सोमवार, 21 नवंबर 2016

भक्तों की गुंडागर्दी


भक्तों ने शिकायत वापस ली . यही प्रमाण है कि वे घटिया नीच बेईमान भ्रष्ट मूर्ख हैं|
अब उन्हें पोलिस द्वारा बीच बाजार लात घूंसा पिटाई कर जेल दाखिल करनी चाहिए|
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बद्री प्रसाद पुरोहित_
मित्रो! २१नवम्बर २००८ को मेरी एक कविता स्थानीय साप्ताहिक में प्रकाशित हुई थी।धर्मान्धों नें आस्था पर ठेस ,ईश निंदा के नाम पर बसना थाने में एफ आई आर किया और मेरे विद्यालय में आकर मुझे बेहिसाब लात घूंसों से मारा।कुछ उन्मादी तो कह रहे थे कि पेट्रोल लाओ जला  देते हैं।खैर मेरे चाचा और एक दो सहकर्मियों के बिच बचाव के बाद मेरे प्राण बचे,वे तो धमका रहे थे इसे जो बचाने आएगा  उसे भी हम जला देंगे खैर मेरी जान बची,पुलिस नें मुझे गिरफ्तार कर लिया।उन्मादियों ने थाने और अदालत को घेर लिया था।जज नें तो जमानत  दे दी पर एस डी एम् ने जमानत न देकर मुझे उपजेल भेज दिया।फिर न्याय प्रेमी ,शान्ति प्रेमी  जनताऔर मेरे मित्र परिजन भी संगठित होकर थाना और अदालत पहुचे और मेरी जमानत करवाई और भारी दबाव डालने के बाद मुझे मारने वालों में से 7 को गिरफ्तारी  कर तत्काल जमानत दे दी। लगभग तीन साल अदालत पेशी जाते रहा मैं तो अदालत से अपनी कविता को जंचवाना चाहता था पर शिकायत कर्ताओं ने अपनी शिकायत वापस ले ली और उस मुकदमे का पटाक्षेप हो गया।भय,   अपमान और जिल्लत झेलने के बाद भी मैंने लिखना बंद नहीं किया ।प्रस्तुत है एक रचना। #
मैं कैसे भूल जाऊँ#
विश्व नहीं भूलता
हिटलर,इदी अमिन,चंगेज खान की बर्बरता
हिरोशिमा ,नागाशाकी में हुआ अणुबम संहार
भारत नहीं भूलता गुलामी का दंश
समारोह पूर्वक याद करता है
हर वर्ष स्वाधीनता की वर्षगांठ मनाकर
भोपाल गैस काण्ड के पीड़ित
नहीं भूलते उस  सिहराने वाली काली रात को
सिक्ख नहीं भूलते 84 के दंगे
मुस्लिम नहीं भूलते बाबरी ध्वंश
और उत्तर गोधरा के दंगे
साहित्यकार नहीं भूलते
हरिशंकर  परसाई की पिटाई
और सफ़दर हासमी की निर्मम हत्या।
लोग इतिहास के बुरे दिनों को याद कर
भविष्य में मानवता को बचाए रखने का संकल्प ही तो लेते हैं
पर मेरे हितैषी
मुझे जाने क्यूँ सलाह देते हैं
मैं उस वाकया को भूल जाऊं और न मनाऊं
अपना दूसरा जन्म दिन
21 नवम्बर 2008 के उस  काले दिन की याद में
जब दिन दहाड़े भरी सड़क में
मेरी एक कविता से नाराज
धर्मान्धों के एक गिरोह के हमले में
मैं बाल बाल बचा ।
मैं कैसे व क्यों भुला दूँ
यह भूल जाने लायक वाकया भी नहीं।
    _ बद्री प्रसाद  पुरोहित

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