दामोदर सावरकर जी को देश की आजादी के लिए काला पानी की सजा हुई । अंडमान के उस कारागृह में कुछ समय रहने के बाद उन्होंने अंग्रेज सरकार से माफी मांग कर वचन दिया कि वे भविष्य में कभी अंग्रेज सरकार का विरोध नहीं करेंगे ।
उन्हें RSS और भाजपा द्वारा वीर कहने से लोग को आपत्ति जताते हैं । क्यों कि वे माफी मांगने के बाद अपने वचन का पालन करते हुए अंग्रेज सरकार का कभी विरोध नहीं किया तथा देश की आजादी से कोई सारोकार नहीं रखा ।
मेरे विचार से उन्हें "वीर" न कहें तो कम से कम आधा वीर तो कहना चाहिये । हम तो उनके सौवां भाग के बराबर भी शायद ही देश के लिये कुछ कर सकें ।
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