मोर के आँसुओं से,
ऐनटीना धारी पैदा होते हैं,
मुख से,
नाक से,
कान से,
भुजाओं से,
उदर से,
जंघाओ से,
पैरो से,
ऐ चमत्कार दुनियाँ के किसी कोने में ,
कहीं नही हो सकते ऐसे अविष्कार...
सिर्फ और सिर्फ ,
ऐनटीनाधारी ही कर सकते हैं,
ऐ बिना संभोग के ही,
मोर के आँसुओ से ,
मोरनी को गर्भवती कर सकते हैं,
रावण की दहाड से,
छःमहीने का मंदोदरी का,
गर्भ गिरा,
मटके में रखा,
जमी में दफन किया
फिर सीता पैदा कर सकते हैं...!!
वही मंदोदरी को,
मेंढकी से पैदा बता सकते हैं,
हिरनी के साथ संभोग करते कश्यप ,
मानव पैदा कर सकते हैं,
हनुमंत के,
पसीने की एक बूँद से,
मछली गर्भधारण करती,
मकराध्वज पैदा कर सकते हैं,
ऐ अपने ही पुत्र का,
जिसे जानते भी नहीं,
सिर काट देते हैं,
पुत्रमोह में पागल,
निरीह हाँथी के बछड़े का,
सिर काटकर लगा सकते हैं,
इतने ही बडे चमत्कारक हो,
तो क्यो नहीं...
जो सिर काटा था गनेश का,
वही सिर लगा देते,
या फिर बदलकर ,
गनेश का सिर ,
हाँथी के बच्चे के धड से जोड देते,
तो थोडी इज्जत बच जाती ,
ऐंटिनाधारियों सुने...!
ऐ मैं नहीं तुम और तुम्हारे,
तथाकथित धर्मग्रंथ बोलते हैं,
तथा स्वयंभू बने तैतीस करोड,
देवी, देवता न जाने ,
कहाँ कहाँ से पैदा हो जाते हैं,
किस किस का रुप,
कैसे कैसे रख लेते हैं,
मसलन गाय के शरीर में,
तैतीस करोड समा जाते हैं,
और कोई जानवर नहीं मिला,
कुछ नहीं मिला तो जानवरों को,
बाँट लिया सवारी के लिए,
पंक्षीयों को भी नहीं बक्शा,
इमरत इकलावी....
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शुक्रवार, 2 जून 2017
अंधविश्वास
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