गुरुवार, 15 जून 2017

नहीं जानता


Padmamukh Panda

"मैं नहीं जानता!"
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मैं किसी परमसत्ता के बारे में
कुछ भी नहीं जानता!
लोग अक्सर ईश्वर;खुदा या पैगंबर की
चर्चा करते रहते हैं
मैं सुन लेता हूँ;सुनता रहता हूं
मगर ऐसे किसी को भी नहीं मानता।
बचपन से लेकर आज तलक
मेरा किसी ईश्वर से सामना नहीं हुआ
मैंने तो सिर्फ लोगों को
मंदिरों के सामने कीर्तन भजन गाते
मंदिरों के भीतर गिडगिडाते देखा है
मैंने कभी भी नहीं देखा
कि ईश्वर किसी पर पसीजा हो
मैंने देखा है कई बार
लोग उपवास व्रत लेकर
कई कई दिनों तक
भूखे ही दिन गुजार देते हैं
मैं साक्षी हूँ उन भक्तों का
जो भगवान को पाने के प्रयास में
प्राण त्याग देते हैं।

मुझे ज्ञात है किस तरह एक माँ
अपने नवजात शिशु की लाश पर
आँसू बहाती है
एक नव विवाहिता वधू
पति की मृत्यु पर गश खाती है
सारे अरमान टूट बिखर जाते हैं
दुनिया फिर तमाशा बनाती है।

मैं ऐसे किसी भगवान को नहीं जानता
जो किसी दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति को
बचाने के लिए सामने आया हो
बाढ़ में डूबता कोई आदमी 
भगवान का नाम लेकर बच पाया हो
किताबों में पढ़ते हैं
बुजुर्गों से सुनते हैं
कभी आँखों के सामने से
ऐसा कुछ भी नहीं गुजरा
जो हमें भगवान के होने का यकीन दिला सके!

पद्ममुख पंडा; महापल्ली

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