बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

विवेक


Rattan Lal Gottra
*और जिसका विवेक शून्य हो जाता है वह इंसान तर्क नही कर सकता,तर्क सुन भी नहीं सकता...*
*और फिर यहीं से शुरू होती है मानसिक गुलामी और बाबाओं का खेल।*
*भारत में करोड़ो लोग इस समस्या से पीड़ित हैं
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जय संविधान जय संविधान

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