PM Panda_
"अंधविश्वासों की खेती!"
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कल्पना करें कि यदि अंधविश्वास कोई फसल होती और मनुष्य के खाने के काम आती तो कितना मज़ा आता?
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि हमारा देश विश्व में सदैव प्रथम स्थान पर रखता और अग्रणी कहलाता।
अंधविश्वासों के बीज हमारे देश में प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। गाँव हो या शहर हर जगह इसकी उपस्थिति देखी जा सकती है।
पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ कोई बात नहीं दोनों अंधविश्वासों पर विश्वास करने में बराबर योग्यता रखते हैं।
हमारे देश में अंधविश्वासों की खेती करने के लिए न केवल उपयुक्त उर्वरा भूमि है वल्कि इसकी फसल को लहलहाने के लिए योग्य मजदूर और किसान भी पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं।
रेती से तेल निकालने से लेकर कोई भी कठिन कार्य अंधविश्वासों के सहारे किया जा सकता है!
हमारे अंधविश्वासी अपने हुनर में इतने माहिर हैं कि वे मूर्तियों के आंख से आँसू निकलवा सकते हैं। यही नहीं मूर्तियों को दूध पिलाने में भी सिद्ध हस्त हैं।
आज से हजारों साल पहले समुद्र का मंथन किया गया था।[क्या आज की तारीख में हम समुद्र का मंथन कर सकते हैं?बिलकुल नहीं]
समुद्र मंथन से क्या क्या पाया वह आपने जरूर सुना होगा।
एक चीज का जिक्र करूँगा वह है""अमृत"
उस अमृत को पता नहीं कौन कौन पी गये?लेकिन जिसने भी पिया था वह सामने क्यों नहीं आता है?
खैर;अंधविश्वासों की खेती तो बिना कुछ किये हो ही रही है देखते हैं यह खेती कब तक होती रहेगी।
[पद्ममुख पंडा महापल्ली]
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शनिवार, 3 जून 2017
अंधविश्वासों की खेती
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