिछड़ी जाति कौन? -
छत्तीसगढ़ में कोलता जाति के लोग भी उपनाम "गुप्ता" लिखते हैं, ओड़िशा में कोई नहीं लिखता ।

                 आर्यों के मनु स्मृति के चार वर्णों में से तीन वर्ण क्रमशः उच्च माने जाते हैं ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य , चौथा वर्ण है शुद्र । 
           शुद्र को अछूत माना गया । ब्राह्मण उनके घर में जाकर जन्म  मृत्यु संस्कार, शादी विवाह, यज्ञ हवन आदि नहीं करते ।
                 आर्य हमारे भारत में आकर बस गये । यहाँ  के मूल निवासी जंगलों में रहने वाले  (S. T.) तथा मैदानी इलाके में रहने वाले (अन्य पिछड़ी जाति O.B.C. मुख्य काम खेती ) को आर्यों राक्षस कहा । आर्यों के पुराणों में इन्हें राक्षस कहा गया है । उनके कथा कहानियों में उन्हें कुरूप, झगड़ालु , बदमाश, मांसाहारी..  बताया गया। आर्यों और राक्षसों के बीच युद्ध होते रहे । राक्षस बलिष्ठ और सरल स्वभाव के  होते थे । आर्यों के कथित उच्च वर्ग (सवर्ण) बड़े दिमाग वाले तथा चालाक होते थे ।
             O.B.C  कोलता अघरिया कुर्मी.....  खुद को सवर्ण वैश्य,  क्षत्रिय कहलाना चाहते हैं खुद को उच्च जाति का बताकर सम्मान पाना चाहते हैं लेकिन शासन द्वारा मिलने वाली सहायता छात्रवृत्ति आरक्षण का लाभ लेते हैं ।
                 हम कोलता भी राक्षस कुल के हैं । विवाह/एकादश कर्म के पूजा हवन में पुरोहित मंत्रोच्चार करते हैं कहते हैं -
जम्बू द्वीपे भारतवर्षे उत्कल देशे राक्षस कुलस्य गुप्त वंशस्य  . ..........
इससे स्पष्ट है छत्तीसगढ़ के हम  (कोलता ) के पूर्वज उत्कल देश (ओड़िशा) से आए हैं । ज्ञातव्य है कि ओड़िशा में कोलता कुल्ता कुलिता कोई अपना उपनाम "गुप्ता " नहीं लिखते ।
                      ओडिशा से कुलिता कुलता छत्तीसगढ़ (पहले मध्यप्रदेश) में आकर कोलता लिखने लगे ।  पधान से प्रधान, भोई से भोय, साहू से साहा साव सा, ....।
            मध्यप्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) रायगढ़ पूर्वांचल दो दो विद्वान जो बहुत पढ़ाकू थे महापल्ली के श्री हेम सुंदर प्रधान तथा लोइंग के श्री पूर्ण चंद्र प्रधान अपने कुल / जाति को गर्वित करने के लिए मनु के चार वर्ण में से वैश्य वर्ण का बताने के लिए मनु के निर्देशानुसार सरनेम " गुप्त" लिखने के लिये विचार किये ।
हेम सुंदर जी कोलता जाति को कलिंग से जोड़ा। बताया कि प्रधान और गुप्त पर्यायवाची शब्द हैं इसलिये प्रधान सरनेम वालों को गुप्त सरनेम लिखना चाहिए ।उन्होंने अपना सरनेम गुप्त लिखना आरम्भ किया। लेकिन पूर्ण चंद्र जी चाहते थे पूरी कोलता जाति को वैश्य मनवाने के लिये कोलता जाति के सभी सरनेम वालों को गुप्त सरनेम लिखना चाहिए । लेकिन वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी के भी प्रेमी थे । उन्होने अपना सरनेम गुप्त का अंग्रेजी स्टाईल गुप्ता पसंद किया । वे पूर्ण चंद्र गुप्ता लिखने लगे । उनके बड़े भाई इन्द्रो जी भी, फिर लोइंग के गौन्तिया गौटिया परिवार के अधिकतर लोग उपनाम  "प्रधान" लिखना छोड़ कर "गुप्ता" लिखने लगे । (लोइंग के  गौटिया परिवार में भी सरनेम लिखने में एकरूपता नहीं थी। मेरे ताऊ श्री धरनीधर प्रधान, मेरे पिता श्री गजपति प्रधान,  मेरे चाचा श्री जयराम गुप्ता,  श्री उद्धव प्रधान,  चचेरे भाई श्री शशिभूषण प्रधान ) ।
 उसी वंश के दूसरे गांव महापल्ली, केंसरा, तुरंगा, पोटेबिर्नी, ..के लोग भी प्रधान सरनेम छोड़ कर गुप्ता लिखने लगे । यह गुप्ता सरनेम बड़े लोगों का, ऊँचा माना जाना लगा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरनेम प्रधान, भोई, खम्हारी,  साहू, बारीक, बिश्वाल,  ....  ..अपना उपनाम  गुप्ता लिखने लगे । कालांतर में छत्तीसगढ़ कोलता समाज की बैठक में बहुत विचार विमर्श के पश्चात गुप्ता सरनेम को मान्यता दी गई ।
             ज्ञातव्य है कि मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यवसाय करना ।
शुद्र - सेवा करना ।
चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश है ।
ब्राह्मण - शर्मा
क्षत्रीय - सिंह 
वैश्य - गुप्त 
शुद्र - दास 
कालांतर में जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी वर्णों के कई कई वर्ग बन गए । तदनुसार अलग अलग सरनेम याने एक उपनाम के कई उपनाम ।
ब्राह्मणों शर्मा के - पंडा , द्विवेदी,  त्रिवेदी. चतुर्वेदी, तिवारी ...
कोलता के - पधान प्रधान, साहू सा साव साहा शाह,  भोई भोय, बारीक, बिश्वाल, खम्हारी  ... .... 
********
मनु के निर्देशानुसार अपने वर्ण के मुख्य उपनाम के साथ उस के वर्ग का उपनाम लिखना चाहिए । 
           आधुनिक काल में साहित्यकारों के द्वारा अपने स्वभाव कर्म योग्यता को व्यक्त करने के लिए कोई अतिरिक्त उपनाम लिखने की परम्परा बनी ।
              मेरे विचार से मनु स्मृति को निम्नांकित दो शिक्षक ठीक ठीक पढ़े और समझे थे । क्यों कि वे अपना नाम मनु के निर्देशानुसार निम्नानुसार  लिखते थे ।
( उनसे कभी मनु स्मृति या जाति उपनाम के सम्बन्ध में मेरी चर्चा नहीं हुई ।
नीलाम्बर प्रसाद शर्मा त्रिपाठी "शास्त्री" ( लोइंग) 
श्कृतार्थ शर्मा "रथ" (नवाँपारा पुसौर ) ।
********************
यदि हमारी जाति "कोलता" को वैश्य मान लें (सच नहीं है) तो लिखना चाहिए -
श्री हेम सुंदर गुप्त प्रधान (महापल्ली )
श्री पूर्ण चंद्र गुप्ता प्रधान (लोइंग )
तदनुसार मैं लिखूं  तो -
नत्थू राम गुप्त प्रधान "सत्यार्थी"
****
कृपया मुझे जातिवादी या मनुवादी न समझें ।
मेरे इस लेख का मकसद किसी को  को ठेस पहुंचाना नहीं है , सच को सामने लाना है ।

रविवार, 3 मई 2020

intellgency

intelligency याने मन में सवाल,  तरह तरह के सवाल ।   प्रश्न??????????????????????????????

श्री राम जी के मन में संदेह था

           श्री राम चंद्र जी राजा रहे थे अपनी नाक बचाने के लिए सीता को छुड़ा कर लाए, सीता से प्रेम के लिए नहीं। उनके मन में सीता जी के लिए संदेह था ।  किसी धोबा का कथन तो एक बहाना था अपनी पत्नी के त्याग के लिए। इसीलिए वे सीता का बार बार सतीत्व परीक्षा ली गई । सीता जी दुखी होकर किसी कुआँ में कूद कर जान दे दी। तब राम जी को समझ आया।  पश्चात्ताप हुआ।  सरयू नदी में डूब कर आत्महत्या कर लिये ।
             वे केवल कैकेई  की इच्छा पूर्ति के लिए 14 साल के लिए राजपाट छोड़ कर चल दिये। जबकि उनके पिता राजा दशरथ की इच्छा नहीं थी।  
 यदि सीता से प्रेम होता, धोबा के कथन को आम जनता का विचार माने तब उन्हें अपनी पत्नी के साथ राजपाट का त्याग कर देना चाहिए था। 

रविवार, 26 अप्रैल 2020

सोशल मीडिया में गाली गलौच

सोशल मीडिया के किसी पोस्ट पर 
गाली गलौच करने वाले मुर्ख नीच स्वार्थी कपटी जलनखोर होते हैं उनके पास कोई आधार तर्क नहीं होता विरोध करने के लिए । लकीर के फ़कीर होते हैं जो सुन पढ़ कर बिना सोचे विचारे मान लेते हैं । ऐसे लोग समझने के लिए अपने दिमाग का उपयोग करना नहीं चाहते ।  जो मिला अपने अणु मस्तिष्क में भरते जाते हैं ।

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

मातृ पितृ दिवस


आसाराम ने अपने भक्तों से 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस मनाने के लिए कहा था । उसके पालन में कुछ भाजपा शासित प्रदेशों (हमारे छत्तीसगढ़) के स्कूलों में शासन के आदेशानुसार 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस मनाने के लिए आदेश दिये गये थे ।
अब आसाराम बलात्कार के आरोप में जेल में हैं। 

धर्म परिवर्तन

ये दलित, आदिवासी तो हिन्दू नहीं हैं ये अपनी मर्जी से कोई भी धर्म अपनाएं तो गलत क्या है ?
    मनु अनुसार शुद्र को कोई अधिकार नहीं है तो ये धर्म बदलना चाहें तो आपत्ति क्यों  ? 

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

पीने वाले जरूरी नहीं बुरे हों

पीने वाले जरूरी नहीं बुरे होते हैं ।
हमने देखा है शराब नहीं पीने वाले शाकाहारी भी गंदे, रिश्वतखोर , सरकारी /गैर सरकारी संस्थाओं का रूपये खाने वाले, भाई बंधु की सम्पति हड़पने वाले,  स्वार्थी,  नीच,  झूठे,  मालिक का रूपया/समय खाने वाले,  देशद्रोही,  दुश्मन देश को खुफिया जानकारी देने वाले,  .... भी होते हैं ।

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

संविधान

 कुरान बाइबिल या मनु स्मृति के निर्देश नियम का नहीं , संविधान का पालन करना है ।

धर्मों की बुराई

हर  धर्म की कमी बुराई को उजागर करना ही चाहिए । वे ही ऐसा नहीं चाहते जो धर्म को धंधा बनाए हैं ।
*****
कृपया तर्क सम्मत, आधार युक्त प्रतिक्रिया दें । 
पोस्ट पढ़ कर चिढ़ लगे तो block कर दें ।

संविधान ही धर्म

किसी जमाने में देश समाज के संचालन के लिये नियम बनाए ये जिसे धर्म कहा गया।  यः धारयति  सः धर्मः ।
जो धारण  करें वह धर्म ।
   अब हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिये ।

सोमवार, 20 अप्रैल 2020

अंधा के लिए प्रकाश

प्रश्न -
अंधा को प्रकाश के बारे में कैसे समझाएं?
उत्तर - 
1- अंधन को आँख देत,  कोढ़ीन को काया ।
भगवान से प्रार्थना कर आंख दिला सकते हैं । 

2- विज्ञान की मदद से किसी नेत्र दानी की आंख लगाएं।

रविवार, 19 अप्रैल 2020

अणु मस्तिष्क में store


आश्चर्य होता है कुछ युवा भी अपने अणु मस्तिष्क का ही उपयोग करते हैं । सोच विचार नहीं करते । जो मिलता है अपने अणु मस्तिष्क में store कर लेते  हैं ।

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

बहुत ज्यादा धार्मिक

कोई कम धार्मिक,  कोई ज्यादा ।
जो बहुत ज्यादा धार्मिक वह देश दुनियां के लिए खतरनाक ।
*****
हमें कोरोना कुछ नहीं करेगा । पाकिस्तानी एक दूसरे से गले मिलो । हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।

गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

कोरोना का प्रभाव दिमाग पर

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण... 
अब लोग अपने दिमाग का अधिक उपयोग करेंगे ।
सोच विचार करेंगे ।
बिना सोचे समझे कुछ भी नहीं मानेंगे ।
लकीर के फ़कीरों की संख्या कम होगी ।

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

unique

बुद्ध _आत्म दीपो भव ।
unique is natural. 
किसी के जैसा बनने की कोशिश मतलब मुखौटा ।

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

अम्बेडकर का संविधान ???

संदर्भ - अम्बेडकर का संविधान 
हमारे देश के संविधान का सर्वाधिकार copy right किसके पास है?
कृपया कोई जानकार बताएं ।

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

हमारा मुसलमानों से संबंध

हमारे गाँव लोइंग, महापल्ली,  पंडरीपानी,  सियारपाली  तथा   जिला मुख्यालय रायगढ़  के कई मुसलमान परिवार से हमाराअच्छा सम्बन्ध  है । नाटक वाला नहीं ।

        

धर्म बनाम संविधान

सभी धर्म अपने - अपने के संविधान के विपरीत हैं ।
संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए ।

रविवार, 12 अप्रैल 2020

काम क्षुधा

भूख प्रकृतिक है । उसकी पूर्ति नहीं होने से गलत तरीका अपनाते हैं याने जबर्दस्ती करते हैं । फ़िर पोलिस पकड़ती है । कुछ छूट जाते हैं रसूख, धन बल का उपयोग कर । कुछ लोगों को कानून सजा देता है । 
    भूख प्यास की पूर्ति के सम्भावित विभिन्न साधनों पर विचार करना चाहिए । जड़ से अपराध रोकने का यह सही तरीका होगा ।
      महान मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड ने कहा था -
दमन से वासना विकृत हो जाती है जो समाज के लिए हानिकारक है ।
 स्वप्न से भी काम वासना पूर्ति होती है । 
इस तरह  कई साधन हो सकते हैं जिससे वासना की पूर्ति हो सकती है । मनो वैज्ञानिक बता सकते हैं। 

शराब बिक्री

शराब बेंचने  से बहुत ज्यादा लाभ होता है । यह लाभ व्यवसायी ले रहे थे ।  इस बात को छत्तीसगढ़ की रमन सरकार समझ गई । शराब बिक्री सरकार द्वारा की जाने लगी । बहुत अधिक आय हो रही है ।
        जहाँ शराबबंदी है वहां के कुछ लोग चोरी छिपे बाहर से लाकर पीते हैं । याने धनी लोग जो पीना चाहें वे पीते ही हैं ।
         शराब सुलभ होने से मध्यम और निम्न आर्थिक स्थिति वालों के परिवार को सामाजिक आर्थिक कष्ट होता है । फिर भी पीने वाले पीते हैं  
           शराब दुकान में आधार जोड़  कर उन्हें कोई सरकारी सहायता, सुविधा, छूट..नहीं देना चाहिए । शराबियों को कोई सरकारी सुविधा का हक नहीं होना चाहिए ।

सोमवार, 30 मार्च 2020

अपना विचार व्यक्त करना चाहिये

कोरोना वायरस संक्रमण काल में पढ़ाकू लोगों को जो अपने जीवन में हजारों पुस्तकें पढ़े हैं, घर में बैठे बैठे अपना विचार व्यक्त करना चाहिये । खूब लिखना चाहिए गद्य पद्य में । सोशल मीडिया में । बाद में भी... 
यह देश समाज के लिए आपका कर्त्तव्य है ।

रविवार, 29 मार्च 2020

कोरोना वायरस

सोचने की बात... 
कहते हैं कि उपर वाले की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता । स्पष्ट है भगवान ही भेजे होंगे ।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

विरोध

कुछ लोग किसी पोस्ट का जो विरोध करना चाहते हैं लेकिन उनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे अनाप शनाप बकवास करते हैं या गाली गलौच करते हैं । दरअसल ऐसे लोग अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करते । ऐसे लोग विज्ञान का उपयोग तो करते हैं लेकिन मानते नहीं ।

गुरुवार, 19 मार्च 2020

विवाह

विवाह एक अलिखित समझौता है । पति पत्नी एक दूसरे के सुख दुख के साझेदार होते हैं । काम क्षुधा की पूर्ति करते हैं । स्वयम् को अपने  बच्चों के रूप में  पुनरुत्पत्ति करते हैं । शादी के बाद वे प्रेमी प्रेमिका , मित्र  जाते हैं । भले ही उनके विचार पूर्णतः एक नहीं होते ।

मल मूत्र चिकित्सा पद्धति

मल मूत्र चिकित्सा पद्धति-
हमारे देश में कुछ लोग गोमूत्र से चिकित्सा की बात चला रहे हैं,  कुछ लोग पी रहे हैं ।
हमारे प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई रोज सुबह स्वमुत्र पान करते थे। 
सभी प्राणियों के मल मूत्र में कुछ तत्व तो होंगे ही । मनुष्य के मल में भी ।
 मल मूत्र सेवन कर इच्छुक लोग प्रयोग कर सकते हैं मानव कल्याण के लिए ।
यह काम हमारे देश के लोगों को करना चाहिए । एक नई चिकित्सा पद्धति (मल मूत्र चिकित्सा पद्धति) की खोज से देश का नाम भी होगा दुनियां में ।

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

सोशल मीडिया में आएं

आज कल खरीद कर पुस्तक पढ़ने वाले बहुत कम हैं । अपने विचार, लेख , कविता,  कहानी, कलाकृति. .. social media में post करना  चाहिए । दुनियां के लिए बहुत उपयोगी होगा ।
  विद्वान साहित्यकार वरिष्ठ जन कहते हैं उनसे इस उम्र में facebook चलाना कठिन होगा ।
    जी नहीं,  आसान है आप चला सकते हैं बहुत अच्छी तरह । कृपया आएं facebook में नई पीढ़ी को कुछ देना आपका कर्त्तव्य है । उन्हें सही दिशा मिलेगी ।

आपके विचार को शेअर करें

आज कल खरीद कर पुस्तक पढ़ने वाले बहुत कम हैं । अपने विचार, लेख , कविता,  कहानी, कलाकृति. .. सोशल मीडिया में शेअर करना  चाहिए । दुनियां के लिए बहुत उपयोगी होगा ।

भ्रष्टाचार कायम रहेगा

भ्रष्टाचार कायम रहेगा जब तक ठग लोग पाप धोने के शार्ट कट रास्ते बताते रहेंगे ।
नीचे हरिभूमि समाचार दिनांक 06-03-2020

शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

क्या आप मानते हैं?

नाहिद अख्तर का एक नगमा है_
अल्ला ही अल्लाह किया करो|
दुख न किसी को दिया करो||
इसे कितने मुस्लिम मानते हैं?
************
वेद मंत्र है_
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे  सन्तु निरामयाः|
इसे कितने हिंदू मानते हैं!

दूर हो जांय जो धर्मनिरपेक्ष नहीं

हमारे संविधान के धर्म निरपेक्ष होने से जिन्हें चिढ़ है वे मुझ से दूर हो जांय दूर्र र्र... 

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

हमारा धर्म


हिं क्लिं फट स्वाहा.. 
जाति धर्म का विनाश हो ।
हमारा संविधान ही हमारा धर्म हो ।

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

धर्मों की बुराई /कमी /आलोचना

अगर कोई  केवल दूसरे धर्म की बुराई करे. अपने धर्म की आलोचना कभी न करे तो निश्चित ही उसका उद्देश्य नफ़रत फ़ैलाना  है ।
   वास्तव में सभी धर्मों में कुछ अच्छाई कुछ बुराई है । अपने अपने धर्म की जानकारी ज्यादा रहती है, दूसरे धर्म की कम ।बेहतर है हम अपने अपने धर्म की बुराई कमी को बताएं । ताकि उसमें संशोधन परिवर्तन हो ।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

शांति की खोज

शांति पाने के लिए _
घर परिवार, ड्युटी duty से भाग जाएं| अवश्य शांति मिलेगी| मंदिर मस्जिद . .कहीं भी या फिर पिकनिक. जंगल. . 
जंगल में ही रह जाएं तो और अच्छा ।
          कहते हैं नशा भी तनाव दूर करता है| शराब गांजा सेवन करें ।
          या कहीं एकांत में कुछ भी बुदबुदाइए .बोलिए चाहे निरर्थक ही हो ..उडु्ग बुड़ुग अगडम बगडम नमो वमो कुडुम. कर के देखिए| 
            सब कुछ भूल कर नाचें गाएं कोई भजन हो या कोई फिल्मी गीत कुछ भी|  खूब गाएं। या 
             जोर जोर से हंसें या खूब जोर से चिल्लाएं| पागल जैसा ।
      जो भी करें दिन भर करें.. दिन रात जब तक जागते रहें वही करें ।  
संक्षेप में जीवन से भागें | जब तक भागेंगे तनाव से दूर रहेंगे| शांति मिलेगी| पूरी शांति ।

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

हमारा संविधान

हमाते संविधान सभा में 200 सदस्य को थे । सभा द्वारा अम्बेडकर जी को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था ।
संविधान के प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष की मनमानी नहीं चल सकती थी ।

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

GK & Reasoning का महत्व

GK और Reasoning दोनो का अलग अलग महत्व है ।
GK याद कर अणु मस्तिष्क में भरते हैं । इससे जानकारी बढ़ती है । व्यक्तित्व विकास होता है ।
Reasoning में तर्क करना पड़ता है । सोच विचार करते हैं । तर्कशीलता बढ़ती है ।  मस्तिष्क का exercise होता है । intelligency बढ़ती है ।

बुधवार, 8 जनवरी 2020