ईश्वरवादियों द्वारा कल्पित युगों में ईश्वर द्वारा लिए गये अवतारों के विषय में विचार करते हैं। चूंकि सतयुग में चारों चरण पुण्य के ही थे इसलिए इस युग में एक भी पापी व्यक्ति नहीं था तो ऐसी स्थिति में इस युग में ईश्वर को एक भी अवतार नहीं लेना चाहिए था। लेकिन हम पंडितों की पोथियों में देखते हैं कि इस युग में ईश्वर ने मत्स्य, कच्छप, सुकर एवं नृसिंह नामक चार अवतार लिए। अब हमारे सामने प्रश्न यह उपस्थित हो जाता है कि जब इस योग में एक भी पापी नहीं हुआ था, तो ईश्वर ने चार अवतार क्यों लिए ? *...... यशवंत जोगी*
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017
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