रविवार, 3 मई 2020

श्री राम जी के मन में संदेह था

           श्री राम चंद्र जी राजा रहे थे अपनी नाक बचाने के लिए सीता को छुड़ा कर लाए, सीता से प्रेम के लिए नहीं। उनके मन में सीता जी के लिए संदेह था ।  किसी धोबा का कथन तो एक बहाना था अपनी पत्नी के त्याग के लिए। इसीलिए वे सीता का बार बार सतीत्व परीक्षा ली गई । सीता जी दुखी होकर किसी कुआँ में कूद कर जान दे दी। तब राम जी को समझ आया।  पश्चात्ताप हुआ।  सरयू नदी में डूब कर आत्महत्या कर लिये ।
             वे केवल कैकेई  की इच्छा पूर्ति के लिए 14 साल के लिए राजपाट छोड़ कर चल दिये। जबकि उनके पिता राजा दशरथ की इच्छा नहीं थी।  
 यदि सीता से प्रेम होता, धोबा के कथन को आम जनता का विचार माने तब उन्हें अपनी पत्नी के साथ राजपाट का त्याग कर देना चाहिए था। 

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