सोमवार, 9 सितंबर 2024

मांसाहार

हमारे जीवन के लिए मांसाहार जरूरी न हो तो हमें किसी प्राणी को मार कर उसका मांस नहीं खाना चाहिए।

गुरुवार, 11 जुलाई 2024

धर्म

धर्म= ?
यः धारयति सह धर्मः।
जो धारण करें वह धर्म है।
धर्म संस्कृत के ''धृ'' धातु से बना है जिसका अर्थ है जो धारण किया जाये। 
जो धारण करने योग्य हो वह धारण करना चाहिए। वर्तमान काल में हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए।

शुक्रवार, 21 जून 2024

सेकुलर

सेकुलर गद्दार नहीं होते। वे अपने मस्तिष्क का उपयोग करते हैं। कट्टर धार्मिक लोग लकीर के फकीर होते हैं जो अपने धर्म को अपने देश के संविधान से अधिक महत्व देते हैं। वे दिमाग का पूरा उपयोग नहीं करते । ऐसी धार्मिक कट्टरता ही आतंकवाद को जन्म देती है

प्रणाम

 मुझे नहीं पता..मैं नास्तिक हूं या नहीं| हां फिलहाल मैं आस्तिक नहीं हूं| लेकिन महापुरुषों के चित्र प्रतिमा समाधि को उनके सम्मान के लिए हाथ जोड़कर प्रणाम करता हू्| कभी कभी मंदिरों में भी प्रणाम करता हुं। हो सकता है वे भी देश दुनियां के हित में कुछ अच्छा किए हों।

       लेकिन मत्था टेककर उनसे कुछ मांगता नहीं| कुछ चढ़ावा नहीं देता|

आत्मा और पुनर्जन्म

 सोचने की बात तो है| तर्क करने से ये आत्मा की धारणा अवैज्ञानिक लगती है झूठ लगती है|

लेकिन आत्मा का पुरजन्म होना यह दर्शन "मृत्यु के बाद क्या ?" का एक खुबसूरत जबाब है| इसे मान लेना मन को सकून देता है, मृत्यु भय को कम करता है| वरना सोच सोच कर कि मृत्यु के बाद क्या होगा? नींद नहीं आती.  मन व्याकुल पागल होने लगता है|


प्रेम और मानवता

प्रेम मानवता ही हमारा धर्म होना चाहिए | लेकिन सभी धर्म एक दूसरे के विरुद्ध घृणा द्वेष फैला रहे हैं| दुनियां में बहुत सारे भगवान, खुदा, गॉड हैं जो मनुष्यों के बीच दिवाल खड़े कर रहे हैं|

Intelligent

 जो पढ़ कर, देख कर सोच विचार करते हैं वे ही सवाल करते हैं । वही intelligent होते हैं ।

बाकी लोग बिना सवाल किए 

अपने अणु मस्तिष्क में भरते जाते हैं ।

हवन

 कहते हैं हवन से वेक्टेरिया नष्ट होते हैं । भारत में इतने हवन होते हैं,  फिर भी विभिन्न वेक्टेरिया भरे हैं।

आस्तिक - नास्तिक - मानावता

 धार्मिक पुस्तकों ग्रन्थों को पढ़ कर, समझ कर ही कोई नास्तिक बनता है।

नास्तिक व्यक्ति का धर्म होता है मानवता।

गुरुवार, 30 मई 2024

अभ्युत्थानमधर्मस्य

 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|

       ********

गीता के श्लोक को लिखने में  हम भूल कर सकते हैं/कर रहे हैं? मुझे संदेह हुआ| मैं गीता प्रेस गोरखपुर को पत्र लिखा| जबाब आया -" संदेह न करें| आगे वही रटा रटाया सुना हुआ अर्थ बताया गया जो गीता पुस्तकों में लिखा हुआ है| यह अर्थ तो मैं कक्षा 9 वीं से जान रहा हूं जब मैं मेरे दादा जी के कहने से रोज शाम को राम चरित और गीता के कुछ पन्ने उसमें दिए अर्थ सहित पढ़कर सुनाता था| मेरे दादा जी और ताऊ जी बैठकर सुनते थे|

अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष

अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य

तद=तब

आत्मानं=स्वयं का

सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।

       यही मैं भी समझा हूं| मेरे विचार से हमें लिखना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |

     सोचने की बात है कि गीता में 

"अधर्म के अभ्युत्थान के लिए" नहीं ,

"धर्म के उत्थान के लिए" 

ही कहा गया होगा|

अभ्युत्थानम् अधर्मस्य (अभ्युत्थामधर्मस्य)  नहीं, अभ्युत्थानम् घर्मस्य कहा गया होगा|.

         **"*"**"

शनिवार, 25 मई 2024

इंसानियत

 


यदि आपमें इंसानियत है तो आपको न तो किसी ईश्वर की जरूरत है और न ही किसी धर्म की...!!

मंगलवार, 21 मई 2024

आस्तिक नास्तिक

 बचपन में लोग बताते हैं कि भगवान, देवी देवता, भूत प्रेत होते हैं। हम बिना सोचे समझे मान कर आस्तिक हो जाते हैं।

     बड़े होकर जो सोच विचार करते हैं, जानने की कोशिश करते हैं वे नास्तिक हो जाते हैं। 

नास्तिक याने भगवन देवी देवता भूत प्रेत को अपि न अस्ति।

गुरुवार, 16 मई 2024

भ्रष्ट्राचार

 भ्रष्टाचार कोई नही रोक सकता| जब तक उसे भगवान और देवी देवताओं का संरक्षण मिलता रहेगा|

मंगलवार, 14 मई 2024

ह्यूमैनिटी

 किसी भी भगवान को हम न मानें, follow न करें, पूजा पाठ यज्ञ हवन प्रार्थना न करें तो क्या होगा? भगवन गुस्सा करेंगे? क्यों? उन्हे हम क्यों खुश करें?

     हमें उचित कर्म करना चाहिए।  Humanity का पालन करना चाहिए।

पिछड़ी जाति कौन

 पिछड़ी जाति कौन? -

छत्तीसगढ़ में कोलता जाति के लोग भी उपनाम "गुप्ता" लिखते हैं, ओड़िशा में कोई नहीं लिखता ।

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                 आर्यों के मनु स्मृति के अनुसार चार वर्णों में से तीन वर्ण क्रमशः उच्च माने जाते हैं ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य। चौथा वर्ण है शुद्र ।

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           शुद्र को अछूत माना गया । ब्राह्मण उनके घर में जाकर जन्म  मृत्यु संस्कार, शादी विवाह, यज्ञ हवन आदि नहीं करते ।

               हमारे भारत के मूल निवासी जंगलों में रहने वाले  (S. T.) तथा मैदानी इलाके में रहने वाले (अन्य पिछड़ी जाति O. B. C. मुख्य काम खेती ) को आर्यों ने  राक्षस कहा । आर्यों के पुराणों में इन्हें राक्षस कहा गया है । उनके कथा कहानियों में उन्हें कुरूप, झगड़ालु , बदमाश, मांसाहारी..  बताया गया । आर्यों और राक्षसों के बीच युद्ध होते रहे । कथित राक्षस बलिष्ठ और  सरल स्वभाव के होते थे । आर्यों के कथित उच्च वर्ग (सवर्ण)  बड़े  दिमाग वाले intelligent तथा चालाक होते थे ।

             O. B.C  कोलता अघरिया कुर्मी.....  खुद को सवर्ण /वैश्य/  क्षत्रिय कहलाना चाहते हैं, खुद को उच्च जाति का बताकर सम्मान पाना चाहते हैं ।लेकिन शासन द्वारा पिछड़ी जाति को मिलने वाली सहायता छात्रवृत्ति तथा आरक्षण का लाभ लेते हैं ।

                 हम कोलता भी राक्षस कुल के हैं । छत्तीसगढ़ में हम कोलता लोगों के घर में  विवाह/एकादश कर्म के पूजा हवन में ब्राह्मण पुरोहित मंत्रोच्चार करते हैं कहते हैं -

जम्बू द्वीपे भारतवर्षे उत्कल देशे राक्षस कुलस्य गुप्त वंशस्य  . .......... (गुप्त के स्थान पर साहा, साहू, भोई भोय.... आदि )

ओड़िशा में क्या कहते हैं? कृपया बताएं।

इससे स्पष्ट है छत्तीसगढ़ के हम  (कोलता ) के पूर्वज उत्कल देश (ओड़िशा) से आए हैं । ज्ञातव्य है कि ओड़िशा में कोलता कुल्ता कुलिता कोई अपना उपनाम  "गुप्ता " नहीं लिखते ।

                    ओडिशा से कुलिता कुलता छत्तीसगढ़ (पहले मध्यप्रदेश) में आकर कोलता लिखने लगे ।  पधान से प्रधान, भोई से भोय, साहू से साहा साव सा, ....।

      कोलता जाति को  (विंशसए 20+100 =120) विशासहे कुल कहा जाता है ।) 

            मध्यप्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) रायगढ़ पूर्वांचल दो विद्वान जो बहुत पढ़ाकू थे महापल्ली के श्री हेम सुंदर प्रधान तथा लोइंग के श्री पूर्ण चंद्र प्रधान ।

अपने कुल / जाति को गर्वित करने के लिए उपर्युक्त दोनो ने अलग अलग विचार कर अपना उपनाम परिवर्तन किया ।

श्री हेम सुंदर जी अपनी पुस्तक "कुलिता " में लिखा है कि कोलता जाति काश्मीर से आकर उत्कल में बस गये । सम्राट अशोक के वंशज हैं । याने क्षत्रिय हैं । उन्होंने आगे लिखा है कि उनके काम के अनुसार अनुसार गुप्त (प्रधान मंत्री), खम्हारी (कोषाध्यक्ष), गढ़तिया (गढ़पति /कीलेदार).... कहा जाता था । कालांतर में यही सब कुल मिला कर 120 वर्ग हो गये। उन्होने कोलता को कलिंग से जोड़ा। उनके अनुसार गुप्त और प्रधान पर्यायवाची हैं ।  इसी लिये श्री हेम सुंदर प्रधान जी ने अपना उपनाम "गुप्त" लिखना आरम्भ किया ।

   श्री पूर्ण चंद्र प्रधान जी ने कोलता को उच्च /श्रेष्ठ स्थान दिलाने के उद्देश्य से 

मनु के चार वर्ण में से वैश्य वर्ण का बताने के लिए मनु के निर्देशानुसार सरनेम " गुप्त" लिखना उचित समझा । लेकिन वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी के भी प्रेमी थे । उन्होने अपना सरनेम गुप्त का अंग्रेजी स्टाईल गुप्ता पसंद किया । वे पूर्ण चंद्र गुप्ता लिखने लगे । उनके बड़े भाई इन्द्रो जी भी, फिर लोइंग, भोजपल्ली  के गौन्तिया /गौटिया परिवार के अधिकतर लोग उपनाम  "प्रधान" लिखना छोड़ कर "गुप्ता" लिखने लगे । (लोइंग के  गौटिया परिवार में भी सरनेम लिखने में एकरूपता नहीं थी। मेरे ताऊ श्री धरनीधर प्रधान, मेरे पिता श्री गजपति प्रधान,  मेरे चाचा श्री जयराम गुप्ता,  श्री उद्धव प्रधान,  चचेरे भाई श्री शशिभूषण प्रधान ) । उसी वंश के दूसरे गांव महापल्ली, केंसरा, तुरंगा, पोटेबिर्नी, ..के लोग भी प्रधान सरनेम छोड़ कर गुप्ता लिखने लगे । यह गुप्ता सरनेम बड़े लोगों का, ऊँचा माना जाने लगा। फिर  छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरनेम प्रधान, भोई, खम्हारी,  साहू, बारीक, बिश्वाल, स्वाईं   ....  ..अपना उपनाम  गुप्ता लिखने लगे । कालांतर में छत्तीसगढ़ कोलता समाज की बैठक में बहुत विचार विमर्श के पश्चात गुप्ता सरनेम को मान्यता दी गई ।

*****************

             ज्ञातव्य है कि मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 

काम क्रमशः -

ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 

क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।

वैश्य - व्यवसाय करना ।

शुद्र - सेवा करना ।

चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश है ।

ब्राह्मण - शर्मा

क्षत्रीय - सिंह 

वैश्य - गुप्त 

शुद्र - दास 

******************

             कालांतर में जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी वर्णों के कई कई वर्ग बन गए । तदनुसार अलग अलग सरनेम याने एक उपनाम के कई उपनाम ।

ब्राह्मणों शर्मा के - पंडा , द्विवेदी,  त्रिवेदी. चतुर्वेदी, तिवारी ...

कोलता के - पधान प्रधान, साहू सा साव साहा शाह,  भोई भोय, बारीक, बिश्वाल,  ... .... 

           आधुनिक काल में साहित्यकारों के द्वारा अपने स्वभाव कर्म योग्यता को व्यक्त करने के लिए अतिरिक्त उपनाम लिखने की परम्परा बनी । जैसे श्री  रामधारी सिंह "दिनकर,  श्री गोपाल दास "नीरज",  श्री जय प्रकाश  "मानस", .................

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                  मेरे विचार से मनु के निर्देशानुसार अपने वर्ण के मुख्य उपनाम के साथ उस के वर्ग का उपनाम लिखना चाहिए । इनके अलावा जो चाहें अपनी पसंद का अतिरिक्त उपनाम भी लिखना चाहिए ।

              मेरे समझ में मनु स्मृति को निम्नांकित दो शिक्षक ठीक ठीक पढ़े और समझे थे । क्यों कि वे अपना नाम मनु के निर्देशानुसार निम्नानुसार  लिखते थे ।

( उनसे कभी मनु स्मृति या जाति उपनाम के सम्बन्ध में मेरी चर्चा नहीं हुई ।

नीलाम्बर प्रसाद शर्मा त्रिपाठी "शास्त्री" सेवा निवृत्त प्रधान पाठक लोइंग (जिला रायगढ़) 

श्री कृतार्थ रथ शर्मा सेवा निवृत्त प्रधान पाठक  नवाँपारा (पुसौर  जिला रायगढ़ ) ।


                यदि हमारी जाति "कोलता" को वैश्य मान लें (सच नहीं है) तो लिखना चाहिए -

श्री हेम सुंदर गुप्त प्रधान (महापल्ली )

श्री पूर्ण चंद्र गुप्ता प्रधान (लोइंग )

तदनुसार मैं लिखूं  तो -

नत्थू राम गुप्त प्रधान "सत्यार्थी"

****

             कृपया मुझे जातिवादी या मनुवादी न समझें । यह बता दूं मैं मनु स्मृति पढ़ा हूं । 

मेरे इस लेख का मकसद किसी को  को ठेस पहुंचाना नहीं है , सच को सामने लाना है ।

शनिवार, 19 अगस्त 2023

परिवारवाद

परिवारवाद -
पहले 
चार वर्ण होते थे। तब परिवारवाद ही चलता था ।
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र ।
तब पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही तरह का पुश्तैनी काम करते थे । नई पीढ़ी बचपनसे ही अपने परिवार के बड़ों से काम सीखता और उसमें पारंगत हो जाता था ।

अब भी 
परिवारवाद चल रहा है लेकिन पहले से कम ।
किसान का बेटा किसान, शिक्षक का पुत्र पुत्री शिक्षक , व्यापारी का बेटा ब्यापारी...... किसी को कोई आपत्ति नहीं ।
लेकिन
राजनीति में परिवारवाद से हमें जलन होती है । 

शनिवार, 10 जून 2023

एकादश कर्म बनाम मृतक भोज

दश कर्म, एकादश कर्म के आयोजन का महत्व 
अपनों के साथ  दुख को share करना भी है ।
उस कार्यक्रम की तैयारी से लेकर कार्यक्रम सम्पन्न होते तक व्यस्तता तथा आगंतुकों से मिल कर बात चीत करने से वह पीडा कम होती जाती है ।
            दश कर्म और एकादश कर्म के दिन आगतुक मेहमानों के आतिथ्य सत्कार के साथ भोजन की व्यवस्था की जाती है जिसे मृतक भोज कहना गलत है। 
       हमारे इधर  मृतक भोज नहीं दी जाती । पहले किसी किसी क्षेत्र में मृतक भोज देने की परंपरा थी, शायद अब भी चलन में हो । इस में कई ब्राह्मणों को शुद्ध गाय घी से तले हुए विभिन्न मिष्ठान्न पुड़ी के साथ भोजन परोसा जाता है ।

भक्ति और आतंकवाद

अपने  धर्म ग्रंथ पढ़ कर बिना सोचे समझे 
उसे पूरा पूरा मान लेना ही भक्ति है  जो धार्मिक कट्टरता को जम्म देती है।  फिर आतंकवाद पनपता है ।

मंगलवार, 6 जून 2023

ST और OBC

ST और OBC 
मनु के चार वर्ण (ब्राह्मण क्षेत्रिय वैश्य शुद्र) 
में से किसी में नहीं हैं ।
यो ये ST, OBC कौन हैं? 

शुक्रवार, 26 मई 2023

स्वर्ग में reservation

सेवा निवृत्ति के बाद-
कुछ लोग 
पेंट शर्ट का त्याग कर सफेद कुरता पाजामा या धोती कुरता धारण करते है । लम्बी दाढ़ी रखने लगते हैं । धार्मिक सामाजिक संस्थाओं से जुड़ कर महा धार्मिक होने लगते हैं। रिश्वत भ्रष्टाचार से खुद को दूर कर लेते हैं ।
शायद स्वर्ग में वातानुकूलित सूट reserve कराने के लिए ।

बुधवार, 19 अप्रैल 2023

जयकारा

जयकारा.. 
जय भीम 
जय श्री राम 
जय ईशू 
अल्लाहो अकबर 
facebook में अपने post के उपर नीचे 
ये जयकारा देख कर ऐसा लगता है कि कोई विश्व युद्ध हो रहा है । प्रजा अपने राजा और उनकी सेना को motivate करने के लिए जयकारा लगा रहे हैं ।

रविवार, 16 अप्रैल 2023

संविधान सभा का औचित्य


हमारे देश का संविधान बाबा साहब का संविधान है ।
बाबा साहब ने संविधान लिखा ।
भारत के संविधान के निर्माता अम्बेडकर जी  थे ।
तो फिर 
संविधान सभा का क्या औचित्य था?

बुधवार, 5 अप्रैल 2023

स्वतंत्रता

नास्तिक स्वतंत्र होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है| वह किसी ग्रंथ से बंधा नहीं होता|

शुक्रवार, 31 मार्च 2023

मेरी बेवकूफ़ी

मेरी बेवकूफ़ी.. 
मैं छोटा था तब सोचता था कि भगवान और उनके पुजारी टट्टी पेशाब नहीं करते । एक दिन गाँव के पुजारी को टट्टी करने लोटा में पानी लेकर जाते देखा तब आश्चर्य हुआ । आश्चर्य  तो अब भी होता है पर पुजारी पर नहीं।

मंगलवार, 28 मार्च 2023

भ्रमित

ईश्वर को नहीं जानने वाले भ्रमित  confused  नहीं हैं |  भ्रमित तो वे हैं जो भगवान को जानते नहीं लेकिन मानते हैं |

सोमवार, 27 मार्च 2023

पूजा

लोगों से ये यह कहना कि.. 
हम तो रोज सुबह दो बजे जाग कर नहाते हैं. फिर पूजा करते हैं ।
       परिवार के सदस्यों को और भगवान को भी सोने नहीं देते, परेशान करते हैं।

आध्यात्म

आध्यात्म भ्रम जाल है।
इस चक्कर में न पड़ें तो अच्छा ।
हम मनुष्य हैं, मनुष्यता का ध्यान रखें बस ।

शुक्रवार, 24 मार्च 2023

आनंद दाता से ज्ञान?

हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए|

अजीब है 
आनंद देने वाले से ज्ञान मांगोगे तो वे कैसे कहाँ से देंगे ?

गुरुवार, 23 मार्च 2023

कमी और वृद्धि

मानवता में कमी और धार्मिकता में वृद्धि हो रही है ।
मानवता और धार्मिकता में रखात्मक सह संबंध है ।

सोमवार, 6 मार्च 2023

खोज

कई साल भगवान और देवी देयताओं का address पता करने की कोशिश करता रहा , कोई नहीं मिले । फिर खोज बंद कर दिया।  बहुत समय बरबाद  कर दिया खोजने में ।

रविवार, 5 मार्च 2023

प्यार

इतनी बड़ी दुनियां
इतने सारे लोग
आओ सब से प्यार करें ।

खुश करने की कोशिश

कब तक शव ममियों को खुश करने की कोशिश करते रहें ?
वे सुनते ही नहीं ।
जीवित को खुश करें तो अच्छा है ।

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

Valentine’s Day

Love is indescribable 
 'Valentine’s Day' 
इतनी बड़ी दुनियां 
इतने सारे लोग 
आओ सब से प्यार करें ।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

गीता का एक श्लोक

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|
(गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित) 
गीता के श्लोक को लिखने में  हम भूल कर सकते हैं|
---------
अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
        अतः होना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |
         **"*"**"

सोमवार, 9 जनवरी 2023

अंतर्जातीय विवाह

महाभारत, रामायण काल में अंतर्जातीय विवाह होते थे| बाद में जातीय श्रेष्ठता के अहंकार में वृद्धि होने के कारण प्रतिबंधित किया गया|  अंतर्जातीय विवाह को भले ही प्रोत्साहन न दे  किंतु जाति समाज द्वारा अन्तर्जातीय विवाह करने वाले और उनके परिवार को प्रताड़ित दंडित करना उचित नहीं| समाज के इसी डर के कारण कई युवक युवती आत्म हत्या कर लेते हैं या जाति समाज द्वारा उनकी हत्या कर दी जाती है जिसे आनर किलिंग कहा जाता है| तब यह जानकर बहुत दुख होता है|
कोई जाति समाज किसी की शादी नहीं कराता तो उसे दंडित करने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए|

रविवार, 25 दिसंबर 2022

गांधी और अछूत

अम्बेडकर भक्त कहते हैं कि गांधी जी मनु के वर्ण व्यवस्था के पक्षधर थे ।
तो क्या हुआ? मुंडे मुंडे मतिर्भिनाः। 
गांधी जी किसी शुद्र दलित को पढ़ने पढ़ाने, शिक्षक मंत्री बनने, वोट देने, से नहीं रोका । अछूतों से अछूत व्यवहार नहीं किया ।

शनिवार, 24 दिसंबर 2022

हरिजन/ दिब्यांग


गांधी जी ने कथित शुद्र दलित को प्यार से हरिजन कहा था. सम्मान देने की नियत से । (उन्होंने कभी किसी दलित शुद्र का तिरस्कार अपमान नहीं किया।) जैसे मोदी जी ने विकलांग अपंग को भी दिब्यांग नाम दिया उन्हें सम्मान देने के लिए ।
        कथित दलित शुद्रों को तिरस्कार के भाव से हरिजन कहें या SC उन्हें बुरा तो लगेगा ही । उसी तरह मोदी जी ने विकलांग अपंग दिब्यांग कहा  ।

मंगलवार, 1 नवंबर 2022

मस्तिष्क में गोबर

स्कूल में पढ़ाई के बाद वयस्क व्यक्ति अपने दिमाग में कुछ भी भरने के लिए स्वतंत्र होता है । वह चाहे तो गोबर भी भर सकता है जितना चाहे ।

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

love u से आत्म हत्या तक

रावण की बहन शुर्पनखा का आई लव यू कहना कोई बहुत बड़ा गुनाह नहीं था|
रावण  ने सीता जी से जबर्दस्ती विवाह रचाने की कोशिश नहीं की| उन्हें अशोक वाटिका में रखा|
      ******
सीता जी पर बार बार संदेह, बार बार परीक्षण? नारी अत्याचार की पराकाष्ठा| नारी ताड़न । परिणाम आत्महत्या । 
         अपराध बोध पश्चाताप 
सरयू नदी  में डूब  कर आत्म हत्या|

रविवार, 16 अक्टूबर 2022

आश्चर्य

बहुत आश्चर्य|
मानते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं| वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं  फिर भी हम उनके रहने बसने, खाने पीने की चिंता करते हैं| इस चिंता में हम मरते मारते भी हैं|

रविवार, 25 सितंबर 2022

ईश्वर

अल्लाह गॉड ईश्वर भगवान देवी देवता भूत प्रेत सब एक ही खानदान के हैं| उनके स्वभाव अलग अलग है|

सोमवार, 19 सितंबर 2022

अबला

पहले पुरुष ने स्त्री को अबला माना जिसे स्त्री ने मान लिया । इसलिये मनु ने यह व्यवस्था दी थी कि स्त्री की रक्षा उसका पिता,  भाई,  पति करेगा ।
अब स्त्री अबला नहीं है । संविधान ने उसे ताकत दी है ।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2022

राम नाम

🤔🤔
अगर राम नाम सत्य है, तो बाकी के क्या है...? जैसे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश, दुर्गा , काली, सरस्वती इत्यादि क्या ये सब नाम झूठ है...?🤔

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

मृत्यु का उत्सव

हमारे देश में औसत आयु लगभग 70 वर्ष है ।
आचार्य रजनीश ने कहा है कि मृत्यु का स्वागत करना चाहिए । उत्सव मनाना चाहिये ।
हमारे देश में औसत आयु लगभग 70 वर्ष है ।
         70  वर्ष के बाद देहांत हो तो एकादश कर्म को उत्सव के रूप में मनाया जा सकता है.।
         अल्पायु में किसी का चले जाना बहुत ज्यादा दुखद होता है । एकादश कर्म के दिन सादा शाकाहारी भोजन होना चाहिए ।

ईश्वर की भाषा

सर्वश्क्तिमान ईश्वर लोग सिर्फ़ अपनी अपनी (एक -एक)भाषा में प्रार्थना सुनते हैं ।
संस्कृत, अरबी, अंग्रेजी . 
      जब कि दुनियां में बहुत भाषा बोली  हैं ।
कई लोग कई भाषा के जानकार होते हैं ।

मायाजाल

जीवन को मायाजाल कहकर उसकी सार्थकता को नकारना उचित नहीं|

शनिवार, 10 सितंबर 2022

विवाह

 मेरे विचार से बच्चों के लालन पोषण तथा यौन क्षुधा की पूर्ति के लिए विवाह एक सामाजिक व्यवस्था है। पति पत्नी के बीच एक अलिखित समझौता है किसके अनुसार वे एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार होते हैं, सम्भोग करते हैं, अपने परिवार का मिलकर दायित्व संभालते हैं ।

किराये के मकान में रहने से उस मकान से भी प्यार हो जाता है । स्वाभाविक है शादी के बाद पति पत्नी के बीच प्यार पनपता है ।

मंगलवार, 6 सितंबर 2022

गुरुवार, 5 मई 2022

दंगाई और आतंकवादी


विधर्मियों से नफ़रत करने वाले चालाक धार्मिक कट्टर लोग दंगाई होते हैं ।
विधर्मियों से नफ़रत करने वाले मुर्ख धार्मिक कट्टर लोग आतंकवादी होते हैं ।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

मैं

मैं आस्तिक नहीं हूं ।
नास्तिक नहीं हूं ।
एक मनुष्य हूं ।
विद्यार्थी हूं ।

संस्कृति की चिंता

जो समझते हैं कि शहरी संस्कृति से, आधुनिक स्कूल कालेज की पढ़ाई से संस्कृति का विनाश हो रहा है, उन्हें अपने बच्चों को शहर जाने से रोकना चाहिए तथा  किसी गुरुकुल/वैदिक/ संस्कृत school में पढाना चाहिये । यदि ऐसे स्कूल कम पड़े तो मिलजुल कर नये स्कूल खोलना चाहिए जहाँ केवल  हिंदी , संस्कृत, वेद पुराण, गीता, भागवत, मनु स्मृति, ....  की पढ़ाई हो ।

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

धार्मिक आयोजन


सार्वजनिक स्थान में धार्मिक आयोजन (जुलुस, भाषण, अजान, प्रार्थना.....) बंद होना चाहिए ।
अपना अपना धर्म अपने घर में मानें। 

ध्वनि विस्तारक यंत्र का सदुपयोग

ऐसा कानून बनना चाहिये कि मंदिर मस्जिद. ....परिसर से किसी कार्यक्रम की आवाज बाहर न आए ।
 ध्वनि विस्तारक यंत्र

गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

हिंसा अहिंसा

भगत सिंह सुभाष .... .और नेहरू गांधी ... . के रास्ते अलग अलग थे लेकिन मंजिल एक ही थी देश की आजादी । एक हिंसा दूसरा अहिंसा । दोनो के विचार धारा बिल्कुल अलग थे ।
अहिंसावादियों ने भगत सिंह को फांसी से बचाने के लिए कुछ नहीं किया ।
 लेकिन उस समय के सबसे बड़ा संगठन था RSS 
उसके लोग भी भगत सिंह को बचाने के लिए कुछ नहीं किये ।

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

विद्यार्थियों के लिए


          मेरे विचार से विद्यार्थियों के लिए कोई छुट्टी नहीं होती । sunday हो या monday, दिवाली छुट्टी हो या गर्मी की छुट्टी । रोज पढाई करनी चाहिए । समय का सदुपयोग करें ।
        परीक्षा के बाद छुट्टी में भाषा सुधार, शब्दार्थ, व्याकरण, निबंध रचना, डायरी लेखन, सामान्य गणित, GK, Reasoning  के लिए समय देना चाहिए । इस के अलावा सोचें कि पिछली कक्षा के कौन कौन से topic आगे काम आयेगा उस पर भी समय देना चाहिए ।

रविवार, 27 मार्च 2022

नास्तिक

ईश्वर के अस्तित्व पर
कुछ लोग जीवन भर जानने की कोशिश करते हैं नहीं जान पाते| कुछ लोग जानना ही नहीं चाहते कही सुनी लिखी गई बातों को मान लेते हैं| कुछ जानने की कोशिश कर अंततः नास्तिक हो जाते हैं
नास्तिक हुए ---
ऋषि चार्वाक
ऋषि जाबालि
गौतम बुद्ध
वीर भगत सिंह
पेरियार स्वामी
डॉ कोबूर
सरिता के संपादक विश्वनाथ
और भी बहुत....
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दुनियां में बहुत लोग ईश्वर के अस्तित्व पर जानना चाहते हैं| बेहतर है उसके अस्तित्व सिद्ध करने के लिए उचित आधार तर्क की जानकारी सोशल मिडिया में दें| फेसबुक के हजारों पाठकों को लाभ होगा|..

शनिवार, 5 मार्च 2022

मनु रामायण महाभारत काल के बाद के थे

रामायण  महाभारत के बाद मनु स्मृति 
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 मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण,  उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये  है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण   - उपनाम - जनेऊ 
ब्राह्मण - शर्मा  -  रेशम 
क्षत्रीय  - सिंह  -  कपास 
वैश्य     - गुप्त  - जूट
शुद्र      - दास 
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
 मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु  यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार  उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता  में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह.......

गुरुवार, 3 मार्च 2022

हिन्दू धर्म नहीं संस्कृति है

वेद, गीता , रामायण, राम चरित मानस.... में हिन्दू धर्म का उल्लेख नहीं  है ।
उच्चतम न्यायालय ने हिन्दू को एक जीवन शैली कहा। यह धर्म नहीं, संस्कृति है ।
भारतीय जीवन शैली ही हिन्दू संस्कृति है । जो गंगा जमना
तहजीब है ।

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2022

सोच विचार

कुछ पढ़ कर, सुन कर  सोच विचार करने वाले के मन में प्रश्न होते हैं ।
बिना सोच विचार किये मान लेने वाले के मन में कोई संशय प्रश्न नहीं होते ।

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

इंसानियत

 गीता कुरान बाइबल तो अपनी अपनी बात कहते हैं , एक संविधान ही है जो इससे उपर उठकर सिर्फ इंसानियत की बात कहता है |

जय संविधान

शनिवार, 29 जनवरी 2022

राजनीति से सारोकार

सभी जागरूक नागरिक (पात्र मतदाता) अपने मत का उपयोग करते हैं । याने प्रजातंत्र में सभी नागरिक देश की राजनीति में भाग लेते हैं ।
      कोई यह कहे कि - 
"मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं।" 
यह सच नहीं है । सब को देश की राजनीति से सारोकार है, होना भी चाहिए ।
राजनीति से संबंधित विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।

बुधवार, 12 जनवरी 2022

ठेका

लजाना, शरमाना, संस्कृति परम्परा रक्षा.. सब का ठेका स्त्रियों को दे दिया गया है । वे वह सब सहर्ष स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रही  हैं ।

शनिवार, 8 जनवरी 2022

राजनीति

राजतंत्र में नगर के निवासी नागरिक होते हैं ।
नगर के बाहर राज्य की सीमा में रहने वाले प्रजा कहलाते हैं ।
नागरिक और प्रजा के अधिकार , सुख सुविधा में अंतर होता है ।
इसी लिये प्रजा कहती है -
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
        लेकिन लोकतंत्र में देश के सभी निवासी (अस्थायी रूप से कुछ समय के लिए निवास करने वाले विदेशियों छोड़कर) देश के नागरिक होते हैं । सभी जागरूक नागरिक (पात्र मतदाता) अपने मत का उपयोग करते हैं । याने प्रजातंत्र में सभी नागरिक देश की राजनीति में भाग लेते हैं ।
      कोई यह कहे कि - 
"मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं।" 
यह सच नहीं है । सब को देश की राजनीति से सारोकार है, होना भी चाहिए ।
राजनीति से संबंधित विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

महा मृत्युंजय जाप


महा मृत्युंजय जाप पूरे देश के लिए संसद में करा दें तो चीन पाक अमेरिका रूस ......... सब कापेंगे ।

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

जलन

मोहन दास करम चंद गांधी जी को राष्ट्रपिता, बापू , महात्मा कहने से कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है । 
       जो चाहे कहें, जो न चाहें न कहें ।

         ऐसा कहने के  लिए कोई सरकारी आदेश तो  नहीं है ।

सोमवार, 27 दिसंबर 2021

दिब्यांग

साधु संत ऋषि मुनि को दिब्यांग कहना गलत है, उनके कोई अंग दिब्य नहीं होते ।
उसी तरह विकलांग को भी दिब्यांग कहना गलत है ।

रविवार, 19 दिसंबर 2021

राष्ट्र भक्ति

जो संविधान का न हुआ वह राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता ।
अगर कोई परम्परा, सामाजिक, धार्मिक नियम संविधान के विपरीत हो तो हमें संविधान को महत्व देना चाहिए ।

रविवार, 12 दिसंबर 2021

आस्तिकों की आस्था

आस्तिकों की आस्था संदिग्ध होती है।  ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो ताला ही क्यों लगाते हैं?

सोमवार, 29 नवंबर 2021

धर्म और संविधान

धार्मिक नियम परम्पराओं को जबर्दस्ती वैज्ञानिक सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कुछ लोग । वास्तव में धर्म और विज्ञान का कोई संबंध नहीं होता । धर्म का आधार आस्था और भक्ति होते हैं । विज्ञान का आधार कारण और परिणाम का संबंध होता है ।
वर्तमान काल में हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए ।
संविधान और विज्ञान का समन्वय होना चाहिए ।

यः धारयति सः धर्मः । 
जो धारण करने योग्य हो जिसे घारण करना चाहिए वह धर्म है ।
       मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल..... ये अपने अपने क्षेत्र area के नागरीकों, समाज के लोगों के हित में बनाये गये नियम थे जिसे धर्म कहा गया । वे अपने अपने देश / कबीला के लिए  तत्कालीन संविधान थे ।

गुरुवार, 25 नवंबर 2021

आस्तिक

मैं पहले पूरा आस्तिक था । लेकिन अब मुझे किसी भी भगवान देवी देवता भूत प्रेत के अस्तित्व पर विश्वास नहीं है । 
मैं यह सार्वजनिक कर रहा हूं । अपना विचार बताना चाहिये । मुझे सिर्फ़ मानवता पर भरोसा है । 
हमारे घर में उन भगवान देवी देवताओं की मुर्ति फोटो हैं क्यों कि घर में मैं अकेला नहीं रहता ।
     अगर वे दुनियां में कहीं हैं तो सब कुछ मुक दर्शक बनकर चुप क्यों रहते हैं ।स्पष्ट है वे नहीं हैं, कल्पित हैं । अगर हैं तो अपनी duty नहीं कर रहे । ऐसी स्थिति में उनका अस्तित्व क्यों स्वीकार करें?

शनिवार, 6 नवंबर 2021

लिखना पढना

आखिरी सांस तक यथा संभव लिखना पढना जारी रहना चाहिए यदि सम्भव हो तो ।
मैं पुस्तक पत्रिका पढ़ना कुछ साल से छोड़ कर social media google, whatsapp,twitter में पढ़ता हूं और facebook, twitter में कुछ कुछ लिखता हूं, दूसरों के पोस्ट share करता हूं ।

सोमवार, 1 नवंबर 2021

गोबर

स्कूल में पढ़ाई के बाद वयस्क व्यक्ति अपने दिमाग में कुछ भी भरने के लिए स्वतंत्र होता है । वह चाहे तो गोबर भी भर सकता है जितना चाहे ।

बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

परिधान

          परिधान -
संशोधन परिवर्तन ही गति है । गति ही जीवन है ।
संस्कृति रक्षा के नाम पर पहनावा पर ही क्यों चर्चा और भी कई विंदु हो सकते हैं ।
जिन्हे पुराने पहनावा पसंद है उनके परिवार के सदस्यों को धोती अंगोछा, साड़ी चोली पहनना चाहिये ।

धर्म और विज्ञान

धर्म कहता है - मान लो।
विज्ञान कहता है - जान लो।

सोमवार, 25 अक्टूबर 2021

गीता का कर्म फल

कर्मेण्येव अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।।
कर्म पर अधिकार होता है याने कि कर्म करें या नहीं, कौन सा क्या कर्म करें? यह हमारी मर्जी है । लेकिन कर्म के परिणाम पर कर्ता का अधिकार अधिकार नहीं होता। यह पूर्णतः सत्य है ।
         इस श्लोक का आशय स्पष्ट है कि परिणाम पर आसक्त न हों। आसक्ति होने से साध्य को प्राप्त करने के लिए गलत साधन का उपयोग हो सकता है । यही आसक्ति भ्रष्टाचार का कारक है ।
विनोबा भावे जी ने भगवद्गीता  पर अपनी पुस्तक में इसी गलत साधन के लिए सचेत किया है।

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

सवाल

अवैज्ञानिक अतार्किक प्रथाओं और परम्पराओं पर intelligent युवा सवाल उठाने लगे हैं।

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

भक्ति

जो लोग आजादी के लिए कुछ किये नहीं, उनके भक्त ऐसा दिखाते हैं जैसे भगत, सुभाष, बल्लभ पटेल जी उन्हीं के साथ थे ।

रविवार, 10 अक्टूबर 2021

प्रमाण


जो नहीं है उसका प्रमाण नहीं होता । 
जो होता है उसका प्रमाण हो सकता है ।

सः अस्ति     वह है।         आस्तिक 
सः न अस्ति   वह नहीं है।  नास्तिक 

प्रतिमा चित्र का महत्व


प्रतिमा, चित्र का महत्व -
हम अपने पूर्वजों के चित्र अपने घर में रखते हैं । उन्हें याद करने के लिए, उनसे प्रेरणा लेने के लिए, हमें एक अच्छे नागरिक बनाने के लिए मन में आभार व्यक्त करने के लिए ।
    उसी तरह महापुरुष जिन्होंने देश समाज के लिए कुछ किया हो उनकी प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य होता है, उनके द्वारा किये गये अच्छे कार्यों को याद कर,उनसे प्रेरित होकर हम भी अच्छा अच्छा करें ।
           मन्दिरों में भगवान, उन के अवतार, देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित कर मंत्र से मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करते हैं । उन्हें जीवित मान कर उनकी पूजा करते हैं, मत्था टेक कर उन से कुछ मांगते हैं, अपने किये पाप अपराध से मुक्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं ।

रविवार, 5 सितंबर 2021

शिक्षक और गुरू में अंतर

शिक्षक और गुरू में अंतर होता है । अर्थ शास्त्र के अनुसार एक शिक्षक श्रमिक होता है जो अपने श्रम (अध्यापन) का पारिश्रमिक लेता है । यदि शिक्षक पाठ्यक्रम के विषय वस्तु के अध्यापन के अलावा भी विद्यार्थियों के लिए, समाज के लिए कुछ करता है तो यह उसकी गुरूता है । जिसमें गुरुता हो वह गुरू है ।
सभी शिक्षक गुरू नहीं होते ।

रविवार, 29 अगस्त 2021

शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

धर्म और संविधान

-धर्म -
यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले अपने - अपने   देश समाज के संचालन के लिये अलग अलग नीति  नियम बनाए गये जिसे सभी लोग धारण / पालन करते थे। उनका संकलन था मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल ....  । अलग अलग धर्म, अलग -अलग  नियम  ।
अब सभी देश अपना - अपना संविधान बनाये । जिसके नीति नियमों का पालन हमें करना चाहिए ।
            याने कि  अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए । 
            पुराने धर्म के नीति नियम वर्तमान संविधान से अलग हो तो संविधान के नियम कानून का पालन करना चाहिए ।

धर्म

-धर्म -

यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो उसे धारण करते हैं । पहले मनु स्मृति, कुरान, बाइबिल के बताये नियम का पालन करते थे । अब अपने देश का संविधान ही धर्म होना चाहिए ।

गुरुवार, 19 अगस्त 2021

भगवान का प्रत्यक्ष दर्शन


जंगल में पेड़ बंदर खूब देख कर आये तो घर में जागते हुये भी बंदर दीखते हैं। यह imaging है । कभी कभी कोई रिश्तेदार, मित्र जागते हुये भी दीख जाते हैं । किसी भगवान देवी देवता की मूर्ति पर ध्यान करने से भी ऐसा हो सकता है ।
       बचपन में मैं सपना में भगवान श्री राम, श्री कृष्ण देवी सरस्वती से बात करता था । यह कोई भगवान या देवी का प्रसन्न होना या उनका प्रत्यक्ष दर्शन नहीं है । 

मंगलवार, 10 अगस्त 2021

CO2 का निर्माण

लोबान, धूप अगरबत्ती, घी,  तेल, मोमबत्ती , लकड़ी कुछ भी जलाने कार्बन डाई आक्साइड बनता है । इससे हवा में आक्सीजन  की खपत होती है। याने आक्सीजन कम हो जाता है कार्बन डाई आक्साइड बढ़ जाता है ।

शनिवार, 7 अगस्त 2021

जड़ और चेतन

जड़ और चेतन 

कुछ लोग अपने दिमाग में copy paste कर भरते जाते हैं ।
जो बिना सोच विचार किये पढ़े या सुने हुए को मान लेता है वह जड़ । 
जो बहुत सोच विचार कर मानता है या नकार देता है वह चेतन ।

सह सम्बंध

अधिकतर विद्यार्थी  युवक  समाजवादी, साम्यवादी  होते हैं ।
उम्र के साथ साथ  समझदारी बढ़ती है । कुछ लोग मानवतावादी हो जाते हैं ।
बाकी लोग 
पूंजी वादी, भोगवादी हो जाते हैं ।
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उम्र 
और 
समझदारी, चालाकी, स्वार्थ
के बीच 
धनात्मक सहसम्बन्ध होता है । याने उम्र के साथ साथ इनमें बढोत्तरी होती है लेकिन कुछ अपवाद होते हैं जिनके दिल में मानवता होती है ।

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

सहयोग

चिड़ियों को कुछ अनाज खिला देने से कुछ नहीं होगा। जरूरतमंद को सहयोग करें तो सचमुच कुछ मिल जाएगा।
अपंग बूढ़े के अतिरिक्त अन्य भिखारियों को भीख देकर निठललापन को बढ़ावा देना है। इससे अच्छा है जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग करें।

सहयोग

चिड़ियों को कुछ अनाज खिला देने से कुछ नहीं होगा। जरूरतमंद को सहयोग करें तो सचमुच कुछ मिल जाएगा।

धर्म

यः धारयति सः धर्मः । जो धारण करने योग्य हो,  जिसे धारण करें वह हमारा धर्म।  
बहुत पहले अलग अलग भू भागों में देश काल परिस्थिति अनुसार अलग अलग धर्म थे । 

हमारा संविधान मानवतावादी है ।
अब हमारा संविधान ही हमारा  धर्म होना चाहिए ।

सोमवार, 2 अगस्त 2021

गौतम बुद्ध

गौतम  बुद्ध एक आम इंसान ही थे । 
most intelligent. 
लेकिन कुछ चालाक लोगों ने उन्हें भगवान बना दिया ।

विपरीत

बुद्ध के "अप्प दीपो भव" के विपरीत है यह "बुद्धम् शरणम्  गच्छामि "