मंगलवार, 16 जनवरी 2018

मनुष्य के लिए मांसाहार बनाम शाकाहार

 वनस्पति में मस्तिष्क नहीं होता| प्राणियों में होता है| इसीलिए वह सोच विचार करता है, हँसता है, रोता है| किसी को मार कर, किसी को रुलाकर उसका मांस खाना क्रूरता है| केवल स्वाद के लिए मांसाहार करना उचित नहीं है जबकि हमारे लिए बेहत्तर विकल्प शाकाहार मौजूद है|

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