कई साल से लोग होली मना रहे हैं, होली की बधाई देते हैं.. क्या इससे सुख समृद्धि में वृद्धि हो रही है? बुराई में कमी आ रही है ?
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
सोमवार, 29 मार्च 2021
रविवार, 28 मार्च 2021
अम्बेडकर का नहीं हमारा संविधान
हमारे संविधान सभा के अध्यक्ष
अम्बेडकर जी नहीं थे. वे drafting कमेटी के अध्यक्ष थे।
drafting कमेटी का काम संविधान सभा में पारित नियम कानून को धारा उप धाराओं में सजाकर लिखना था । उन्होने उन पारित नियम कानून नीतियों को कर संविधान का रूप दिया ।
यह काम विधि विशेषज्ञ अच्छे से कर सकते थे । इस लिये इसकी जिम्मेदारी अम्बेडकर जी को दी गई थी ।
अतः हमारे संविधान को अम्बेडकर का संविधान कहना गलत है ।
शनिवार, 20 मार्च 2021
कुल देवता कुल देवी
कुल देवी / कुल देवता
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हिंदू धर्म मानने वाले सभी जाति की एक एक कुल देवता / देवी होती है । पता नहीं, मुस्लिम इसाई लोगों के कुल देवता या कुल देवी होती है या नहीं ।
कोलता जाति की कुल देवी
श्री रामचंडी को मानते हैं । वे दुर्गा की रूप हैं ऐसा माना जाता है । आज कल हमारे इधर रायगढ़ पूर्वांचल के कई गांवों में श्री रामचंडी के मंदिर बना रहे हैं ।
देवी के नाम में श्री राम और श्री चंडी जुड़े हैं । इससे लगता है कि पाताल लोक की देवी महामाया ही ( जिन्हें देवी दुर्गा का रूप माना जाता है ) श्री रामचंडी देवी हैं जिनके सामने रावण का भाई पाताल का राजा अहिरावण श्री राम और श्री लक्ष्मण जी का बलि देने वाला था । वीर हनुमान जी ने अहिरावण को पराजित कर राम और लक्ष्मण को भूलोक में ले आये । हो सकता है हनुमान जी देवी महामाया / चंडी को भी अपने साथ ले आये हों । जिन्हें हम श्री रामचंडी कहते हैं जिन्हें हम कोलता जाति की कुल देवी मानते हैं ।
शनिवार, 13 मार्च 2021
वर्ण, जाति, उपनाम, पिछड़ी जाति, कोलता, गुप्ता
जाति और उनके उपनाम
पिछड़ी जाति OBC कौन ? -
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छत्तीसगढ़ में कोलता जाति के लोग भी उपनाम "गुप्ता" लिखते हैं, ओड़िशा में कोई नहीं लिखता ।
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आर्यों के मनु स्मृति के अनुसार चार वर्णों में से तीन वर्ण क्रमशः उच्च माने जाते हैं ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य। चौथा वर्ण है शुद्र ।
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शुद्र को अछूत माना गया । ब्राह्मण उनके घर में जाकर जन्म मृत्यु संस्कार, शादी विवाह, यज्ञ हवन आदि नहीं करते ।
हमारे भारत के मूल निवासी जंगलों में रहने वाले (S. T.) तथा मैदानी इलाके में रहने वाले (अन्य पिछड़ी जाति O. B. C. मुख्य काम खेती ) को आर्यों ने राक्षस कहा । आर्यों के पुराणों में इन्हें राक्षस कहा गया है । उनके कथा कहानियों में उन्हें कुरूप, झगड़ालु , बदमाश, मांसाहारी.. बताया गया । आर्यों और राक्षसों के बीच युद्ध होते रहे । कथित राक्षस बलिष्ठ और सरल स्वभाव के होते थे । आर्यों के कथित उच्च वर्ग (सवर्ण) बड़े दिमाग वाले तथा चालाक होते थे ।
O. B.C कोलता अघरिया कुर्मी..... खुद को सवर्ण वैश्य, क्षत्रिय कहलाना चाहते हैं खुद को उच्च जाति का बताकर सम्मान पाना चाहते हैं लेकिन शासन द्वारा मिलने वाली सहायता छात्रवृत्ति आरक्षण का लाभ लेते हैं ।
हम कोलता भी राक्षस कुल के हैं । छत्तीसगढ़ में हम कोलता लोगों के घर में विवाह/एकादश कर्म के पूजा हवन में पुरोहित मंत्रोच्चार करते हैं कहते हैं -
जम्बू द्वीपे भारतवर्षे उत्कल देशे राक्षस कुलस्य गुप्त वंशस्य . .......... (गुप्त के स्थान पर साहा, साहू, भोई भोय.... आदि )
ओड़िशा में क्या कहते हैं? कृपया बताएं।
इससे स्पष्ट है छत्तीसगढ़ के हम (कोलता ) के पूर्वज उत्कल देश (ओड़िशा) से आए हैं । ज्ञातव्य है कि ओड़िशा में कोलता कुल्ता कुलिता कोई अपना उपनाम "गुप्ता " नहीं लिखते ।
ओडिशा से कुलिता कुलता छत्तीसगढ़ (पहले मध्यप्रदेश) में आकर कोलता लिखने लगे । पधान से प्रधान, भोई से भोय, साहू से साहा साव सा, ....।
मध्यप्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) रायगढ़ पूर्वांचल दो दो विद्वान जो बहुत पढ़ाकू थे महापल्ली के श्री हेम सुंदर प्रधान तथा लोइंग के श्री पूर्ण चंद्र प्रधान ।
अपने कुल / जाति को गर्वित करने के लिए उपर्युक्त दोनो ने अलग अलग विचार कर अपना उपनाम परिवर्तन किया ।
श्री हेम सुंदर जी अपनी पुस्तक "कुलिता " में लिखा है कि कोलता जाति काश्मीर से आकर उत्कल में बस गये । सम्राट अशोक के वंशज हैं । याने क्षत्रिय हैं । उन्होंने आगे लिखा है कि उनके काम के अनुसार अनुसार गुप्त (प्रधान मंत्री), खम्हारी (कोषाध्यक्ष), गढ़तिया (गढ़पति /कीलेदार).... कहा जाता था । कालांतर में यही सब कुल मिला कर 120 वर्ग हो गये। उन्होने कोलता को कलिंग से जोड़ा। उनके अनुसार गुप्त और प्रधान पर्यायवाची हैं । (कोलता जाति को (विंशसए) विशासहे कुल कहा जाता है ।) इसी लिये श्री हेम सुंदर प्रधान जी ने अपना उपनाम "गुप्त" लिखना आरम्भ किया ।
श्री पूर्ण चंद्र प्रधान जी ने कोलता को उच्च /श्रेष्ठ स्थान दिलाने के उद्देश्य से
मनु के चार वर्ण में से वैश्य वर्ण का बताने के लिए मनु के निर्देशानुसार सरनेम " गुप्त" लिखना उचित समझा । लेकिन वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी के भी प्रेमी थे । उन्होने अपना सरनेम गुप्त का अंग्रेजी स्टाईल गुप्ता पसंद किया । वे पूर्ण चंद्र गुप्ता लिखने लगे । उनके बड़े भाई इन्द्रो जी भी, फिर लोइंग, भोजपल्ली के गौन्तिया /गौटिया परिवार के अधिकतर लोग उपनाम "प्रधान" लिखना छोड़ कर "गुप्ता" लिखने लगे । (लोइंग के गौटिया परिवार में भी सरनेम लिखने में एकरूपता नहीं थी। मेरे ताऊ श्री धरनीधर प्रधान, मेरे पिता श्री गजपति प्रधान, मेरे चाचा श्री जयराम गुप्ता, श्री उद्धव प्रधान, चचेरे भाई श्री शशिभूषण प्रधान ) । उसी वंश के दूसरे गांव महापल्ली, केंसरा, तुरंगा, पोटेबिर्नी, ..के लोग भी प्रधान सरनेम छोड़ कर गुप्ता लिखने लगे । यह गुप्ता सरनेम बड़े लोगों का, ऊँचा माना जाने लगा। फिर छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरनेम प्रधान, भोई, खम्हारी, साहू, बारीक, बिश्वाल, स्वाईं .... ..अपना उपनाम गुप्ता लिखने लगे । कालांतर में छत्तीसगढ़ कोलता समाज की बैठक में बहुत विचार विमर्श के पश्चात गुप्ता सरनेम को मान्यता दी गई ।
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ज्ञातव्य है कि मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय, वैश्य, शुद्र का
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना, यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना।
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण, उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण - उपनाम - जनेऊ
ब्राह्मण - शर्मा - रेशम
क्षत्रीय - सिंह - कपास
वैश्य - गुप्त - जूट
शुद्र - दास
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह
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कालांतर में जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी वर्णों के उनके काम के अनुसार कई कई वर्ग बन गए । तदनुसार अलग अलग सरनेम याने एक उपनाम के कई उपनाम ।
ब्राह्मणों शर्मा के - पंडा , द्विवेदी, त्रिवेदी. चतुर्वेदी, तिवारी ...
कोलता के - कोई राजा या जमीदार का मेनेजर का काम किया उनके वंशज दिवान/खम्हारी, कोई गांव का मुखिया बना तो उसके वंशज पधान /प्रधान, कोई साहुकारी करने लगा तो उनके वंशज साहू....
पधान प्रधान, साहू सा साव साहा शाह, भोई भोय, बारीक, खम्हारी , दिवान, बिश्वाल, ... ....
वर्तमान में
सरनेम देख कर जाति नहीं जान सकते ।
सरनेम लिखने के संबंध में कोई कानून नही है। याने उपनाम लिखने के लिए सभी स्वतंत्र हैं कोई कुछ भी लिखे । कई जाति के लोग पहले कोई उपनाम ही नहीं लिखते थे ।
बाद में दूसरों के देखा देखी कुछ लोग अपनी जाति को ही उपनाम लिखने लगे । कुछ शारीरिक जाति के नये नये उपनाम गढ़कर लिखने लगे । जैसे निर्मलकर, विमलकर, कुम्भकार, बसोड़, चर्मकार, किसान, सूर्यवंशी, ...
कुछ जाति के लोग दूसरी जाति के उपनाम को लिखने लगे । जैसे भोय, साहू, ठाकुर, चौहान, ...
ज्ञातव्य है कि पहले परीक्षा या अन्य फार्म में उपनाम का कालम नहीं होता था ।
आधुनिक काल में साहित्यकारों के द्वारा अपने स्वभाव कर्म योग्यता को व्यक्त करने के लिए अतिरिक्त उपनाम लिखने की परम्परा बनी । जैसे श्री रामधारी सिंह "दिनकर, श्री गोपाल दास "नीरज", श्री जय प्रकाश "मानस", .................
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मेरे विचार से मनु के निर्देशानुसार अपने वर्ण के मुख्य उपनाम के साथ उस के वर्ग का उपनाम लिखना चाहिए । इनके अलावा जो चाहें अपनी पसंद का अतिरिक्त उपनाम भी लिखना चाहिए ।
मेरे समझ में मनु स्मृति को छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ के निम्नांकित दो शिक्षक ठीक ठीक पढ़े और समझे थे । क्यों कि वे अपना नाम मनु के निर्देशानुसार लिखते थे ।
( उनसे कभी मनु स्मृति या जाति उपनाम के सम्बन्ध में मेरी चर्चा नहीं हुई ।
1 श्री नीलाम्बर प्रसाद शर्मा त्रिपाठी "शास्त्री" सेवा निवृत्त प्रधान पाठक लोइंग (जिला रायगढ़)
2 श्री कृतार्थ रथ शर्मा सेवा निवृत्त प्रधान पाठक नवाँपारा (पुसौर जिला रायगढ़ ) ।
यदि हमारी जाति "कोलता" को वैश्य मान लें तो लिखना चाहिए -
श्री हेम सुंदर गुप्त प्रधान (महापल्ली )
श्री पूर्ण चंद्र गुप्त प्रधान (लोइंग )
तदनुसार मैं लिखूं तो -
नत्थू राम गुप्त प्रधान "सत्यार्थी"
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कृपया मुझे जातिवादी या मनुवादी न समझें । यह बता दूं मैं मनु स्मृति पढ़ा हूं ।
मेरे इस लेख का मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है , सच को सामने लाना है ।
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अवलोकनार्थ संलग्न है स्व श्री हेम सुंदर गुप्त जी की पुस्तक "कुलिता" के कुछ अंश
शुक्रवार, 5 मार्च 2021
रामायण महाभारत के बाद मनु स्मृति रची गई
रामायण महाभारत के बाद मनु स्मृति की रचना हुई
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मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय, वैश्य, शुद्र का
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना, यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना।
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण, उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण - उपनाम - जनेऊ
ब्राह्मण - शर्मा - रेशम
क्षत्रीय - सिंह - कपास
वैश्य - गुप्त - जूट
शुद्र - दास
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह
बुधवार, 24 फ़रवरी 2021
विद्यालय और मंदिर
विद्यालय का मतलब शिक्षा ज्ञान का केन्द्र होता है. वह भक्ति केन्द्र नहीं होता. भक्ति के लिये मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा होते हैं जहां विज्ञान, तर्क, प्रयोग का कोई महत्व नहीं होता जिसे पवित्र कहा जाता है । वहां जो सुनाया जाता है उसे ही सच माना जाता है ।
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021
वैज्ञानिक जागरूकता समिति की स्थापना
आज देश में वैज्ञानिक जागरूकता, स्वास्थ्य जागरूकता की बहुत जरूरत है । इसके लिए हर जिला में एक वैज्ञानिक जागरूकता फोरम /समिति की स्थापना होनी चाहिए जो विद्यार्थीयों में वैज्ञानिक तथा स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कोशिश करे ।
हमारी संस्कृति प्यार वाली
असल में राधा कृष्ण के प्यारवाली है हमारी सँस्कृति ....खजुराहो जैसे शिल्प दुनियाँ में कहीं नहीं । हकीकत में 1000साल पुराना हमारा समाज ज्यादा mature और खुल्ला था ।
शनिवार, 13 फ़रवरी 2021
शादी की उम्र क्या हो
शादी की उम्र क्या हो ?-
हमारे देश में कानून अनुसार शादी की न्यूनतम उम्र लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 है । कानून में शादी के लिये पुरुष से महिला की उम्र अधिक हो, दोनो की बराबर हो.... तो कोई प्रतिबंध नहीं है ।
मनु स्मृति के अनुसार लड़का लड़की के शादी के उम्र में 8 साल का अंतर होना चाहिए । यह अंतर का सुझाव बहुत महत्वपूर्ण है । इसलिये कि पुरुष की यौनेच्छा 70-80 साल तक भी रह सकती है लेकिन स्त्री की इच्छा उसके मासिक चलते तक ही रहती है । प्रकृति द्वारा दिये इस विसंगति के कारण पत्नी के रजोनिवृत्ति के बाद पति नया पार्टनर खोजने लगता है । पहले पुरुष दो - तीन शादी करते थे । आज कल स्त्री की रजोनिवृत्ति के बाद पांच - सात साल तक हार्मोन चिकित्सा से Period की अवधि बढ़ाई जा सकती है ।
सोमवार, 1 फ़रवरी 2021
संविधान में इंसानियत
गीता कुरान बाइबल तो अपनी अपनी बात कहते हैं , एक संविधान ही है जो इससे उपर उठकर सिर्फ इंसानियत की बात कहता है |
रविवार, 27 दिसंबर 2020
जंगल में तपस्या
जंगल में तपस्या करने से भगवान के दर्शन और आशीर्वाद मिलता है । मोक्ष ओर स्वर्ग मिलता है ।
स्वर्ग में अप्सराएं सोम रस उपलब्ध होते हैं । वहां कोई काम करना नहीं पड़ता । सुख, आनंद ही आनंद ।
लेकिन आज कल बहुत कम लोग तपस्या करते हैं ।
शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020
गांधी जी और वर्ण व्यवस्था
अम्बेडकर भक्त कहते हैं कि गांधी जी मनु के वर्ण व्यवस्था के पक्षधर थे ।
तो क्या हुआ? मुंडे मुंडे मतिर्भिनाः।
गांधी जी किसी शुद्र दलित को पढ़ने पढ़ाने, शिक्षक मंत्री बनने, वोट देने, से नहीं रोका । अछूतों से अछूत व्यवहार नहीं किया ।
धर्म में सवाल नहीं
सभी धर्म दिमाग आंख सब बंद कर चुपचाप मानने के लिए कहते हैं । कोई तर्क नहीं, सही कोई सवाल नहीं ।
वीर या आधा वीर
सावरकर जी आजादी की लडाई में शामिल हुए. इसीलिए उन्हें कालापानी की सजा हुई. बाद में माफ़ीनामा लिख कर सजा से मुक्त हुए. उनके आजादी की लड़ाई, कालापानी के कष्ट की सोचें।
यह भी सोचें हमने देश के लिए क्या किया? हम होते तो क्या करते?
सावरकर जी को पूरा वीर भले ही न कहें आधा वीर तो कह सकते हैं ।
गुरुवार, 24 दिसंबर 2020
गांधी जी का हरिजन और मोदी जी का दिब्यांग
गांधी जी ने कथित शुद्र दलित को प्यार से हरिजन कहा था. सम्मान देने की नियत से । (उन्होंने कभी किसी दलित शुद्र का तिरस्कार अपमान नहीं किया। ) जैसे मोदी जी ने विकलांग अपंग को भी दिब्यांग नाम दिया उन्हें सम्मान देने के लिए ।
कथित दलित शुद्रों को तिरस्कार के भाव से हरिजन कहें या SC उन्हें बुरा तो लगेगा ही । उसी तरह विकलांग अपंग दिब्यांग ।
रविवार, 20 दिसंबर 2020
गांधी ओर हरिजन
गांधी और हरिजन
यह तर्क है तर्क करने के लिए.
कथित दलित शुद्र हरिजन हैं तो बाकी राक्षस हैं क्या?
उन्हें गांधी जी ने हरिजन कहा था उसमें कोई तिरस्कार अपमान का भाव नहीं था ।
ये भीम के भक्त अम्बेडकर को सबसे महान, सबसे बड़ा बनाने के लिए गांधी जी की तुलना कर उनके बारे में झूठ अफवाह फैलाते हैं । वे कहते हैं कि गांधी जी कथित शुद्रों के शुभ चिंतक नहीं थे । उन्हें हरिजन कहकर उनका अपमान किया । वे इसके साथ एक झूठ फैला रहे हैं कि जिसके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन कहा जाता है याने वौश्या के संतान को । यह सरासर झूठ है । दरअसल जिनके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन नहीं राम जनी कहा जाता है । (इसका मतलब यह भी नहीं कि वे श्री राम जी के संतान हैं । )
यह भी ज्ञातव्य है कि
गांधी जी अपने जीवन में कथित शुद्र दलितों के साथ कभी अछूत ब्यवहार नहीं किया ।
हमारे संविधान में सब को समान अधिकार दिया गया है, कथित शुद्रों हरिजन दलित को भी , उन्हें भी आरक्षण दिया गया है । यह सब गांधी जी जीवित थे तब हुआ है । यह अधिकार केवल एक अम्बेडकर जी की इच्छा से नहीं, पूरे संविधान सभा की सहमति से हुआ है ।
आरक्षण का लाभ देने के लिए हर वर्ग को एक नाम तो देना ही पड़ा । ओ बी सी OBC, एस टी ST, एस सी SC ।
कथित शुद्र एस सी SC कहते हैं. कई लोगों के कहने के लहजे में तिरस्कार का भाव होता है ।
यह गलत है । लेकिन धीरे धीरे शिक्षा प्रसार और सझदारी के कारण उन्हें अपमानित करने का भाव , छुआछूत कम हो रहा है ।
बुधवार, 16 दिसंबर 2020
अम्बेडकर
भीम राव अम्बेडकर जी निश्चित ही बहुत intelligent थे, खूब पढाई किये, बहुत सारे डिग्री हासिल किये लेकिन उन्हें देश दुनियां के लिए नहीं, केवल अपनी अछूत जाति के हित से मतलब था ।
उन्होने देश के संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में सभा द्वारा पारित नियम कानून का बहुत अच्छा ड्राफ्टिंग किया ।
रविवार, 13 दिसंबर 2020
मेरी आस्था
मैं पहले पूरा आस्तिक था । लेकिन अब मुझे किसी भी भगवान देवी देवता भूत प्रेत के अस्तित्व पर विश्वास नहीं है ।
मैं यह सार्वजनिक कर रहा हूं । अपना विचार व्यक्त करना चाहिये । मुझे सिर्फ़ मानवता पर भरोसा है । क्यों कि मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है ।
हमारे घर में उन भगवान देवी देवताओं की मुर्ति फोटो हैं क्यों कि घर में मैं अकेला नहीं रहता ।
अगर वे दुनियां में कहीं हैं तो सब कुछ देख कर मुक दर्शक क्यों बने रहते हैं? स्पष्ट है वे नहीं हैं, कल्पित हैं । अगर हैं तो अपनी duty नहीं कर रहे । ऐसी स्थिति में उनका अस्तित्व क्यों स्वीकार करूं?
भगवान को जानने, पाने की कोशिश
उस कथित भगवान को जानने की बहुत कोशिश किया। अब कोशिश बंद है ।
कुछ भी नहीं समझा, कुछ भी नहीं जाना ।
उसे खोजने, जानने,पाने की कोशिश करना निरर्थक लगा ।
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इतनी बड़ी दुनियां
इतने सारे लोग
आओ
सबसे प्यार करें ।
गुरुवार, 10 दिसंबर 2020
आर्य और अनार्य
भारत के मूल निवासी (ST, OBC) बलिष्ठ, सीधे,सरल, सच्चे,निष्कपट , होते थे । आर्य उनकी अपेक्षा बड़े दिमाग वाले याने intellgent होते थे । मूल निवासी जंगल में रहते थे । जंगल के पेड़ पौधों के फल पत्ते और मांस ही उनका मुख्य भोजन था ।
बाद में कुछ (OBC) मैदानी भाग में रहने लगे जो खेती तथा पशु पालन करने लगे ।
आर्यो का सर्वोच्च वर्ण ब्राह्मण बहुत अधिक intelligent थे । उनकी कल्पना शक्ति अद्भुत होती श। भगवान देवी देवता को पैदा कर लेते श । ग्रहों की चाल स्थिति बदल देते । याने पूरी दुनियां को नचाते ।
उनका दूसरा वर्ण क्षत्रिय बलशाली थे । वे बाहु बल से किसी भी भाग के राजा बन जाते ।
तीसरा वर्ण वैश्य भी बड़े दिमाग वाले होते थे । वे खेत खेत्र में बिना मेहनत किये बुद्धि के बल पर वस्तुओं का उत्पादन करते याने विनिमय कर मालामाल होते ।
आर्य अपनी सेवा के लिये जिन्हें नगर गाँव के किनारे जगह देकर बसाते थे उन्हें वे शुद्र कहते थे । वे अछूत होते थे ।
आर्य खुद को देव कहते थे और भारत के मूल निवासियों को अनार्य दानव राक्षस कहते थे ।
आर्य अपने कथा कहानियों में मूल निवासियों के राजाओं को खल नायक बताकर उन्हें बदमाश, कुरूप बताते थे तथा उनका उपहास करते थे ।
आर्य अपने दिमाग का उपयोग कर भारत में प्रभाव जमाने लगे । ब्राह्मण के अलावा क्षत्रिय तथा वैश्य के घर में पूजा पाठ करते थे इससे उनकी पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी । इसलिए वे भारत के मूल निवासी ST, OBC के घर में भी पूजा पाठ करने लगे । वे आज भी शुद्र के घर में पूजा पाठ शादी विवाह आदि कोई संस्कार , यज्ञ हवन नहीं करते ।
ST, OBC, ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य और शुद्रों के त्वचा का रंग, रहन सहन, संस्कार उनके क्रिया कलाप, सब अलग अलग होते थे । कालांतर में सब मिश्रण होते जा रहा है ।
राम नाम सत्य
🤔🤔
अगर राम नाम सत्य है, तो बाकी के क्या है...? जैसे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश, दुर्गा , काली, सरस्वती इत्यादि क्या ये सब नाम झूठ है...?🤔
सोमवार, 7 दिसंबर 2020
महिला शिक्षा
महिलाओं को युग युग से शिक्षा से वंचित रखा गया था । कुछ साल से शिक्षा मिल रही है । धीरे धीरे सोच विचार , वैज्ञानिक जागरूकता में वृद्धि होने लगी है।
आस्था
आस्था -
हमारे हिंदू धर्म के अनुसार जो भी होता है पूर्व निर्धारित होता है| याने भगवान द्वारा तय होता है| बाढ़ भूकम्प, युद्ध, दंगे फसाद, हत्या चोरी डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार... सब कुछ..
कोई पत्ता हिलता हो तो वह भी उपर वाले की मर्जी से होता है ।
सब कुछ वही करता है| गजब है यह मान्यता|
कोई इसे बकवास कहे तो उनकी धार्मिक आस्था को चोट लगेगी| और ऐसी मान्यता के प्रचार प्रसार से हमारी वैज्ञानिक आस्था को चोट लगेगी उसका क्या?
रविवार, 6 दिसंबर 2020
मस्तिष्क का फार्मेट
पाठ्य पुस्तकों के अलावा हर तरह की पुस्तकें (हजार हजार) पढ़ कर बचपन से अपने दिमाग में भरे कचरे की सफाई (मस्तिष्क का फार्मेट) कर सार सार को भरते रहना चाहिए ।
शनिवार, 5 दिसंबर 2020
वेद कुरान में विज्ञान?
जो लोग वेद पुराण कुरआन में ज्ञान विज्ञान की बात करते हैं उनको अपने बच्चों को स्कूल कॉलेजों में भेजने के बजाय धार्मिक स्थलों पर ही भेजना चाहिए।
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020
सम्बोधन
हम भारतीय दूसरे अपरिचितों को बड़े प्यार सम्मान से सम्बोधन करते हैं.. भाई भैया, बहन दीदी, चाचा अंकल, चाची आंटी , ..
इसे हम हमारी महान संस्कृति,संस्कार , हमारी महान सभ्यता मानते हैं । फिर भी हम दूसरों के साथ गाली गलौच, अपमान, ईर्ष्या, नुकसान, चोरी , मार काट , रिश्वतखोरी , ......करते हैं। याने हम नाटक करने में expert हैं । बातचीत में ब्यवहार में सब बहुत अच्छे। सब को प्रेम सम्मान देते हैं लेकिन अंदर नफ़रत, जहर, स्वार्थ, जलन, ....
हम किसी समूह को बहुत आत्मीयता दर्शाते हुए सम्बोधन करते हैं - भाइयों, बहनों, मित्रों, सज्जनों ...
इससे तो अच्छा है पश्चिम देशों का सम्बोधन - ladies and gents साफ स्पष्ट यथार्थ , कोई नाटक नहीं।
शुक्रवार, 27 नवंबर 2020
गोमाताओं की व्यथा गाथा
शहरों में कुछ गो पालक ऐसे भी होते हैं जिनके पास गाय को रखने की पर्याप्त जगह नहीं होती फिर भी सैकड़ों लिटर दूध का धंधा करते हैं । उनके गाय सड़कों में लावारिस घूमते रहते हैं, जो मिला खाते हैं, कचरा कागज.. आदि भी खा जाते हैं । रात को कहीं भी, बीच सड़क पर भी सो जाते हैं । ट्राफिक के लिए समस्या बनते हैं, जो दुर्घटना के कारक भी होते हैं । सुबह चारा पानी खाने मालिक के पास पंहुच जाते हैं । थोडा दाना पानी देकर आखिरी बूंद तक दूध निकाल कर अपने गायों को सड़क पर छोड़ देते हैं ।
ये है हमारे देश की गो माताओं की दिनचर्या। उनकी व्यथा गाथा ।
मंगलवार, 24 नवंबर 2020
पाप धोने का मतलब
पाप धोने का मतलब अपने किये अपराधों के प्रमाण मिटाकर दंड से बचना । इस तरह के पाप धोने के सरल तरीके जहाँ अधिक होंगे वहां अपराध भ्रष्टाचार भी अधिक होंगे ।
शनिवार, 21 नवंबर 2020
नामकरण
बहुत सारे संस्थाओं के नाम नेहरू इंदिरा के नाम पर हैं ।
प्रधान मंत्री मुख्य मंत्री के नाम से उनके कार्यकाल में किये काम का नाम होना चाहिए । किसी संस्था के लिये जो कुछ खास काम किये हों उनके नाम से भी संस्था हो सकते हैं । लेकिन जिन्होंने उस संस्था के लिए कोई काम न किया हो उनका नाम कदापि नहीं होना चाहिए ।
ऐसा अब भी होना चाहिए । मोदी जी ने भी जो जो किये उनका नाम भी होना चाहिए ।
गुरुवार, 19 नवंबर 2020
बुधवार, 18 नवंबर 2020
प्रतिमाओं को प्रणाम
देवी देवता अपने जमाने में कुछ अच्छा काम किये होंगे देश समाज के लिए, ऐसा मान कर कभी कभी उनकी प्रतिमा को प्रणाम कर देता हूँ ,उनकी पूजा नहीं करता, चढ़ावा नहीं देता, मत्था टेक कर उन से नहीं मांगता।जीवन में सिर्फ एक मंदिर में चढ़ावा दिया हूं , बटमूल आश्रम साल्हेओना महाविद्यालय महापल्ली में
मंगलवार, 17 नवंबर 2020
कामेच्छा
काम पिपासा पुरुष में अपेक्षाकृत अधिक होती है ।
पुरुष की इच्छा शायद 70-80 या उससे अधिक उम्र तक रहती है।
जबकि 50 (औसत) वर्ष बाद स्त्री का period बंद हो जाता है उसकी कामेच्छा समाप्त हो जाती है ।
यह स्त्री पुरुष के सम्बंध के लिए बहुत बड़ी समस्या हो जाती है ।
स्त्री की कामेछा समाप्ति के बाद उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता । लेकिन पुरुष की क्षुधा तृप्ति घर में नहीं हो पाती । जिनके हार्मोन ज्यादा बनते हैं वे घर के बाहर भूख मिटाने की कोशिश करते हैं ।
इससे पति पत्नी के बीच कलह होता है । कोई स्त्री यह सहन नहीं कर पाती कि उसका पति घर के बाहर खाना नास्ता करे । पत्नी यह दे नहीं सकती। उसकी इच्छा नहीं होती ।
विवाह के समय पति पत्नी के उम्र में यदि अधिक अंतर हो तो यह समस्या कम होती है । यदि दोनों के उम्र में कम अंतर हो या समान हो तो समस्या अधिक होती है । शायद इसी लिये मनु जी ने दोनो की उम्र में आठ साल का अंतर रखने का सुझाव दिया था ।
यदि स्त्री इस उम्र में पति का ध्यान रखे तो कलह से बचा जा सकता है ।
एक सुझाव है यदि स्त्री physicaly पूर्णतः स्वस्थ है तो वह रजोनिवृत्ति के बाद किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से hormon treatment ले सकती है । इससे period पांच - सात साल बढ़ जाती है ।
रविवार, 15 नवंबर 2020
चमत्कार और विज्ञान
संसार में कोई भी चीज चमत्कार नही है। हर चमत्कार के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण है। हमारी अज्ञानता ही चमत्कार है, जब इन चमत्कारों का कारण एक साधारण व्यक्ति जान जाता है तो वह विज्ञान कहलाता है और जब ये कारण किसी ठग की जानकारी में आता है तो वह अंधविश्वास बन जाता है।
शनिवार, 24 अक्टूबर 2020
DNA Test
सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते। वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । ऐसे जातीय दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के सब का DNA test करा लेना चाहिए ।
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । इच्छानुसार बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं
जाति की रक्त शुद्धता
सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जाती समाज में विवाद, भेद, विभाजन होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले पुत्र / पुत्री कभी न आएं का शर्त और समाज द्वारा तय जुर्माना भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं ।
ऐसे जातीय दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के सब का DNA test करा लेना चाहिए ।
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण।
Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं
ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म हत्या... नहीं होंगे ।
क्यों???
भारत में सबसे ज्यादा भगवान,सबसे ज्यादा पाठ पूजा,सबसे ज्यादा कर्म कांड फिर भी इतना भ्रस्टाचार,अन्याय,अव्यवस्था, गंदगी क्यो ??
हजारों में से कोई एक
सब की सोच समान नहीं होती ।
कीमती आभूषण हजारों लोग देखते हैं । उनमें से कोई एक का मन लालच करता है ।
उन हजारों लालची में से कोई एक लूटता है ।
उसी तरह जिस्म देख कर भी.....
सोच और बलात्कार का सम्बन्ध
सच तो यह है कि कपड़े और बलात्कार का कोई सम्बन्ध नहीं है ।सोच और बलात्कार का सम्बन्ध जरूर है ।
अरे! कोई कीमती आभूषण पहना हो तो देख कर लूट लोगे क्या?
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
समलैगिंक आकर्षण
समलैगिंक आकर्षण अधिकतर विवाह के पहले होता है । काम क्षुधा की पूर्ति के लिए विपरित लिंग नहीं मिलने से gay या lesbo sex कर के पूर्ति कर लेते हैं । इसे कोई बीमारी समझना उचित नहीं है । यह किसी भी उम्र में हो सकता है ।
हर जाति का दो भाग बना देना चाहिए
सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन
अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे रक्त मिश्रण होने देना नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जातीय समाज में विवाद, भेद, विभाजन होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले पुत्र / पुत्री कभी नहीं आने के शर्त के साथ समाज द्वारा तय जुर्माना भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं ।
ऐसे जातीय दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के सब का DNA test करा लेना चाहिए ।
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण।
भविष्य में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों ।
ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म हत्या... नहीं होंगे ।
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020
प्रदर्शन और लालच
घर के बाहर अपने जिस्म का प्रदर्शन उचित नहीं है । अच्छे से शरीर को ढक कर बाहर निकलना चाहिये । देख कर कुछ लोगों को लालच आ जाता है ।
उसी तरह
अपने धन के प्रदर्शन के लिए कीमती आभूषण पहन कर घर से बाहर घूमना भी उचित नहीं है। कुछ लोगों का मन बिगड़ जाता है ।
दोनों ही परिस्थितियों देश समाज की शांति व्यवस्था खराब होती है । पोलिस, अदालत सब परेशान होते हैं ।
बुधवार, 21 अक्टूबर 2020
अंध भक्ति से हानि
उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।
एक ही तरह की बात सुनने पढ़ने से अंध भक्ति होती है । यह भक्ति देश समाज संसार के लिए बहुत हानिप्रद होती है ।
इसी से आतंकवाद, नक्सलवाद, तानाशाही फलता फूलता है ।
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020
बच्चे के खाली दिमाग में धर्म आस्था भर दी जाती है
बच्चा जन्म लेता है तब उसके दिमाग में कोई आस्था धर्म भगवान अल्लाह god... कुछ नहीं होता । उसके माता पिता, परिवार के लोग उसके दिमाग में यह सब भरते हैं जिसे वह मान लेता है ।
कालांतर में कोई कोई सोच विचार कर अपने दिमाग में भरे हुए आस्था विश्वास आस्तिकता को हटाकर विज्ञान को भरते जाते हैं । ॠषि चार्वाक, ऋषि जाबालि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह, डाक्टर कोबूर, पेरियार स्वामी, विश्वनाथ (सरिता के सम्पादक) .....
हमारे छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिला के -
ग्राम लोइंग के स्व श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता (मेरे मित्र, चाचा) पूर्व प्रधान पाठक शास उच्चतर माध्यमिक शाला महापल्ली,
श्री पद्ममुख पंडा सेवा निवृत्त बैंक मेनेजर निवासी महापल्ली.
पंडरीपानी पूर्व के श्री जगदीश गुप्ता
रायगढ़ के मुमताज भारती, जयप्रकाश मानस रथ
सोमवार, 19 अक्टूबर 2020
असामान्य लोगों को राजनीति से दूर करना चाहिए
ये बाबा साधु सन्यासी के विचार, रहन सहन, उपदेश.. आम आदमी से हट कर होता है ।
असामान्य लोगों को देश की राजनीति में भागीदारी से वंचित करना चाहिए। उनके लिए किसी राजनौतिक मुद्दे पर बात करना , वोट देना प्रतिबंधित होना चाहिए ।
शनिवार, 17 अक्टूबर 2020
कर्म फल और भाग्यफल
कर्म फल वैज्ञानिक सिद्धांत है ।
कर्म का उचित फल मिलता है ।
कारण और परिणाम का सम्बंध वैज्ञानिक है ।
भाग्य फल सिद्धांत कल्पित है झूठ है । इस का प्रचार प्रसार शोषक वर्ग के हित में किया गया ताकि शोषित का शोषण अबाध होता रहे ।
शोषण
जो भी होता है उपर वाले की मर्जी से होता है ।
उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता
जो होता है सब भाग्य फल होता है। जैसा किस्मत में लिखा होगा वैसा ही होगा ।
इन धार्मिक भावना से शोषित का शोषण करने में शोषको को सुविधा होती है ।
क्यों कि शोषित संतुष्ट रहता है ।
मन की शांति
जो होता है वही करता है..
मान लेने से दिमाग के सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं । मन शांत हो जाता है । कुछ सोच विचार करने की जरूरत नहीं रह जाती ।
जो भी घटना दुर्घटना हो उसके कारण, निवारण के उपाय जानने करने की जरूरत नहीं । क्यों कि जो हो रहा है सब उसकी इच्छा से हो रहा है ।
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020
आशीर्वाद
# "कैसे हो? "
# "सब आपके आशीर्वाद से अच्छा हूं गुरू जी "
# बहुत अच्छा लेकिन मेरे आशीर्वाद से नहीं, तुम्हारी अपनी कोशिश से "
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शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020
परम्परा
पुरानी परम्पराओं के औचित्य पर सोच विचार कर उसका त्याग या पालन करना चाहिए ।
परम्परा -
परम्परा हमारे व्यवहार के तरीकों की द्योतक है।
परम्परा का अर्थ उन सभी विचारों आदतों और प्रथाओं का योग है, जो व्यक्तियों के एक समुदाय का होता है, और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होता ।
रविवार, 4 अक्टूबर 2020
अम्बेडकर का संविधान या हमारा संविधान
प्रेमचंद का गोदान, तुलसी का राम चरित मानस, धर्मवीर भारती का गुनाहों का देवता.....
ये सब तो ठीक है.
लेकिन कुछ लोग बार बार अलापते रहते हैं
बाबा का संविधान ,
अम्बेडकर का संविधान ..
ये क्या कहना चाहते हैं ।
अम्बेडकर का संविधान होने से तो सर्वाधिकार उनके परिवार का होता, पुस्तक विक्री की रायल्टी भी उन्हें मिलती । उनकी अनुमति के बिना उसमें कोई संशोधन सम्भव नहीं होता ।
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020
शनिवार, 26 सितंबर 2020
अजपाजप
किसी के नाम को जपने से ज्ञान प्राप्त नहीं होता । ध्यान (सोच विचार) करने से ज्ञान प्राप्त होता है ।
गुरुवार, 24 सितंबर 2020
हमारा भारत
पहले यहाँ सिर्फ मूल निवासी रहते थे । वे जंगलों में कंद मूल फल मांस खाते थे । उनके अलग अलग कबीले होते थे। हर कबीला का एक सरदार याने राजा होता था।
बाद में कुछ होशियार लोग मैदानी इलाकों में रहकर खेती और पशु पालन करने लगे जो आज OBC कहलाते हैं । अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग राज्य के राजा होते थे ।
बहुत बाद में आर्य आये । ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य अपने साथ अपनी सेवा कराने के लिये कुछ दास लेकर आये वे जिन्हें शुद्र कहते थे । जो आजकल SC में आते हैं।
आर्य अपने तीन उच्च वर्ण के लोगों को "आर्य" कहकर सम्बोधन करते थे । वे भारत के मूल निवासियों को राक्षस, दैत्य , असुर कहते थे ।
धीरे धीरे आर्य भारत के मूल निवासियों के कबीले, राज्यों को साम दाम दंड भेद से जीत कर एक कर लिये जिसे व आर्यावर्त कहा गया । कालांतर में आर्यों के छोटे छोटे टुकड़े टुकड़े राज्य हो गये ।
जिन्हें मुगलों ने जीत कर एक बादशाह के अधीन कर दिया जो हिन्दुस्तान कहलाया । जिसमें अधिकतर राजा हिन्दू थे ।
अंग्रेज आकर सबको जीत कर एक india बना दिए ।
1947 आजादी के बाद हमारे देश का नाम भारत, india हुआ ।
पाकिस्तान अलग हो गया ।
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अब तो सभी हर तरह का काम धंधा करते हैं।
धर्म परिवर्तन
मुस्लिम, इसाई धर्म में कोई भी शामिल हो सकता है लेकिन हिन्दू धर्म में मुस्लिम इसाई शामिल नहीं हो सकते ।
लेकिन हम कहते हैं
"वसुधैवेकम् कुटुंबकम् "
पूरी पृथ्वी एक परिवार है ।
प्रेम
कई संकीर्ण लोग प्रेम कथा पढ़ते सुनते देखते हैं लेकिन अपने परिवार जाति समाज में हो तब उन प्रेमियों के प्रेम को सहन नहीं कर पाते याने प्रेम करने वालों से जलते हैं ।
बुधवार, 23 सितंबर 2020
हमारा भारत
हमारे भारत के हजारों टुकड़ों को जीत कर मुगलों ने जोड़ दिया।
अंग्रेजों ने हमारे भारत के सैकड़ों टुकड़ों को जोड़ कर एक कर दिया।
आर्थिक विकास
आर्थिक विकास के लिए सरकार और नागरिक द्वारा उत्पादक कार्यों में खर्च होना चाहिए अनुत्पादक कार्य में नहीं ।
सोमवार, 21 सितंबर 2020
स्त्री अबला
पहले स्त्री अबला मानी जाती थी पुरुष द्वारा । स्त्री भी इसे मान लेती थी । इसलिये मनु ने यह व्यवस्था दी थी कि स्त्री की रक्षा उसका पिता, भाई, पति करेगा ।
अब स्त्री अबला नहीं है । संविधान ने उसे ताकत दी है ।
बुधवार, 16 सितंबर 2020
पूरी दुनियां का एक धर्म
मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल.... पुराने जमाने में अपने अपने समाज के लिये संविधान थे ।
अब तो अपने अपने देश का संविधान है । यही हमारा धर्म होना चाहिए ।
एक दिन आएगा सरहदें नहीं होगी, संयुक्त राष्ट्र संघ का संविधान ही पूरी दुनियां का धर्म होगा ।
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जय जगत _ बिनोबा भावे
शनिवार, 29 अगस्त 2020
सन्स्थाओं के नाम
कहते हैं कई संस्थाओं के नाम नेहरू इंदिरा के नाम पर हैं। प्रधान मंत्री मुख्य मंत्री के अलावा किसी संस्था के लिये जो कुछ खास काम किये हों उनके नाम से भी हो। जिसने संस्था के लिए कुछ न किया हो उनका नाम कदापि नहीं होना चाहिए ।
मोदी जी भी जो जो किये उनका नाम भी होना चाहिए।
गुरुवार, 27 अगस्त 2020
पूजा करने के लिए नहीं, पढ़ने के लिए हैं
गीता रामायण को लाल कपड़े में लपेट कर अपने पूजा घर में रख कर पूजा करने के लिए नहीं हैं । पढ़ कर सोच विचार करने के लिए है ।
भीम ही संविधान सभा थे?
हमारा संविधान, उसके सारे नियम कानून अम्बेडकर का है । याने बाबा भीम ही संविधान सभा थे ? जी नहीं ।
संविधान सभा में 200 सदस्य थे । कई कमेटी बनाई गई थी । drafting commitee के अध्यक्ष थे भीम अम्बेडकर ।
दरअसल संविधान सभा में विचार विमर्श पश्चात जिन पर सहमति होती थी उस सब को भीम राव अम्बेडकर अच्छे से drafting करते थे ।
हमारा संविधान, उसके सारे नियम कानून अम्बेडकर का है । याने बाबा भीम ही संविधान सभा थे ? जी नहीं ।
संविधान सभा में 200 सदस्य थे । कई कमेटी बनाई गई थी । drafting commitee के अध्यक्ष थे भीम अम्बेडकर ।
दरअसल संविधान सभा में विचार विमर्श पश्चात जिन पर सहमति होती थी उस सब को भीम राव अम्बेडकर अच्छे से drafting करते थे ।से drafting करते थे ।
जो नियम कानून बने सभा की सहमति से, अकेले अम्बेडकर की मर्जी से नहीं।
ईश निंदा
ईश्वर की निंदा करने वाले को ईश्वर ही दंड देंगे ।
इसके लिए मनुष्य को चिंता करने की जरूरत नहीं ।
शादी और प्रेम
प्रेम विवाह हो चाहे अरेंज विवाह, यदि अन्य सब बातें यथावत रहें सामान्य रहें तो शादी के बाद पति पत्नी के बीच प्रेम दिनों दिन प्रगाढ़ होता जाता है ।
लड़कियों के ड्रेस
लड़कियों के ड्रेस पर बहुत चर्चा होती है ।
सार्वजनिक स्थान में देश के संविधान और कानून का पालन करते हुए वस्त्र धारण करना चाहिए । बस। कानून अनुसार हो तो कोई आलोचना नहीं होनी चाहिए । कानून का उल्लंघन हो हो तो पोलिस को शिकायत करना चाहिए ।
देश में नंगे, अधनंगे साधु बाबा सार्वजनिक स्थानों, तीर्थ स्थलों में दिखाई देते हैं । संसद में भाषण देते हैं ।
नागा, जैनी साधु तो शहरों के आम सड़क में भी जुलुस के साथ होते हैं ।
बुधवार, 26 अगस्त 2020
नीजीकरण
नीजीकरण
से संस्था अच्छी चलती है तो
पूरे देश को किसी कम्पनी या किसी देश के हवाले कर दें तो नीजीकरण का ज्यादा लाभ मिलेगा देश वासियों को ।
केन्द्र सरकार को इस पर विचार के लिए संसद में प्रस्ताव रखना चाहिए । सहमति होने से यथा शीघ्र निविदा मंगाना चाहिए ।
most intelligent अम्बेडकर जी
अम्बेडकर जी कालेज विद्यार्थी जीवन में तथा बाद में भी बहुत ठाठबाट से रहते थे । अच्छे ड्रेस (सूट बूट कोट) पहनते थे । विमान से विदेश जाते थे । निश्चित ही उनकी अच्छी कमाई होती थी वकील पेशा में । बताते हैं कि दुनियां में सबसे अधिक डिग्री हासिल करने वाले थे। इससे स्पष्ट होता है कि वे most intelligent व्यक्ति थे ।
मैं सुना पढ़ा था कि आर्यों के ब्राह्मणों का दिमाग सबसे बड़ा होता था । उनकी तुलना में क्षत्रिय वैश्य शुद्र तथा भारत के मूल निवासी (OBC और ST) के दिमाग कमतर होते थे । (बाद में तो सभी जाति में दिमाग छोटे बड़े होने लगे हैं ।)
तो अम्बेडकर जी इतने अधिक intelligent कैसे हो गये? ऐसा तो नहीं रामायण के रचयीता बाल्मिकी (उस जमाने के most intelligent) ब्राह्मण रहे हों। बाद में उन्हें शुद्र बता दिया गया हो । वैसे ही अम्बेडकर जी भी दलित न हों । बाद में छोटे से बड़ा बताने के लिए, प्रेरणादायक कहानी बनाने के लिए उन्हें शुद्र बताया गया हो ।
जैसे - कुछ प्रेरणादायक सच्ची कथाएं..
जूता पालिशदार से जूता फेक्टरी का मालिक
भिखारी से राजा
चाय वाला से मंत्री
महान अम्बेडकर
ये भीम, बाबा , जय भीम वाले महान अम्बेडकर जी को और अधिक महान बनाने के लिए -
गांधी और नेहरु जी के बारे में झूठ और अफ़वाह फ़ैला रहे हैं ।
अम्बेडकर के बारे में बढ़ा चढ़ाकर झूठा प्रचार करते हैं ।
पूजा पाठ का विरोध करते हैं , उपहास करते हैं । लेकिन अम्बेडकर की पूजा करते हैं ।
सोमवार, 24 अगस्त 2020
धर्मो की आलोचना
दूसरों के धर्म की अपेक्षा अपने अपने धर्म के अनुपयुक्त अनुचित नियम परम्परा की आलोचना करनी चाहिए।
अहंकार मंत्र
अपने पक्का मकान और कार से सुख मिलता है लेकिन उसके side effect से बचने के लिए
इस मंत्र का ध्यान करें ।
झर रे झर मेरे अहंकार
********
यह श्री भवानी प्रसाद षड़ंगी पूर्व प्राचार्य नगर पालिका उच्चतर माध्यमिक शाला रायगढ़ की एक कविता की प्रथम पंक्ति है ।
रविवार, 23 अगस्त 2020
शनिवार, 22 अगस्त 2020
प्रेम और वासना
प्रेम और काम वासना अलग अलग हैं ।
प्रेम सागर है, आकाश है । वहां कोई स्वार्थ नहीं होता ।
प्रेम और वासना साथ साथ भी हो सकते हैं, नहीं भी ।जहाँ सिर्फ सेक्स सम्बन्ध है वहां जरूरी नहीं प्रेम भी हो ।
जहाँ प्रेम हो वहां जरूरी नहीं काम वासना हो ।
दरवाजा खुला है
मेरे दिल का दरवाजा खुला है सब के लिये ।
इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग
आओ सबसे प्यार करें ।
गुरुवार, 20 अगस्त 2020
अम्बेडकर और संविधान
ये जय भीम वाले कहते हैं
बाबा का संविधान
बाबा का कानून ।
अम्बेडकर जी संविधान सभा नहीं थे ।
सभा द्वारा बनाए गये प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष थे ।
मंगलवार, 18 अगस्त 2020
स्त्री को वस्तु मानते थे
पहले पुरुष स्त्री को वस्तु मानते थे ।
कुछ मुर्ख अब भी कहते हैं..
तु चीज बड़ी मस्त मस्त ।
धार्मिक यात्रा के लिए सरकारी खर्च क्यों
हज यात्रा या किसी भी धार्मिक समारोह में जाने के लिए सरकारी खर्च नहीं होना चाहिए ।
जो पुण्य कमाने के लिये तीर्थ यात्रा करना चाहता है वह खुद वहन करे ।
कोरोना मंत्र का रोज जाप करें
अब इस कोरोना मंत्र का रोज जाप करें तो देश समाज का कुछ हित हो सकता है ।
कृपया इसे share करें ।
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असतो मा सद्गमय ।
यः असत्यम् वदति, भ्रष्टाचारम् करोति , पापम् करोति ।
तस्य शरीरे कोरोना प्रविशतु ।
(जो झूठ कहे, भ्रष्टाचार करे, पाप करे उसके शरीर में कोरोना प्रवेश करे)
सोमवार, 17 अगस्त 2020
खूबसूरती का आनंद लें, तोड़ें नहीं
स्त्री के अंग प्रदर्शन, उसके छोटे कपड़े, उसकी खूबसूरती, उसकी सेक्सी फिगर, उस का अकेले घूमना, रात को अकेली यात्रा करना.... ये कोई कारण नहीं कि पुरुष स्त्री को लूट ले ।
स्त्री के कीमती गहने देख कर लूट लोगे ?
बैंक में रूपयों की गड्डी देख कर लूट लोगे?
फूलों की खूबसूरती देख कर तोड़ लोगे?
बिल्कुल गलत ।
रविवार, 16 अगस्त 2020
शादी और प्यार
शादी एक अलिखित समझौता है. दोनों सुख दुःख के भागीदार होते हैं . आनंद पूर्वक एक परिवार का सृजन करते हैं । साथ साथ रहकर स्वावाभाविक रूप से एक दूसरे से प्यार करते हैं । कुछ बुरे लोग होंते हैं जो समझौता तोड़ देते हैं ।
शनिवार, 15 अगस्त 2020
भोले शंकर जी
आर्य खुद को देवता कहते थे। यहाँ के मूल निवासियों राक्षस/दानव ।
आर्यों के क्षत्रिय राक्षसों को साम दाम दंड से परास्त कर राजा बन गये ।
शंकर जी भारत के मूल निवासी अनार्य थे । उनके ज्ञान और शक्ति को परास्त करने का साहस आर्य नहीं कर सके। आर्यों ने शंकर जी को महादेव की उपाधि देकर खुश कर लिये । अपने साथ मिला लिये ।
शंकर जी भोलेनाथ थे मन के सच्चे सरल । उन्हें जो भी कुछ भी माँगता वे तथास्तु कह कर दे देते थे ।
पुराने जमाने के संविधान
मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल.... पुराने जमाने में अपने अपने समाज के लिये संविधान थे ।
अब तो अपने अपने देश का संविधान है । यही हमारा धर्म होना चाहिए ।
एक दिन आएगा सरहदें नहीं होगी, संयुक्त राष्ट्र संघ का संविधान ही पूरी दुनियां का धर्म होगा ।
शुक्रवार, 14 अगस्त 2020
कोरोना मंत्र
इस कोरोना मंत्र का रोज जाप करें तो देश समाज का कुछ हित हो सकता है ।
कृपया इसे share करें ।
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असतो मा सद्गमय ।
यः असत्यम् वदति, भ्रष्टाचारम् करोति , पापम् करोति ।
तस्य शरीरे कोरोना प्रविशतु ।
(जो झूठ कहे, भ्रष्टाचार करे, पाप करे उसके शरीर में कोरोना प्रवेश करे)
हिं क्लिं फट् स्वाहा।
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स्वर्ग नर्क
स्वर्ग नर्क की कल्पना समाज से अत्याचार भ्रष्टाचार अपराध दूर करने के लिए की गई थी । लेकिन अब नर्क से बचने, स्वर्ग में आरक्षण के कई short cut तरीके खोज लिये गये हैं ।
प्रेमिका और पत्नी
प्रेमिका कई हो सकती है । उनकी संख्या घाटती जाती है।
पत्नी एक ही होती है जो जीवन भर साथ देती है ।
प्यार और इश्क
प्यार = प्रेम ।
इश्क = प्यार + कामेच्छा
प्रेम हर प्राणी, हर वस्तु से कर सकते हैं । पूरी दुनियां से कर सकते हैं ।
इश्क मनुष्य करते हैं मनुष्य से ।
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इतनी बड़ी दुनियां
इतने सारे लोग
आओ
सबसे प्यार करें ।
मंगलवार, 11 अगस्त 2020
पति पत्नी का प्यार
कुछ लोग कहते हैं कि पति पत्नी एक दूसरे को जीवन भर झेलते हैं याने उनके बीच प्यार नहीं होता ।
मेरे विचार से यह गलत है । साथ साथ रहने से तो मकान की दिवारों से भी प्यार हो जाता है फिर पति पत्नी के बीच क्यों नहीं होगा । अगर दोनों बदमाश नहीं तो निश्चित ही दोनों के बीच जीवन भर प्रेम रहेगा ।
राधा और मीरा को जीओगे तो
आज कृष्ण जी के पहले राधा का नाम लेते हैं ।
राधा कृष्ण राधा कृष्ण
भजते हैं ।
कई जगह राधा कृष्ण के मंदिर भी हैं ।
उनके जीवन काल में पता नहीं राधा के पति और परिवार की मनोदशा क्या थी ।
आज मीरा राधा को
गाओगे तो मिलेगी ताली
जीओगे तो मिलेगी गाली ।
सोमवार, 10 अगस्त 2020
जलाने CO2बनता है
लोबान, धूप अगरबत्ती, घी, तेल, मोमबत्ती , लकड़ी कुछ भी जलाने कार्बन डाई आक्साइड बनता है । इससे हवा में आक्सीजन की खपत होती है। याने आक्सीजन कम हो जाता है कार्बन डाई आक्साइड बढ़ जाता है ।
रविवार, 9 अगस्त 2020
लोग क्या कहेंगे
स्त्री को लोग क्या कहेंगे वाला डर ज्यादा होता है पुरुष को यह डर कम होता है ।
इसी लिये पुरुष के कई gf होते हैं लेकिन महिला के आम तौर से एक ।
इसी लिये पुरुष दुस्साहस कर कई से सम्बन्ध बना लेते हैं । यही समस्या है परिवार समाज का ।
यदि पपुरुष भी स्त्रियों की तरह डरते तो बदमाशी कम होती ।
खास बात.. ये लोग क्या कहेंगे... में कथित लोग स्त्रियां ही होती हैं लगभग 90%
शनिवार, 8 अगस्त 2020
प्यार और स्वास्थ्य
प्यार और स्वास्थ्य के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध है ।
प्यार को प्रदर्शित करने का भी महत्व है । घर में पति पत्नी प्यार का इजहार करने में झिझक न करें। अपने घर में खुल्लम खुल्ला प्यार करें । यह सोच कर कि हम तो 50 + हैं गम्भीरता का लबादा न ओढ़ें । कभी कभी शरारत भी करें । पत्नी कहे. . अरे क्या करते हो, दरवाजा खुला है.....
चेतन कौन
जो बिना सोच विचार किये पढ़े या सुने हुए को मान लेता है वह जड़ । जो बहुत सोच विचार कर मानता है या नकार देता है वह चेतन ।
शुक्रवार, 7 अगस्त 2020
सवाल ???
सवाल नहीं करने वाले भक्त बनते हैं जो कुछ पढ़ते सुनते हैं उसे मान लेते हैं ।
सवाल करने वाले वैज्ञानिक सोच वाले होते हैं, वे सोच समझकर मानते हैं ।
बुधवार, 5 अगस्त 2020
आलोचना
धार्मिक परम्पराओं, नियमों, मान्यताओं की सार्थक तर्क आधार युक्त वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आलोचना करना उचित है । यह किसी धर्म व्यक्ति की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है ।
धर्म
यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो, जिसे धारण करें वह हमारा धर्म।
बहुत पहले अलग अलग भू भागों में देश काल परिस्थिति अनुसार अलग अलग धर्म थे ।
हमारा संविधान मानवतावादी है ।
अब हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए ।
आर्य अनार्य कौन
आर्य जब भारत में आये अपने साथ अपनी सेवा के लिए शुद्रों को लेकर आये थे या फिर भारत के गरीब जो OBC की सेवा करते थे उन्हें आर्यों ने शुद्र कहा होगा ।
भारत के मूल निवासी OBC और ST को उन्होने राक्षस /अनार्य कहा है ।
आर्य यहाँ के राक्षसों से युद्ध कर साम दाम दंड से अपने अधीन कर लिये ।
पहले ब्राह्मण केवल अपनी जाति, क्षत्रीय, वैश्य के घर में पूजा पाठ, यज्ञ हवन, .. करते थे । उनकी संख्या कम होने से पर्याप्त आय नहीं होती थी । बाद में कथित अनार्य राक्षसों के घर भी जाने लगे । उनके घर में भी पूजा पाठ.... करने लगे ।
इससे OBC और ST अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने लगे । वे भी दलितों को हेय दृष्टि से देखने लगे तथा उन्हें अस्पृश्य मानने लगे ।
ज्ञातव्य है कि ब्राह्मण आज भी कथित शुद्र /दकित के घर पूजा पाठ यज्ञ हवन नहीं करते ।
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एक कथित मूल निवासी जय भीम वाले ने facebook पर लिखा कि OBC और ST भी दलित हैं ।
इस से मैं सहमत नहीं हूं । इसलिए उपर्युक्त पोस्ट डाला ।
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स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं मानवता वादी हूं । बचपन से ही छूआ छूत नहीं मानता ।
मंगलवार, 4 अगस्त 2020
राक्षस कौन?
आर्य जब भारत में आये अपने साथ अपनी सेवा के लिए शुद्रों को लेकर आये थे ।
भारत के मूल निवासी OBC और ST को उन्होने राक्षस कहा है ।
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