आओ विचार करें
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दोस्तों! हम ठंडे दिमाग से बिना किसी दुराग्रह के ईश्वर के अस्तित्व पर चर्चा करते हैं।
ईश्वर का नाम पूरे विश्व में है।प्रत्येक धर्म के लोग ईश्वर को अलग अलग रूप से मानते हैं। हमारे माता पिता तथा गुरूजनों ने हमें ईश्वर के बारे में जो कुछ बताया हमने उसे मान लिया। हम लोग माता पिता तथा गुरूजनों का सम्मान करते हैं। वे हमारे हितैषी व हमें प्यार करने वाले लोग हैं।
पर हम जब बड़े हो गए तो हमारे मन में ईश्वर को लेकर अनेकों सवाल उठने लगे।समय के साथ चलना हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। सत्य को जानने का सबको अधिकार है।सत्य को जाने बिना जीवन निरर्थक है।
ईश्वर के अस्तित्व पर चर्चा होती रही है तथा ईश्वर के पक्ष में तमाम तरह की दलीलें दी जाती रही हैं। ईश्वर के होने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है तथा अप्रत्यक्ष रूप से भी ईश्वर न्याय नहीं करता है। पूरी दुनिया में सामाजिक आर्थिक धार्मिक तथा जातीय संघर्ष होता रहा है। विषमता तथा विसंगतियों में कोई कमी नहीं है।
धर्म के नाम पर ठगी का धंधा फलता फूलता रहा है। लोग सत्य प्रेम न्याय सहयोग दया को न मानकर ईश्वर का ही गुणगान करते रहते हैं। ईश्वर की आड़ में आतंक व अन्याय को बढ़ावा दिया करते हैं।
ईश्वर के स्थान पर यदि हम मानवोचित गुणों को स्वीकार कर लें तथा सभी को समान रूप से जीवन जीने का अधिकार दे दें तो संसार स्वर्ग बन जाएगा। सब सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे तथा मृत्यु के समय भी संतोष के साथ देह त्याग करेंगे इसमें कोई शक नहीं है।
विचारक पद्ममुख पंडा. महापल्ली
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