मंगलवार, 29 नवंबर 2016

परिवर्तन संशोधन

धर्म के ठेकेदार उसकी आलोचना, बुराई की चर्चा, कोई संशोधन पसंद नहीं करते| उन्हें डर होता है कि कहीं संशोधन परिवर्तन होते  होते हमारे धर्म के सारे नियम खतम न हो जाय|
कुछ  परम्परावादी लकीर के फकीर अपने समाज, धर्म की कोई आलोचना सुनना पसंद नहीं करते| उसमें कोई संशोधन परिवर्तन उन्हें स्वीकार नहीं|
अपने  समाज, धर्म, संविधान की कमी या बुराई की अवश्य चर्चा करनी चाहिए| चर्चा कर देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवरर्तन करना चाहिए|

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