रविवार, 23 जुलाई 2017

स्त्रियों की बदतर जिंदगी


Dinesh Aastik

भारतीय समाज की कू-रीतियों ने स्त्रीयों का जितना गला घोटा हैं उतना शायद ही किसी पुरुष ने घोटा होगा। पुरुषो की ऐसी मानसिकता के सबसे बड़े जिम्मेदार हमारे हिन्दू धर्म ग्रन्थ हैं जिसको एक बार किसी पुरुष ने पढ़ लेने के बाद स्वीकार लिया तो उस पुरुष के साथ स्त्री बद्द से भी बद्तर जिंदगी गुजारेंगी। 
क्या आपको नहीं लगता अब वो समय आ गया हैं कि हमें सही गलत में फर्क करना सीखना चाहिए अगर हमारे धर्मो में ऐसा कुछ हैं जो स्त्रियों को या किसी भी वर्ग को निचा दिखा रहा हैं तो उनको पूजना बंद कर देना चाहिए। गलती हर किसी से होती हैं हमको यें मानने में जरा भी शर्म नहीं आनी चाहिए की हमारे हिन्दू ग्रन्थ हम को सही दिशा नहीं दे सकते। अब हमको जम कर इन धर्म ग्रंथो का विरोध करना चाहिए जहाँ कही भी स्त्री को मनुष्य न मान कर एक जानवर से भी ज्यादा बद्तर सलूक किया जा रहा हैं तो कही न कही स्त्री को निचा दिखाने की मानसिकता यही से पनपी हैं क्यूँ न इनको जला कर थोडा आत्मा को शांत किया जाए। 
जहाँ कही भी स्त्री के स्वतंत्रता की बात आती हैं तो सबसे पहले धर्मो की आड़ ले ली जाती हैं या अपनी छोटी मानसिकता के आधार पर एक बाउंड्री बना दी जाती हैं और बता दिया जाता हैं कितना धीरे हँसना है कैसे कपडे पहनने हैं और किस समय घर आना हैं। आखिर यें बाउंड्री कब तक सिर्फ स्त्री के हिस्से में आएगी। इन बाउंड्री में से किसी भी विचार को अगर पुरुष पर थोप दिया जाएं तो वो एक महीना तो छोडो एक दिन भी बर्दाश नहीं कर पाएंगे। तो हम स्त्रियों पर तो न जाने कब से यें बाउंड्री थोपी हुई हैं। 
बर्दाश की हद होती हैं धर्मो को पूजना बंद करो वो तो वैसे भी मौन हैं हम स्त्रियों(इंसान) का क्या जो जिन्दा रह कर भी इतने समय से मौन हैं। — feeling बर्दाश की एक सीमा होती हैं और इस में न जाने कितनी सीमाए(स्त्रियाँ) मर चुकी हैं.
By Komal Bharti Gupta

शनिवार, 22 जुलाई 2017

बेचारे मुर्दे मुस्कराते हैं

नीतीश के. एस.

धर्म के नाम पर अपने बच्चों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने परिवार का कत्ल
धर्म के नाम पर सधर्मियों का कत्ल
धर्म के नाम दूसरे धर्म के लोगों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने गाँव-शहर वालों का कत्ल
धर्म के नाम पर अपने देशवासियों का कत्ल
धर्म के नाम पर दूसरे देश वालों का कत्ल

धार्मिक लोगों ने हर स्तर पर कत्ल करने के बहाने खोज रखे हैं। सुना है धर्म कभी ख़राब नहीं होता, धार्मिक लोग ख़राब होते हैं। धार्मिक ख़राब होते हैं तो सुधार कौन करेगा? या फिर जनसंख्या बैलेंस करने का ठेका ले रखा है सल्फेटों ने? खुद दस-दस बीस-बीस पैदा करते-करवाते रहते हैं और बैलेंस करने के लिये कटवाते-मरवाते रहते हैं।

धर्म से वर्चस्व को अलग कर के देखिये। बड़ा मज़ा आता है खुद को लाशों के ढेर के बीच में बैठा महसूस कर के। वही लाशें जो कभी दुश्मन थीं। अच्छा लगेगा मुर्दों की महक के बीच साँस लेते हुये.. क्योंकि मुर्दों से पसीने की बदबू नहीं आती। बेचारे मुर्दे सिर्फ मुस्कुराते

इंसानियत

Arun Kumar

मांसाहार मार कर

अगर हमारे किसी कर्म से किसी को पीड़ा होती है, हम उसकी पीड़ा को देख सुन रहे हैं तो निश्चित ही हम असहिष्णु हैं| मार कर खाना...

आधा प्रकाश/ आधा अंधेरा

Natthu Ram Pradhan

हम आधा प्रकाश आधा अंधेरा पसंद है| 
पूरा प्रकाश? ना बाबा ना..डर लगता है कुछ गड़बड़ न हो जाय|

Rattan Lal Gottra

मंदिर का मतलब होता है ......मानसिक गुलामी का रास्ता ...
स्कूल का मतलब होता है ......जीवन में प्रकाश का रास्ता .....!!

मंदिर की जब घंटी बजती है तो हमें सन्देश देती है की हम धर्म, अन्धविश्वास, पाखंड और मूर्खता की ओर बढ़ रहे.... हैं ....!
जब स्कूल की घंटी बजती है तो ये सन्देश देती हैं ....कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता की ओर बढ़ रहे हैं ...! अब तय आपको करना हैं की जाना कहाँ हैं ....?

गाय/भैंस में अंतर

गाय और भैंस की उपयोगिता में क्या अंतर है? कृषि, दूध में समानता है| भैंस का मांस नहीं खाते| इसीलिए गाय को माता मानते हैं क्या?

मंदिर मस्जिद बनाम स्कूल

हम आधा प्रकाश आधा अंधेरा पसंद है| 
पूरा प्रकाश? ना बाबा ना..डर लगता है कुछ गड़बड़ न हो जाय|

Rattan Lal Gottra

मंदिर का मतलब होता है ......मानसिक गुलामी का रास्ता ...
स्कूल का मतलब होता है ......जीवन में प्रकाश का रास्ता .....!!

मंदिर की जब घंटी बजती है तो हमें सन्देश देती है की हम धर्म, अन्धविश्वास, पाखंड और मूर्खता की ओर बढ़ रहे.... हैं ....!
जब स्कूल की घंटी बजती है तो ये सन्देश देती हैं ....कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता की ओर बढ़ रहे हैं ...! अब तय आपको करना हैं की जाना कहाँ हैं ....?

काश कोई मजहब न होता

B L Yadav

ना मस्जिद आजान देती, ना मंदिर के घंटे बजते
ना अल्ला का शोर होता, ना राम नाम भजते

ना हराम होती, रातों की नींद अपनी
मुर्गा हमें जगाता, सुबह के पांच बजते

ना दीवाली होती, और ना पठाखे बजते
ना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होते

तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,
…….काश कोई धर्म ना होता....
…….काश कोई मजहब ना होता....

ना अर्दय देते , ना स्नान होता 
ना मुर्दे बहाए जाते, ना विसर्जन होता

जब भी प्यास लगती , नदिओं का पानी पीते
पेड़ों की छाव होती , नदिओं का गर्जन होता

ना भगवानों की लीला होती, 
ना अवतारों का नाटक होता
ना देशों की सीमा होती , 
ना दिलों का फाटक होता

तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,
…….काश कोई धर्म ना होता.....
…….काश कोई मजहब ना होता....

कोई मस्जिद ना होती, कोई मंदिर ना होता
कोई दलित ना होता, कोई काफ़िर ना होता

कोई बेबस ना होता, कोई बेघर ना होता
किसी के दर्द से कोई, बेखबर ना होता

ना ही गीता होती , और ना कुरान होता
ना ही अल्ला होता, ना भगवान होता

तुझको जो जख्म होता, मेरा दिल तड़पता.
ना मैं हिन्दू होता, ना तू मुसलमान होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता।

~~अज्ञात~~ (via - Prem Ranjan)

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

ईश्वर ???

Padmamukh Panda _
आस्तिकों और नास्तिकों में ठन गया है
ईश्वर  एक विवादित विषय बन गया है
तर्क वितर्क का लंबा दौर जारी है
कभी एक तो कभी दूसरा भारी है
आस्तिकों के लिए ईश्वर जरूरी है
नास्तिकों ने बना रखी दूरी है
ईश्वर है या नहीं यही प्रमुख मसला है
निर्णय हो जाए तो सबका भला है
आस्तिकों के तेवर बहुत ही तीखे हैं
चोट खाए बब्बर शेर के सरीखे हैं
"इतने बड़े ब्रह्मांड को जो चलाता है
वह परम पिता परमेश्वर कहलाता है
चंद्र सूर्य तारे ग्रह जिसके अधीन हैं
बिना ईश्वर के यह सब क्या मुमकिन है
ईश्वर हमारा पिता है जन्मदाता है
वह संसार में यह लीला रचाता है
वह श्रष्टा पालक और मोक्ष दाता है
वही सर्वस्व हमारा भाग्य विधाता है
उसकी पूजा करो आराधना करो
उसे पाने के लिए कठिन साधना करो
ईश्वर की निंदा घोर निंदनीय कार्य है
नास्तिकों!हमें तुम्हारे तर्क अस्वीकार्य हैं
"नास्तिकों का यह कहना है
तुमने तो पाखंड का चोला पहना है
ईश्वर को आज तक किसने देखा है
पंडा पुजारी ने ले लिया ठेका है
ईश्वर महज एक कपोल कल्पना है
जो धर्म के ठेकेदारों के लिए बना है
ईश्वर का कोई अता पता नहीं है
इसे पूजने में कोई बुद्धिमत्ता नहीं है
न वह न्याय का कभी साथ देता है
न वह कोई जिम्मेदारी लेता है
ईश्वर समस्त बुराईयों की जड़ है
इसके नाम से ही  सब गड़बड़ है
ब्रह्मांड को ईश्वर ने नहीं बनाया है
ब्रह्मांड स्वयं अस्तित्व में आया है
यह प्रकृति संपूर्ण रूप से शाश्वत है
ऐसा हमारा दृढ़ अभिमत है
हे पाठक आप स्वयं विचार करें
अपना अभिमत तैयार करें
अपनी प्रतिक्रिया प्रेषित करें
स्पष्ट राय जरूर इंगित करें।

विनयावनत
पद्ममुख पंडा महापल्ली

मुस्लिम को किससे खतरा

ikhilesh Mishra

इस्लाम (मुसलमान) को किससे ख़तरा है ?
क्या ग़रीबी से ?
क्या आशिक्षा से ?
क्या राजनीतिक हिस्सेदारी में कमी से ?
क्या प्रशासन में उनकी उपेक्षा से ?
पुलिस उत्पीड़न से ?
बढ़ती बहुसंख्यक संप्रदायिकता से ?
नही साहब बिलकुल नही 
ख़तरे उससे भी बड़े हैं 
सानिया मिर्ज़ा की मिनी स्कर्ट 
शमी की पत्नी के फ़ोटो 
इरफ़ान की वाइफ़ की नेल पोलिश 
रहमान का म्यूज़िक 
तसलीमा की क़लम 
समझ गए ना आप लोग 
या फिर इन्ही मुस्लिम चिंतकों से पूँछेंगे

.......शकील खान

दीर्घ कोण न्यून कोण

R Krishnan Sharma

कोण दीर्घ और न्यून

पक्का हिन्दू मुसलमानों का दुश्मन, 
और कट्टर मुसलमान हिन्दुओ का दुश्मन होता है, 
नास्तिक इन दोनों को नहीं पचता, 
नास्तिकों को यह दोनों अपना दुश्मन न. 1 जानते हैं. 
यहाँ वह फार्मूला नहीं काम करता कि 
"दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त" 
त्रिभुज में नास्तिक १५० अंश का दीर्घ कोण होता है 
यह दोनों धर्मी 15-15 अंश के न्यून कोण होते हैं. 
हिन्दू और मुस्लिम दूर दूर खड़े रह कर, 
अपनी न्यूनता की संकीर्णता से नास्तिकता की दीर्घता को देखा करते हैं 
कि जिस दिन यह पूर्ण हो जाएगा, 
उस दिन हमारे वजूद का अंत हो जाएगा.
दुन्या को एक सीधी १८० डिग्री की सड़क मिल जाएगी.
नास्तिकता इन दोनों या सभी धर्मियों का साँझा दुश्मन है. 
मैं सदाक़त का मतलाशी हूँ, 
सत्य का खोजी हूँ, 
हर वक़्त सच को सर पर लादने के लिए तैयार 
और धर्म व मज़हब हर सच को अवैध गर्भ के फूले पेट को, 
अपने तंग आँचल से ढकने की कोशिश में रहते हैं. 
हर धर्म, धर्मियों की छोटी बड़ी दुकानें होती हैं.
वह अपने समर्थक सवारियों पर अपने निर्मूल्य और भावुक विचार लादकर बस्तियों में घुमाया करते हैं.
देवालय इनकी केंद्र होते हैं, जहाँ यह अपने देवों को सजाए 
गाहकों का इंतज़ार किया करते हैं.
दुन्या में, खास कर उपमहाद्वीप में धर्म व मज़हब इर्तेका (रचना-काल) के पैरों में बेड़ियाँ डाले हुए हैं. पश्चिम कहाँ से कहाँ पहुँच गया है, 
हम अजानों और घंटा घडियालों से लोगों की नीदें हराम किए हुए हैं.
.

हम भारतीय हैं या हिंदू?

स्वामी मैत्रेय श्री श्री > ‎आओ तर्क करें

जापान में रहने वाला जापानी है! 
अमेरिका में रहने वाला अमेरिकन है! 
कनाडा में रहने वाला कनाडाई है. 
यहाँ तक की कथित हिंदू राष्ट्र में रहने वाला भी नेपाली है 
पर भारत में रहने वाला हिंदू क्यों है? ?

बुधवार, 19 जुलाई 2017

देवताओं के प्रकार

कोई बताएंगे?..
भगवानों के प्रकार
देवी देवताओं के प्रकार
देवियों के प्रकार
देवताओं के प्रकार
राक्षसों के प्रकार
मनुष्यों के प्रकार
गाय के प्रकार
बैल के प्रकार
........
..... ....

पाप धोने के सहज सरल उपाय

भ्रष्टाचार पाप धोने के सहज सरल उपाय हैं हमारे धर्म में| चिंता की कोई बात नहीं|

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

नवजात शिशु

Rattan Lal Gottra

नवजात शिशु का दिमाग एक रिक्त स्थान होता है । पैदा होने के बाद वह स्वयं उसमें कुछ नहीं भर सकता । लेकिन जिस धर्म या मजहब वाले के यहां वह पैदा होता है , वही धर्म उसके मासूम दिमाग में भर दिया जाता है ।
मैं भगवान और खुदा को तब मानूं जब मुसलमान का बच्चा पैदा होते ही "अल्लाह हू अकबर " बोले ,और हिंदू का बच्चा "जय श्री राम"

शुभ/अशुभ


R Krishnan Sharma

मैं समझता हूँ भारतीय इन्हीं के कारण पीछे रह गए की जब सारा दिमाग इसी में खर्च हो जाएगा की गुरुवार को नाख़ून नहीं काटने, अमावस्या को चावल नहीं बनाने, रविवार को तुलसी में पानी नहीं डालना, शनिवार को मूर्ति पर तेल चढ़ाना है, सोमवार को बेलपत्र तोड़ने हैं, मंगल को व्रत रखना है, बुध को घास गणेशजी को चढ़ानी है, बिल्ली रास्ता काटे तो अशुभ मानना है, छींक आए तो 5 मिनट रुकना है, 12 बजे घर से बाहर नहीं निकलना है।
तो घण्टा कोई ज्ञान हासिल करने या नया अविष्कार करने में अपना दिमाग लगा पाएगा। यह सब मनुष्य की उन्नति में बाधक है

Saurabh Varshney

सोमवार, 17 जुलाई 2017

प्रेम

Sonu Meena Mandawar
कितनी अजीब बात है , जब भागवत में बैठकर पंडा कहता है-
" प्रभु प्रेम के भूखे थे , हैं , पर्भु ने प्रेम किया. Etc...."

तब तो भक्त वाह वाह करते हैं...!!

और हम इसकी चर्चा भी करते हैं , तो लोग हमारी मानसिकता पर भी सवाल उठाते हैं..

इस शब्द को निंदा के साथ देखा जा रहा है..!

जबकि ये तो सोशल मिडिया के बुद्दिजीवियों का नमूना है,,

जब आप सोशल मिडिया पर इस विषय पर चर्चा नही कर सकते हैं , तो अपने बच्चों और युवाओ को इस विषय में कैसे गाइड करोगे ,, वो इसे बेहद गन्दा विषय समझेंगे...!!
- फिर वे इस विषय पर आपसे हमसे खुलकर बात क्यों करेंगे..??

जैसे ही वे मुँह खोलेंगे तुम उन पर टूट पड़ोगे....!!

फिर वे आपसे सलाह मशवरा क्यों करेंगे..??

- सीधा अवैध सम्बन्ध जोड़ेंगे और लास्ट में ट्रेन के निचे...!!

- युवाओ को बदलने से पहले बुद्दिजीवियों को अपनी स्वयँ की इस विषय में सोच बदलने की जरूरत हैं....!!

रविवार, 16 जुलाई 2017

नफरत के बीज

बचपन में हमारे दिमाग में कचरा और नफ़रत के बीज भरे जाते हैं Ruba Ansari is thinking about my childhood. स्कूल की एक हिन्दू टीचर मुझे बहुत पसंद थी। कुछ महीने पहले शादी हुई थी। उनका बोलना, पढाना, हंसना, प्यार से सर पे हाँथ फेरना सब कुछ मुझे बहुत अट्रैक करता था। यूं कह लीजिये वो मेरी क्रश थीं। एक बार वो कई दिन स्कूल नही आयी पता चला की उनका बच्चा पेट में ही मर गया। शाम में मेरी सहेली मेरे साथ खेलने आयी जो की रोज़ आया करती थी। हम ही दोनों छोटे और नासमझ थे। मैंने उसे सारी बात बतायी वो बोली- "पता है जो हिन्दू होते हैं वो जहन्नम में जाते हैं। वहां आग उन्हें जलाती है कीड़े मकोड़े सांप बिच्छू सब उनको काट काट... सब उनको काट काट के खाते हैं। उन्हें खाने के लिए मवाद और खून दिया जाता है"। मैं दौड़ कर अम्मी के पास गई उनसे पूछा कि "क्या सारे हिन्दू जहन्नम में जाते हैं??" उन्होंने कहा "हाँ"। मैंने पूछा क्यों? उन्होंने कहा "क्योंकि वो अल्लाह को नही मानते, गैर खुदा को पूजते हैं और गैरखुदा को मानना शिर्क कहलाता है। अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है सिवाए शिर्क के"। उस नन्ही सी जान के लिए मुझे खौफ आने लगा मैं मन ही मन दुआ करने लगी की "उसकी कोई गलती नही उसे जहन्नम में ना डालियेगा"। मेरे स्कूल में ज़्यादातर हिन्दू स्टूडेंट्स और टीचर थे उनके जहन्नम में जाने के ख्याल से ही दिल सहम जाता था। कुछ दिन बाद वो टीचर फिर से स्कूल आने लगी। मैं नही चाहती थी की वो जहन्नम में जाएँ इसलिए हिम्मत करके मैंने उनसे कहा "मैम आप अल्लाह को माना करिये भगवान को नही" मैम ने मुझे अपने पास बैठाया और समझाया "बेटा भगवान अल्लाह गॉड सब एक ही होते हैं बस लोग अलग अलग नामों से पुकारते हैं जैसे की एप्पल को सेब भी कहते हैं" उनका जवाब मुझे संतुष्ट नही कर पाया क्योंकि मुझे लगता था कि उन्हें अलग खुदा ने बनाया है और मुझे अलग खुदा ने, जिनको मेरे खुदा ने बनाया है सिर्फ वही जन्नत में जायेंगे बाकी सारे दोज़ख में, भले वो कितने भी अच्छे क्यों न हो.....

ईश्वर अल्लाह

Ravi Kumar > ‎तर्कशील समाज

मेरे किसी भी पोस्ट पर -
जहाँ मैं 'ईश्वर' शब्द लिखूँ उसे मुस्लिम लोग 'अल्लाह' पढ़े। 
जहाँ मैं 'अल्लाह' लिखूँ उसे हिन्दू लोग 'ईश्वर यानि भगवान' पढ़ें।
जहाँ भी मैं मंदिर लिखूँ, मुस्लिम लोग उसे मस्जिद पढ़ें। 
और जहाँ भी मैं मस्जिद लिखूँ उसे हिन्दू लोग मंदिर पढ़ें। 
जहाँ भी मैं मौलवी लिखूँ उसे हिन्दू होग पुरोहित पढ़ें। 
और जहाँ भी मैं पुरोहित लिखूँ उसे मुस्लिम भाई मौलवी पढ़ें। 
इसी तरह अन्य सभी धर्म मे लोग मेरे लिखे पोस्ट को अपने ही धर्म से जोड़ कर पढ़ें। उसे दूसरे धर्म की आलोचना न समझें।

इस मूर्खता मे लिय आप से माफी मांगता हूँ ।

भीड़ के सहारे वतन साथियो

Md Sarfraz Kareem

#थप्पड़_इमाम_को_नहीं_देश_के_प्रधानमंत्री_के_मुंह_पर_मारा_गया_है👇

इस देश में मस्जिद के बाहर उस मस्जिद के आसपास रहने वाले जाने पहचाने चेहरे जमा होते हैं। नारा लगता है। भारत माता की जय। वंदे मातरम। मस्जिद के अंदर अफरातफरी मचती है। इमाम गेट पर आते हैं। नारा लगाने वाला समूह उन्हें गेट की चौखट से नीचे खींच लेता है। इमाम झुंड के घेरे में हैं। झुंड उनसे कह रही है,’बोल भारत माता की जय’ बोल जल्दी ‘वंदे मातरम’ ‘गद्दार’ ‘मार साले को।’ इमाम के चेहरे पर भय पसर जाता है। वह दोनों हाथों से झुंड को समझाने का प्रयास करते हैं, कुछ कहने को होते हैं तभी एक थप्पड़ उनके चेहरे पर पड़ता है। सब कुछ दस- बारह सेकंड में हो गया।

इमाम पीट दिए जाते हैं। इमाम का अर्थ होता है नेतृत्वकर्ता। नमाज़ पढ़ाने वाला। इमाम के मुंह से वंदेमातरम निकलवाना होता तो भीड़ थोड़ा इंतज़ार करती। दस सेकंड से भी कम टाइम में थप्पड़ मार देना बताता है कि वे लोग उन्हें पीटने आए थे। मीडिया थी वहां। कैमरे चमक रहे थे। वीडियो बन गया। मन तृप्त हुआ। आत्मा की तृष्णा शांत हुई। नफरत के वटवृक्ष की शाखें पहले से कहीं अधिक बलवान हो गईं। हरियाणा के हिसार से वीडियो चला और देश भर में फैल गया। लोग कहने लगे बहुत अच्छा। गद्दारों का यही हश्र होना चाहिए।

मुझे भी दिखा। साथ मे मेरे दोस्त थे Uday RajArun Tiwari,Rajeev Naithani,anjodh Ranjodh Singh PandherRohit Singh , Gopal Kant मैंने उनसे से कहा कि तुम लोगो ने देखा ? उन्होनो बताया कि रात में ही देख लिया था। वो हिल गये थे भीतर तक। जबकी बो हिंदू है। मैंने सोचा आखिर ये लोग क्यों डर गया। इमाम को मारने वाले तो हिंदू थे न। ये लोग भी हिंदू है। इस हिसाब से तो इनको को खुश होना चाहिए कि उसके ही मज़हब वाले एक मुसलमान को पीट रहे हैं। फिर इनको हिंदुओं के हाथों इमाम के पीटे जाने से दुख क्यों हुआ।

फिर हिसाब लगाने लगा कि अमरनाथ जत्थे पर हमले के बाद देश का ऐसा कौन सा मुसलमान है जिसे खुशी हो रही। मेरे जानने में ऐसा कोई नहीं दिखा। मैंने Kafeel Ahmad WaQarMannan Rayeen Chishti, tovseef Touseef Pasha, Mohd Arif Shaikh,Mohammed FazalGolden N को फोन किया और पूछा कि तुम्हारे मज़हब के मानने वालों ने अमरनाथ जा रहे हिंदुओं पर गोलियां बरसाईं और क़त्ल कर दिया, मन को शांति मिल गई ? उन सबने कहा कि सरफराज आप पागल हो गए हैं क्या? ये कैसा बेहुदा सवाल है।

अब मैं और परेशान हो गया कि मेरे हिन्दु दोस्तो को इमाम की पिटाई से गहरा धक्का लगा है तो दूसरी तरफ मेरे मुसलमान दोस्तों को अमरनाथ जत्थे पर हुए हमले का अफसोस है। फिर हरियाणा के बजरंग दल के नेता और उसके पीछे वाली भीड़ ने मस्जिद से इमाम को निकाल कर सिर्फ इसलिए क्यों पीटा कि हमला करने वाले पाकिस्तानी मुसलमान हैं और इमाम भी मुसलमान हैं। क्या हरियाणा के मुसलमान कश्मीर गए थे हमला करने? मनोहर लाल खट्टर जी, क्या आपके राज्य में रहने वाले हिसार के मस्जिद के इमाम हमले में शामिल थे? नहीं। फिर क्यों थप्पड़ मार दिया।

प्रधानमंत्री जी आपने कहा था कि देश का मुसलमान मुझसे आधी रात में भी संपर्क कर सकता है। मैं आधी रात को भी मुसलमानों की सेवा में हाजिर रहूंगा। सेवन आरसीआर के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। हिसार में इमाम के मुंह पर थप्पड़ नहीं मारा गया बल्कि देश के प्रधानमंत्री की अंतरात्मा पर बजरंगियों ने थूका है। बजरंगियों ने बता दिया कि नरेंद्र मोदी से हम नहीं डरते। देश के कानून, नीति निर्माताओं की बातों का हमपे कुछ फर्क़ नहीं पड़ता।

बजरंगियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुसलमानों की सेवा-सुरक्षा पर दिए गए बयान का न सिर्फ मज़ाक बनाया है बल्कि उन्होंने यह भी बता दिया है कि देश में बजरंग दल के झुंड से बढ़ कर कुछ नहीं। इमाम का तो सिर्फ चेहरा था, जिस पर चोट पहुंची है इधर तो पूरा का पूरा जमीर है जो पल भर में नेस्तानाबूत कर दिया गया। अब कभी किसी प्रधानमंत्री की औकात नहीं होगी कि वह इस तरह के झुंड के विरूद्ध जा सके।

अब देश में क्या होगा वह ऐसी ही भीड़ तय करेगी क्योंकि जो इस भीड़ से अलग हैं और बड़ी तादाद में हैं उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। क्योंकि जिनके हाथ में कानूनी बेंत है वे इसे होने दे रहे हैं। क्योंकि जिनके हाथ में धर्म की बागडोर हैं वे अपनी गद्दियों पर आराम फरमा रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी कहीं किसी कोने में बैठे बैठे यह गा रहे होंगे, ऐसा मुझे लगता है।
कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों,
अब इस भीड़ के हवाले वतन साथियों।

नास्तिकता


Ram Adhar Yadav ji ne whatsapp group me bheja h_

नास्तिकता बौद्धिक साहस के जिगर वाली मर्दानगी और कोरी गप्प को नकारने वाले साहस का नाम है।गोबर में गणेश देखने वाले कायरों और डरपोंकों को नास्तिकता का पाठ पढ़ाना बेवकूफी है।

नास्तिकता का मतलब अधार्मिकता नहीं होती।
नास्तिक व्यक्ति आचरण में धार्मिक लोगों से भी बेहतर हो सकता है।
इंसानियत से मुहब्बत और समसहजीविता का आचरण करना धार्मिक होना ही है।
एक नास्तिक दुनियां के सभी मजहबों की अच्छाइयों से मुहब्बत करता है, उन्हें पढ़ता समझता है।
वह किसी भी मजहब के इंसान से नफरत नहीं करता, उनकी खामियों को इशारों में बताता है ।

धर्म और मजहब आम इंसान को अच्छा बनाने के अपने अपने तरीके बताता है, नास्तिक उन सभी तरीकों का पालन करने की बजाय सीधे इंसानी अच्छाइयों पर चलने की कोशिशें करता है।

शनिवार, 15 जुलाई 2017

अधिक कट्टर कौन? क्यों?

Chetan Swaroop

एक बात बताइए कि भारत में इस्लाम के अनुयायी कभी सड़क किनारे पेशाब करते हैं या नहीं? क्योंकि मैंने ही नहीं आपने भी हजारों बार लोगों को मूतने और थूकने से रोकने के लिए दीवारों पर शंकर जी, गणेश जी और हनुमान जी की टाइल लगी देखी होंगी! हाँलाकि यह भी देखा है कि इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता, हलके होने वाले और गुटखा या पान की पीक करने वाले लोग 2 फुट बगल में अपने काम के लिए जगह बना ही लेते हैं परन्तु कभी भी इन जगहों पर कोई कुरान की आयतों वाली फोटो चिपकी नहीं देखी! और कल्पना करें कि यदि किसी ने हिन्दू देवी देवताओं के बगल में कुरान की आयतों वाली फोटो भी लगा दी तो उसकी मुस्लिम समाज पर क्या प्रतिक्रिया होगी? जबकि हिन्दुओं के लिए इस तरह के चित्र देखना अपने देश में सामान्य सी बात है और न ही उन्हें इससे विशेष कोई फर्क पड़ता है. उस व्यक्ति को जो गणेश के चित्र की पूजा करता है कोई फर्क नहीं पड़ता जबकि वो बीड़ी पीकर गणेश छाप बीड़ी के रेपर में छपी गणेश की फोटो को गंदी नाली में फेंक देता है अथवा पड़ा हुआ देखता है! 
वैसे मेरे बारे में तो आप जानते ही हैं कि मैं एक ही लाठी से हिन्दू और इस्लाम अथवा किसी भी संगठित धर्म को हांकता हूँ!
Balendu Swami की कलम से

आस्तिक नास्तिक

बचपन से हमें आस्तिक बनाया जाता है| हम आस्तिक हो जाते हैं| कुछ लोग सोचने लगते हैं, ईश्वर के अस्तित्व पर जीवन भर सोचते ही रह जाते हैं | कुछ लोग सोच समझकर नास्तिक बन जाते हैं| मैं भी सोचता ही रहा लेकिन जान न सका ईश्वर है या नहीं| """"""""'**"""

आदमी में आदमी की तलाश

शिव कुमार पांडे रायगढ़_ आदमी में आदमी तलाशना कठिन हो गया|

मंदिरों के आय का सदुपयोग

रामकेश हातोज

भारत सरकार में अगर हिम्मत है तो उसको चाहिए एक ऐसा बिल पास करें ।जिससे हमारे मन्दिरों- मस्जिदों के चढ़ावो का 50% हर माह हमारे देश के कर्ज से मरते किसानों पर सर्वे कराकर मानक के अनुकूल उनको सहायता दे। जिससे किसानों की दशा में सुधार हो ।

प्राप्त सूचना के आधार पर भारत में कुछ मन्दिरों की
एक महीना की कमाई के ये आंकड़े आपको सोचने को मजबूर कर देंगे-

1. *तिरुपति बालाजी* 1 हजार 325 करोड़
2. *वैष्णौंदेवी* 400 करोड़ 
3. *रामकृष्ण मिशन* 200 करोड़
4. *जगनाथपुरी* 160 करोड़
5. *शिर्डी सांईबाबा* 100 करोड़
6. *द्वारकाधीश* 50 करोड़ 
7. *सिद्धी विनायक* 27 करोड़
8. *वैधनाथ धाम देवगढ* 40 करोड़
9. *अंबाजी गुजरात* 40 करोड़
10. *त्रावणकोर* 35 करोड़
11. *अयोध्या* 140 करोड़
12. *काली माता मन्दिर कोलकाता* 250 करोड़
13. *पदमनाभन* 5 करोड़
14. *सालासर बालाजी* 300 करोड़
इसके अलावा *भारत के छोटे बड़े मन्दिरों की सालाना आय 280 लाख करोड़*और *भारत का कुल बजट 15 लाख करोड़।

*अगर हर आदमी गरीब किसानों की मदद करे तो भारत से गरीबी महज साल भर मे हट सकती है।

भगवान को अल्लाह को पैसे की कोई आवश्यकता नहीं है 50% में मंदिर मस्जिद का रखरखाव बहुत बढिया ढंग से हो सकता है ।

*एक तरफ़ तो भगवान को दाता कहते हो दूसरी तरफ़ मंदिरो मे पैसे चढा कर उसी भगवान को भिखारी बना रखा है l

*वैसे भी आपके उस पैसे से भगवान नही भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है l