अम्बेडकर जी हिंदू धर्म की संकीर्णता से परेशान होकर बौद्ध धर्म अपनाए| लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि बौद्ध धर्म केवल अम्बेडकरवादियों का है|
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ये अम्बेडकर वादी तो अम्बेडकर जी को केवल दलितों के नेता प्रचारित कर उनकी महानता को कम कर रहे हैं| यह सोच उनकी संकीर्णता है|
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