दिनांक 21-10-2017 को छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ के पूर्वांचल शिक्षक मंच महापल्ली की वार्षिक सभा में शिक्षा को समर्पित भिलाई में कार्यरत श्री मनोज स्वाईं ग्राम कुकुर्दा को मंच की सदस्यता दी गई |
सभा में आयोजित शिक्षा पर संगोष्ठी में उन्होंने अपना विचार रखा |
मंच के नए सदस्य भिलाई में कार्यरत श्री मनोज स्वाईं ग्राम कुकुरदा ने अपने शिक्षा क्रांति की जानकारी देते हुए कहा - "मैंने वर्ष 2017 को शिक्षा क्रांति वर्ष कहा है| मैं इस अंचल के तथा ओड़िशा के कई स्कूलों में जाकर पढ़ाई की मेरी टेकनिक से गणित को | तोड़ दिया हूँ| गणित को खेल बना दिया हूँ| जो बच्चे क्लास में बोलते नहीं थे वे गणित को खेल समझने लगे हैं |
आपको बता दूं कि मैं एक ही किडनी से चल रहा हूँ| कब क्या हो जाय पता नहीं| ज्यादा बोलने से मेरा शरीर बिगड़ने लगता है| लेकिन फिर भी मैं बोल रहा हूँ| मैं एक दिन में सौ किलोमीटर एक
बोतल पानी लेकर मोटर साइकिल से दौरा किया हूं| मैं जानता हूं यह मेरे जीवन के लिए ठीक नहीं है लेकिन करता हूं| एक दिन में कई स्कूलों में जाकर छः छः घंटे क्लास लिया हूँ| आज भी
मैं आपके पास आया हूँ| कुछ लेने नहीं कुछ देने आया हूँ |
मैंने कॉलेज स्तर के प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे जाने वाला एह प्रश्न का हल कक्षा 6 वीं मे बताया मेरी टेकनिक से| फिर उस क्लास का एक विद्यार्थी 8 वीं के विद्यार्थियों को पुरे आत्म विश्वास के साथ समझाया |प्रायमरी मिडिल कक्षाओं में सिर्फ तीन घंटे पर्याप्त हैं| पाठ्यक्रम पूरा हो जाएगा|" अंग्रेजी शिक्षा संबंध में आगे कहा - "मेरे सिलेबस अनुसार पहली कक्षा में सिर्फ ए बी सी डी अल्फाबेट, दूसरी में सिर्फ सौ शब्द जानना है विद्यार्थियों को | गणित में पहली से पांचवीं तक जोड़ घटाना, |भाग गुणा, लघुत्तम महत्तम बस| पर्याप्त है|" इस पर श्री आर सी प्रधान प्राचार्य ने कहा कि हमें शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम तो पूरा करना पड़ेगा | फिर आपके सिलेबस अनुसार कैसे पढाएं? आपके अनुसार हमारे पाठ्यक्रम से कम क्यों पढाएं ? श्री मनोज स्वाई ने आगे कहा - आप विश्वास करेंगे| मैं जब दूसरी कक्षा में पढ़ता था एक उपन्यास पढ़ा | पूरा समझकर पढ़ा| क्या कोई अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाला अंग्रेजी का | उपन्यास पढ़ सकता है? कभी नहीं| हमें अपनी भाषा की और आना है | अपने बच्चों को | अंग्रेजी माध्यम में नहीं हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूलों में पढ़ना चाहिए| विद्यार्थी अपनी भाषा में अच्छे से समझ सकता हैं अंग्रेजी में नहीं| इस पर श्री आनंद प्रधान सेवा निवृत शिक्षक ने कहा कि लगभग दो साल पहले हमारे विचार मंच द्वारा बटमूल महाविद्यालय महापल्ली में आयोजित विचार गोष्ठी में सभी एकमत थे कि अपने बच्चों को हिंदी माध्यम शालाओं में पढ़ाना चाहिए|
अंत में श्री स्वाई जी कहा - "मैं यहां कुछ लेने नहीं कुछ देने आया हूँ|
पूर्वांचल शिक्षक मंच के अध्यक्ष एन. आर. प्रधान ने कहा भगत सिंह आजादी के लिए पागल थे | मनोज स्वाई शिक्षा के लिए पागल हो गए हैं |वे कहते हैं अंग्रेजी के तीन काल पढाये जाते हैं | मैं पांच काल बनाया हूँ | मेरे इस काल को यदि पढ़ाया जाय तो विद्यार्थी फर्राटे के साथ इंग्लिश बोलेंगे | देखते हैं कौन सरकार मेरे इस टेक्निक को पहले अपनाती है | मैं वर्ष 2017 को शिक्षा क्रांति वर्ष नाम दिया हूँ | कौन कौन मेरा साथ देंगे? आप सब मेरे इस क्रांति में मेरा साथ दीजिये यही मेरा निवेदन है अंग्रेजी और गणित पढ़ाने का उनका टेकनिक कितना सार्थक होगा? उनके पाठ्यक्रम और टेकनिक को कौन कौन शिक्षकअपनाएंगे? यह समय बताएगा | अभी तो वे शिक्षा क्रांति के लिए तन मन और धन दे रहे हैं |
मनोज जी का कार्यक्रम पुर्व निर्धारित नहीं था| लगभग चालीस मिनट में उनकी बात पूरी नहीं हो सकी | उनकी बातों पर हमारे मंच में चर्चा अधूरी रही|
( मेरे विचार से श्री मनोज स्वाई जी चाहें तो हमारे छत्तीसगढ़ में शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले भिलाई या राजधानी रायपुर या उनके जन्म क्षेत्र के जिला मुख्यालय रायगढ़ में एक स्कूल खोल कर शिक्षा के अपने विचारों, टेक्निक और पाठ्यक्रम को मूर्त रूप दे सकते हैं | )
सभा में आयोजित शिक्षा पर संगोष्ठी में उन्होंने अपना विचार रखा |
मंच के नए सदस्य भिलाई में कार्यरत श्री मनोज स्वाईं ग्राम कुकुरदा ने अपने शिक्षा क्रांति की जानकारी देते हुए कहा - "मैंने वर्ष 2017 को शिक्षा क्रांति वर्ष कहा है| मैं इस अंचल के तथा ओड़िशा के कई स्कूलों में जाकर पढ़ाई की मेरी टेकनिक से गणित को | तोड़ दिया हूँ| गणित को खेल बना दिया हूँ| जो बच्चे क्लास में बोलते नहीं थे वे गणित को खेल समझने लगे हैं |
आपको बता दूं कि मैं एक ही किडनी से चल रहा हूँ| कब क्या हो जाय पता नहीं| ज्यादा बोलने से मेरा शरीर बिगड़ने लगता है| लेकिन फिर भी मैं बोल रहा हूँ| मैं एक दिन में सौ किलोमीटर एक
बोतल पानी लेकर मोटर साइकिल से दौरा किया हूं| मैं जानता हूं यह मेरे जीवन के लिए ठीक नहीं है लेकिन करता हूं| एक दिन में कई स्कूलों में जाकर छः छः घंटे क्लास लिया हूँ| आज भी
मैं आपके पास आया हूँ| कुछ लेने नहीं कुछ देने आया हूँ |
मैंने कॉलेज स्तर के प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे जाने वाला एह प्रश्न का हल कक्षा 6 वीं मे बताया मेरी टेकनिक से| फिर उस क्लास का एक विद्यार्थी 8 वीं के विद्यार्थियों को पुरे आत्म विश्वास के साथ समझाया |प्रायमरी मिडिल कक्षाओं में सिर्फ तीन घंटे पर्याप्त हैं| पाठ्यक्रम पूरा हो जाएगा|" अंग्रेजी शिक्षा संबंध में आगे कहा - "मेरे सिलेबस अनुसार पहली कक्षा में सिर्फ ए बी सी डी अल्फाबेट, दूसरी में सिर्फ सौ शब्द जानना है विद्यार्थियों को | गणित में पहली से पांचवीं तक जोड़ घटाना, |भाग गुणा, लघुत्तम महत्तम बस| पर्याप्त है|" इस पर श्री आर सी प्रधान प्राचार्य ने कहा कि हमें शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम तो पूरा करना पड़ेगा | फिर आपके सिलेबस अनुसार कैसे पढाएं? आपके अनुसार हमारे पाठ्यक्रम से कम क्यों पढाएं ? श्री मनोज स्वाई ने आगे कहा - आप विश्वास करेंगे| मैं जब दूसरी कक्षा में पढ़ता था एक उपन्यास पढ़ा | पूरा समझकर पढ़ा| क्या कोई अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाला अंग्रेजी का | उपन्यास पढ़ सकता है? कभी नहीं| हमें अपनी भाषा की और आना है | अपने बच्चों को | अंग्रेजी माध्यम में नहीं हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूलों में पढ़ना चाहिए| विद्यार्थी अपनी भाषा में अच्छे से समझ सकता हैं अंग्रेजी में नहीं| इस पर श्री आनंद प्रधान सेवा निवृत शिक्षक ने कहा कि लगभग दो साल पहले हमारे विचार मंच द्वारा बटमूल महाविद्यालय महापल्ली में आयोजित विचार गोष्ठी में सभी एकमत थे कि अपने बच्चों को हिंदी माध्यम शालाओं में पढ़ाना चाहिए|
अंत में श्री स्वाई जी कहा - "मैं यहां कुछ लेने नहीं कुछ देने आया हूँ|
पूर्वांचल शिक्षक मंच के अध्यक्ष एन. आर. प्रधान ने कहा भगत सिंह आजादी के लिए पागल थे | मनोज स्वाई शिक्षा के लिए पागल हो गए हैं |वे कहते हैं अंग्रेजी के तीन काल पढाये जाते हैं | मैं पांच काल बनाया हूँ | मेरे इस काल को यदि पढ़ाया जाय तो विद्यार्थी फर्राटे के साथ इंग्लिश बोलेंगे | देखते हैं कौन सरकार मेरे इस टेक्निक को पहले अपनाती है | मैं वर्ष 2017 को शिक्षा क्रांति वर्ष नाम दिया हूँ | कौन कौन मेरा साथ देंगे? आप सब मेरे इस क्रांति में मेरा साथ दीजिये यही मेरा निवेदन है अंग्रेजी और गणित पढ़ाने का उनका टेकनिक कितना सार्थक होगा? उनके पाठ्यक्रम और टेकनिक को कौन कौन शिक्षकअपनाएंगे? यह समय बताएगा | अभी तो वे शिक्षा क्रांति के लिए तन मन और धन दे रहे हैं |
मनोज जी का कार्यक्रम पुर्व निर्धारित नहीं था| लगभग चालीस मिनट में उनकी बात पूरी नहीं हो सकी | उनकी बातों पर हमारे मंच में चर्चा अधूरी रही|
( मेरे विचार से श्री मनोज स्वाई जी चाहें तो हमारे छत्तीसगढ़ में शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले भिलाई या राजधानी रायपुर या उनके जन्म क्षेत्र के जिला मुख्यालय रायगढ़ में एक स्कूल खोल कर शिक्षा के अपने विचारों, टेक्निक और पाठ्यक्रम को मूर्त रूप दे सकते हैं | )

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