शुक्रवार, 9 मार्च 2018

शिक्षा

"जिसने भी मनुस्मृति में यह लिखा है कि शूद्र को वेद शास्त्र पढ़ने की इजाजत नहीं है;यदि वह ऐसा करता है अथवा श्रवण करता है तो उसके कानों में गर्म पिघला हुआ शीशा डाल देना चाहिए। तभी उसका प्रायश्चित होगा।"
यह कितना क्रूर और हिंसक बात है कि किसी को विद्या अध्ययन और ज्ञान प्राप्ति के लिए न केवल रोकता है बल्कि उस पर अमानवीय अत्याचार करने पर भी आमादा है।
वर्ण व्यवस्था के इस कुरूप चरित्र की आजकल बहुत चर्चा हो रही है। बेहतर होगा मनुस्मृति को सरकार बैन कर दे तथा इसकी सभी प्रतियाँ सार्वजनिक रूप से नष्ट कर दी जाएँ।
यही प्रजातंत्र का तकाजा है अन्यथा सरकार के होने न होने का क्या मतलब है?वर्ण व्यवस्था तथा जाति प्रथा पर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस कथन से क्या आप सहमत हैं अथवा कोई आपत्ति है?कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर देवें।
पद्ममुख पंडा

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