धर्म के ठेकेदार उसकी आलोचना, बुराई की चर्चा, कोई संशोधन पसंद नहीं करते| उन्हें डर होता है कि कहीं संशोधन परिवर्तन होते होते हमारे धर्म के सारे नियम खतम न हो जाय|
कुछ परम्परावादी लकीर के फकीर अपने समाज, धर्म की कोई आलोचना सुनना पसंद नहीं करते| उसमें कोई संशोधन परिवर्तन उन्हें स्वीकार नहीं|
अपने समाज, धर्म, संविधान की कमी या बुराई की अवश्य चर्चा करनी चाहिए| चर्चा कर देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवरर्तन करना चाहिए|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 29 नवंबर 2016
परिवर्तन संशोधन
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