क्यों न बंद हो धर्मिक/मजहबी कामो में लाउडस्पीकर का प्रयोग ?
आज किसी भी धर्मिक या मजहबी स्थल की सबसे ज्यादा जरुरी चीज बन गई है तो वह है लाउडस्पीकर ।
पूजा प्रार्थना करनी हो या नमाज पढ़ना हो लाउडस्पीकर की तेज आवाज चाहिए सभी को,बिना लाउडस्पीकर के फुल वॉल्यूम किये धार्मिकों को लगता ही नहीं की उनकी आवाज खुदा या भगवान् तक जायेगी ही ।
धर्मिक मजहबी लोग जैसे अपने खुदा या भगवान् को नहीं बल्कि चीख चीख दूसरे लोगो को बताना चाहते हैं की देखो हम अल्लाह ईश्वर की पूजा प्रार्थना कर रहे हैं ।
अरे भाई!जैसा की आप लोग मानते हैं की ईश्वर सातवे आसमान में विराजमान है या ब्रह्माण्ड में कंही तो वैसे भी आपके लाउडस्पीकर की आवाज ब्रह्माण्ड या सातवे आसमान तक नहीं पहुचने वाली ।
तब काहे को आस पास के लोगो के कान बहरे कर देते हो ?
अगर आप कहते हो की आप लाउडस्पीकर में अपने जैसे धर्मिक मजहबी लोगो को आगाह करते हैं या सूचना देते है अपने धार्मिक क्रियाकलापो की ।
तो , साहब घर जाके बताइये न उन्हें ... क्या जिसको बताने का आप दावा कर रहे है लाउडस्पीकर में चिल्ला के उसे धर्म की नियमावली नहीं पता ?उसे टाइमटेबल नहीं पता?
यदि वह आपके बताने पर भी भूल जाता है और आपको उसको लाउडस्पीकर में चिल्ला के बताना पड़ रहा है तो इसका मतलब वह जिसे आप समझाने गए थे उसे आपके धर्म मजहब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है.....आप पीछा छोड़िये उसका .... चिल्लाना बंद किजिये।
जिसे इंट्रेस्ट होगा वह खुद आएगा आपके पास ।
इस प्रकार लाउडस्पीकर में चिल्लाना ईश्वर अल्लाह की पूजा इबादत नहीं बल्कि अपना अपना संख्याबल दिखाना भर है और दूसरे लोगो को परेशान करना भर है।
तरह तरह के प्रदूषण से तो वैसे ही इंसान की जान निकल रही है , आप लोग क्यों रात दिन चिल्ला चिल्ला के ध्वनि प्रदूषण और बढ़ा के लोगो का जीना दूभर कर रहे हैं ।
मैं चाहता हूँ की सरकार धर्मिक /मजहबी स्थलो में लाउडस्पीकर का प्रयोग बंद करवा दे ताकि गैर धर्मिक लोगो को परेशनी न हो ।
पूजा पाठ नमाज पढ़नी हो तो बिना लाउडस्पीकर के प्रयोग के की जाए ताकि दूसरे लोग जो आपके पूजा पाठ या नमाज में इंट्रेस्ट नहीं रखते वे चैन से जी सके ।
- केशव ( संजय)

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