गुरुवार, 20 जुलाई 2017

हम भारतीय हैं या हिंदू?

स्वामी मैत्रेय श्री श्री > ‎आओ तर्क करें

जापान में रहने वाला जापानी है! 
अमेरिका में रहने वाला अमेरिकन है! 
कनाडा में रहने वाला कनाडाई है. 
यहाँ तक की कथित हिंदू राष्ट्र में रहने वाला भी नेपाली है 
पर भारत में रहने वाला हिंदू क्यों है? ?

बुधवार, 19 जुलाई 2017

देवताओं के प्रकार

कोई बताएंगे?..
भगवानों के प्रकार
देवी देवताओं के प्रकार
देवियों के प्रकार
देवताओं के प्रकार
राक्षसों के प्रकार
मनुष्यों के प्रकार
गाय के प्रकार
बैल के प्रकार
........
..... ....

पाप धोने के सहज सरल उपाय

भ्रष्टाचार पाप धोने के सहज सरल उपाय हैं हमारे धर्म में| चिंता की कोई बात नहीं|

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

नवजात शिशु

Rattan Lal Gottra

नवजात शिशु का दिमाग एक रिक्त स्थान होता है । पैदा होने के बाद वह स्वयं उसमें कुछ नहीं भर सकता । लेकिन जिस धर्म या मजहब वाले के यहां वह पैदा होता है , वही धर्म उसके मासूम दिमाग में भर दिया जाता है ।
मैं भगवान और खुदा को तब मानूं जब मुसलमान का बच्चा पैदा होते ही "अल्लाह हू अकबर " बोले ,और हिंदू का बच्चा "जय श्री राम"

शुभ/अशुभ


R Krishnan Sharma

मैं समझता हूँ भारतीय इन्हीं के कारण पीछे रह गए की जब सारा दिमाग इसी में खर्च हो जाएगा की गुरुवार को नाख़ून नहीं काटने, अमावस्या को चावल नहीं बनाने, रविवार को तुलसी में पानी नहीं डालना, शनिवार को मूर्ति पर तेल चढ़ाना है, सोमवार को बेलपत्र तोड़ने हैं, मंगल को व्रत रखना है, बुध को घास गणेशजी को चढ़ानी है, बिल्ली रास्ता काटे तो अशुभ मानना है, छींक आए तो 5 मिनट रुकना है, 12 बजे घर से बाहर नहीं निकलना है।
तो घण्टा कोई ज्ञान हासिल करने या नया अविष्कार करने में अपना दिमाग लगा पाएगा। यह सब मनुष्य की उन्नति में बाधक है

Saurabh Varshney

सोमवार, 17 जुलाई 2017

प्रेम

Sonu Meena Mandawar
कितनी अजीब बात है , जब भागवत में बैठकर पंडा कहता है-
" प्रभु प्रेम के भूखे थे , हैं , पर्भु ने प्रेम किया. Etc...."

तब तो भक्त वाह वाह करते हैं...!!

और हम इसकी चर्चा भी करते हैं , तो लोग हमारी मानसिकता पर भी सवाल उठाते हैं..

इस शब्द को निंदा के साथ देखा जा रहा है..!

जबकि ये तो सोशल मिडिया के बुद्दिजीवियों का नमूना है,,

जब आप सोशल मिडिया पर इस विषय पर चर्चा नही कर सकते हैं , तो अपने बच्चों और युवाओ को इस विषय में कैसे गाइड करोगे ,, वो इसे बेहद गन्दा विषय समझेंगे...!!
- फिर वे इस विषय पर आपसे हमसे खुलकर बात क्यों करेंगे..??

जैसे ही वे मुँह खोलेंगे तुम उन पर टूट पड़ोगे....!!

फिर वे आपसे सलाह मशवरा क्यों करेंगे..??

- सीधा अवैध सम्बन्ध जोड़ेंगे और लास्ट में ट्रेन के निचे...!!

- युवाओ को बदलने से पहले बुद्दिजीवियों को अपनी स्वयँ की इस विषय में सोच बदलने की जरूरत हैं....!!

रविवार, 16 जुलाई 2017

नफरत के बीज

बचपन में हमारे दिमाग में कचरा और नफ़रत के बीज भरे जाते हैं Ruba Ansari is thinking about my childhood. स्कूल की एक हिन्दू टीचर मुझे बहुत पसंद थी। कुछ महीने पहले शादी हुई थी। उनका बोलना, पढाना, हंसना, प्यार से सर पे हाँथ फेरना सब कुछ मुझे बहुत अट्रैक करता था। यूं कह लीजिये वो मेरी क्रश थीं। एक बार वो कई दिन स्कूल नही आयी पता चला की उनका बच्चा पेट में ही मर गया। शाम में मेरी सहेली मेरे साथ खेलने आयी जो की रोज़ आया करती थी। हम ही दोनों छोटे और नासमझ थे। मैंने उसे सारी बात बतायी वो बोली- "पता है जो हिन्दू होते हैं वो जहन्नम में जाते हैं। वहां आग उन्हें जलाती है कीड़े मकोड़े सांप बिच्छू सब उनको काट काट... सब उनको काट काट के खाते हैं। उन्हें खाने के लिए मवाद और खून दिया जाता है"। मैं दौड़ कर अम्मी के पास गई उनसे पूछा कि "क्या सारे हिन्दू जहन्नम में जाते हैं??" उन्होंने कहा "हाँ"। मैंने पूछा क्यों? उन्होंने कहा "क्योंकि वो अल्लाह को नही मानते, गैर खुदा को पूजते हैं और गैरखुदा को मानना शिर्क कहलाता है। अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है सिवाए शिर्क के"। उस नन्ही सी जान के लिए मुझे खौफ आने लगा मैं मन ही मन दुआ करने लगी की "उसकी कोई गलती नही उसे जहन्नम में ना डालियेगा"। मेरे स्कूल में ज़्यादातर हिन्दू स्टूडेंट्स और टीचर थे उनके जहन्नम में जाने के ख्याल से ही दिल सहम जाता था। कुछ दिन बाद वो टीचर फिर से स्कूल आने लगी। मैं नही चाहती थी की वो जहन्नम में जाएँ इसलिए हिम्मत करके मैंने उनसे कहा "मैम आप अल्लाह को माना करिये भगवान को नही" मैम ने मुझे अपने पास बैठाया और समझाया "बेटा भगवान अल्लाह गॉड सब एक ही होते हैं बस लोग अलग अलग नामों से पुकारते हैं जैसे की एप्पल को सेब भी कहते हैं" उनका जवाब मुझे संतुष्ट नही कर पाया क्योंकि मुझे लगता था कि उन्हें अलग खुदा ने बनाया है और मुझे अलग खुदा ने, जिनको मेरे खुदा ने बनाया है सिर्फ वही जन्नत में जायेंगे बाकी सारे दोज़ख में, भले वो कितने भी अच्छे क्यों न हो.....

ईश्वर अल्लाह

Ravi Kumar > ‎तर्कशील समाज

मेरे किसी भी पोस्ट पर -
जहाँ मैं 'ईश्वर' शब्द लिखूँ उसे मुस्लिम लोग 'अल्लाह' पढ़े। 
जहाँ मैं 'अल्लाह' लिखूँ उसे हिन्दू लोग 'ईश्वर यानि भगवान' पढ़ें।
जहाँ भी मैं मंदिर लिखूँ, मुस्लिम लोग उसे मस्जिद पढ़ें। 
और जहाँ भी मैं मस्जिद लिखूँ उसे हिन्दू लोग मंदिर पढ़ें। 
जहाँ भी मैं मौलवी लिखूँ उसे हिन्दू होग पुरोहित पढ़ें। 
और जहाँ भी मैं पुरोहित लिखूँ उसे मुस्लिम भाई मौलवी पढ़ें। 
इसी तरह अन्य सभी धर्म मे लोग मेरे लिखे पोस्ट को अपने ही धर्म से जोड़ कर पढ़ें। उसे दूसरे धर्म की आलोचना न समझें।

इस मूर्खता मे लिय आप से माफी मांगता हूँ ।

भीड़ के सहारे वतन साथियो

Md Sarfraz Kareem

#थप्पड़_इमाम_को_नहीं_देश_के_प्रधानमंत्री_के_मुंह_पर_मारा_गया_है👇

इस देश में मस्जिद के बाहर उस मस्जिद के आसपास रहने वाले जाने पहचाने चेहरे जमा होते हैं। नारा लगता है। भारत माता की जय। वंदे मातरम। मस्जिद के अंदर अफरातफरी मचती है। इमाम गेट पर आते हैं। नारा लगाने वाला समूह उन्हें गेट की चौखट से नीचे खींच लेता है। इमाम झुंड के घेरे में हैं। झुंड उनसे कह रही है,’बोल भारत माता की जय’ बोल जल्दी ‘वंदे मातरम’ ‘गद्दार’ ‘मार साले को।’ इमाम के चेहरे पर भय पसर जाता है। वह दोनों हाथों से झुंड को समझाने का प्रयास करते हैं, कुछ कहने को होते हैं तभी एक थप्पड़ उनके चेहरे पर पड़ता है। सब कुछ दस- बारह सेकंड में हो गया।

इमाम पीट दिए जाते हैं। इमाम का अर्थ होता है नेतृत्वकर्ता। नमाज़ पढ़ाने वाला। इमाम के मुंह से वंदेमातरम निकलवाना होता तो भीड़ थोड़ा इंतज़ार करती। दस सेकंड से भी कम टाइम में थप्पड़ मार देना बताता है कि वे लोग उन्हें पीटने आए थे। मीडिया थी वहां। कैमरे चमक रहे थे। वीडियो बन गया। मन तृप्त हुआ। आत्मा की तृष्णा शांत हुई। नफरत के वटवृक्ष की शाखें पहले से कहीं अधिक बलवान हो गईं। हरियाणा के हिसार से वीडियो चला और देश भर में फैल गया। लोग कहने लगे बहुत अच्छा। गद्दारों का यही हश्र होना चाहिए।

मुझे भी दिखा। साथ मे मेरे दोस्त थे Uday RajArun Tiwari,Rajeev Naithani,anjodh Ranjodh Singh PandherRohit Singh , Gopal Kant मैंने उनसे से कहा कि तुम लोगो ने देखा ? उन्होनो बताया कि रात में ही देख लिया था। वो हिल गये थे भीतर तक। जबकी बो हिंदू है। मैंने सोचा आखिर ये लोग क्यों डर गया। इमाम को मारने वाले तो हिंदू थे न। ये लोग भी हिंदू है। इस हिसाब से तो इनको को खुश होना चाहिए कि उसके ही मज़हब वाले एक मुसलमान को पीट रहे हैं। फिर इनको हिंदुओं के हाथों इमाम के पीटे जाने से दुख क्यों हुआ।

फिर हिसाब लगाने लगा कि अमरनाथ जत्थे पर हमले के बाद देश का ऐसा कौन सा मुसलमान है जिसे खुशी हो रही। मेरे जानने में ऐसा कोई नहीं दिखा। मैंने Kafeel Ahmad WaQarMannan Rayeen Chishti, tovseef Touseef Pasha, Mohd Arif Shaikh,Mohammed FazalGolden N को फोन किया और पूछा कि तुम्हारे मज़हब के मानने वालों ने अमरनाथ जा रहे हिंदुओं पर गोलियां बरसाईं और क़त्ल कर दिया, मन को शांति मिल गई ? उन सबने कहा कि सरफराज आप पागल हो गए हैं क्या? ये कैसा बेहुदा सवाल है।

अब मैं और परेशान हो गया कि मेरे हिन्दु दोस्तो को इमाम की पिटाई से गहरा धक्का लगा है तो दूसरी तरफ मेरे मुसलमान दोस्तों को अमरनाथ जत्थे पर हुए हमले का अफसोस है। फिर हरियाणा के बजरंग दल के नेता और उसके पीछे वाली भीड़ ने मस्जिद से इमाम को निकाल कर सिर्फ इसलिए क्यों पीटा कि हमला करने वाले पाकिस्तानी मुसलमान हैं और इमाम भी मुसलमान हैं। क्या हरियाणा के मुसलमान कश्मीर गए थे हमला करने? मनोहर लाल खट्टर जी, क्या आपके राज्य में रहने वाले हिसार के मस्जिद के इमाम हमले में शामिल थे? नहीं। फिर क्यों थप्पड़ मार दिया।

प्रधानमंत्री जी आपने कहा था कि देश का मुसलमान मुझसे आधी रात में भी संपर्क कर सकता है। मैं आधी रात को भी मुसलमानों की सेवा में हाजिर रहूंगा। सेवन आरसीआर के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। हिसार में इमाम के मुंह पर थप्पड़ नहीं मारा गया बल्कि देश के प्रधानमंत्री की अंतरात्मा पर बजरंगियों ने थूका है। बजरंगियों ने बता दिया कि नरेंद्र मोदी से हम नहीं डरते। देश के कानून, नीति निर्माताओं की बातों का हमपे कुछ फर्क़ नहीं पड़ता।

बजरंगियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुसलमानों की सेवा-सुरक्षा पर दिए गए बयान का न सिर्फ मज़ाक बनाया है बल्कि उन्होंने यह भी बता दिया है कि देश में बजरंग दल के झुंड से बढ़ कर कुछ नहीं। इमाम का तो सिर्फ चेहरा था, जिस पर चोट पहुंची है इधर तो पूरा का पूरा जमीर है जो पल भर में नेस्तानाबूत कर दिया गया। अब कभी किसी प्रधानमंत्री की औकात नहीं होगी कि वह इस तरह के झुंड के विरूद्ध जा सके।

अब देश में क्या होगा वह ऐसी ही भीड़ तय करेगी क्योंकि जो इस भीड़ से अलग हैं और बड़ी तादाद में हैं उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। क्योंकि जिनके हाथ में कानूनी बेंत है वे इसे होने दे रहे हैं। क्योंकि जिनके हाथ में धर्म की बागडोर हैं वे अपनी गद्दियों पर आराम फरमा रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी कहीं किसी कोने में बैठे बैठे यह गा रहे होंगे, ऐसा मुझे लगता है।
कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों,
अब इस भीड़ के हवाले वतन साथियों।

नास्तिकता


Ram Adhar Yadav ji ne whatsapp group me bheja h_

नास्तिकता बौद्धिक साहस के जिगर वाली मर्दानगी और कोरी गप्प को नकारने वाले साहस का नाम है।गोबर में गणेश देखने वाले कायरों और डरपोंकों को नास्तिकता का पाठ पढ़ाना बेवकूफी है।

नास्तिकता का मतलब अधार्मिकता नहीं होती।
नास्तिक व्यक्ति आचरण में धार्मिक लोगों से भी बेहतर हो सकता है।
इंसानियत से मुहब्बत और समसहजीविता का आचरण करना धार्मिक होना ही है।
एक नास्तिक दुनियां के सभी मजहबों की अच्छाइयों से मुहब्बत करता है, उन्हें पढ़ता समझता है।
वह किसी भी मजहब के इंसान से नफरत नहीं करता, उनकी खामियों को इशारों में बताता है ।

धर्म और मजहब आम इंसान को अच्छा बनाने के अपने अपने तरीके बताता है, नास्तिक उन सभी तरीकों का पालन करने की बजाय सीधे इंसानी अच्छाइयों पर चलने की कोशिशें करता है।

शनिवार, 15 जुलाई 2017

अधिक कट्टर कौन? क्यों?

Chetan Swaroop

एक बात बताइए कि भारत में इस्लाम के अनुयायी कभी सड़क किनारे पेशाब करते हैं या नहीं? क्योंकि मैंने ही नहीं आपने भी हजारों बार लोगों को मूतने और थूकने से रोकने के लिए दीवारों पर शंकर जी, गणेश जी और हनुमान जी की टाइल लगी देखी होंगी! हाँलाकि यह भी देखा है कि इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता, हलके होने वाले और गुटखा या पान की पीक करने वाले लोग 2 फुट बगल में अपने काम के लिए जगह बना ही लेते हैं परन्तु कभी भी इन जगहों पर कोई कुरान की आयतों वाली फोटो चिपकी नहीं देखी! और कल्पना करें कि यदि किसी ने हिन्दू देवी देवताओं के बगल में कुरान की आयतों वाली फोटो भी लगा दी तो उसकी मुस्लिम समाज पर क्या प्रतिक्रिया होगी? जबकि हिन्दुओं के लिए इस तरह के चित्र देखना अपने देश में सामान्य सी बात है और न ही उन्हें इससे विशेष कोई फर्क पड़ता है. उस व्यक्ति को जो गणेश के चित्र की पूजा करता है कोई फर्क नहीं पड़ता जबकि वो बीड़ी पीकर गणेश छाप बीड़ी के रेपर में छपी गणेश की फोटो को गंदी नाली में फेंक देता है अथवा पड़ा हुआ देखता है! 
वैसे मेरे बारे में तो आप जानते ही हैं कि मैं एक ही लाठी से हिन्दू और इस्लाम अथवा किसी भी संगठित धर्म को हांकता हूँ!
Balendu Swami की कलम से

आस्तिक नास्तिक

बचपन से हमें आस्तिक बनाया जाता है| हम आस्तिक हो जाते हैं| कुछ लोग सोचने लगते हैं, ईश्वर के अस्तित्व पर जीवन भर सोचते ही रह जाते हैं | कुछ लोग सोच समझकर नास्तिक बन जाते हैं| मैं भी सोचता ही रहा लेकिन जान न सका ईश्वर है या नहीं| """"""""'**"""

आदमी में आदमी की तलाश

शिव कुमार पांडे रायगढ़_ आदमी में आदमी तलाशना कठिन हो गया|

मंदिरों के आय का सदुपयोग

रामकेश हातोज

भारत सरकार में अगर हिम्मत है तो उसको चाहिए एक ऐसा बिल पास करें ।जिससे हमारे मन्दिरों- मस्जिदों के चढ़ावो का 50% हर माह हमारे देश के कर्ज से मरते किसानों पर सर्वे कराकर मानक के अनुकूल उनको सहायता दे। जिससे किसानों की दशा में सुधार हो ।

प्राप्त सूचना के आधार पर भारत में कुछ मन्दिरों की
एक महीना की कमाई के ये आंकड़े आपको सोचने को मजबूर कर देंगे-

1. *तिरुपति बालाजी* 1 हजार 325 करोड़
2. *वैष्णौंदेवी* 400 करोड़ 
3. *रामकृष्ण मिशन* 200 करोड़
4. *जगनाथपुरी* 160 करोड़
5. *शिर्डी सांईबाबा* 100 करोड़
6. *द्वारकाधीश* 50 करोड़ 
7. *सिद्धी विनायक* 27 करोड़
8. *वैधनाथ धाम देवगढ* 40 करोड़
9. *अंबाजी गुजरात* 40 करोड़
10. *त्रावणकोर* 35 करोड़
11. *अयोध्या* 140 करोड़
12. *काली माता मन्दिर कोलकाता* 250 करोड़
13. *पदमनाभन* 5 करोड़
14. *सालासर बालाजी* 300 करोड़
इसके अलावा *भारत के छोटे बड़े मन्दिरों की सालाना आय 280 लाख करोड़*और *भारत का कुल बजट 15 लाख करोड़।

*अगर हर आदमी गरीब किसानों की मदद करे तो भारत से गरीबी महज साल भर मे हट सकती है।

भगवान को अल्लाह को पैसे की कोई आवश्यकता नहीं है 50% में मंदिर मस्जिद का रखरखाव बहुत बढिया ढंग से हो सकता है ।

*एक तरफ़ तो भगवान को दाता कहते हो दूसरी तरफ़ मंदिरो मे पैसे चढा कर उसी भगवान को भिखारी बना रखा है l

*वैसे भी आपके उस पैसे से भगवान नही भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है l

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

गुजरा हूँ उन कूंचों से

Abhay Vivek Aggroia added 9 new photos.

गुजरा हूँ उन कूंचों से--
इंसां मर रहे हैं और हमें समझा रहे हैं की यह हिन्दू मरा , वह मुस्लिम मरा---
पोस्टमार्टम करने से पता चला की एक के दिल में राम थे और दूसरे के दिल में अल्लाह . और डॉक्टर ने रिपोर्ट में कहा यह हिन्दू का शव है और यह मुस्लिम का .
रासायनिक जाँच के लिए फिर उनके कुछ द्रव भेजे --लॅबोरेटरी में पाया गया एक में वेदों का रस था और एक में कुरान का.
अंगों को भी जाँच के लिए भेजा गया तो पाया गया एक में मंदिर है तो दूसरे में मस्जिद
सब साबित होने के बाद राजनैतिक नेताओं ने सच्चाई पेश की --इस देश में हिन्दुओं के लिए कोई जगह नहीं है-तो दूसरों ने कहा इस देश में मुस्लिमो की कोई जगह नहीं
जब एक दूसरों में इतना फर्क है तो उनकी पहचान और जान बचाने के लिए पंडितों और मौल्विओं ने अपने अपने भाषण देने शुरू किये 
सच्चाई पेश की गयी -एक गाय को बचाना है तो दूसरे सूअरों से घृणा करना--इसके इलावा जीवन कुछ ही नहीं है.
इसको सही सही अंजाम देने के लिए लड़ाकू संघठन बन गए 
एक अपनों को बचाने के लिए राम और अल्लाह के नारों के बीच धरती लाल होकर पुकारने लगी --रोते रोते बोली --तुम ऊपर बैठे तमाशा देख कर मुझे क्यों लहू लुहान कर रहे हो.
ऊपर से आवाज़ आयी --जब तक हम हैं ये खेल तो चलता ही रहेगा .
न जाने क्यों लोग एक दूसरे पर दोष लगाते हैं --जब तक ऊपर वाला हम सब की खबर और रक्षा और पालन कर रहा है तो यह खून खराबा भी तो अपने राम और अल्लाह को बचाने के लिए ही तो है-
इनके खिलाफ तो दूर की बात --अगर कहो मुझे जगरातों और मंदिर की आवाज़ों और अज़ान के बोलों से आपति है -- तो उसे संसार छोड़ ऊपर भेज दिया जायेगा --और राम और अल्लाह आपस में तय कर लेंगे-यह हिन्दू है या मुस्लिम --उनके पास तो सब से उत्तम प्रयोगशालाएं होंगी --मेरा तो यही मानना है .
मुझे बहुत घृणा होती है -जब कोई बेरोज़गारी, बेबसी , बेइज़्ज़त, कुपोषण , झुग्गी झोंपड़ी में पलते इंसान की खाल की मजबूरियां , बलात्कार , सूखा, बाढ़ से बर्बादी , भुखमरी के मुद्दे हूठाटे है --पापी हैं वो --उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस तंत्र ,जेलों और अदालत और गुंडों की फौज तो है --यही तो देश द्रोही हैं --अगर इनको कुचल नहीं देंगे तो समाज और धर्म और राम और अल्लाह सब खत्म हो जायेगा-त्राहि त्राहि हो जाएगी---आओ और खून बहाएं और अपने धर्म का झंडा ऊपर लहराता रखें -

गुजरा हूँ उन कूंचों से जहाँ हवा में किसी मानस के जलने की ख़ुशबि से सरे बस्ती में महक है 
मुक्ति हो गई है जलती इमारतों में झुलस रही लाशें अल्लाह ईश्वर को इन से मिलने की तड़प है

===============अभय ===================
असली मुद्दों की लड़ाई के लिए जनजीवन को एकजुट कर एक लंबे संघर्ष से ही शोषण से मुक्ति मिल सकती है
-समझें और सामझाएं ------ पहल करें ------पहिये का रुख बदलने का
मुश्किल है ------------नामुमकिन तो नही
जागो, मेरे भाई जागो Join: Jago, Mere Bhai Jago
शामिल हों : बदलाव की लड़ाई और तमन्ना
शामिल हों :रुके नही कदम , अब जागे हैं हम ( Unstoppable Struggle To Change The System )
शामिल हों : एक दिशा या राह ----Ek disha ya raah

गुजरा हूँ उन कूंचों से--

Abhay Vivek Aggroia added 10 new photos.

गुजरा हूँ उन कूंचों से--
इंसां मर रहे हैं और हमें समझा रहे हैं की यह हिन्दू मरा , वह मुस्लिम मरा---
पोस्टमार्टम करने से पता चला की एक के दिल में राम थे और दूसरे के दिल में अल्लाह . और डॉक्टर ने रिपोर्ट में कहा यह हिन्दू का शव है और यह मुस्लिम का .
रासायनिक जाँच के लिए फिर उनके कुछ द्रव भेजे --लॅबोरेटरी में पाया गया एक में वेदों का रस था और एक में कुरान का.
अंगों को भी जाँच के लिए भेजा गया तो पाया गया एक में मंदिर है तो दूसरे में मस्जिद
सब साबित होने के बाद राजनैतिक नेताओं ने सच्चाई पेश की --इस देश में हिन्दुओं के लिए कोई जगह नहीं है-तो दूसरों ने कहा इस देश में मुस्लिमो की कोई जगह नहीं
जब एक दूसरों में इतना फर्क है तो उनकी पहचान और जान बचाने के लिए पंडितों और मौल्विओं ने अपने अपने भाषण देने शुरू किये 
सच्चाई पेश की गयी -एक गाय को बचाना है तो दूसरे सूअरों से घृणा करना--इसके इलावा जीवन कुछ ही नहीं है.
इसको सही सही अंजाम देने के लिए लड़ाकू संघठन बन गए 
एक अपनों को बचाने के लिए राम और अल्लाह के नारों के बीच धरती लाल होकर पुकारने लगी --रोते रोते बोली --तुम ऊपर बैठे तमाशा देख कर मुझे क्यों लहू लुहान कर रहे हो.
ऊपर से आवाज़ आयी --जब तक हम हैं ये खेल तो चलता ही रहेगा .
न जाने क्यों लोग एक दूसरे पर दोष लगाते हैं --जब तक ऊपर वाला हम सब की खबर और रक्षा और पालन कर रहा है तो यह खून खराबा भी तो अपने राम और अल्लाह को बचाने के लिए ही तो है-
इनके खिलाफ तो दूर की बात --अगर कहो मुझे जगरातों और मंदिर की आवाज़ों और अज़ान के बोलों से आपति है -- तो उसे संसार छोड़ ऊपर भेज दिया जायेगा --और राम और अल्लाह आपस में तय कर लेंगे-यह हिन्दू है या मुस्लिम --उनके पास तो सब से उत्तम प्रयोगशालाएं होंगी --मेरा तो यही मानना है .
मुझे बहुत घृणा होती है -जब कोई बेरोज़गारी, बेबसी , बेइज़्ज़त, कुपोषण , झुग्गी झोंपड़ी में पलते इंसान की खाल की मजबूरियां , बलात्कार , सूखा, बाढ़ से बर्बादी , भुखमरी के मुद्दे हूठाटे है --पापी हैं वो --उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस तंत्र ,जेलों और अदालत और गुंडों की फौज तो है --यही तो देश द्रोही हैं --अगर इनको कुचल नहीं देंगे तो समाज और धर्म और राम और अल्लाह सब खत्म हो जायेगा-त्राहि त्राहि हो जाएगी---आओ और खून बहाएं और अपने धर्म का झंडा ऊपर लहराता रखें -

गुजरा हूँ उन कूंचों से जहाँ हवा में किसी मानस के जलने की ख़ुशबि से सरे बस्ती में महक है 
मुक्ति हो गई है जलती इमारतों में झुलस रही लाशें अल्लाह ईश्वर को इन से मिलने की तड़प है

===============अभय ===================
असली मुद्दों की लड़ाई के लिए जनजीवन को एकजुट कर एक लंबे संघर्ष से ही शोषण से मुक्ति मिल सकती है
-समझें और सामझाएं ------ पहल करें ------पहिये का रुख बदलने का
मुश्किल है ------------नामुमकिन तो नही
जागो, मेरे भाई जागो Join: Jago, Mere Bhai Jago
शामिल हों : बदलाव की लड़ाई और तमन्ना
शामिल हों :रुके नही कदम , अब जागे हैं हम ( Unstoppable Struggle To Change The System )
शामिल हों : एक दिशा या राह ----Ek disha ya raah

अजब गजब हमारा विज्ञान

... अजब गजब हमारा  विज्ञान...
           **************
शिवलिंग की वैज्ञानिकता ....
भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा लें, तब हैरान हो जायेगें ! भारत सरकार के नुक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है।

शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स ही हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे।

महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे किए बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले है।

  क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसीलिए तो जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता।

  भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है।

शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है।

  तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि महादेव शिवशंकर अगर नाराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जाएगी।

  ध्यान दें, कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है।

  जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो तो चिर सनातन है।विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।..
Copied

धर्मों को खतरा किससे

Narendra Tomar > ‎नास्तिक The Atheist

क्‍या यह अजीब नहीं लगता कि भारतीय संस्‍कृति (हिंदू संस्‍कृति पढिये) और इस्‍लाम को सारा खतरा इस बात से ही क्‍यों पैदा होता है कि महिलाएं क्‍या और क्‍यों पहनती है , क्‍या और कहां खातीपीती हैं और कब कहां आती जाती है वगैरह?
इन धर्मों को कभी कोई खतरा पुरूषों के व्‍यक्तिगत और सामाजिक व्‍यवहार से क्‍यों नहीं होता है ?

श्रावण सोमवार

Purnendu Goswami

आज श्रावण का पहला सोमवार है और हिन्दू धर्म की धार्मिक लड़कियाँ व्रत शुरू करेगी ताकि व्रत से प्रसन्न हो कर शिव उन्हें अच्छा वर दें में ऐसी कई लड़कियों को जानता हूँ जिन्होंने ये व्रत किये और उन्हें जैसा वो चाहती थी वैसा वर नहीं मिला । और कल से हर शिव मन्दिर में सैकड़ों हजारों लीटर दूध शिव के ऊपर चढ़ाया जाएगा जो की नाली के रास्ते होता हुआ सीवर में जायेगा और उसी शिव मन्दिर के बाहर आपको तमाम भिखारी मिल जाएंगे जो आपसे अपने भूखे बच्चे के लिए खाना माँगते मिल जाएँगे पर उनकी तरफ ध्यान नहीं जाएगा आखिर इंसान से बड़ा पेट भगवान का जो है चाहे जितना भर दो कभी नहीं भरेगा और ये भिखारी क्या देंगे जो आप लोगों के तथाकथित भगवान देंगे लड़कियों को अच्छा वर घर की सुख समृद्धि ये भिखारी थोड़ी दे सकता है ये तो भगवान देगा ये वो भगवान है जो इसके मन्दिर के बाहर बैठे भिखारी से ज्यादा भूखा और लालची है चाहे जितना दे दो कभी पेट नहीं भरेगा अरे इससे अच्छे तो वो इन्सान है जो अपने घर में बचे हुए खाने को किसी भूखे को खिला देते है पर मन्दिर में बैठा ये भगवान अपने ऊपर हजारों लीटर दूध चढ़वा कर नाली के रास्ते सीवर में बहा देगा पर किसी भूखे बच्चे की भूख नहीं मिटायेगा ।

मानव का धर्म

R Krishnan Sharma

अनाथालय मे पलने वाले बच्चे का कौन सा धर्म होता है। उसे जो भी धर्म वाले गोद लेता वह उसी धर्म जाति का हो जाता है !इसलीए मानव का कोई धर्म नही , जन्म लेने के बाद धर्म और जाति का मुहर लगता है !

हम घटिया होते जा रहे हैं|

Nikhilesh Mishra

अमरनाथ यात्रियों को ही नही असँख्य निर्दोषों को... असँख्य दीन-हीन हिंदुओं, मुस्लिमों, ईसाईयों, सिखों, यहूदियों, बौद्धों, जैनियों और नास्तिकों को हमने मारा है और इन मौतों की जिम्मेदारी अपने सिर लेकर गलतियों को ठीक करने के बदले नॉट इन माई नेम का बैनर उठाकर खुद को सबसे अलग कर लेने की हर सम्भव कोशिश ने सारी हत्याएँ की हैं।

मुट्ठी भर आतंकी मुस्लिम, करोड़ो अमन पसंद मुस्लिमों के प्रतिरोध के होते सफल हो ही नही सकते। या तो मुस्लिमों का चुप चाप समर्थन इन्हें हाँसिल है या इन्हें कोई फर्क नही पड़ता या आतंकी मुस्लिमों को छोड़ बाकी सब कमजोर हैं।

और...

मुट्ठी भर गौ रक्षक ( नर भक्षक ) का गली गली लोगों की जान बर्बरता... क्रूरता से ले लेना। ये तिलकधारी आतंकी करोड़ों अमन पसंद हिंदुओं के प्रतिरोध के होते सफल नही हो सकते। या तो हिंदुओं का चुपचाप समर्थन इन्हें हाँसिल है या इन्हें कोई फर्क नही पड़ता या गौ आतंकियों को छोड़ सारे हिन्दू कमजोर हैं।

हम दिन प्रतिदिन घटिया होते जा रहे हैं।

.................पंकज कुमार

गुरुवार, 13 जुलाई 2017

आतंकवाद का धर्म

Mithilesh K Sinha

"आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता" अपने आपमें एक कुतर्क है धर्म बचाने का, वरना उसके जनाजे में न तो धार्मिक हुजूम उमड़ता न तो रीती-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार!

बुधवार, 12 जुलाई 2017

गांधी जी

अरुण जैन

महात्मा गांधी की प्रतीमा 130 देशो मे लगी हे
मोदी जी से पूछ लो पूरी
दुनिया घूम लिये , कहीं किसी देश में ,
#गोड़से की प्रतिमा मिली क्या ???

धर्म में संशोधन परिवर्तन

अपने धर्म के प्रत्येक विंदु पर , हर पहलू पर विचार करना चाहिए| आवश्यकतानुसार संशोधन करना चाहिए| बहुत परिवर्तन की जरुरत हो तो पूरा बदल कर नया बनाना चाहिए|

मंगलवार, 11 जुलाई 2017

नोबल से पुरष्कृत अधिकतर यहूदी

Pratik Bhoi

*105 वर्षो में 129 नोबल पुरस्कार जीत चुके है यहूदी !!*

विश्व की कुल आबादी में से यहूदियों की संख्या लगभग डेढ़ करोड़ है, जिसमें से लगभग 70 लाख अमेरिका में रहते हैं, 50 लाख यहूदी एशिया में, 20 लाख यूरोप में और बाकी कुछ अन्य देशों में रहते हैं… कहने का मतलब यह कि इज़राईल को छोड़कर सभी देशों में वे “अल्पसंख्यक” हैं !!

प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आईन्स्टीन एक यहूदी थे, प्रसिद्ध मनोविज्ञानी सिगमण्ड फ़्रायड, मार्क्सवादी विचारधारा के जनक कार्ल मार्क्स जैसे अनेकों यहूदी, इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं जिन्होंने मानवता और समाज के लिये एक अमिट योगदान दिया है। बेंजामिन रूबिन ने मानवता को इंजेक्शन की सुई दी, जोनास सैक ने पोलियो वैक्सीन दिया, गर्ट्र्यूड इलियन ने ल्यूकेमिया जैसे रोग से लड़ने की दवाई निर्मित की, बारुच ब्लूमबर्ग ने हेपेटाइटिस बी से लड़ने का टीका बनाया, पॉल एल्हरिच ने सिफ़लिस का इलाज खोजा, बर्नार्ड काट्ज़ ने न्यूरो मस्कुलर के लिये नोबल जीता, ग्रेगरी पिंकस ने सबसे पहली मौखिक गर्भनिरोधक गोली का आविष्कार किया, विल्लेम कॉफ़ ने किडनी डायलिसिस की मशीन बनाई… इस प्रकार के दसियों उदाहरण गिनाये जा सकते हैं जिसमें यहूदियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और गुणों से मानवता की अतुलनीय सेवा की है।

पिछले 105 वर्षों में 129 यहूदियों को नोबल पुरस्कार मिल चुके हैं, भारत को अब तक सिर्फ़ 6 नोबल पुरस्कार मिले हैं, जिसमें से एक साहित्य (टैगोर) और एक शान्ति के लिये (मदर टेरेसा को, यदि उन्हें भारतीय माना जाये तो), ऐसे में विश्व में जिस प्रजाति की जनसंख्या सिर्फ़ दशमलव दो प्रतिशत हो ऐसे यहूदियों ने अर्थशास्त्र, दवा-रसायन खोज और भौतिकी के क्षेत्रों में नोबल पुरस्कारों की झड़ी लगा दी है, क्या यह वन्दनीय नहीं है?

मानव जाति की सेवा सिर्फ़ मेडिसिन से ही नहीं होती और भी कई क्षेत्र हैं, जैसे पीटर शुल्ट्ज़ ने ऑप्टिकल फ़ायबर बनाया, बेनो स्ट्रॉस ने स्टेनलेस स्टील, एमाइल बर्लिनर ने टेलीफ़ोन माइक्रोफ़ोन, चार्ल्स गिन्सबर्ग ने वीडियो टेप रिकॉर्डर, स्टैनली मेज़ोर ने पहली माइक्रोप्रोसेसरचिप जैसे आविष्कार किये। व्यापार के क्षेत्र में राल्फ़ लॉरेन (पोलो), लेविस स्ट्रॉस (लेविस जीन्स), सर्गेई ब्रिन (गूगल), माइकल डेल (डेल कम्प्यूटर), लैरी एलिसन (ओरेकल), राजनीति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में येल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रिचर्ड लेविन, अमरीकी सीनेटर हेनरी किसींजर, ब्रिटेन के लेखक बेंजामिन डिज़रायली जैसे कई नाम यहूदी हैं।

मानवता के सबसे बड़े प्रेमी अपनी चार अरब डॉलर से अधिक सम्पत्ति विज्ञान और विश्व भर के विश्वविद्यालयों को दान करने वाले जॉर्ज सोरोस भी यहूदी हैं। ओलम्पिक में सात स्वर्ण जीतने वाले तैराक मार्क स्पिट्ज़, सबसे कम उम्र में विंबलडन जीतने वाले बूम-बूम बोरिस बेकर भी यहूदी हैं। हॉलीवुड की स्थापना ही एक तरह से यहूदियों द्वारा की गई है ऐसा कहा जा सकता है, हैरिसन फ़ोर्ड, माइकल डगलस, डस्टिन हॉफ़मैन, कैरी ग्राण्ट, पॉल न्यूमैन, गोल्डी हॉन, स्टीवन स्पीलबर्ग, मेल ब्रुक्स जैसे हजारों प्रतिभाशाली यहूदी हैं। आप दिन-रात जिस फेसबुक पर रमे रहते हैं, वह भी एक यहूदी अर्थात मार्क जुकरबर्ग का ही है !!