शनिवार, 26 नवंबर 2016

संविधान ही धर्म

दुनियां में अलग अलग धर्मो की जरुरत नहीं है| अपने देश का संविधान ही अपना धर्म होना चाहिए| यः धारयति सः धर्मः| जिसे धारण करें वह धर्म है|

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें