अफवाह फैलाने में माहिर कुछ झूठे लोग
सोशल मिडिया में लिख रहे हैं कि भगत सिंह को फांसी का आदेश 14 फरवरी 1930 को हुआ था|
सीधे सादे लोग उसे मानकर प्रचारित भी कर रहै हैं|
सच है 07 अक्टूबर 1930 को
भगतसिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी की सज़ा सुनाई गई।
23 मार्च 1931को उन्हें फांसी दी गई|
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हमारे देश में महान बलात्कारी आसा राम बापू के परामर्श को मानकर 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस मनाने की कोशिश हो रही है|
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अब 14 फरवरी को नर्मदा जयंती मनाने की कोशिश शुरू हो गई|
14 फरवरी को वेलेंटाइन डे| कुछ सालों से शहीद भगत सिंह को भिड़ा रहे हैं| कुछ माता पिता को भिड़ा रहे हैं| अब नर्मदा नदी को|
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चौदह फरवरी हैरान परेशान है|
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सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
सोमवार, 13 फ़रवरी 2017
चौदह फरवरी हैरान परेशान है
रविवार, 12 फ़रवरी 2017
चार युग
AmartaRam Meghwal Rohina >
आज आप सभी को "युगों" के बारे में बताता हूं :--
1- "सतयुग" = जिस युग में केवल ब्राह्मण ही पढ़-लिख सकता था, इसलिये वह जो बोलता था, वही सत्य समझा जाता था, इसलिये उसे सतयुग कहते हैं ।
2- "द्वापर" = जिस युग में ब्राह्मण के साथ क्षत्रिय भी पढ़ने लगे..यानी दो वर्ण पढ़ने लगे इसलिये उसे द्वापर युग कहने लगे.
3- "त्रेतायुग" = जिस युग में बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य..यानी तीनों वर्ण पढ़ने लगे, इसलिये त्रेतायुग कहने लगे ।
4- "कलयुग" = जिस युग में ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य..के साथ-साथ शूद्र /अछूत भी पढ़ने लगे..इसलिये इसे कलयुग यानी अशुभ/अधर्म/पाप का युग कहने लगे ।
अब आप खुद समझ जाइये.....
कलयुग यानी "कल युग" आपके लिये अच्छा है..... / या सतयुग, द्वापर, त्रेता, अच्छा था..... ?????
आप चिंतन स्वयं करें.... !!!
शनिवार, 11 फ़रवरी 2017
पश्चिमी संस्कृति का डर
विदेशों में हमारी संस्कृति का प्रभाव देखकर बहुत खुश होते हैं हम|
लेकिन विदेशी संस्कृति वेलेंटाइन डे का विरोध कर रहे हैं हम_
कुछ साल से उसी दिन मातृ पितृ दिवस मनाकर |
अफवाह फैलाकर कि शहीद भगत सिंह को उसी दिन फांसी की सजा सुनाई गई थी या फांसी दी गई थी|
गार्डन पार्क में वेलेंटाइन डे मनाने वालों को परेशान कर, अपमानित कर|
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विदेशी संस्कृति से इतनी बुरी है या उससे खतरा है तो रहन सहन, खान पान सबमें वापस जाओ पुराने की ओर| कानून बना दो|
कम्प्युटर मोबाइल टी वी मोटर साइकल... .... सब बंद करो, हां विमान रहने दो क्योंकि वेद पुराण में लिखा है|
श्री राम कृष्ण पेंट शर्ट टाई कोट नहीं पहनते थे|
देवी सरस्वती दुर्गा सलवार सूट ब्लाउज .. नहीं पहनती थी|
आंग्लभाषाया त्यागेत् संस्कृतं वद|
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वैसे विदेशी संस्कृति को सबसे पहले 1925 में RSS राष्ट्रीय स्वयं संघ ने पश्चिमी संस्कृति को अपनाया पेंट शर्ट को गणवेष बनाकर|
शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017
नामकरण
गांधी जी को किसी सरकारी आदेश से "महात्मा", "राष्ट्र पिता" या "बापू" नहीं कहा जाता| किसी ने कहा लोगों ने कहा|
आसा राम को कुछ लोग "बापू" कहते हैं|
किसी को भी कोई कुछ नाम दे क्या समस्या है? "भगवान" कहो "महात्मा" कहो .. जो चाहो| जो चाहेगा बोलेगा, जो न चाहे नहीं कहेगा|
कोई किसी के नामकरण के लिए सरकाऱ के आदेश या अनुमति की आवश्यकता नहीं होती|
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017
जयकारा
कोई लड़ रहा हो या लड़ने जा रहा हो तो उसके शुभचिंतकों के द्वारा प्रोत्साहित करने के लिए जयकारा लगाया जाता है|
वर्तमान कोई भगवान देवी देवता गुरू लड़ाई नहीं करने वाले हैं इसलिए उनका जयकारा लगाना अनावश्यक है|.,,,_
जय ईशु. जय श्रीराम. जय गुरुदेव... ???
शनिवार, 4 फ़रवरी 2017
राम राज्य का प्रभाव
मैंने भी राम राज्य का प्रभाव देखा है|_
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एक शिक्षक कुछ आदिवासी विद्यार्थियों को छड़ी से पीट रहे थे .. तड़ाक .तड़ाक. क्यों रे पढ़ के कलेक्टर बनोगे? सड़ाक,, ..खेत में कौन काम करेगा रे . सड़ाक सड़ाक..तड़ाक...
मैंने महान गुरू द्रोणाचार्य को भी देखा है| उन्होंने अपने विषय के प्रायोगिक परीक्षा में एक विद्यार्थी को 50 में 50 दिया, किंतु उसे सैद्धांतिक में 150 में मात्र 02 अंक मिला|
दूसरे विद्यार्थी को प्रायोगिक में कम अंक देने के कारण उस एक विषय में डिक्टिंशन नहीं ला सका, बाकी सभी में D मिला|
शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017
अवतार
ईश्वरवादियों द्वारा कल्पित युगों में ईश्वर द्वारा लिए गये अवतारों के विषय में विचार करते हैं। चूंकि सतयुग में चारों चरण पुण्य के ही थे इसलिए इस युग में एक भी पापी व्यक्ति नहीं था तो ऐसी स्थिति में इस युग में ईश्वर को एक भी अवतार नहीं लेना चाहिए था। लेकिन हम पंडितों की पोथियों में देखते हैं कि इस युग में ईश्वर ने मत्स्य, कच्छप, सुकर एवं नृसिंह नामक चार अवतार लिए। अब हमारे सामने प्रश्न यह उपस्थित हो जाता है कि जब इस योग में एक भी पापी नहीं हुआ था, तो ईश्वर ने चार अवतार क्यों लिए ? *...... यशवंत जोगी*
विश्वास
कहते हैं पूरा विश्वास से मानो तो सब कुछ हो सकता है|
मानो तो भगवान, न मानो तो पत्थर|
मान लें कि 2+3=7 तो क्या सही हो जाएगा?
बुधवार, 1 फ़रवरी 2017
शांति पाने के लिए
शांति पाने के लिए _
घर परिवार, ड्युटी duty से भाग जाएं| अवश्य शांति मिलेगी| मंदिर मस्जिद . .कहीं भी या फिर पिकनिक. जंगल. . कहते हैं नशा भी तनाव दूर करता है| या कहीं एकांत में कुछ भी बुदबुदाइए .बोलिए चाहे निरर्थक ही हो ..उडु्ग बुड़ुग अगडम बगडम नमो वमो कुडुम. कर के देखिए| या सब कुछ भूल कर नाचें गाएं भजन हो या कोई फिल्मी कुछ भी| जोर जोर से हंसें या खूब जोर से चिल्लाएं|
संक्षेप में जीवन से भागें | जब तक भागेंगे तनाव से दूर रहेंगे| शांति मिलेगी|
मंगलवार, 31 जनवरी 2017
स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन
स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन कुछ ही शहरों में| विदेशी वाह वाह करेंगे| हमारा अच्छा इमेज बनेगा विदेशों में
सोमवार, 30 जनवरी 2017
भ्रष्टाचार के संरक्षक
इसीलिए यह भ्रष्टाचार सर्वब्यापी हो गया है, दिनोदिन बढ़ता जा रहा है|
अन्ना जी जितना चिल्लाएं, अनशन करें; मोदी जी जितने छापे मारें इसका नाश बहुत मुश्किल है| यह तो घर - घर में, जन जन में विद्यमान है|
मतभेद
रविवार, 22 जनवरी 2017
धर्म और संविधान
तथाकथित धर्म वेद पुराण कुरान के नियम परंपराओं से हटकर भी संविधान में कुछ नियम कानून बनाए गए हैं|
तथाकथित धर्मऔर संविधान का एक साथ पूरा पूरा पालन संभव ही नहीं हैं|
इसलिए हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए|
वेद और नामकरण
गांधी जी को महात्मा, राष्ट्र पिता; नेहरू को चाचा, सरोजनी नायडू को भारत कोकिला, सुभाष चंद्र बोस को नेता जी.. ... ये सब नामकरण सरकार द्वारा नहीं किया गया है| लोग अपनी मर्जी से इस तरह का उपनाम जोड़ देते हैं| अगर किसी को इन नामों से आपत्ति जलन हो तो वे उपयोग न करें| साहित्यकार अपना उप नाम वेद से पूछकर नहीं स्वयं अपनी मर्जी से रखते हैं|
किसी का नामकरण वेद से पूछकर नहीं होता| हमारे देश का नामकरण भी नहीं| कौन कौन सा काम वेद अनुसार हो रहा है? देश की आजादी की लड़ाई वेद के अनुसार नहीं होने के कारण वेद के जानकारों ने उस लड़ाई में भाग नहीं लिए क्या? यह लोकतंत्र, चुनाव, शुद्रों के लिए स्कूल, ब्राह्मणों का नौकरी करना, छूआ छूत न मानना, .... यह सब वेद अनुसार हो रहा है क्या?
वेद को जो देखे भी नहीं वे गांधी को राष्ट्र पिता कहने से वेद का हवाला देकर आपत्ति कर रहे हैं|
बौद्ध, जैनी, आर्य समाजी, पं श्री राम शर्मा गायत्री शक्ति पीठ के अवुयायी.... क्या वेद को मानते हैं?
हम वेद को माने या नहीं यह हमारी मर्जी है| वेद को मानने के लिए हमारे संविधान में कोई कानून नियम नहीं बनाया गया है| हम हमारे संविधान को मानेंगे|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म है|
रविवार, 15 जनवरी 2017
शनिवार, 14 जनवरी 2017
अंध भक्त दूर हों
जो अपनी बात सार्वजनिक मंच, सोशल मिडिया, प्रिंट मिडिया में कहने का साहस नहीं करते, केवल वाट्सएप ग्रुप के किसी मंच में कहते हैं वे निश्चित ही घटिया मानसिकता के हैं| ऐसे ही जलनखोर लोग कान कान में झूठ अफवाह फैलाने में माहिर होते हैं| ऐसा वे अपनी मूर्खता जलनखोरी और अंधभक्ति के कारण करते हैं|
ऐसे भक्त मुझसे दूर हो जांय, मेरे वाट्सएप ग्रुप "विचार मंच" मंच में भी न रहें|
बुधवार, 11 जनवरी 2017
मंगलवार, 10 जनवरी 2017
बड़ा दिमाग
दर असल ब्राह्मणों का दिमाग अपेक्षाकृत बड़ा होता है| पुराने जमाने में वे दूसरों को अध्ययन से वंचित रखने की कोशिश किए अपने हित में| उनके बताए मार्ग का लोग आंख बंद कर पालन करने लगे| आम जन के लिए स्कूल खोले गए अंग्रेज शासन काल में| लोगों के बंद दिमाग खुलने लगे| सोच विचार करने लगे| ब्राह्मणवाद का विरोध भी शुरू हो गया| लेकिन इसे ब्राह्मण परिवार में जन्मे लोगों का विरोध नहीं समझना चाहिए| क्योंकि आज वे हर तरह के कार्य कर रहे हैं मंत्री प्रशासक अधिकारी सैनिक अध्यापक व्यवसायी डॉक्टर इंजिनियर चपरासी.
गाली
Bramahan .... ko... gali..dena ..
..fashion ho...gaya
hay....
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ब्राह्मणवाद की आलोचना होती है, ब्राह्मण परिवार में पैदा होने वालों की नहीं|
यह कोई फैशन नहीं, लोगों के खुले दिमाग का परिणाम है|
रविवार, 8 जनवरी 2017
भावना को ठेस
वैज्ञानिक सोच के विरुद्ध कोई बात कहने से हमारी विज्ञान सम्मत भावना को ठेस पहुंचती है| सरकार, न्यायालय को हमारी भी चिंता करनी चाहिए|
बुधवार, 4 जनवरी 2017
अंतर
हिंदी साहित्य में रुचि रखने वालों से एक प्रश्न-
राजेंद्र यादव तथा राजेंद्र अवस्थी में गुण धर्म आधार पर अंतर बताइए|
बुधवार, 28 दिसंबर 2016
धार्मिक कट्टरता
हिंदू धर्म के मुताबिक_
सति प्रथा सही. विधवा विवाह गलत. शुद्र का अध्ययन अध्यापन करना, सैनिक, अधिकारी बनना गलत|
मुस्लिम धर्म के मुताबिक_
ब्याज लेना गलत| बुरका में रहना जरूरी|
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कट्टर भक्तों को चाहिए कि अपने धर्म के पुरानी परंपराओं नियमों को लागू कर,ें लागू कराने की कोशिश करें|
संस्कृति रक्षा
हा हा हा.. संस्कृति रक्षा के ठेकेदार पता नहीं और क्या क्या शुरू करेंगे|
वेलेंटाइन दिवस 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस|
क्रिसमस 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस|
राज्य
तर्क आधार सहित अपना विचार व्यक्त करें| श्रीराम, श्रीकृष्ण, .. . किसके राज्य में प्रजा अधिक सुखी थी?
मंगलवार, 27 दिसंबर 2016
दिब्येन्द्रीय
कहते हैं पहले के ऋषि मुनी साधु संतों के कर्मेन्द्रीय ज्ञानेन्द्रीय सभी अंग दिब्य होते थे, अलौकिक अद्भुत क्षमतावान होते थे| क्या आज कोई दिब्येन्द्रीय/दिब्यांग हैं?
रविवार, 25 दिसंबर 2016
बुराई से डर
बुराई से डर कर भागना ठीक नहीं उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए|
ब्याप्त बुराइयों के कारण जाति समाज देश दुनियाँ या धर्म को छोड़ने का निर्णय उचित नहीं है|
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016
धोखा
धोखा- -
किसी ने मेरे एक मित्र डॉ एस एस गुप्ता जी को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा| बताया " कार्यक्रम शिक्षा से संबंधित है| शिक्षा में रुचि रखने वाले आप लोगों को अवश्य जाना चाहिए|
मित्र के कहने से मैं निर्धारित तिथि को रायगढ़ के रेड क्वीन में समय पर उपस्थित हो गया| कई युवक युनिफार्म में आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे|मेरे मित्र को मेसेज किया कि मैं पहुँच गया हूँ| हाल के अंदर मुझे बैठाया गया|
कुछ देर बाद घोषणा हुई - हमारी कंपनी आपके फायदे के लिए आपके शहर में काम शुरू करने जा रही है| आप सब को कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए पधार रहे हैं मिस्टर अबस | आप लोग उनके स्वागत में खड़े हो जाएं, जोरदार तालियां बजाइए| सब खड़े होकर ताली बजाने लगे|
मुझे अजीब लग रहा था| मैं क्यों खड़ा होता| क्यों स्वागत करता| मैं खड़ा नहीं हुआ, चुपचाप बैठा रहा|
खैर वे मंचासीन हुए| उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बड़ा सा फूल माला पहनाया गया|
माइक लेकर मिस्टर अबस ने कहा-
आप सबका मैं अभिनंदन करता हूँ| मैं जानता हूँ आपका शहर उर्जावान है| रायगढ़ के युवा बहुत उर्जावान हैं|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम उर्जावान है्ं|
वे दोनो हाथ उपर नीचे 180, 90, 45 अंश में घुमा रहे थे| मुझे हमारे देश के एक बड़े नेता के भाषण देने की स्टाइल याद आ रही थी|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं! बोलिये|
पीछे से आवाज- हां हैं|
मैं यह भी जानता हूं कि आप सब कुछ करना चाहते हैं| बड़ा आदमी बनना चाहते हैं| है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम बड़ा बनना चाहते हैं|
तो हम आपको बहुत धनी बनाना चाहते हैं| बोलिए बनना चाहते हैं?
पीछे से आवाज- हां हम धनी बनना चाहते हैं|
मैं परेशान हो रहा था| कहां फँस गया| मुड़कर देखा पूरा हाल भरा था| पीछे कुछ लोग युनिफार्म में खड़े थे जो बीच बीच में में ताली बजा रहे थे | उत्साहित करने के लिए समवेत स्वर में जी हां जी हां बोल रहे थे|
अब मैं झेल नहीं सका| हेलमेट उठाया, बाहर चला आया| पीछे बैठे थे मेरेे मित्र | वे भी मेरे पीछे पीछे बाहर आ गए|
किसी कहने से पहली बार मेरा समय बरबाद हुआ| बहुत अखर रहा था|
हमारे गाँव लोइंग के रविवारीय स्वाध्याय केंद्र का समय हो रहा था जहां हम सेवा निवृत शिक्षक कर्मचारी निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाते हैं प्राथमिक माध्यमिक विद्यार्थियों को| हम दोनो मित्र बिना चाय नास्ता किए सीधे लोइंग पहुँचे स्वाध्याय केंद्र में|
गुरुवार, 22 दिसंबर 2016
युवाओं से उम्मीद
अपने विऱोधी विचार को भी सुनना पढ़ना चाहिए| सोच समझकर तर्क आधार युक्त अपनी राय देनी चाहिए|
लेकिन ऐसा लकीर के फकीर नहीं कर सकते| वे तो सुनेंगे ही नहीं| क्योंकि वे महा ज्ञानी होते हैं|
युवा वर्ग से उम्मीद की जाती है क्योंकि वे जिज्ञासु होते हैं सब कुछ जानना चाहते हैं|
Following
किसी के सम्पूर्ण गुण धर्म का follow करना संभव नहीं है| एक या एकाधिक गुण का follow कर हम उनके Follower हो सकते हैं| मैं गांधी, नेहरू, इंदिरा, अटल, मोदी जी ...... का follower हूँ|
लेकिन मैं किसी का भक्त नहीं हूँ|
बुधवार, 14 दिसंबर 2016
Universal?
भगवान ईश्वर अल्लाह खुदा गॉड देवी देवता भूत प्रेत सब सार्वभौनिक universal क्यों नहीं होते?
मंगलवार, 13 दिसंबर 2016
ताला और आस्था
आस्तिकों की आस्था संदिग्ध| ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो ताला ही क्यों लगाते हैं?
प्रभु इच्छा
कहते हैं धर्म भक्ति आस्था की कमी के कारण समाज का पतन हो रहा है|
यह प्रभु की इच्छा से ही हो रहा होगा फिर क्या चिंता?
रविवार, 11 दिसंबर 2016
फांसी गोली
रैली आंदोलन करने वालों को किसी कानून में फांसी नहीं हो सकती| बाबा रामदेव, अन्ना, केजरीवाल को सरकार का विरोध करने से फांसी होगी क्या? फिर आजादी के आंदोलन के लिए गांधी नेहरू या अन्य कांग्रेसियों को फांसी गोली क्यों मिलती?
शनिवार, 10 दिसंबर 2016
भक्ति और श्रद्धा
यज्ञ हवन पूजा पाठ में भक्ति होती है, स्वार्थ होता है, कुछ मांग होती है भगवान देवी देवताओं से| महात्मा गांधी की समाधि पर कोई श्रद्धा सुमन अर्पित करे, प्रणाम करे तो वह स्वार्थ नहीं, कोई मांग नहीं केवल श्रद्धा होती है|
भक्ति ओर श्रद्धा में बहुत अंतर है|
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016
आस्तिक का अर्थ
कहा जाता है कि जो वेद को नहीं मानता वह नास्तिक है|
लेकिन मेरे विचार से .. सः अस्ति याने भगवान है ऐसा मानने वाला आस्तिक है| सः न अस्ति = सः नास्ति याने भगवान नहीं है ऐसा मानने वाला नास्तिक है|
आस्तिक नास्तिक
प्रचलित धर्मों का विरोध करता हूँ या पूजा पाठ नहीं करता| इसका मतलब यह नहीं कि मैं नास्तिक हूँ|
मैं भगवान को जानता समझता नहीं, इसलिए फिलहाल आस्तिक नहीं हूँ| जिस दिन मैं जान गया वह है, तो आधा अधूरा नहीं शत प्रतिशत आस्तिक हो जाऊंगा|
धर्म और संविधान
अपने अपने संविधान और अपने धर्म की आलोचना कर आवश्यक सुधार करना चाहिए| दूसरे की आलोचना आवश्यक नहीं|
देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होना चाहिए| यदि धर्मों में भी संशोधन होते रहें तो अंत में वह होगा हमारे देश का संविधान|
गुरुवार, 8 दिसंबर 2016
प्यार
कब तक शव ममियों का मस्का लगाते टाईम पास करें|
इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग आओ सबसे प्यार करें|
एकमत
कहते हैं उपर वाले की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता| तो ये उपर में रहने वाले अल्लाह भगवान.. सभी किसी पत्तीको हिलाते समय एकमत होते हैं?
मोदी जी
ब्रह्मचारी जी शक्तिशाली हैं, उत्साही हैं| कुछ नया करने की इच्छा बलवती है| भारत स्वछता अभियान. शौचालय निर्माण, अब नोटबंदी| आगे आगे देखिए होता क्या है|
अलग अलग भगवान
अगर भगवान अल्लाह सब एक ही हैं तो उनके बताए रास्ते भी एक ही होना चाहिए| हिंदू मुस्लिम सब अलग अलग क्यों?
बुधवार, 7 दिसंबर 2016
विरोध
मैं मोदी का जी विरोध करूं तो कांग्रेसी न समझें, कल उनका भी विरोध करूंगा| अम्बेडकर जी की प्रशंसा करता हूं लेकिन बाबावादी या जय भीम वाला नहीं हूँ|
मंगलवार, 6 दिसंबर 2016
दिमाग का उपयोग
आम तौर पर युवा वर्ग लकीर के फकीर नहीं होते| कुछ ही होते हैं जो बिना सोच विचार किए मान लेते हैं| वे अपने दिमाग का कम उपयोग करते हैं|
मंगलवार, 29 नवंबर 2016
शंख घंट की उपयोगिता
पुराने मंदिरों में खिड़कियां, रोशनदान नहीं होते थे चोरी के डर से | कम प्रकाश में भगवान देवी देवता के भोग के कुछ छूटे गिरे भाग खाने के लिए चूहे आते थे| चूहों को खाने के लिए साँप आ जाते थे| उन्हें भगाने के लिए पुजारी सबसे पहले घंट शंख बजाते थे | इस ध्वनी से लोगों को पूजा प्रारंभ होने की खबर भी हो जाती थी|
परिवर्तन संशोधन
धर्म के ठेकेदार उसकी आलोचना, बुराई की चर्चा, कोई संशोधन पसंद नहीं करते| उन्हें डर होता है कि कहीं संशोधन परिवर्तन होते होते हमारे धर्म के सारे नियम खतम न हो जाय|
कुछ परम्परावादी लकीर के फकीर अपने समाज, धर्म की कोई आलोचना सुनना पसंद नहीं करते| उसमें कोई संशोधन परिवर्तन उन्हें स्वीकार नहीं|
अपने समाज, धर्म, संविधान की कमी या बुराई की अवश्य चर्चा करनी चाहिए| चर्चा कर देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवरर्तन करना चाहिए|
भ्रष्टाचार
कांग्रेस को ज्यादा मौका मिला| कांग्रेसी ज्यादा घोटाला किए| अब मोदी जी को मौका मिला है| वे भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कमर कस लिए हैं| देखें क्या होता है|
एक बात.. मोदी जी के पाक साफ होने से उनके भक्त भी ईमानदार होंगे, ऐसा नहीं है|
मेरे विचार से जब तक भगवान देवी देवता दुनियां में रहेंगे भ्रष्टाटार चलता रहेगा| क्योंकि हम मानते हैं कि हमारे सारे पाप भगवान और देवी देवताओं का मस्का लगाने से धुल जाते हैं|
सोमवार, 28 नवंबर 2016
महान कौन?
अम्बेडकर जी ने संविधान का प्रारूप लिखा जिसे पारित किया सभा ने| अर्थात सब की इच्छा से संविधान बना| केवल अम्बेडकर की नहीं चल सकती थी यह समझना चाहिए| अम्बेडकर जी महान थे बेशक लेकिन उन्हें सबसे महान सिद्ध करने के लिए बाकी सबको कमतर बताना गलत है , मूर्खता है|
शनिवार, 26 नवंबर 2016
संविधान ही धर्म
दुनियां में अलग अलग धर्मो की जरुरत नहीं है| अपने देश का संविधान ही अपना धर्म होना चाहिए| यः धारयति सः धर्मः| जिसे धारण करें वह धर्म है|
शुक्रवार, 25 नवंबर 2016
धर्म
धर्म की एक चाल है कि आपके मस्तिष्क को इतना सुन्न कर दिया जाए कि आप उसके आदेशों पर प्रश्न ही ना कर सकें, भले ही वह आदेश कितना भी मूर्खतापूर्ण क्यों न हो। आपसे कहा जा रहा है कि आप अपने दिमाग का दरवाजा बंद करके, जैसा कहा जा रहा है वैसा करते चले जाएँ। --अज्ञात।।
गुरुवार, 24 नवंबर 2016
अपना रास्ता खुद बनाओ
धर्मो के नियमों में बहुत विभिन्नता है| सभी धर्मों का पालन संभव नहीं| महापुरुषों के विचारों में बहुत विभिन्नता है| उनका अनुसरण संभव नहीं| इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा "अप्प दीपो भव|" अपना दीपक स्वयं बनो|
Secular
मैं धर्म निरपेक्ष secular हूं, धर्म निरपेक्ष रहूंगा| गाली गलौज करना मेरा धर्म नहीं है| इंसान हूं, इंसानियत मेरा धर्म है|
भगवान का स्नान
हमारे मंदिरों में भगवान देवी देवताओं की रोज पूजा करते हैं, भोग लगाते हैं( भोजन कराते) हैं लेकिन रोज नहीं नहलाते| उनके जन्म दिन या खास दिन ही नहलाते हैं| क्यों?
दोषों का परिमार्जन
पहले अपने अंदर के दोष को देखें | अपने और अपने धर्म की बुराई दूर करें तो हम और हमारा धर्म बेहत्तर होंगे| हम सुधरें तो युग सुधरेगा|
तीन ब्रह्मचारी
_ तीन ब्रह्मचारी_
ऊंचे पूरे डील डौल वाले साहसी वीर ब्रह्मचारी हनुमान जी श्री राम के भक्त थे | आंशिक नहीं शत प्रतिशत भक्त| अपने प्रभु श्री राम जी जो आज्ञा दें बिना किसी संशय के तत्काल पालन करने वाले|
ऐसे ही ऊंचे पूरे कद काठी वाले साहसी आर एस एस के परम भक्त ब्रह्मचारी मोदी जी ने भारत मेें नोटबंदी कर दिया अपने प्रभु की आज्ञा से | परिणाम देख रहे हैं हाहाकार| अंतिम परिणाम कालाधन का एक भाग खत्म| नक्सलवाद को चोट|
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरीष्ठ सदस्य संवेदनशील कवि हृदय अजानुबाहु ब्रह्मचारी अटल बिहारी वाजपेयी जी से अगर यह नोटबंदी करने के लिए कहा जाता तो वे हरगीज तैयार नहीं होते चाहे जो भी परिणाम होता|
आत्मा की अवधारणा
एक अनुत्तरित, मन को अशांत कर देने वाला प्रश्न - मृत्यु पश्चात क्या? इसका जबाब है आत्मा की कल्पित अवधारणा मन को सकून तो देता है मान लेने से|
गीता में कहा है- जिस तरह शरीर पूराने वस्त्र को त्याग कर नया धारण करता है वैसे ही आत्मा समय आने पर पूराने शरीर को त्याग कर नए रूप में जन्म लेती है|
मंगलवार, 22 नवंबर 2016
धार्मिक आजादी
हमें अंग्रेजों से आजादी मिली किंतु अपनी इच्छा से धर्म के चयन की आजादी नहीं मिली| जन्म होते ही बच्चा हिंदु मुस्लिम इसाई हो जाता है| फिर Copy Paste चलता रहता है|
सभी धर्म चहते हैं कि हम तर्क न करें, विचार न करें| Copy Paste करते रहें, आंख, दिमाग सब बंद रखें|
निश्चित ही हमारे देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने वाले Copy Paste करने वाले नहीं थे, सोचते विचारते थे|
राष्ट्र भक्त विचारक होते हैं वे Copy Paste करने वाले नहीं होते| धर्म भक्त copy paste करने वाले होते हैं|
हम राष्ट्र भक्ति कभी कभी दिखा देते हैं
हकीकत में हम धर्म भक्त होते हैं|
सरकारी आदेश का पालन करने हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं|
बिना सरकारी आदेश के हम धार्मिक त्यौहारों को अपने घर में सपरिवार धूमधाम से मनाते हैं लेकिन राष्ट्रीय पर्व नहीं|
वर्तमान सभी धर्म हमारा brain wash करते हैं, फिर हमारे दिमाग में अपनी बातों को भरते हैं| वे चाहते हैं कि हम बिना विचारे उसका पालन करें|
मुझे आश्चर्य होता है छोटे छोटे बच्चे मंदिर मस्जिद.. में जाते हैं नमाज पढ़ते हैं, पूजा अर्चना करते हैं| याने वे ईश्वर को जानते हैं |मैं सड़सठ वर्ष का हो गया लेकिन उस भगवान को नहीं जान सका|