शुक्रवार, 9 मार्च 2018

चिंतन

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पोस्ट लंबी ज़रूर है, मगर ग़ौरो फिक्र वाली है। गुज़ारिश है पढ़े ज़रूर_ ahmed kaleem
एक दूसरे मित्र ने पूछा है कि इस्लाम के साधक मक्का में हज के लिए जाते हैं, क्या वह भी ध्यान नहीं है?
वह भी ध्यान की एक प्रक्रिया है। लेकिन शायद ठीक नहीं होगा कहना कि है, कहना होगा ठीक कि थी, अब है नहीं। कभी थी। दुनिया में सारे धर्मों का जन्म, ध्यान की प्रक्रिया के बिना नहीं हुआ है। कोई धर्म दुनिया में जन्म नहीं ले सकता ध्यान की गहरी प्रक्रिया के बिना। लेकिन सब ध्यान की प्रक्रियाएं धीरे-धीरे रिचुअल हो जाती हैं, क्रियाकांड हो जाती हैं। लोग उनको औपचारिक ढंग से करने लगते हैं--फॉर्मल। अब चूंकि एक आदमी मुसलमान है, इसलिए हज कर आता है। किसी ध्यान के लिए नहीं, किसी परमात्मा के लिए नहीं। क्योंकि अगर ध्यान और परमात्मा का खयाल हो, तो मक्का तक जाने की जरूरत नहीं है, वह तो इसी जमीन के टुकड़े पर हो सकता है। मक्का तक जाने की जो जरूरत पैदा होती है, वह मुसलमान होने से पैदा होती है, वह ध्यान के लिए नहीं पैदा होती। काशी जाने की जरूरत हिंदू होने से पैदा होती है, ध्यान के लिए पैदा नहीं होती। गिरनार जाने की जरूरत जैन होने से पैदा होती है, ध्यान के लिए नहीं होती।
अब यह बड़े मजे की बात है कि जैन अगर मक्का में रह रहा होगा तो गिरनार आएगा। और मुसलमान अगर जूनागढ़ में रह रहा होगा तो मक्का में जाएगा। निपट पागलपन है। काशी का मुसलमान मक्का जाएगा, मक्का का हिंदू काशी आएगा। बिलकुल पागलपन है। अगर ध्यान का खयाल है तो यह कहीं भी हो सकता है। इस पृथ्वी का कोई भी कोना परमात्मा से वंचित नहीं है। मक्का में भी हो सकता है, मदीना में भी हो सकता है, बंबई में भी हो सकता है। और जिसे ध्यान की प्रक्रिया का कोई पता नहीं है उसे मक्का में भी नहीं होगा, काशी में भी नहीं होगा, कैलाश पर भी नहीं होगा।
इसलिए असली सवाल प्रक्रिया को समझने का है। हज की प्राथमिक प्रक्रिया ध्यान ही थी। समस्त तीर्थों का जन्म ध्यान के ही आधार पर हुआ था, समस्त धर्मों का भी। लेकिन फिर सब खो जाता है। और पीछे जो लोग जन्म से धार्मिक होते हैं, बाइ बर्थ, उनसे ज्यादा झूठे धार्मिक आदमी दुनिया में नहीं होते। लेकिन हम सभी लोग जन्म से धार्मिक होते हैं। और तो हमारा धार्मिक होने का कोई आधार ही नहीं होता।
जन्म से कोई धार्मिक हो सकता है? जन्म से किसी को शिक्षित बनाने लगें, उस दिन पता चलेगा आपको--शिक्षित बाप का बेटा शिक्षित हो जाए जन्म से और डाक्टर का बेटा डाक्टर हो जाए जन्म से--तब आपको पता चलेगा कि कितना खतरा दुनिया में हो जाएगा।
लेकिन मुसलमान, हिंदू, ईसाई, धार्मिक जन्म से हो रहे हैं। बाप भी जन्म से था, उनका बाप भी जन्म से था। अगर पिछला बाप भी डाक्टर रहा हो तो हो सकता है बाप के पास रहते-रहते थोड़ा आदमी सीख ले। लेकिन किसी का बाप चौदह सौ साल पहले मर चुका, किसी का पांच हजार साल पहले, किसी का दस हजार साल पहले। और जिसका बाप जितना पहले मर चुका, वह सोचता है, उसके पास उतना ही कीमती धर्म है। सारी धर्म की प्रक्रियाएं ध्यान से ही संबंधित हैं। लेकिन ध्यान को ही सीधे समझ लेना उचित है बजाय उन प्रक्रियाओं को समझने के।
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शिक्षा

"जिसने भी मनुस्मृति में यह लिखा है कि शूद्र को वेद शास्त्र पढ़ने की इजाजत नहीं है;यदि वह ऐसा करता है अथवा श्रवण करता है तो उसके कानों में गर्म पिघला हुआ शीशा डाल देना चाहिए। तभी उसका प्रायश्चित होगा।"
यह कितना क्रूर और हिंसक बात है कि किसी को विद्या अध्ययन और ज्ञान प्राप्ति के लिए न केवल रोकता है बल्कि उस पर अमानवीय अत्याचार करने पर भी आमादा है।
वर्ण व्यवस्था के इस कुरूप चरित्र की आजकल बहुत चर्चा हो रही है। बेहतर होगा मनुस्मृति को सरकार बैन कर दे तथा इसकी सभी प्रतियाँ सार्वजनिक रूप से नष्ट कर दी जाएँ।
यही प्रजातंत्र का तकाजा है अन्यथा सरकार के होने न होने का क्या मतलब है?वर्ण व्यवस्था तथा जाति प्रथा पर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस कथन से क्या आप सहमत हैं अथवा कोई आपत्ति है?कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर देवें।
पद्ममुख पंडा

गुरुवार, 8 मार्च 2018

धर्म

"नया टीचर"

क्लास में आते ही 
नये टीचर ने 

बच्चों को 
अपना लंबा चौड़ा परिचय दिया 

बातों ही बातों में 
उसने जान लिया की 
लड़कियों के इस क्लास में 
सबसे तेज और सबसे आगे 
कौन सी लड़की है ?

उसने खामोश सी बैठी 
उस लड़की से पूछा 

बेटा आपका नाम क्या है ?

लड़की खड़ी हुई और बोली 
जी सर , मेरा नाम है जूही

टीचर ने फिर पूछा

पूरा नाम बताओ बेटा ?

जैसे उस लड़की ने 
नाम मे कुछ छुपा रखा हो 

लड़की ने फिर कहा 

जी सर , मेरा पूरा नाम जूही ही है 

टीचर ने सवाल बदल दिया

और पूछा कि अच्छा 
तुम्हारे पापा का नाम बताओ ?

लड़की ने जवाब दिया
जी सर , मेरे पापा का नाम है शमशेर !!

टीचर ने फिर पूछा 
अपने पापा का पूरा नाम बताओ 

लड़की ने जवाब दिया

मेरे पापा का पूरा नाम
शमशेर ही है सर जी 

अब टीचर कुछ सोचकर बोला

अच्छा अपनी माँ का पूरा नाम बताओ

लड़की ने जवाब दिया 
सर जी , मेरी माँ का पूरा नाम है निशा 

टीचर के पसीने छूट चुके थे
क्योंकि अब तक 
वो उस लड़की की फैमिली के 
पूरे बायोडाटा में 
जो एक चीज 
ढूंढने की कोशिश कर रहा था 
वो उसे नही मिला था !!

उसने आखिरी पैंतरा आजमाया

बोला -अच्छा तुम कितने भाई बहन हो ?

टीचर ने सोचा कि 
जो चीज वो ढूंढ रहा है
शायद इसके भाई बहनों के नाम मे वो क्लू मिल जाये ?

लड़की ने टीचर के
इस सवाल का भी 

बड़ी मासूमियत से जवाब दिया

बोली -सर जी , मैं अकेली हूँ
मेरे कोई भाई बहन नही है !!

अब टीचर ने 
सीधा और निर्णायक सवाल पूछा 

बेटे तुम्हारा धर्म क्या है ?

लड़की ने 
इस सीधे से सवाल का भी 
सीधा सा जवाब दिया 

बोली -सर मैं एक विद्यार्थी हूँ
और ज्ञान प्राप्त करना ही
मेरा धर्म है !

मुझे पता है की 
अब आप मेरे पेरेंट्स का धर्म पूछोगे !!

तो मैं आपको बता दूं कि 
मेरे पापा का धर्म है मुझे पढ़ाना 
और मेरी मम्मी की जरूरतों को 
पूरा करना

और मेरी मम्मी का धर्म है 
मेरी देखभाल
और मेरे पापा की जरूरतों को 
पूरा करना 

लड़की का जवाब सुनकर
टीचर के होश उड़ गये 

उसने टेबल पर रखे 
पानी के ग्लास की ओर देखा
लेकिन उसे उठाकर पीना भूल गया !

तभी लड़की की आवाज 
एक बार फिर उसके कानों में 
किसी धमाके की तरह गुंजी 

सर मैं विज्ञान की छात्रा हूँ 
और एक साइंटिस्ट बनना चाहती हूँ !

जब अपनी पढ़ाई पूरी कर लुंगी 
और अपने माँ बाप के 
सपनों को पूरा कर लुंगी 

तब कभी फुरसत में 
सभी धर्मों के अध्ययन में जुटूंगी 

और जो भी धर्म 
विज्ञान की कसौटी पर 
खरा उतरेगा 
उसे अपना लुंगी

लेकिन अगर 
धर्मग्रंथों के उन पन्नों में 
एक भी बात विज्ञान के विरुद्ध हुई 
तो मैं उस पूरी पवित्र किताब को 
अपवित्र समझूँगी 

और उसे कूड़े के ढेर में
फेंक दूंगी !

क्योंकि साइंस कहता है 
एक गिलास दूध में 
अगर एक बूंद भी
केरोसिन मिली हो तो 

पूरा का पूरा दूध ही बेकार हो जाता है !

लड़की की बात खत्म होते ही 
पूरी क्लास 
साथी लड़कियों की 
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी !!

टीचर के पसीने छूट चुके थे !!

तालियों की गूंज उसके कानों में
गोलियों की गड़गड़ाहट की तरह 
सुनाई दे रहे थे !

उसने आंखों पर लगे 
धर्म के मोटे चश्मे को उतार कर 
कुछ देर के लिए टेबल पर रख दिया

और पानी का ग्लास उठाकर
एक ही सांस में गटक लिया 

थोड़ी हिम्मत जुटा कर 
लड़की से बिना नजर मिलाये ही बोला !!

बेटा.....

I Proud of you....
***""
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महिला दिवस पर


यत्र नार्यस्तु पूज्न्ते
             रमन्ते  तत्र  देवता ।
       **************"
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारत के संदर्भ में प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए|

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

राष्ट्र द्रोही

नक्सलवाद उद्देश्य आर्थिक समानतता लाना है| मार पीट लूट मार चोरी डकैती हत्या करके क्या उचित है?
असहमति के कारण  हत्या कदापि उचित नहीं| असभ्य स्वार्थी नीच जलनखेर कपटी राष्ट्रद्रोही संविधान द्रोही हैं नक्सलवादी और गांधी के हत्यारे गोडसेप्रेमी|

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

मोदी जी और भगवान में खींचातानी

   हमारे देश में भ्रष्टाचार शिखर पर है|
इधर मोदी जी भ्रष्टाचार मिटाने के लिए नए नए उपाय सोच रहे हैं, कर रहे हैं|
      लेकिन  हमारे भगवान देवी देवता हमारे पाप धोने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं| बस थोड़ा मस्का लगाना पड़ता है सामर्थ्य अनुसार|

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

कांग्रेस के साठ वर्ष

Praveen Giri -
एक घर में जवान बच्चों ने टीवी पर लगातार देश के पीएम का भाषण में सुना कि 60 वर्षो से सत्ताधारी सरकारों ने कुछ नही किया उन्होंने देश को लूटने का ही काम किया, जिससे कारण देश में तरक्की नहीं हुई है।
तब बच्चों ने अपने पिता से पूछा कि,
पापा क्या ये सत्य हे?
क्या देश की जनता मुर्ख थी ?
जो मतदान पूर्वक ऐसी सरकारे चुनती रही!
अगर सत्ताधारी प्रमुख ऐसे भ्रष्ट थे तो उनको सजा क्यों नही मिली? क्यों आजतक हम इन्हें महापुरुषो में गिनते हे ?
बच्चों के ऐसे सवाल पर पिता ने कहा की बेटा इसकी हकीकत जाननी हे तो एक काम करते हे अपने पूरे परिवार के सदस्य कल बिजली, वाहन, मोबाइल, टीवी, गैस रहित जीवन बिताएंगे।
और इनसे सम्बन्धित किसी भी वस्तु का प्रयोग नही करेंगे
*अगले दिन प्रातः घर की महिलाएं कुए से पानी लाई , थके हाल लकड़ी जलाकर चूल्हे से खाना बनाया , पैदल ही 1 किमी दूर दूकान पर धंधा करने गए , बिना पंखे के गर्मी में बेहाल दूकान में व्यापार किया , आवश्यक होने पर भी व्यापारी और ग्राहक से बात करने मोबाइल का प्रयोग नही कर पाए , रात को पैदल ही थके थके घर आये , घर की महिलाए दिनभर काम करके गर्मी में चूल्हे पर खाना बनाकर लथपथ हो गयी थी फिर लालटेन की रौशनी में सबने खाना खाया।*
अंत में टीवी बन्द होने से जल्दी जब सोने गये लेकिन गर्मी में बिना पंखे की नींद नही आयी *तब घर के सभी सदस्य बोले पापा जी ऐसी जिंदगी तो अब एक पल भी ओर नही जी सकते आगे कभी ऐसा प्रयोग नही करवाना।*
पापा बोले -बेटा तुम एक दिन में ही इतने अधीर हो गए तो सोचो आज से 50-60 वर्ष पूर्व तुम्हारे बाप-दादा ऐसी ही जिंदगी जीते थे। लेकिन
*ये आज की जो इतनी सुविधाओं की जिंदगी देख रहे हो वो हमारी चाहत,मेहनत और 60 वर्षो में देश की सत्ताधारी सरकारों के लगातार प्रयासो से ही प्राप्त हुई है।*
*सड़के, रेलमार्ग, बिजली, हॉस्पिटल, स्कुल, गैस चूल्हे, दूरसंचार, कम्युटर, लैपटॉप जैसी सुविधाओं के साथ साथ अनेकों उपग्रह, चन्द्रयान, मंगलयान और परमाणु ऊर्जा सम्पन्नता इत्यादि सभी कार्य विभिन्न सरकारी प्रयासों से मोदी जी के प्रधानमन्त्री बनने से पहले ही सम्भव हो गई है।*
पिता की बाते सुनकर बेटा बोला - पापा 60 वर्षो में हमारी जिंदगी इतनी बदली अपना देश इतना बदला तो हमारे मोदी जी ऐसा क्यों बोलते हैं कि 60 वर्षों में देश पिछड़ गया!!
पापा बोले- बेटा ये उनकी अज्ञानता है, वे दूसरों से अलग दिखने के प्रयास में अहंकारी हो गए हैं।
*भारत बड़ी आबादी, अनेकों मान्यताओं, भिन्न परिवेश और दूरस्थ ग्रामों में फैला हुआ देश है। जिसका समग्र विकास सबके विकास से ही शनैः शनैः ही होगा। कोई अगर कहे कि 60 दिन में छः महीने में या छः साल में देश का पूरा विकास हो जायेगा तो वह झूठ ही होगा।*
यह हमारा 60 वर्षो का अनुभव है, जिसने इस भारत की विकास यात्रा को देखा है, जिया है और यही सत्य है.
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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

किडनी दान

कोई अंग दान देकर किसी की जान बचाना चाहे तो उसे प्रोत्साहन करना चाहिए|
खेद है की हमारे देश का नियम किसी को किडनी प्रदान करने से रोक रहा है|
इस नियम में मानवीयता की दृष्टि से उचित संशोशन परिवर्तन करना चाहिए|

14 फरवरी

आज कोई शहीद दिवस या मातृ पितृ दिवस नहीं है|
आज वेलेंटाइन डे है प्रेम दिवस|

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

मनुष्य के लिए मांसाहार बनाम शाकाहार

 वनस्पति में मस्तिष्क नहीं होता| प्राणियों में होता है| इसीलिए वह सोच विचार करता है, हँसता है, रोता है| किसी को मार कर, किसी को रुलाकर उसका मांस खाना क्रूरता है| केवल स्वाद के लिए मांसाहार करना उचित नहीं है जबकि हमारे लिए बेहत्तर विकल्प शाकाहार मौजूद है|

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

दिमाग का उपयोग

जो अपने दिमाग का खूब उपयोग करते हैं वे  intelligent होते हैं| जो तोता जैसे रटते हैं बिना सोचे समझे वे लकीर के फकीर होते हैं|

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

भारतीय संस्कृति और अंतर्जातीय विवाह

वैदिक, पौराणिक काल में, द्वापर त्रेता युग में क्या अंतर्जातीय विवाह होते थे| यदि हां तो कृपया उदाहरण सहित जानकारी दें|

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

मुर्गा मांस खाना उचित है?

मांसाहारी बकरा बकरी, भेड़, मछली, हिरण चिड़िया ...सब खाते हैं लेकिन कुछ जाति में मुर्गा मांस का निषेध है| जातीय सामाजिक संगठन वाले मुर्गा मांस खाने वाले को दंडित करते हैं?
मुर्गा मांस से क्यों परहेज करते हैं? इससे खाने वाले को या समाज को क्या क्या हानि होती है?

मुर्गा मांस खाना उचित है?

मांसाहारी बकरा, भेड़, मछली, हिरण चिड़िया ...सब खाते हैं लेकिन कुछ जाति में मुर्गा मांस का निषेध है|
निषेध के बावजूद बहुत लोग खाते हैं | सामाजिक नियम का पालन नहीं करते तो नियम बनाने का क्या औचित्य?
जातीय सामाजिक संगठन वाले मुर्गा मांस खाने वाले को दंडित करते हैं?
मुर्गा मांस से क्यों परहेज करते हैं? खाने वाले को या समाज को क्या क्या हानि होती है?

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

लड़कियों की व्यथा

हमारे समाज के लड़के कम सुंदर लड़कियों को पसंद नहीं करते| फलस्वरूप कई लड़कियां घर से भाग कर अपनी मर्जी से शादी कर लेती हैं जिसे परिवार, समाज स्वीकार नहीं करता|  कुछ विवाह की उम्मीद लिए बूढ़ी हो जाती हैं| यह बहुत दुखद स्थिति है| हमारा जाति समाज उन लड़कियों के जीवन बसाने के लिए कुछ नहीं करता किंतु दंडित करने के लिए तत्पर रहता है|

बुधवार, 20 दिसंबर 2017

अंतर्जातीय विवाह पर कठोर दंड

छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ पुसौर क्षेत्र के गाँव की एक इंटेलिजेंट लड़की के आई टी रायगढ़ से इंजिनियरिंग पढ़कर एक साल अध्यापन की| NIT राउरकेला में पी जी पढ़ाई पूरी कर वह इंजिनियर कॉलेज भुवनेश्वर में प्राध्यापक है|
     एक विचारशील सज्जन श्री के एन प्रधान ने उस लड़की की व्यथा सुनाई|
    उसके पिता जीअपने कई परिचितों रिश्तेदारों से बोले - "हामर झीअ र लागी पीला देखबअ  (हमारी लड़की के लिए लड़का देखेंगे)| समय बीतता रहा| हमारे कोलता समाज का कोई पढ़ा लिखा लड़का उस लड़की को पसंद नहीं किया| क्योंकि वह सुंदर नहीं थी, काली थी| इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार नहीं थी|
शादी की उम्र निकल रही थी | अन्ततः उसने एक विजातीय लड़के से विवाह कर लिया| (उसके इस साहसपूर्ण कदम के लिए मैं बधाई देना चाहता था किंतु मेरे मोबाइल में उसका नम्बर डिलिट हो गया था|) उन्होंने आगे बताया कि उनके गाँव में उस परिवार को जात भात करने, जुर्माना करने, जाति बहिष्कार करने की चर्चा चल रही है| शायद उसके माता पिता को अपनी उस पुत्री को मृत मानकर बिसर खाना पड़ सकता है| जाति समाज को भोज देना पड़ेगा|
                   ************
       हमारे जाति - समाज द्वारा उस लड़की के लिए सहयोग सहायता कुछ नहीं लेकिन भोज खाएंगे, दंडित करेंगे, उसे मृत मान लेंगे| उस लड़की का अपने माता पिता के घर आना प्रतिबंधित होगा| अन्यथा पूरे परिवार को जाति से बहिष्कार|
      वाह! हम और हमारे समाज की यह क्रूरता भी अद्भुत है| हम महान| हमारी संस्कृति महान?
               *********
      श्री केदार नाथ प्रधान जी से मैंने कहा कि उस नव दम्पति को रायगढ़ में आशीर्वाद समारोह का आयोजन करना चाहिए|
     हमें पहुँचकर उन्हें शुभकामना देनी चाहिए|
मेरे इस विचार से वे सहमत हुए|

समाज सेवी श्री एस डी पंडा

छत्तीसगढ़ रायगढ़ पूर्वांचल के एक महान समाज सेवी
   *************
        हेम सुंदर गुप्ता शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला महापल्ली के पूर्व प्राचार्य, सेवा निवृत शिक्षा अधिकारी श्री शशिधर पंडा जी  ग्राम महापल्ली के निवासी हैं|
        वे सेवा निवृत्ति पश्चात अपना पूरा समय समाज सेवा में देते हैं|
           उन्होंने महापल्ली में जन सहयोग से दो मंदिरों की स्थापना की|
           एक गायत्री मंदिर जहाँ देवी गायत्री तथा अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं| रोज सुबह शाम पंडा जी आकर पूजा करते हैं| कभी कभी यज्ञ हवन भी कराते हैं|
            एक और मंदिर बटमूल आश्रम महाविद्यालय जहाँ किसी देवी देवता की प्रतिमा नहीं है|  वहाँ साक्षात देवी देवताओं के द्वारा देवों के देव महादेव श्री शशिधर पंडा जी के मार्गदर्शन में शिक्षार्थियों को उत्तम शिक्षा दी जाती है|
           श्रद्धेय  श्री पंडा जी रोज महाविद्यालय में पूरा समय देते हैं|         
            इस विद्या मंदिर के  महादेव और  देवी देवताओं को नमन|

समाज सेवी श्री मनोज स्वाईं

समाज सेवा करने के लिए किसी जातीय सामाजिक संगठन का पदाधिकारी होना आवश्यक नहीं है|
शिक्षा के लिए समर्पित छत्तीसगढ़ रायगढ़ पूर्वांचल ग्राम कुकुर्दा के श्री मनोज स्वाईं जो स्कूल शिक्षा सुधार के लिए पागल हो चुके हैं, जो तन मन धन दे रहे हैं, स्कूलों में जाकर बहुत परिश्रम कर रहे हैं|
क्या यह समाज सेवा नहीं है?

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

समाज सेवा

एक जातीय सामाजिक संगठन के बड़े नेता ने मुझसे कहा -  "आप सेवा निवृत्ति के बाद समाज सेवा करते हैं?"
मैंने कहा - "हाँ| अपने तरीके से  मुझसे जो बनता है करता हूँ|
उन्होंने कहा - " नहीं, वो नहीं| मैं अपनी जाति समाज की बात कर रहा हूँ|"
मैंने कहा - "मैं ऐसा कुछ तो नहीं करता|"
         ******************
मैं अपने गाँव के  सैकड़ों विद्यार्थियों को घर में सुबह शाम कई साल निःशुल्क पढ़ाया| अपने गाँव में गरीब विद्यार्थियों के सहयोग के लिए विद्यार्थियों के सहयोग से गाँधी निधि का संचालन किया| गाँव में एक पुस्तकालय की स्थापना कर सैकड़ों पुस्तकें देने के अलावा कई पत्रिकाएँ नियमित मंगाता था| अपने गाँव में हर साल होने वाले साँस्कृतिक कार्यक्रम में कई साल तक विद्यार्थियों के उत्साह वर्धनार्थ  पुरष्कार का व्यय वहन किया|
अपने स्कूल के कई जरूरतमंद विद्यार्थियों को परीक्षा फीस, पाठ्य पुस्तक दिया हूँ| सेवा निवृत्ति के बाद बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ के पुस्तकालय को जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए हर साल एक सेट विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित पुस्तकें देता हूँ| छ: पत्रिकाएँ (हंस, समर लोक, लोकाक्षर, अभियान, तर्कशील, आरोग्य) डाक से सीधे महाविद्यालय को भेजने के लिए आजीवन सदस्यता शुल्क पटाया हूँ| पत्रिकाएँ नियमित पहुँच रही हैं| इसके अलावा उस विद्या मंदिर में एक बार दान भी दिया| क्योंकि वह एक ऐसा मंदिर है जहाँ साक्षात देवी देवता देवों के देव महादेव श्री शशिधर पंडा जी के मार्गदर्शन में बहुत कम वेतन लेकर विद्या दान करते हैं|
     कभी कभी मेरे मित्र आनंद प्रधान के साथ हमारे क्षेत्र के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं| इंटेलिजेंट बनने के गुर बताते हैं| सामान्य ज्ञान, स्वास्थ्य की बातें बताते हैं|
      हमारे गाँव लोइंग के सेवा निवृत शिक्षक  रविवारीय स्वाध्याय केंद्र में पढ़ाते हैं|
       मैं इतने में ही खुश हूँ| इससे ज्यादा नहीं कर सकता|
             ***********
            हमारे रायगढ़ पूर्वांचल में महान व्यक्ति भी हैं जो अपनी ही जाति के़ लिए नहीं सम्पूर्ण समाज की सेवा करते हैं| अधिकतम समय तथा तन मन धन दे रहे हैं| उन्हें नमन करते हुए उनकी गाथा लिखूंगा|

रविवार, 17 दिसंबर 2017

यः धारयति सः धर्मः

यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करे वह उसका धर्म है|
जरूरी नहीं कि कोई हिंदू मुस्लिम.... धर्म ही धारण करे| वह मानवता सच्चाई प्रेम को भी धारण कर सकता है| वही उसका धर्म होगा|

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

संस्कृति रक्षा के ठेकेदारों का गणवेश

यह हाफ पेंट हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप था? संस्कृति रक्षा के ठेकेदारों के द्वारा जांघ दिखाऊ गणवेश क्यों तय किया गया सौ साल तक चलाते रहे| इस वेष से क्या लाभ था? क्या कोई वैज्ञानिक तथ्य है या मशीनरी युग के लिए सुविधाजनक मानते रहे अब तक? अब बदल दिए फुल पेंट क्यों?

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

जैसा आहार वैसा विचार?

पश्चिमी देशों में मांसाहारी अधिक हैं| हमारे देश में कुछ मांस शाकाहारी हैं और कुछ शाकाहारी| कहते हैं जैसा आहार वैसा विचार, वैसा ही व्यवहार होगा|
तो क्या हमारे देश में पश्चिम की अपेक्षा इंसानियत अधिक है?
क्या  मांसाहारी क्रूर चोर डाकू घटिया भ्रष्ट कपटी बेइमान जलनखोर स्वार्थी .... ... होते हैं?

सोमवार, 27 नवंबर 2017

पूजा/प्यार

कब तक शव ममियों की पूजा करते रहोगेे? इतनी बड़ी दुनियां  इतने सारे लोग| आओ सबसे प्यार करें|

सार्वजनिक जगह का दुरुयोग

कोई भी धार्मिक कार्य गतिविधि जुलुस सार्वजनिक जगह सड़क आदि पर नहीं होना चाहिए|

अम्बेडकर जी महान

अम्बेडकर जी ने संविधान का  प्रारूप लिखा जिसे  पारित किया सभा ने| अर्थात सब के मत से संविधान बना| केवल अम्बेडकर की नहीं चल सकती थी यह समझना चाहिए| अम्बेडकर जी महान थे बेशक लेकिन उन्हें  सबसे महान सिद्ध करने के लिए बाकी सबको कमतर बताना गलत है , मूर्खता है|

शनिवार, 25 नवंबर 2017

संस्कृति परम्परा में परिवर्तन

हमारी संस्कृति परम्पराओं में परिवर्तन--
***"*
पहले---
बहुपत्नी विवाह, सती प्रथा, बाल विवाह,. .., ...
धोती कुरता, साड़ी, बैल गाड़ी, .. , ..  ......, ...
"""""""
आज--
परम्परा संस्कृति विरुद्ध _
**********
हिंदू विवाह अधिनियम, .., .  , ....
आम जन के लिए स्कूल कॉलेज.. ,.. , ...
आधुनिक पहनावा, बिजली, स्टील प्लास्टिक बर्तन, गैस चुल्हा, रेफ्रिजेटर, कम्प्युटर, टी वी, मोबाइल.., ... ,    ..

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

अप्प दीपो भव

विभिन्न धर्मो के नियमों तथा मापुरुषों के विचारों में बहुत विभिन्नता है| सबका का पालन अनुसरण संभव नहीं| इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा अप्प दीपो भव|

इंसानियत ही मेरा धर्म

मैं धर्म निरपेक्ष secular हूं, धर्म निरपेक्ष रहूंगा| गाली गलौज करना मेरा धर्म नहीं है| इंसान हूं, इंसानियत मेरा धर्म है|

सुधार

पहले अपने अंदर के दोष को देखें | अपने और अपने धर्म की बुराई दूर करें तो हम और हमारा धर्म बेहत्तर होंगे| हम सुधरें तो युग सुधरेगा|

अंतर्जातीय विवाह

आश्चर्य है हम आज भी कितने असहिष्णु हैं|
********
अंतर्जातीय विवाह भारतीय दंड संहिता के अनुसार कोई अपराध नहीं है| शासन ऐसे विवाह को प्रोत्साहन करती है|
लेकिन कुछ जातीय सामाजिक संगठन इस विवाह को स्वीकार नहीं करते| उस परिवार को बहिष्कार का दंड दिया जाता है| बहिष्कार से बचने के लिए समाज के पारम्परिक नियम अनुसार लड़़का/लड़की को मृत मानकर उनके घर के लोगों को बिसर खाना पड़ता है तथा डाति समाज को  मृतक भोज देना पड़ता है|
हमारे समाज के इस क्रूरता के कारण अंतर्जातीय विवाह के इच्छुक लड़के लड़कियां आत्महत्या भी कर लेते हैं|
***********
क्या इसपर विचार नहीं करना चाहिए? या परम्परा को ढोते रहना ही उचित है?
******"
पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह समाज में स्वीकार था| फिर आज क्यों नहीं?

हमारा संविधान बनता या नहीं

एक प्रश्न?
ये बाबा भीमराव अम्बेडकर जी नहीं होते तो हमारे भारत का संविधान बनता या नहीं?

आत्मा की अवधारणा

एक अनुत्तरित, मन को अशांत कर देने वाला प्रश्न - मृत्यु पश्चात क्या? इसका जबाब है आत्मा की  कल्पित अवधारणा | मन को सकून  देता है मान लेने से|

गीता में कहा है- जिस तरह शरीर पूराने वस्त्र को त्याग कर नया धारण करता है वैसे ही आत्मा समय आने पर  पूराने शरीर को त्याग कर नए रूप में जन्म लेती है|

बुधवार, 15 नवंबर 2017

नकल करना ही धर्म है?


Meraj Anwar
ये तो सभी जानते हैं कि अपने पैग़म्बर की नक़ल करना सुन्नत कहलाता है। मसलन दाढ़ी रखना, क़ुर्बानी करना, कुर्ता पायज़ाम पहनना, बकरी चराना, लौकी खाना... ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जिसे सुन्नत कहा जाता है।
पर कुल मिलाकर सारा का सारा सुन्नत केवल दाढ़ी बढ़ाना, मूँछे काटना, छोटा पायज़ाम पहनना और बड़ा कुर्ता पहनना पर ही क्यूँ अटक गया हैं? और लोग इसे कट्टरता से मानते भी हैं। माने दाढ़ी के बारे में कुछ कह दो तो लोग ग़ुस्सा हो जाते हैं। इस्लाम से ख़ारिज तक बता देते हैं। ज़िंदगी भर लोग धार्मिक कृत्य मानकर दाढ़ी ढोते रहते हैं...
जितनी कट्टरता से दाढ़ी ढोया जाता है उतनी कट्टरता से रोज़ लौकी खाना, बकरी चराना, खेत में लोटा लेकर जाना, ऊँट पर सवारी करना... आदि इत्यादि क्यूँ नही माना जाता है?
या फिर दाढ़ी-मूँछ कपड़े को एक धार्मिक सिम्बल बना देने की जगह... फ़ैशन के हिसाब से क्यूँ नही बदलते रहते हैं लोग? जैसे कि जब मन हो लौकी खाना और जब मन हो भिंडी..

रविवार, 12 नवंबर 2017

हमारी उदार संस्कृति

हमारी हिंदू संस्कृति मुस्लिम जैसी संकीर्ण नहीं, उदार है| हमारे ऋषि जाबालि चार्वाक, गौतम बुद्ध, भगत सिंह नास्तिक थे|

शनिवार, 11 नवंबर 2017

पोस्ट कार्ड से जन्म

हम बहुत चालाक हैं इसलिए हमने अधिक भगवान देवी देवता पैदा कर लिए| संतोषी माता और साईं भगवान का जन्म पोस्ट कार्ड से हु़आ|

इंसानियत

नास्तिक अधार्मिक नहीं होता| उसका धर्म इंसानियत होता है| जरुरी नहीं कि तथाकथित धार्मिक हिंदू मुस्लिम .. इंसानियत को मानते हों|

धार्मिक कट्टरता

मुस्लिम में हिंदुओं से अधिक कट्टरता और संकीर्णता होती है इसलिए हिंदुओं में सेकुलर , नास्तिक अधिक होते हैं मुस्लिम की अपेक्षा|

अहंकार

इंसानियत के दुश्मन ये अहंकार| हमारी जाति महान| हमारा धर्म महान| हमारा देश महान| हमारी संस्कृति महान|

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

धर्म

सभी धर्म इंसानियत के दुश्मन हैं| जब तक दुनियां में ये धर्म बने रहेंगे प्रेम, इमानदारी, मानवता में कमी आती रहेगी|

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

आस्तिक से नास्तिक

खाली दिमाग में आस्था भरकर आस्तिक बनाया जाता है| सोच समझकर बाद में कुछ लोग नास्तिक बन जाते हैं| जैसे ऋषि चार्वाक, ऋषि जाबालि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह, डॉ कोबूर.... .....

बुधवार, 8 नवंबर 2017

मृत्यु के बाद

मृत्यु के बाद पता नहीं क्या होगा?
शव को जला देने या गाड़ देने की अपेक्षा मेडिकल कॉलेज को प्रदान करना उचित होगा|
कोई अंग किसी के काम आएगा|
विद्यार्थी प्रेक्टिकल कर  सीखेंगे|

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

धार्मिक कट्टरता

धार्मिक  कट्टरता सोच विचार नहीं करती, तर्क नहीं करती| बसुधैवेकम् कुटुम्बकम् की दुश्मन होती है| आतंकवाद को जन्म देकर पालती है|
नई सोच को को स्वीकार करने में रोकती है|

सोमवार, 6 नवंबर 2017

शिक्षा का प्रभाव

शिक्षा प्रसार से पुरानी मान्यताएं, परम्पराएं टूट रही हैं|

मैं हूँ भ्रष्टाचार

मैं हूं भ्रष्टाचार | मैं सर्वब्यापी| | हर कोई मुझे चाहता है अंत समय से कुछ पहले मेरा साथ छोड़ कर परलोक सुधारने की कोशिश करता है|

रविवार, 5 नवंबर 2017

चुनाव में उम्मीदवारों को कसम

किसी संस्था, संगठन, पंचायत, विधान सभा संसद.... के चुनाव के पहले उम्मीदवारों को अपने कुलदेवी/ श्री दुर्गा देवी के मंदिर में या मस्जिद गुरुद्वारा ... में कसम करनी चाहिए कि वे कभी किसी संस्था संगठन सरकार का कभी रूपया पैसा नहीं खाए हैं| कभी नहीं खाएंगे| अपने पद का उपयोग निजी लाभ के लिए नहीं करेंगे|